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Blog: मनोभूमि

Blogger: Manish Yadav
मास्टर साहब उसे डंडे से धो रहे थे और साथ ही एक ही वाक्य बार बार दोहरा रहे थे – बोल!! पढ़ेगा कि नहीं? वह घिघियाते हुए कहे जा रहा था – पढ़ूँगा.. पढ़ूँगा.. उसके ऐसा कहने पर मास्टर साहब प्रतिप्रश्न कर देते – पढ़ेगा? कैसे पढ़ेगा? ऐसे पढ़ेगा!! और वह डंडे की चोट से चीखते हुए ‘नहीं नहीं... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   5:09am 21 May 2013 #यादें
Blogger: Manish Yadav
गर्मी के दिन, स्कूल की छुट्टियाँ और नानी जी का घर. सवेरे सवेरे उत्पात शुरू हो जाता था खरबूजे को लेकर.. हमें हमेशा पूरा ही चाहिये होता था… और चावल का मांड विद हल्का सा नमक.. चूल्हे की धीमी आँच में भुने आलू का चोखा और धनिया की चटनी… रोटी को तवे पर कड़क करने की जिद… और अन्ततः दा... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   8:13am 19 May 2013 #यादें
Blogger: Manish Yadav
एक समाचार चैनल ने देश में बढ़ते हुए रेप के मामलों पर चिन्ता व्यक्त करने के लिये चार होशियार लोगों को बुलाया. जिसमें दो नर थे दो नारी थी और तीसरा होशियारों का शहंशाह एंकर था.होशियारों से बेहद होशियारी से पूछा जाता है – आखिर क्या हो गया है इस समाज को? क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   10:37am 27 Apr 2013 #यादें
Blogger: Manish Yadav
दो किनारे खामोश खड़े रहे, औरएक नदी निश्चिंत होकर बहती रही.उन किनारों ने उसे सहेज रखा था.अन्तर्मन तो सारे मनोभावों का एक संग्रह है. सहेजना हमारा काम है,और बिखेरना नियति का.... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   6:47pm 11 Apr 2013 #मंथन
Blogger: Manish Yadav
स्वाभाविक सी लगने वाली सत्यता कहीं भी नज़र आती है तो उसकी चीरफाड़ करने में कुछ शक्तियाँ स्वतः ही लग जाती हैं. ऐसे में एक कहानी याद हो आती है, जिसका टाइटिल राजनैतिक गलियारों से लेकर गाँव की गली तक मशहूर है – बन्दरबाँटवह कहानी कुछ ऐसी है, जिसमें दो सौभाग्यवती बिल्लियों को... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:33am 7 Apr 2013 #यादें
Blogger: Manish Yadav
दूर पहाड़ों पर बर्फ की सफेद चादर बिछी थी और वह पथरीली नदी के किनारे पड़े एक बड़े से पत्थर पर अपने घुटने समेटकर बैठा था. सुबह की ताजी हवा में चिड़ियों का कलरव सुनना उसे अच्छा लग रहा था और पत्थरों से टकराती हुई जल की धार एक जीवन संगीत का निर्माण कर रही थी.उसका अन्तर्मन एक प्... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   6:36am 3 Apr 2013 #यादें
Blogger: Manish Yadav
वह देखना चाहता था, उन आँखों में अपना प्रतिबिम्ब… लेकिन कभी वह पलकें झुका लेती तो कभी वह नज़रें नीची कर लेता… और अन्तर्मन में बुनी जा रही एक छवि कुछ अधूरी सी रह जाती. मन्दिर की घंटियाँ निरन्तर बज रही थी और वह सीढ़ियों पर बैठा उन पलकों के उठने की प्रतीक्षा कर रहा था जो एक मा... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   6:55am 9 Mar 2013 #यादें
Blogger: Manish Yadav
आज ख्याल आया कि हमने सार्वजनिक तौर पर कभी व्यक्तिगत रूप से अपनी तस्वीरें शेयर नहीं की. कारण – तस्वीरें उतरवाने का ज्यादा शौक नहीं रहा कभी. क्योंकि हमेशा लेने की फिराक में रहता था. बचपन से शुरू करते हैं. ज्यादा तो है नहीं.. सिर्फ गिनी चुनी है.. और उसमें भी शेयर की जा सकने वाल... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   11:42pm 3 Feb 2013 #यादें
Blogger: Manish Yadav
उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले ‘भावी दूल्हे’ तीस मार खाँ नहीं होते. यह जरूरी नहीं कि जो दिमाग से अच्छा है वह दिल से भी अच्छा हो. दिमाग से तो चोर उचक्के भी काफी अच्छे होते हैं.. पर्याप्त सम्मान देने के लिये उन्हें ‘शातिर’ कहकर सम्बोधित किया जाता है, जिसे सुनकर उनकी ब... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   8:34am 31 Jan 2013 #यादें
Blogger: Manish Yadav
बहुत दिनों बाद भावनाओं में इतनी प्रबलता आयी है कि मनोभूमि पर कुछ लिखा जा सके. शाम की सुनहरी धूप में बैठकर अनुभवों को लपेटने का मजा ही कुछ और है. इस मजेदार घड़ी में कुछ ऐसे अतिरिक्त अनुभव भी मिल जाते हैं मानो हम चमत्कारों की दुनिया में मजे ले रहे हैं. सबसे बड़ा चमत्कार तो य... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   7:57pm 26 Jan 2013 #यादें
Blogger: Manish Yadav
मनोभूमि बनाने से पहले मैं अधूरा सपनाबुनता था. बड़े बड़े सपने, जो अक्सर अधूरे रह जाते और मन दुःखी हो जाता. एक दिन गंगा किनारे बैठा सोच रहा था – क्या सिर्फ मेरे सपने ही अधूरे रह जाते हैं? यह प्रश्न मन में अभी उठा ही था कि बहते पानी में एक छोटी सी भँवर पैदा हो गयी… और किसी ने भी... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   6:37am 27 Sep 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
प्रधानमंत्री ने हमारी पिता वाली शैली का प्रयोग करते हुए कहा – पैसे पेड़ पर नहीं उगते..!! लेकिन उन्होंने पिता वाली शैली में जनता से यह नहीं पूछा – कि जो पैसे हमने तुम्हें कलम खरीदने को दिया था उसका क्या किया??‘समझदार’ जनता से यह पूछा जाना चाहिये कि गैस सिलिण्डर जब घर का खान... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   2:51am 22 Sep 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
एक कहानी है. जिसमें एक छोटा बच्चा रो रहा होता है क्योंकि वह एक ऐसे चौराहे पर खड़ा होता है जहाँ से कई रास्ते जाते हैं. वह हैरान परेशान…. जाये तो किधर जाये? इतनें में उड़ते हुए एक चिड़िया आती है. वह उपर आसमान की तरफ़ देखता है और सोचता है कि यदि मैं भी उड़ सकता तो उपर जाकर सारे रास्तो... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   10:52am 24 Aug 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
आज बाबा भवसागर पार करके आये हैं और कीबोर्ड के पास बैठे हैं. शायद प्रवचन करने का मूड है उनका!! उनके स्वागत के लिये पुष्प तो हैं नहीं.. इस कीबोर्ड को ही उनके सिर पर समर्पित करता हूँ. हो सकता है खुश हो जायें.. भक्तजनों!! इस मनीषवा की मत सुनों, हमें भी फूल ही प्यारे लगते हैं सो वही च... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   2:28am 23 Aug 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
हर रोज की भाँति शबरी अपने द्वार के सामने झाड़ू लगा रही थी, सामने के रास्ते से एक ग्रामीण गुजरा और चुटकी लेते हुए कहा – क्या रे शबरी!! इस बुढ़ापे में काहे जान देने पर तुली है? कौन है तेरा? जो तेरे यहाँ आयेगा. साफ सफाई तो तब की जाती है जब कोई अपना आ रहा होता है.शबरी मुस्कुराती है... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   2:18am 22 Aug 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
सुबह सुबह पानी में घुलकर जो सुकून मिलता है वह वही जानता है जो पानी को महसूस किया हो. बाथटब में लोगों को नींद मारते देखा है, लेकिन तैरने में जो मज़ा आता है उसकी तो बात ही कुछ और है.अतीत में झाँकता हूँ तो अक्सर वह छोटा सा लड़का याद आता है जो नदी / तालाब के किनारे खड़ा लोगों को त... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   1:36am 21 Aug 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
‘खोज करना’ जिज्ञासु मनुष्य का मूल स्वभाव होता है. हमने तो कई खोजी देखे हैं, जिनमें से एक आइने में नज़र आता है और दूसरा सड़कों पर कूड़े में कुछ खोजता नज़र आता है. कुछ और भी हैं जो पहली नज़र में पूर्णतः विक्षिप्त नज़र आते हैं लेकिन वे अपनी खोज से बेहद खुश नज़र आते हैं. सड़कों... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   11:47am 17 Aug 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
वेदान्त दर्शन की पुस्तक बगल में दबाये वे उस रास्ते से निकल रहे थे कि उनकी नज़र उस पर पड़ी. वह एक वेश्या की बेटी थी, जिसके तन पर पर्याप्त कपड़े नहीं थे. पर्याप्त अवलोकन कर लेने के बाद वे धीरे से मुस्कुराये और मन्दिर की तरफ चल पड़े थे.शाम होने को थी, उनके कदम तेजी से वापस घर की... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   6:24pm 10 Aug 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
व्यापार कोई बुरी चीज नहीं है, यही तो उन चंद कलाओं में से के है जिनके बल बूते पर परिवार चलता है, समाज चलता है और पूरा देश चलता है. व्यापार न हो तो जीने के कोई मायने रहेंगे क्या? इन्सान दिन भर बैठा मक्खियाँ मारेगा या फिर ज्यादा एक्सपर्ट हो गया तो चिड़ीमार बन जायेगा. पुरातन यु... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   8:54am 7 Aug 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
इस तस्वीर में आपको कुछ अलग भले ही न दिखे लेकिन यह कुछ अलग जरूर कहना चाहती है. इस तस्वीर में आपकी तरफ देख रहा शक्स आपको कुछ बताना चाह रहा है.मैं इस वक्त दारागंज, इलाहाबाद के एक मन्दिर “नागवासुकी” की सीढ़ियों से नीचे उतरकर गंगा नदी के किनारे कुछ मछुआरों के साथ बैठा हूँ. सूर... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   12:29pm 1 Jul 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
भिखारियों को आपने देखा ही होगा. उनके व्यवहार से भलीभाँति परिचित भी होंगे. सड़क पर पसरा भिखारी भी आजकल गुस्सा करने लगा है यह बोलकर कि मुझे भिखारी समझ रखा है क्या? अठन्नी देते हुए शरम नहीं आती?उस बेवकूफ को जरा सी भी समझ होती तो वह कुछ ही दिनों में लखपति हो गया होता अगर वह गुस... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   8:41am 18 Jun 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
वह ट्रेन में बैठ चुका था, प्लेटफॉर्म का शोर उस दरवाजे तक ही सीमित था जहाँ से डिब्बे का तापमान शरीर को राहत देना प्रारम्भ किया था. वह अकेला रहना चाहता था इसलिए उसने साइड लोवर वाली सीट चुनी थी और वह चुपचाप एकवर्णीय शीशे के उस पार निहार रहा था. उसे आश्चर्य हो रहा था कि इतनी च... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   11:31am 14 Jun 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
सम्बन्धों की मिठास और उसके बीच छिपे प्यार, आदर, समर्पण व विश्वास जैसी चीजों को सीधे प्रकृति से जोड़ देना हिन्दू धर्म की पहचान रही है. प्रकृति द्वारा हमें दी गई अमूल्य संपदा को हमने मानवीय रिश्तों के अनुसार प्रयोग में लाया है, कभी जरूरत से ज्यादा दोहन करने का प्रयास नहीं... Read more
clicks 189 View   Vote 1 Like   7:43am 11 Jun 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
४६ बरस हो गये, एक फिल्म बनी थी “तीसरी कसम”. नई पीढ़ी ने अपनी पुरानी पीढ़ी को समझते हुए वह फिल्म देखी. विज्ञान की एक कहावत है – “ज्ञान (Knowledge) समान रहता है अभियांत्रिकी (टेक्नालॉजी) जरूरत के हिसाब से बदलती रहती है.”पुराने लोगों के पास ज्ञान बहुत था, तकनीक की शायद उन्हें ज्यादा... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   2:05pm 9 Jun 2012 #यादें
Blogger: Manish Yadav
यह एक खेल है जिसकी खोज एक विशेष उद्देश्य से की गयी थी. उन बच्चों के लिए यह सिर्फ एक खेल था, जिनकी हवेली में कुछ साल पहले बँटवारा हुआ था जिस पर गाँव के ही एक दबंग आदमी का कब्जा था. वह जाते जाते ऐसी गणित कर गया उस हवेली में.. कि आज तक उस गणित की पहेली हवेली वाले सुलझा ही नहीं पाये.... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   9:02am 4 Jun 2012 #यादें
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