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Blog: दास्तानें

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एक जापानी अपने मकान की मरम्मत के लिए उसकी दीवार को खोल रहा था। ज्यादातर जापानी घरों में लकड़ी की दीवारो के बीच जगह होती है।जब वह लकड़ी की इस दीवार को उधेड़ रहा तो उसने देखा कि वहां दीवार में एक छिपकली फंसी हुई थी। छिपकली के एक पैर में कील ठुकी हुई थी। उसने यह देखा और उसे छ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:57am 30 Jul 2011 #
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एक सौदागर व्यापार करने के मकसद से घर से निकला। उसने एक अपाहिज लोमड़ी देखी, जिसके हाथ-पैर नहीं थे, फिर भी तंदरुस्त। सौदागर ने सोचा, यह तो चलने-फिरने से भी मजबूर है, फिर यह खाती कहां से है? अचानक उसने देखा कि एक शेर, एक जंगली गाय का शिकार करके उसी तरफ आ रहा है। वह डर के मारे एक प... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   11:11am 20 Jul 2011 #
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“गुरुजी, मेरा सहपाठी मुझसे जलता है. जब मैं ‘हदीस’ के कठिन शब्दों के अर्थों को बताता हूँ तो वह जल-भुन जाता है.” शेख सादी ने अपने शिक्षक से कहा.गुरूजी बहुत नाराज हुए – “अरे नासमझ, तू अपने सहपाठी पर उंगली उठाता है, पर अपनी ओर नहीं देखता. मुझे यह समझ में नहीं आया कि तुझे किसने बत... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   6:36am 4 Jul 2011 #
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एक बादशाह ने एक विदेशी क़ैदी को मृत्युदंड दे दिया. क़ैदी को यह बहुत नागवार गुजरा और यह समझ कर कि उसे तो अब मरना ही है, बादशाह को अपनी भाषा में खूब गालियां देने लगा.बादशाह ने वज़ीर से पूछा – “यह क्या बक रहा है?”वज़ीर ने कहा – “हुजूर यह कह रहा है कि जो आदमी क्रोध को अपने वश में ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   6:33am 4 Jul 2011 #
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एक बादशाह अत्यंत अत्याचारी था. एक बार उसने एक फ़क़ीर से पूछा - “मेरे लिए सबसे अच्छी इबादत क्या होगी?”फ़क़ीर बोला - “तुम जितना अधिक सो सको, सोया करो. तुम्हारे लिए यही सबसे बड़ी इबादत है.”बादशाह को अचरज हुआ. बोला - “यह कैसी इबादत है? भला सोते रहने में कैसी इबादत? फ़क़ीर यह कैसी... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   6:32am 4 Jul 2011 #
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एक कवि थे. जिसके सामने होते, उसकी प्रशंसा में कविता कर उसे सुनाते. बदले में उन्हें इनाम में जो कुछ मिलता, उससे गुजर-बसर आराम से चल रहा था.एक बार वह डाकुओं के डेरे पर जा पहुँचे. डाकुओं के सरदार की प्रशंसा में कवि कविता सुनाने लगे.डाकुओं के सरदार ने कहा - “इस मूर्ख को पता नहीं ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   6:30am 4 Jul 2011 #
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एक बार एक बादशाह ने नौकर को मोहरों की थैली देते हुए कहा - “ले, जा इन मोहरों को फ़क़ीरों में बांट आ.”नौकर सारा दिन मोहरें बांटने के लिए तमाम जगह घूमता रहा और देर रात को वापस आया. बादशाह ने उसके हाथ में मोहरों से वैसी ही भरी हुई थैली देखकर पूछा - “क्यों मोहरें नहीं बांटीं क्या?... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   6:28am 4 Jul 2011 #
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एक धनी बूढ़ा था. उसने शादी नहीं की थी. लोग उससे कहते – “अब तो बुढ़ापे में सहारे के लिए शादी कर लो मियाँ”“किसी बुढ़िया से शादी करने को जी नहीं करता” बूढ़ा कहा करता.“तो फिर किसी जवान से ही कर लो” लोग कहते - “औरतों की कोई कमी है क्या?”बूढ़े का उत्तर होता - “जब मैं बूढ़ा किसी बुढ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   6:26am 4 Jul 2011 #
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मेरा एक दोस्त मुझसे शिकायत करने लगा, 'जमाना बड़ा खराब है। मेरी आमदनी थोड़ी है और बाल-बच्चे ज्यादा। कहां तक सहा जाए? भूखों मरा नहीं जाता। कई बार मन में आता है कि परदेस चला जाऊं। सुख-दुख में जैसे भी हो, वहां गुजर कर लूं। किसी को मेरे अच्छे या बुरे हाल का पता भी नहीं चलेगा।' न ज... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   6:20am 28 Jun 2011 #
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मैंने एक आदमी को देखा, जो सूरत तो फकीरों की-सी बनाए हुए था, लेकिन फकीरों जैसे गुण उसमें नहीं थे। महफिल में बैठा हुआ वह दूसरों की बुराइयां कर रहा था और उसने शिकायतों का पूरा दफ्तर खोल रखा था, धनवान लोगों की वह खासतौर पर बुराई कर रहा था।वह कह रहा था, 'फकीर की ताकत का बाजू बंधा ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   6:33am 8 Jun 2011 #
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एक साल मैं बल्ख से वामिया जा रहा था। रास्ते में डाकुओं का खतरा था। हमारे आगे एक नौजवान चल रहा था। वह हथियारों से लैस था। दुनिया का कोई पहलवान उसकी कमर को जमीन पर नहीं लगा सकता था। मगर उसने न जमाना देख रखा था, न बहादुरों के नक्कारे की कड़क उसके कानों में पड़ी थी और न सवारों ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   10:10am 6 Jun 2011 #
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एक शहजादे को विरासत में बेहद दौलत मिल गई। वह ऐयाशी में डूब गया। कोई गुनाह ऐसा नहीं था, जो उसने नहीं किया। एक बार मैंने उसे समझाया,'साहबजादे! आमदनी बहते हुए पानी की तरह है और खर्च पनचक्की की तरह। इसलिए ज्यादा खर्च उसी को मुनासिब है जिसकी आमदनी लगातार होती रहती हो।' मल्लाह ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   6:09am 31 May 2011 #
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एक बहुत बड़ा विद्वान बादशाह के बेटे को पढ़ाता था। वह उसे बेहद डांटता और मारता रहता था। एक दिन मजबूर होकर लड़के ने पिता के पास जाकर शिकायत की और अपना जख्मी जिस्म भी दिखाया। बादशाह का दिल भर आया। उसने उस्ताद को बुलवाया और कहा, 'तू मेरे बच्चे को जितना झिड़कता और मारता है, इत... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   12:30pm 30 May 2011 #
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पश्चिम के मुल्क में मैंने एक मदरसे में ऐसे उस्ताद को देखा जो बेहद चिड़चिड़ा, बच्चों को सताने वाला और कमअक्ल था। मुसलमान उसे देखकर बहुत दुखी होते। उसके सामने न किसी की हंसने की हिम्मत होती थी और न बात करने की। कभी वह किसी के गाल पर तमाचा मार देता और कभी किसी की पिंडली को श... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   5:55am 24 May 2011 #
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मैंने एक गुम्बद पर घास से बंधे हुए कुछ ताजे फूलों के गुलदस्ते रखे हुए देखे। मैंने घास से कहा, 'तू फूलों के साथ रहने योग्य कहां थी!' वह रो पड़ी और बोली, 'चुप रह! शराफत का अर्थ यह नहीं है कि दोस्ती को भुला दिया जाए। माना कि मुझ में सुन्दरता, रंग और खुशबू नहीं है, किन्तु क्या मैं भ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   6:51am 23 May 2011 #
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एक बादशाह मन-ही-मन फकीरों से नफरत करता था। एक समझदार फकीर इस बात को ताड़ गया। उसने कहा, 'ऐ बादशाह! हम लोग तुझसे, अधिक सुखी हैं। तेरे पास बहुत बड़ी सेना जरूर है, लेकिन मरेंगे हम और तू दोनों ही। अल्लाह ने चाहा, तो कयामत के दिन हमारी दशा तुझसे अच्छी होगी। 'दुनिया को जीतने वाला अ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   6:46am 18 May 2011 #
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एक बादशाह किसी मुसीबत में फंसा हुआ था, उसने मानता मानी कि यदि उसकी मुसीबत टल गई, तो वह बहुत-सा धन फकीरों में बांट देगा। सौभाग्य से उसकी मुराद पूरी हो गई। उसने अपने एक विश्वासपात्र गुलाम को दिरहमों  की थैली देकर कहा, 'जा, फकीरों में बांट आ।' लोग कहते हैं कि गुलाम बड़ा समझदा... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   6:45am 14 May 2011 #
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एक आलिम ने अपने वालिद से कहा, 'वाइजो' (धर्मोपदेशक) की लच्छेदार बातों का मेरे दिल पर कोई असर नहीं होता, क्योंकि उनके कौल (कथनी) और फेल (करनी) में बड़ा अन्तर होता है। दुनिया को वे दुनिया छोड़ने की नसीहत करते हैं और खुद अनाज और चांदी बटोरते फिरते हैं। जो वाइज सिर्फ 'वाज' ही देना ज... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   6:32am 14 May 2011 #
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  मैं अपने दमिश्क के दोस्तों के साथ रहते-रहते इतना ऊब गया कि कुद्स के जंगल की ओर निकल गया। वहां रहकर मैं जानवरों से प्रेम करने लगा। दुर्भाग्य से मुझे फिरंगियों ने कैद कर लिया और यहूदियों के साथ मुझे भी तराबलस में एक खाई की मिट्टी निकालने के काम पर लगा दिया। उधर से हलब का... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   8:48am 11 May 2011 #
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एक फकीर जंगल के एक कोने में अकेला बैठा था। उधर से एक बादशाह गुजरा। फकीर ने उसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया। बादशाह का रोब फकीर पर न चला। यह देखकर बादशाह को क्रोध आ गया। वह कहने लगा, 'ये गुदड़ी पहनने वाले जानवर हैं। न इनमें लियाकत है और न इंसानियत!' बादशाह के साथ उसका वजीर भी था। ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   6:32am 7 May 2011 #
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