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Blog: इम्तिहान

Blogger: purushottam kumar
पिछले कई महीनों से भ्रष्टाचार व घपलों-घोटालों में घिरी, विरोधियों का विरोध झेल रही और विदेशी मीडिया तक में किरकिरी करा रही मनमोहन सरकार ने चुप्पी तोड़ी, गुस्सा निकाला और बड़ा संदेश दिया कि सरकार चाहे तो क्या नहीं कर सकती। हां, कुछ भी। पहले दिन डीजल पर दाम बढ़ाए और रसोई ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   3:29pm 15 Sep 2012 #महंगाई
Blogger: purushottam kumar
चांद की फिजा की रहस्यमय मौत और एयर होस्टेस गीतिका की खुदकुशी की खबरें पढ़ी आपने? इन दोनों वारदातों से कुछ सबक लिया आपने? जरूर लिया होगा। लेकिन क्या, यह सबसे बड़ा सवाल है। आप दोष भी दे रहे होंगे, धिक्कार भी रहे होंगे, पर सवाल है किसे? चांद को? जिसकी मोहब्बत में एक लड़की ने न क... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   3:41pm 7 Aug 2012 #
Blogger: purushottam kumar
अन्ना ने भी इस सपने के इतनी जल्दी सच होने की उम्मीद नहीं की थी, जिस पीढ़ी के बारे में माना जा रहा था कि आगे निकलने की होड़ में वो कुछ भी पीछे छोड़ सकती है। अपना देश संस्कृति यहाँ तक कि अपना परिवार भी वही आज अन्ना के साथ खड़ी है। अन्ना के अनशन के आगे सरकार घुटने टेकेगी या नही... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   7:45pm 19 Aug 2011 #
Blogger: purushottam kumar
अमर उजाला के एमडी अतुल माहेश्वरी का निधन निश्चित रूप से पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसे बहुत दिनों तक महसूस किया जाएगा। मैं यहां कुछ उन लम्हों को आप सभी से शेयर करना चाहूंगा, जब अमर उजाला, जालंधर में नौकरी के दौरान मैंने अतुल माहेश्वरी जी के साथ गुजारे। यह २... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   2:46pm 4 Jan 2011 #अमर उजाला
Blogger: purushottam kumar
बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत लेकर जो इतिहास कायम किया है, उससे कई मतलब निकलते हैं। मतलब एक - यह सूबे में विकास की जीत है। लोग अब जातिगत समीकरणों से ऊपर उठ चुके हैं। मतलब दो - नीतीश का नेतृत्व, उनकी शैली तथा बीजे... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   6:11pm 24 Nov 2010 #लालू का सूपड़ा साफ
Blogger: purushottam kumar
दीपावली पर सभी मित्रों को ढेर सारी शुभकामनाएं।http://example.domain... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   4:39pm 4 Nov 2010 #
Blogger: purushottam kumar
खलियारी बस्ती में घुसते ही नाक पर हाथ रखना पड़ता था। मन तो करता था कि आंखें भी बंद कर लें। उफ, इतनी गंदगी। घरों में ही सुअर के बाड़े, गंदी बदबूदार नालियां, उसमें लोट-पोट होते सुअर। चारों ओर भिनभिनाते मच्छर। क्या नरक इसी को कहते हैं? बस्ती के लोगों पर सवालनुमा यह जुमला भी ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   6:22pm 7 Sep 2009 #
Blogger: purushottam kumar
ध्यान रखिए, सार्वजनिक होते लागू हो जाता है कोडकुछ साथियों ने हमें कठघरे में रखा है और कहा है कि कोई तो मानक हो ब्लाक लेखन का सीरीज के तहत आप टीआरपी बढ़ाना चाहते हैं। उनकी टिप्पणी इसी सीरीज की पोस्ट के साथ प्रकाशित हैं। एक डाक्टर साहब ने टिप्पणी में लगाकर रखे गये माडरेशन... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   1:13pm 4 Sep 2009 #
Blogger: purushottam kumar
सुविधा है तो कुछ भी लिखेंगे?लगता है बात गलत दिशा में मुड़ गई है। ऐसे में सीधी बात करें तो बेहतर। पिछले दो पोस्ट पर जो टिप्पणियां आईं, उनमें से कुछ का मतलब यह है कि ब्लागजगत में मानक की बात करना बेमानी है। ऐसा क्यों?क्या सिफॆ इसलिए कि हमारे पास यह सुविधा है कि हम कुछ भी लिख... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   7:50pm 31 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
ब्लाग पर बकवास, पैसा खर्च होता है भई !ब्लाग पर बकवास लिखने से पहले ब्लाग लिखने वालों को यह जरूर सोचना चाहिए कि जो कोई भी उन्हें पढ़ रहा है, वह अपने पाकेट का पैसा खर्च कर पढ़ रहा है। नेट का लिंक मुफ्त में तो नहीं मिलता? और आज के उपभोक्ता युग में क्या किसी को यह राइट बनता है कि ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:50pm 31 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
हिन्दी ब्लागिंग पर तमाम बहसें होती हैं। कभी इस पर लिखे गए को साहित्य और असाहित्य मानने को लेकर तो कभी शुद्धियों और अशुद्धियों को लेकर। ये तो फिर भी अच्छी बहस है। बहस तो इस पर भी चलती है कि कौन किसका चमचा है। कौन किसके खेमे का है। कौन लड़कियों को अधिक टिप्पणी करता है और कौ... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   7:00pm 30 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
आजादी के सिलसिले में एक बात बहुत गौर करने वाली है। वह यह कि चाहे मुगलों का शासन चल रहा था, चाहे अंग्रेजों का, हिन्दुस्तान में आबादी का एक बड़ा हिस्सा न तो गुलामी का दंश झेल रहा था, न ही वह खुद को गुलाम मानता था। उल्टे उनकी तो मौज थी। मुगलों-अंग्रेजों द्वारा दिये गये अधिकार... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   8:06am 22 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
हम में से ज्यादातर यह कहानी सुन चुके होंगे। फिर भी अपनी बात शुरू करने से पहले, यहां इस कहानी का उल्लेख उचित होगा। कहानी कुछ इस तरह है। ..एक बच्चा बहुत ज्यादा गुड़ खाता था। मां उसे एक महात्मा जी के पास ले गई। समस्या जानकर महात्मा जी ने कहा, इस बच्चे को को पंद्रह दिन बाद लेकर ... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   7:59am 19 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
हिन्दुस्तान का मतलब गांव, वहां की गलियां, भोले-भाले लोग। हिन्दुस्तान का मतलब दिल्ली, वहां की गद्दी, गद्दी पर बैठे लोग। जी हां, आप देख सकें तो देख सकते हैं कि भोले- भाले ग्रामीण से लेकर दिल्ली की तख्त पर बैठा हमारे देश का सिरमौर तक सभी हाथ जोड़े खड़ा है। भिखारी की तरह। वाह - ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   8:17am 18 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
मेरी पिछली बातों (खुद को भी तो बदलिए) का संदभॆ लेते हुए ब्रजेश, चंद्रा एक बात स्पष्ट कर लें कि नेता, अधिकारी या व्यापारी कोई आसमान से नहीं आते। आम लोगों यानी पब्लिक के बीच से ही आते हैं। पिछली बातों से अगर यह भी साफ नहीं हो पाया कि देश, समाज और व्यवस्था सुधरे, इसके लिए क्या ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   6:58pm 17 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
इसके पहले कि मैं आजादी का अर्थ तलाशती रपट का सिलसिला आगे बढ़ाऊं, पुरुषोत्तम जी को धन्यवाद दे लूं कि उन्होंने इस सिलसिले में अपने आलेख से चार चांद लगा दिये हैं। पिछली पोस्ट में मैंने आजादी के सच्चे अर्थ की तलाश में कुछ सरकारी संस्थानों की सैर पर अपने साथ चलने वालों को चल... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   7:59am 17 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
यह कैसी आजादी? यह जुमला हमें अक्सर पढ़ने-सुनने को मिल जाता है। समाज, देश और व्यवस्था की दुरावस्था से त्रस्त लोग ऐसा कहते हैं। लेकिन देश, समाज की दुरावस्था से आजादी का क्या लेना-देना। भ्रष्टाचार, नाकामी और काहिली के लिए आजादी कहां से जिम्मेदार हो गई। भई, आजादी हमें बड़ी म... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   5:19pm 16 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
कोई गफलत नहीं, कोई शिकायत नहीं, पर यह सच है। यह सच है कि आज जो जश्न-ए-आजादी चल रहा है, वह कभी हुई जंग-ए-आजादी के दम पर ही टिका है। कहीं पढ़ा था। भगत सिंह जेल में बंद थे। उनकी माता उनसे मिलने आयीं। भगत सिंह को सूचना दी गयी कि उनकी माता उनसे मिलने आयी हैं। भगत सिंह सोच रहे थे कि उन... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   7:23am 16 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
एक ऐसे बोर सब्जेक्ट पर लिखने को जी मचला है , जिसे मुद्दा बनाकर आज हर ओर हर कोई लिख रहा है। लिख रहा है और पूछता चल रहा है कि क्या लिखा है, वाह। मेरा यह लेख आपकी किसी वाह सुनने का मोहताज नहीं। यह पत्थर है, जो तबीयत से उछाला जा रहा है, शायद कहीं कोई सुराख पैदा हो जाय।आजादी। बड़ा प... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   6:23pm 14 Aug 2009 #
Blogger: purushottam kumar
1999 में जब कारगिल की लड़ाई छिड़ी थी और द्रास-कारगिल में बर्फ की सफेद पट्टियां वीर जांबाजों के खून से लाल हो रही थीं, उस दौरान हमारे नेताओं के आम चुनाव के नफा-नुकसान के आकलन में मशगूल रहने को लेकर झारखंड के एक इंजीनियर कवि ओमप्रकाश वरनवाल ने जो मुक्तक लिखा था, वह आज भी मौजूं ... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   11:54am 26 Jul 2009 #
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