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Blog: मन पाए विश्राम जहाँ

Blogger: Anita nihalani
पल-पल है चेतना नई सीग्रह - नक्षत्र, धरा,रवि, चाँद पादप, पशु, नदिया, चट्टान,  पवन डोलती तूफ़ां उठते सृष्टि पूर्ण मानव अनजान !बंधी एक नियम, ऋत, क्रम में नित नूतन यह पुनर्नवा सी, अंतर घिरा अतीत धूम्र से पल-पल है चेतना नई सी !सुख की चाह रहे भरमाती पीड़ा के वन में ले जाए, जितनी दौड़ लग... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   5:12am 2 Dec 2020 #चेतन
Blogger: Anita nihalani
 लो फिर आयी विमल दीवाली जगमग दीप जले पंक्ति में बन्दनवार लगे हर द्वारे सजी दिवाली महके जन पथ तोरण सजे गली चौबारे उठी सुगन्ध गुजिया, मोदक की वस्त्र नए देहों पर सरसरलगी झालरें जली बत्तियां थाल सजे पूजा के मनहर सजे विनयाक, धान्य लक्ष्मी राग जगाती सुख बरसाती लो फिर आयी ... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   11:08am 12 Nov 2020 #पूजा
Blogger: Anita nihalani
समय या भ्रम   समय जो निरंतर गतिमान है क्या वाकई गति करता है? या घटनाएं ही ऐसा प्रतीत कराती हैं दिन और रात माह और वर्ष जन्म और मृत्यु के मध्य समय बहता सा लगता है  पर देखने वाला सदा एक सा रहता है ! रेत पर धँसे पाँव ज्यों कहीं जाते से प्रतीत होते हैं लहर आकर चली जाती है ... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   5:41am 5 Nov 2020 #जन्म
Blogger: Anita nihalani
स्वधर्म – परधर्मस्वधर्म – परधर्म यह सारी कायनात भिन्न नहीं है हमसे झींगुर बोलता बाहर है पर हम भीतर सुनते हैं पेड़ पर गाती कोकिल की गूंज भीतर कुछ स्पंदन जगा जाती है सूरज बाहर है या भीतर ? हमारी आँखें उसी से नहीं देखती क्या   बाहर बहती हवा प्राण भीतर भरती  है भीतर व बाहर का भ... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   5:11am 29 Oct 2020 #कायनात
Blogger: Anita nihalani
 व्यक्त वही अव्यक्त हो सके हे वाग्देवी ! जगत जननी  वाणी में मधुरिम रस भर दो, जीवन की शुभ पावनता का शब्दों से भी परिचय कर दो !भाषा का उद्गम तुमसे है नाम-रूप से यह जग रचतीं,ध्वनि जो गुंजित है कण-कण में नव अर्थों से सज्जित करतीं !शिव-शिवानी अ, इ में समाएक से म पंचम वर्गीय सृष्ट... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   10:17am 24 Oct 2020 #भाषा
Blogger: Anita nihalani
 ठहरे विमल झील का दर्पण पूर्ण चन्द्रमा, पूर्ण समंदर पूर्ण, पूर्ण से मिलने जाये,  माने मन स्वयं को अधूरा अधजल गगरी छलकत जाये !चाहों के मोहक जंगल में इधर भागता उधर दौड़ता, कुछ पाने की कुछ करने  कीसदा किसी फ़िराक में रहता !ठहरे विमल झील का दर्पण शांत सदा भीतर तल झलके, जिस पर ट... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   10:27am 20 Oct 2020 #झील
Blogger: Anita nihalani
उस देवी की पूजा करें हम  थामती जो हर  विपद में  ज्ञान दीपक पथ दिखाती,प्राण का आधार भी है   रात्रि बन विश्राम देती !सौंदर्य देवी कहाएजगत को आकार देती, शिव मिलन की प्रेरणा दे ले स्वयं कैलाश जाती !ऊर्जा अपार धारेअनंत का दर्शन कराती,  दात्री बनी सिद्धि रिद्धिनिःशंक जो सदा व... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   10:13am 18 Oct 2020 #ज्ञान
Blogger: Anita nihalani
 सिंधु से नाता जोड़ लेंनींद टूटे, स्मरण जागे फिर खिल उठे मन का कमल   जो बन्द है मधु कोष बन     हो प्रकट वह शुभता अमल !हम बिंदु हैं तो क्या हुआ सिंधु से नाता जोड़ लें, इक लपट ही हों आग की रवि की तरफ मुख मोड़ लें !अब शक्ति को पहचान निज खिल कर उसे बह लेने  दें, जो सुप्त है कई जन्म से ... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   5:47am 15 Oct 2020 #कमल
Blogger: Anita nihalani
उस लोक में जहां आलोक है अहर्निश किंतु समय ही नहीं है जहाँरात-दिन घटें कैसे ? पर शब्दों की सीमा है जागरण के उस लोक में जहाँ नितांत एकांत है और निपट नीरव पर जहाँ जाकर ही मिलता है मानव को निजता का गौरव उस निजता का जिसमें कोई पराया है ही नहीं जहाँ हर पेड़-पौधे, हर प्राणी से ज... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   6:19am 13 Oct 2020 #एकांत
Blogger: Anita nihalani
 जो खिल रहा अनंत में एक ही तो बात है एक ही तो राज है, एक को ही साधना एक से दिल बाँधना !एक ही आनंद है वही जीवन छंद है, बह रहा मकरंद है मदिर कोई गंध है !खिले वही अनंत में दुःख-विरह के अंत में, राधा-श्याम कंत मेंऋतुराजा वसंत में !   रहे यदि बंटे हुए जीवन से कटे हुए,  तीर से बिंधे ह... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   9:29am 12 Oct 2020 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
 प्रार्थना जो दिया है तूने हे प्रभु !असीम है नहीं समाता इस झोली में तू दिए ही जाता है तेरी अनुकम्पा की क्या कोई सीमा है ?उदार मालिक द्वारा दिए गए अतिरिक्त धन की तरह तू भरे जाता है संसार मेरा मन झुका है तेरे कदमों में बैठा नहीं जाता देर तक दुखती है बूढ़ी हड्डियाँकरवटें ब... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   5:04am 8 Oct 2020 #आनंद
Blogger: Anita nihalani
 नीला अम्बर सदा वहीं थासंशय, भ्रम, भय, दुःख के बादल  जग को हमने जैसा देखा, छिपा लिया था दृष्टि पथ ही मन पर पड़ी हुई थी रेखा !कैसे दिखे विमल नभ अम्बरआशाओं की ओट पड़ी हो,कैसे कल-कल निर्मल सरिता भेदभाव की भीत गड़ी हो !दुराग्रहों के मोटे पर्दे नयनों को करते हों धूमिल,नीला अम्बर सद... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   5:46am 21 Sep 2020 #जग
Blogger: Anita nihalani
 पितृ पक्ष में परलोक से बना रहे हमारा संपर्क स्मरण यह पितृ श्राद्ध कराते हैं, हमारे अस्तित्त्व में जिन पूर्वजों का है योगदान जिस वंश परंपरा के हैं हम वाहक जगे कृतज्ञता की भावना उनके प्रति यह याद भी दिलाते हैं !बने रहें सत्य के पथ पर होते रहें दान-पुण्य भर भर भक्ति, ध्य... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   10:00am 16 Sep 2020 #पूर्वज
Blogger: Anita nihalani
जरा जाग कर देखा खुद को  स्वप्न खो गए जब नींदों से चढ़ा प्रीत का रंग गुलाल, दौड़ व्यर्थ की मिटी जगत में झरा हृदय से विषाद, मलाल ! द्रष्टा  बन मन जगत निहारे बना कृष्ण का योगी,अर्जुन,कर्ता का जब बोझ उताराकृत्य नहीं अब बनते बन्धन ! श्वास चल रही रक्त विचरता तन अपनी ही धुन में रमत... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   5:41am 9 Sep 2020 #कृष्ण
Blogger: Anita nihalani
 शब्दों के वह पार मिलेगा जब  खिलेगा भीतर मौन का पुष्प वहाँ न भावनाओं की डालियाँ होंगी न विचारों की भूमि !! शब्दों की नाव तो बनानी ही होगी जो उतार देगी शून्य के तट पर ! शब्द ले जाते हैं खुद से दूर शब्द जगत हैं माया हैं ! सत्य की यदि चाह है  तो उस आग से गुजरना होगा जहाँ जल जात... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   4:34am 8 Sep 2020 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
                                                             अमर स्पर्श “वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान उमड़ कर आँखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान” इन कालजयी पंक्तियों के रचियता छायावाद के प्रमुख स्तम्भ, हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि, विचारक और दार्शनिक सुमित्रानंदन पंत को यूँ तो... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   5:24am 3 Sep 2020 #ईश्वर
Blogger: Anita nihalani
योग और प्रेम  जानने की इच्छा खुद को जानने की यदि जानने वाले की इच्छा बन जाये अर्थात ज्ञाता यदि स्वयं को जानने की इच्छा करे तो जो क्रिया करनी होगी उसे वही तो योग है ! जानने वाला यदि श्याम हो जानने की इच्छा राधा है जानने की क्रिया ही तो प्रेम है ! श्याम को इच्छा जगी स्वयं ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   9:55am 19 Aug 2020 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
 देश हमारा  सदा सत्य की राह दिखातागीत शांति का रहे सुनाता, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ मानकर सदा सभी का सुहित चाहता ! देश हमारा आगे बढ़ता सुख-समृद्धि के मार्ग खोलता, हर आपदा को दे चुनौती हँसकर मिलकर उसको सहता ! शांति यहाँ का मूलमन्त्र है परम अनूठा लोकतंत्र है, साथ निभाता सब देशो... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   5:55am 14 Aug 2020 #देश
Blogger: Anita nihalani
 फिर कोरोना देव अवतरित  पीला पात डाल से बिछड़ा संग पवन के डोले  इत उत,हम भी बिछुड़े अपने घर से पता खोजते गली-गली में ! कोई कहता काशी जाना काबा की भी राह दिखाता,गंगा तट पर शिव के डेरे  कोई महामंत्र ही फेरे ! द्वारे -द्वारे भटक रहे थे  हुए बंद मंदिर व शिवालय, फिर कोरोना देव अवत... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   5:16am 13 Aug 2020 #कोरोना
Blogger: Anita nihalani
मन पंकज बन खिल सकता था  तन कैदी कोई मन कैदी कुछ धन के पीछे भाग रहे, तन, मन, धन तो बस साधन हैं बिरले ही सुन यह जाग रहे ! रोगों का आश्रय बना लिया तन मंदिर भी बन सकता था, जो मुरझा जाता इक पल में  मन पंकज बन खिल सकता था !  यदि दूजों का दुःख दूर करे वह धन भी पावन कर देता, जो जोड़-जोड़ लख ख... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   5:23am 10 Aug 2020 #दुःख
Blogger: Anita nihalani
 हर दिल की यही कहानी है   कुछ पाना है जग में आकर क्या पाना है यह ज्ञात नहीं, कुछ भरना है खाली मन में क्या भरना है आभास नहीं ! जो नाम कमाया व्यर्थ गया अब भी अपूर्णता खलती है, जो काम सधे पर्याप्त नहीं भीतर इच्छाएँ पलती हैं ! कर-कर के भी शमशान मिलाना कर पाए जो पीड़ित है, माया मि... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   9:09am 7 Aug 2020 #दिल
Blogger: Anita nihalani
राम  त्रेता युग में जन्मे थे  मर्यादापुरुषोत्तम राम,   किन्तु आज भी अति पावन  परम उनका सुंदर नाम ! अनंत को सांत बनाया  अवतरित  होकर विष्णु ने,  ना रहे राम पर सीमित भारत की सीमाओं में ! राम नाम मधुर जाप ने  सारे जग को गुंजाया,  हरि अनंत  कथा अनंता  हर युग ने गायी  गाथा ! ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   6:03am 5 Aug 2020 #मन पाए विश्राम जहाँ
Blogger: Anita nihalani
जो शेष रहा अपना होगा वह बनकर बदली बरस रहा  फिर चातक उर क्यों तरस रहा,  ले जाये कोई बाँह थाम गर उन चरणों का परस रहा ! जो लक्ष्य गढ़े थे विलीन हुए  अब पत्तों सा ही उड़ना हो,  जब डोर बंधी हो जीवन से  फिर और कहाँ अब जुड़ना हो ! बिखरेगा हिम टुकड़ों सा मन  कल कल निनाद कर बह जाए, जो शे... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   10:10am 3 Aug 2020 #डोर
Blogger: Anita nihalani
आया अगस्त  नव उजास नव आस लिए फिर  नव प्रभात अगस्त ले आया,  त्योहारों  का उल्लास लिए   शुभ अष्टम सु-मास यह  आया ! रक्षा सूत्र बँधे हाथों में  अंतर प्रीत प्रकट हो इनमें,  अमर अदाह्य अभेद चेतना  सदा अभय ही जाना जिसने ! राम बसे जो रोम रोम में  महिमावान प्रभु पुनः विराजें,  ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   12:53pm 1 Aug 2020 #कान्हा
Blogger: Anita nihalani
साक्षी  बनें साक्षी ?  नहीं, बनना नहीं है  सत्य को देखना भर है  क्या साक्षी नहीं हैं हम अपनी देहों के  शिशु से बालक  किशोर से प्रौढ़ होते !  क्या नहीं देखा हमने  क्षण भर पूर्व जो मित्र था उसे शत्रु होते   अथवा इसके विपरीत  वह  चाहे जो भी हो  वस्तु, व्यक्ति, परिस्थिति  क्य... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   9:15am 29 Jul 2020 #देह
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