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Blog: कविता-एक कोशिश

Blogger: नीलांश
मेरी जुस्तजू पर और सितम नहीं करिए अबबहुत चला सफ़र में,ज़रा आप भी चलिए अब आसमानी उजाले में खो कर रूह से दूर न होचलिए ,दिल के गलियारे में भी उतरिये अब ज़ख्म ये जिस्म के नहीं हैं ,दवा काम न करेगीअपने मुरब्बत ,अपने करम से इसे भरिये अब न था कभी ,न रहेगा ,न होगा ज़माना अपन... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   10:57am 9 Aug 2021 #कलम
Blogger: नीलांश
दलील क्या है ?,थाह ले कर देख लो !हक में कुछ गवाह ? ले कर देख लो !हो गयी है राह पथरीली मगर ..राह की भी राह ,ले कर देख लो है वही पेड़ था झूला जिधर ...आप अब पनाह ले कर देख लो !चाहते हो जाने-जाना या नहीं ..मेरी दो एक चाह ले कर देख लो...घर का हूँ तो गलतियाँ हैं लाजिमी ..किसी और की सलाह ले कर देख... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   2:09pm 24 Jan 2021 #
Blogger: नीलांश
निशा  निमंत्रण  लेकर  चन्दा , छत पर  मेरे  आया  हैसपनो  में  था  खोया  मैं ,उसने  आकर मुझे  जगाया  हैठंडी  ठंडी  हवा  चल  रही  ,रिमझिम  बूँदें  बरस  रहीबादल  का  घूंघट  ओढ़े  वो  ,चाँदनी को  संग  लाया  है !!वो कहता  है  मुझसे  ... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   5:01pm 1 Sep 2020 #मेरी आवाज़ सुनो
Blogger: नीलांश
तू खुद को बहलायेगा कब तकहसीन ख्वाब सजाएगा कब तक!!तू साहिल पर युही क्यूँ बैठा हैलहरों से दूर जाएगा कब तक !!आइना पूछता है अब चेहरे से तू मुझे आजमाएगा कब तक ?हिजाकात नही होती परश्ती में तू ज़वाहिरों से मनायेगा कब तक!!उनकी सूरत साकिब है नज़रों मेंज़माने को समझाएगा कब तक!!... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   6:48am 1 Aug 2020 #कलम
Blogger: नीलांश
जाग उठो ,अब स्वप्न लोक सेजाओ ,उपवन की महक की ओर सूर्य खड़ा है मुस्कुराता ,देखो चलो तुम भी फलक की ओर मन को रंग लो सु विचारों से न जाओ बाह्य धनक की ओर उजाला दिल में ही कर लेना नहीं देखो आभूषण की चमक की ओर संगीत बनाओ सुरमई सुमधुर जाओ पंछियों की चहक के ओर किसी बस्ती में गर मुफलिस... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   3:20am 7 Jun 2020 #मेरी आवाज़ सुनो
Blogger: नीलांश
खामोशियाँ  आती  हैं  अक्सर कुछ  यादों  के  संगचलो  हम  भी  महफ़िल  में  आयें दुआओं और फरियादों  के  संगइन  खामोश  आवाजों की धुन  को  तुम  भी  सुन  लो  न राही रह  जायेगी  बस  तन्हाइयां ही कुछ  पुरे अधूरे  वादों  के  संगकुछ ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   1:05pm 1 Apr 2020 #मेरी आवाज़ सुनो
Blogger: नीलांश
राहों के    दौरान  आये गयेसुर फिर वही सब सुनाये गयेकैद -ए - मशक़्क़त  तो था ही लिखाजिरह से   क्यूँ भरमाये गयेए फनकार तेरे लब से कभीमेरे गीत क्यों न गाये गयेबच्चे बहुत जल्द सो जाते हैं बहुत देर से फिर जगाये गयेउन्हें लग रहा था कि हैं  संग संगमगर साथ तो सिर्फ ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   11:50am 8 Feb 2020 #
Blogger: नीलांश
ए  दोस्त  कहाँ  हो  ,कैसे  हो  ,बोलो  न , कुछ  तो  बोलोबात  बनेगी , राह  दिखेगी  ,अपने  अंतर्मन  को  खोलोधुप  ,छाँव  ,शहर  और  गाँव  ,सब इक  से  हो  जायेंगेमहफ़िल  तुम  जहाँ  बनाना  ,अधरों  में  मिश्री  को घोलोदेखो  चरवाहा  अपन... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   1:02pm 1 Feb 2020 #मेरी आवाज़ सुनो
Blogger: नीलांश
जंग के मैदान के बाहर है अफवाह बहुतकि जंग लरने को मिलते है तनख्वाह बहुतइक छोटी सी चोंच और उसमें दो दानेरहे चाहत तो मिल जाते हैं राह बहुतशेख जी क्या जरूरत है पेशगी की कहें आपके  तस्सवुर में  खो जाते हैं गवाह बहुततुम जो होते हो तो लोग बदल जाते हैंतुम जो न हो तो बढ़ जाता ... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   9:33am 24 Jan 2020 #
Blogger: नीलांश
इस अजनबी बाजार में ख्वाब देखिये बोझिल हुये  सवालों के  जबाब देखियेमोड़ पे खड़े हैं लिजे राह का भी ठौरये शेर नापसंद तो किताब देखियेगुणा -भाग , जोड़ और घटाव चारो ओरअजी भूल कर अपने हर हिसाब देखियेसुकून हैरानी कभी इधर कभी उधरहम देखें आपको हमें जनाब देखियेकभी देखिये ... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   2:16pm 15 Jan 2020 #
Blogger: नीलांश
एक खत आने की आँखों में  चमक है जीइत्र के शहर में  इस स्याही की महक है जीतेरा होना तो मेरे   कारवाँ  में फलक है जीकितना पा लूँ तुझे , तू तो दूर तक है  जीकिसी मासूम बच्चे सा हो जाऊँ तो अच्छामेरे लहजों पे दुनिया को  खुब  शक है जीमैं उसके सिवा और वो मेरे  बगैर  है क... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   1:35am 13 Jan 2020 #
Blogger: नीलांश
पार जाने की कड़ी साबन गया है इक नदी साभूल के अक्स मजहबी सायाद आये आदमी सातआ'रुफ़ उसका  दूर से देपास बैठे अजनबी सारुक गया तो हैसियत क्याचमचमाती एक घड़ी साबात सुनने में है बच्चाबात बोले पीर जी साजो दिया आँगन सँवारेवो दिया है चाँदनी सामुझको देकर तख्त ऐ फाँसीकर रहा वो खु... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   4:14am 11 Jan 2020 #
Blogger: नीलांश
इस तरह से बस ही अपनाया हुआजैसे सूरज रात को पराया  हुआ घास की हरियाली नहीं जाती  यूहींओस दर ब दर भी गर  छाया  हुआक्या पता कहते किसे हैं बिजलीयाँमोम सा जलता है और ज़ाया हुआतू नदी है मैं महज़ तहज़ीब हूँ कुछ सदी के बाद ठुकराया हुआखटखटाना भी नहीं ना  दी  सदाकब से&nbs... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   8:24am 4 Jan 2020 #
Blogger: नीलांश
अदावत में कभी पत्थर न उठाया करनाएक पल में अपनों को न पराया करना !!रहते हैं ख़ार ज्यूँ गुलाबों के हमनशीं हो करदिल में दर्दों को वैसे ही छुपाया करना !!तिनके-तिनके में छुपी है मोहब्बत राहीबुलबुल के घरौंदे को न मिटाया करना !!तश्नगी आसमां की और कोशिशें चुल्लू भरख्वाब डूब जाये... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   1:00pm 1 Jan 2020 #कलम
Blogger: नीलांश
तोहफा दिया बस ,आपके नज़र में आ गयेजैसे कि अजनबी हमारे घर में आ गयेइक दाद की उम्मीद ही नज़्म हो गयीअशरार खुद ब खुद ही बहर में आ गयेये हादसा ही है ,कि अब जायेंगे किधरजो बाज़ के लहज़े कबूतर में आ गयेचलते रहे जिस तरह घर के आँगन में,बस उसी प्यार से दफ्तर में आ गयेहर बार रहबर की तर... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   11:20am 29 Dec 2019 #
Blogger: नीलांश
काम से कभी फुर्सत नही माँगी चार दिवारी सही ,छत नहीं माँगीफूल कलियों से नजाकत नहीं माँगी और पत्थरों से ताकत नहीं माँगीजब आये थे तो इजाज़त नहीं माँगी जब गये भी तो नेमत नहीं माँगीदो चार पल की जिंदगी, है कीमती बहुत तोहफे में इसलिये, मोहलत नहीं माँगीमहफ़िल-ऐ-अहबाब में न पेश ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   2:32pm 25 Dec 2019 #
Blogger: नीलांश
हाथों की लकीर पर है एतबार आपको !जाने किस नसीब का है इंतजार आपको ?जिंदगी बाँटिये, समेटिये , समझाईये !मौत तो हर पल करेगी बेकरार आपको !आपकी अदायगी से बज़्म फिर ग़ुलज़ार है !किसने कर दिया भला फिर दरकिनार आपको ?लेना था लगा रहा कि आपको थी क्या कमी ?देना पर रहा हिसाब किश्तवार आपको !म... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   12:44am 11 Dec 2019 #
Blogger: नीलांश
सीधी बात है  बदल जाओ ,  मगर  बदलो  नहीं दायरा जो आपका है उससे  परे निकलो नहीं !दाने दाने पे लिखा है खाने  वालों का ही नाम दाने में तो दान भी है ,   स्वाद से बहलो नहीं लो पिघल रहा है हिमखंड जल देने को मोम ने दी रोशनी पर आप क्यूँ पिघलो नहीं ?हँस कागा दोनों के विवेक का ... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   1:53pm 7 Dec 2019 #
Blogger: नीलांश
हिम की सतह सा है ये मन देखो टोह  लेता ही रहे ये निर्वहन , देखो फिर पिघल रहा है ओ  मेघों इसे सम्भालो फिर भी चलता रहे आवागमन ! , देखोदो बूँद पानी के स्वपन के लिये अब हिम के शिखर का वो पतन ! , देखोएक शीतल श्रोत सिंचित किया कर  जतन हो रहा गंगोत्री का अवतरण , देखोये हिम शिखर आज... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   7:36pm 4 Dec 2019 #
Blogger: नीलांश
कह दिया सादगी से , हमारी कमी ?उम्र बस जा रही है, जारी कमी !आहटें दर पे रोज़ देती हैं खटखटाती हैं बारी बारी कमी!आपका और हमारा वजूद भी है आपका है हुनर जो ,हमारी कमी!दिन की हलचल में आन रखते हैं रात चुपके से फिर गुजारी कमी!कोई तो कुछ कहो  मुलाज़िम को बात दर बात पे सरकारी कम... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   2:07pm 29 Nov 2019 #
Blogger: नीलांश
कितना बेसब्र है , भागा भागा जाता है। रखा है पूरा , मगर ले कर आधा जाता है ए बच्चे ! न लूट अजनबी गलियों में तेरे छत ही से पतंगों का धागा जाता हैसहेज के न रख ए   शेख़ ये जुबानी गोले हम सरहद पे हैं यहाँ बारूद दागा जाता हैघूंघट की आड़ में दीदार तो रूमानी ही है किसी  आड़... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   1:47pm 26 Nov 2019 #
Blogger: नीलांश
एक टूटे हुए पत्ते ने जमीं पायी है ,जड़ तक पहुंचा दे ,ये सदा लगायी है !सादा कागज है मुंतज़िर कि आये गजलक्या कलम में  हमने भरी रोशनाई है ?झील में मारकर पत्थर न दिखाओ सागरझील की सादगी भी हमको रास आयी है !हर तरफ आईने ,हर आईने में कई चेहरे,किस चेहरे में जी ने सुकूं पायी है  ?वो तो... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   1:25am 25 Nov 2019 #
Blogger: नीलांश
कहाँ तक जायें  कि कोई किनारा कहाँ चुभती है सुई की घङी ,मझधारा कहाँ हम जमीन वाले , आसमान है तेरा चमकता  है अब हमारा सितारा कहाँ तुम बादल के पर्दे को हटाकर देखो कहाँ गिरे बर्फ , बढ़ा है पारा कहाँ ये वक्त की लहर है , समँदर सा ज़ीस्त लौट के फिर आयेगा दोबारा कहाँ ... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   1:37am 18 Nov 2019 #
Blogger: नीलांश
जब आयी है मुकाम की घड़ियाँ करीब आज तोकर काशिशें इक बार फिर भूलो नसीब आज तोबोलों का ,गीतों का ,एहसासों का इम्तेहान हैबाग में हमने बुलाये   अंदलीब  आज तो दिवारों को,मुंडेरों को और दर-ओ-दरवाजों कोजाना की सम्भालता है कोई नीब आज तोयूँ तो रख रहा था वो रश्क-ओ-रंज बारहाबन ग... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   2:07pm 15 Nov 2019 #
Blogger: नीलांश
कैसी शगलों में रहते हो डूब जाते होनौकाओं को देखो जब भी ऊब जाते होपेड़ पुकारे जड़ के लिये , तुम प्रेमी पत्तों केदर्शन के अभिलाषी  मिलने खुब जाते हो ,हमने खुद को बदला या तुम मन के ईश्वरभ्रम में रखते हो बन कर महबूब जाते होजो कहते हो तुम वो कोई ना कहे कभीजब लिख  दूँ वो सब ,कह क... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   1:14am 11 Nov 2019 #
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