POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: जिजीविषा - नीरज द्विवेदी

Blogger: Neeraj Dwivedi
जो दिये के तल अँधेरा रह गया था उस दिवालीइस दिवाली उस तमस् को भी नया दिनमान देनाकुछ अँधेरे झोपड़ों पर याद रखना इक नजऱदेखना अबकी चमकती हर हवेली के परेसंगमरमर की सतह पर रेंगने के मायनेदेखना तब आँख से तुम बूँद जब कोई झरेरोक लेना दौड़कर गिरते फलक के रंग सार... Read more
clicks 344 View   Vote 0 Like   9:31am 29 Oct 2016 #छंदबद्ध कविता
Blogger: Neeraj Dwivedi
वो सैनिक है आसमान सी छाती लेकर फिरता है,धरती के हक़ में सुभाष की थाती लेकर फिरता है।वो धागा कितना दृढ़ होगा, जिसे कभी न मिली कलाई,कैसी होगी बहन वो जिसने, सौंप दिया इकलौता भाई,वो माँ भी कैसी माँ होगी, जो माँ का दर्द समझती है,घर में बूढी माँ भूखी रहकर भी, बड़ी धनी रहती है,भूखे जिन... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   10:11am 28 Oct 2016 #कविता
Blogger: Neeraj Dwivedi
वो सैनिक है आसमान सी छाती लेकर फिरता है,धरती के हक़ में सुभाष की थाती लेकर फिरता है।रातों के अधियारों में भी, उसकी नींद जगी रहती है,अंधड़ रेत सहारों में भी, उसकी आँख खुली रहती है,स्वप्नों के गलियारों में, उसकी बन्दूक तनी रहती है,दर्रों मैदान पहाड़ों में, कर्तव्यज्योति जगी र... Read more
clicks 342 View   Vote 0 Like   1:45pm 4 Oct 2016 #कविता
Blogger: Neeraj Dwivedi
वो सैनिक है आसमान सी छाती लेकर फिरता है,धरती के हक़ में सुभाष की थाती लेकर फिरता है।हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, जिद्दी स्वांसों की हलचल है,जमा हुआ है रक्त, धौंकनी चलती है, कैसा ये बल है,अग्निपरीक्षा पल पल देता, सीने में भरकर हुँकार,खौल उठता है शोणित सुनकर, धरती की एक करुण पु... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   7:13am 30 Sep 2016 #कविता
Blogger: Neeraj Dwivedi
नवगीत - तू दंड दे मेरी खता हैऐ मनुज तूकाट मुझकोदंड दे मेरी खता है,खोदकर अपनीजडें हीमृत्यु से क्यों तोलता है?धार दे चाकू छुरी में, और पैनी कर कुल्हाड़ी,घोंप दे मेरे हृदय में, होश खो पी खूब ताड़ी,जान ले मेरीहिचक मतबेवजह क्यों डोलता है?रुक गया क्यों, साँस लेने की जरूरत ही तुझे क... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   3:30am 16 Jun 2016 #Environment
Blogger: Neeraj Dwivedi
ऐ मनुज तूकाट मुझकोदंड दे मेरी खता है,खोदकर अपनीजडें हीमृत्यु से क्यों तोलता है?धार दे चाकू छुरी में, और पैनी कर कुल्हाड़ी,घोंप दे मेरे हृदय में, होश खो पी खूब ताड़ी,जान ले मेरीहिचक मतबेवजह क्यों डोलता है?रुक गया क्यों, साँस लेने की जरूरत ही तुझे क्या,मौत से मेरी मरेगा कौन, क... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   3:30am 16 Jun 2016 #छंदबद्ध कविता
Blogger: Neeraj Dwivedi
उस दिनआँखों में आँखें डालकर तुमने कहा था कि किताब हो तुम अगर किताब हूँ तो पढ़ो तो कभी कभी पढ़ीं कई किताबें तुमने जरूरत की कहो या स्वार्थ की किसी परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए पर मेरी जिंदगी की किताब ने तुम्हारी कोई परीक्षा ली ही नहीं बस दी है अपने किताब होने की परीक्षा ... Read more
clicks 276 View   Vote 0 Like   7:40am 25 Aug 2015 #hindi poem
Blogger: Neeraj Dwivedi
तुम वही हो न,जिसकी पलकों के इशारे बादलों को आकार और समय को पल पल बदलने के गुर सिखातें हैंतुम वही हो न जिसके होंठों के आकार जब चाहें मौसम में ख़ुशी और उदासी ले आते हैं तुम वही हो न जिसकी आँखों के सम्मोहन से चाँद तारे और सूरज एक निर्धारित गति से घूमते रहते हैं तुम वही हो न जिस... Read more
clicks 275 View   Vote 0 Like   2:34pm 15 Jul 2015 #hindi kavita
Blogger: Neeraj Dwivedi
मैं पुरूष पाषाढ़ कह कर, मुझको ठुकराओ न तुम आसमां का रंग गुलाबी यदि तुम्हारे होंठ से है घुमड़कर घन घन बरसना पत्थरों की चोट से है तुम्हारी साँसों से समंदर में कहीं लहरें उठी हैं अब मुझे आषाढ़ कह कर मुझसे घबराओ न तुममैं पुरूष पाषाढ़ कह कर मुझको ठुकराओ न तुम जोड़कर अपने तुम्हारे ... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   11:30pm 15 May 2015 #man
Blogger: Neeraj Dwivedi
मैं खता हूँरात भर होता रहा हूँ  इस क्षितिज पर इक सुहागन बन धरा उतरी जो आँगनतोड़कर तारों से इस पर मैं दुआ बोता रहा हूँमैं खता हूँरात भर होता रहा हूँ  आँख रोयी या न रोयी बूँद जो पलकों पे सोयी मोतियों सा पोर पर रख जीत कर खोता रहा हूँमैं खता हूँरात भर होता रहा हूँ छलक जो आये प... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   10:31am 13 May 2015 #hindi poem
Blogger: Neeraj Dwivedi
"खुशबू सीली गलियों की"के बारे में लिखने के लिए मुझे बहुत देर हो चुकी है शायद। पता नहीं किसी कविता संग्रह के बारे में लिखने के लायक हूँ मैं या नहीं परन्तु एक संग्रह है जिसके बारे में मैं कुछ लिखना चाहता हूँ। संग्रह का नाम है "खुशबू सीली गलियों की"जिसमें संगृहीत हैं सीमा दी... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   10:35am 26 Mar 2015 #hindi kavita
Blogger: Neeraj Dwivedi
मैं ही क्यों आखिर, हर बार टूटता हूँ?हर जगह छूटता हूँ,मैं ही क्यों आखिर, हर बार टूटता हूँ?मैसूर में खोया जो, कावेरी के जल में,इतिहास की धरती पर, रिमझिम से मौसम में,उस खोये कतरे को,हर जगह ढूंढता हूँ ....हर जगह छूटता हूँ,मैं ही क्यों आखिर, हर बार टूटता हूँ?इस ईंट के जंगल से, क्यों मो... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   3:27pm 14 Jan 2015 #hindi kavita
Blogger: Neeraj Dwivedi
शत प्रतिशततुम होती होतो ये सच हैकि सब कुछमेरे मन का नहीं होतामेरी तरह से नहीं होतामेरे द्वारा नहीं होतामेरे लिए नहीं होताये भी सच हैकि मैं कवितायेँ नहीं लिख पाताकिताबें नहीं पढ़ पाताज्यादा काम नहीं कर पातामैं मशीन नहीं बन पातादूसरे शब्दों में मैं वो सब कुछ नहीं कर पा... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   10:39am 20 Oct 2014 #hindi poem
Blogger: Neeraj Dwivedi
मैं खुश रहता हूँ,आज कल भीतुम्हारे बिना भी पर तुम्हे पता है कि मुझे कितनी हिम्मत जुटानी पड़ती है कितनी जद्दोजेहद करनी पड़ती है कितनी मेहनत करनी पड़ती हैकितना समझाना पड़ता है बरगलाना पड़ता है खुद कोकितना सचेत सावधान रहना पड़ता है हर पल हर क्षण अपने सपाट सर्द चेहरे पर मुस्कान ... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   11:22am 17 Oct 2014 #hindi kavita
Blogger: Neeraj Dwivedi
एक वृक्ष की शाख हैं हमसाथ हैं हम, हाथ हैं हम,एक वृक्ष की शाख हैं हम,विंध्य हिमाचल से निकली जो,उस धारा की गति प्रवाह हम,मार्ग दिखाने इक दूजे को,बुजुर्ग अनुभव की सलाह हम,फटकार हैं हम, डांट हैं हम, एक वृक्ष की शाख हैं हम।बचपन का उत्साह हम ही हैं,खेल कूद की हम उमंग हैं,जीवन के हर ए... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   1:10pm 15 Oct 2014 #hindi kavita
Blogger: Neeraj Dwivedi
क्षणिका - जल्दी बीतो नजल्दी बीतो न,दिन,रातऔर दूसरे समय के टुकड़ों ...तेज चलो नघडी की सुईयोंधक्का दूँ क्या ...ये टिक टिकजल्दी जल्दी टिक टिकाओ न …तुम्हारा क्या जाता हैपर मेरा जाता है।-- Neeraj Dwivedi-- नीरज द्विवेदीPlease be a follower and do not forget to share with your friends.... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   4:22pm 14 Oct 2014 #hindi kavita
Blogger: Neeraj Dwivedi
तू पिघल रही थीआँखों सेमोटे मोटे आँसूढुलक रहे थे गालों परबोझ लिए मन में पहाड़ साबैठ रहा था जी पल पलऔर दो आँखें देख रहीं थींपाषणों की भांति अपलकपिघल रहा था उनमें भी कुछभीतर भीतरज्यों असहाय विरत बैठा हो कोईसब कुछ पीकरजो बीत रहा वो करे व्यक्तशब्दों में चाह अधूरी होमन सिसक ... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   11:50am 7 Sep 2014 #Life is just a Life
Blogger: Neeraj Dwivedi
मेरी तन्हाईयाँआज पूछती है मुझसेकि वो भूले बिसरे हुए गमजदा आँसूजो निकले तो थेतुम्हारी आँखों की पोरों सेपर जिन्हें कब्र तक नसीब नहीं हुयीजमीं तक नसीब नहीं हुयीजो सूख गए अधर में हीतुम्हारे गालों से लिपट करतुम्हारे विषाद के ताप सेवही आसूँ जिन्होंने जिहाद किया थाअपने घ... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   3:13pm 28 Aug 2014 #Loneliness
Blogger: Neeraj Dwivedi
तरस रहीं दो आँखें बस इक अपने कोमोह नहीं छूटा जीवन का,छूट गए सब दर्द पराए,सुख दुख की इस राहगुजर में,स्वजनों ने ही स्वप्न जलाए,अब तो बस कुछ नाम संग हैं, जपने को।कब से तरस रहीं दो आँखें, अपने को।जर्जरता जी मनुज देह की,पर माटी से मोह न टूटा,अपने छूटे सपने टूटे,किन्तु गेह का नेह न... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   6:43am 23 Aug 2014 #Neeraj Dwivedi
Blogger: Neeraj Dwivedi
चलो मिलाकर हाथ चलें, संघ मार्ग पर साथ चलें,आसमान में फर फर देखो,फहर रहा भगवा ध्वज अपना,कर्म रहा पाथेय हमारा,रचा बसा है बस इक सपना,एक हो हिन्दुस्तान हमारा, मात्र यही प्रण साध चलें,चलो मिलाकर हाथ चलें, संघ मार्ग पर साथ चलें।अडिग हमारी निष्ठा मन में,लक्ष्य प्राप्ति की कोशिश ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   4:49am 19 Aug 2014 #Hindi
Blogger: Neeraj Dwivedi
मेरठ पर न बोल सके तो जरा सहारनपुर पर बोलो,जबरन धर्म बदलने की इस कोशिश पर ही मुँह खोलो,क्या चुप ही रहोगे जब तक पीड़ित रिश्तेदार न होगा,समय यही है अरे सेकुलर मुँहबंदी का रोजा खोलो।-- नीरजPlease be a follower and do not forget to share with your friends.... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   2:08am 5 Aug 2014 #Break Silence
Blogger: Neeraj Dwivedi
हाँ मनाऊँगा,मनाऊँगा न तुम्हें तो मनाना भी पड़ेगा तुमसे निभाना भी पड़ेगा तुम्हें दुनिया से हर मुश्किल से हर दर्द से हर आह से हर बुरी नजर से छिपाना भी पड़ेगा अपने जेहन में अपनी स्वांसों में अपनी आँखों में अपने ख्वाबों में अपनी रातों में अपने शब्दों में अपने गानों में अपनी न... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   5:22am 9 Jul 2014 #Kavita
Blogger: Neeraj Dwivedi
एक दिन मैं चल पड़ूँगा,दूरियाँ कुछ तय करूँगा।समय की झुर्री में संचित, उधार का जीवन समेटे,इस धूल निर्मित देह में ही, चाह की चादर लपेटे,कुछ जर्जर सुखों की चाह में, यौवन लुटाकर राह में,नि:शब्द शाश्वत सत्य को, चिरशांति को, मैं भी बढूँगा,एक दिन मैं चल पड़ूँगा,चाहे राह मेरी रोकने ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   4:41am 5 Jul 2014 #Hindi
Blogger: Neeraj Dwivedi
धूप सेएक रेशा खींचकरलपेटना शुरू कियातो साँझ की शक्ल मेंरात आ गयीउनके साथबीते पलों कोसमेटना शुरू कियातो समंदर के पहलू मेंबाढ़ आ गयीतुम्हे पता हैसाँझ और समंदर का क्या रिश्ता हैमुझे तो नहीं पतापर ये जरूर पता हैसाँझ आने पर समंदर में उफान जरूर आता है …उसके भीतर एक तूफान ज... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   4:39pm 14 Jun 2014 #Kavita
Blogger: Neeraj Dwivedi
बहुत नाजुक से होते हैंगुलाबी रंग के रिश्तेमगरभरोसे के सहारे कीजरूरत तोयहाँ हर रंग को होती है।        -- नीरज द्विवेदी (Neeraj Dwivedi)Please be a follower and do not forget to share with your friends.... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   2:55pm 28 May 2014 #Gulabi Rang ke Rishte
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3991) कुल पोस्ट (194994)