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Blog: दिल का दर्पण

Blogger: mohinder
 आखिर चुने गये तुम रिश्तोँ की मिनारों मेँ  और साँस ले रहे हो एहसास की दरारों मेँ  पर कतरवा अरमान घौँसल़ोँ मेँ फिर लौटे  कई नश्तर लगे हुए थे उम्मीद की दीवारोँ मेँ  वो काफिले बँधे थे किसी दूसरे ही सफर से  बेकार चलते रहे हम उन लम्बी कतारोँ मेँ  रोशनी नहीँ आग थी जो आई दूर नजर ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   12:19pm 26 Apr 2018 #
Blogger: mohinder
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clicks 134 View   Vote 0 Like   5:04pm 10 Jul 2017 #
Blogger: mohinder
बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं था I आज दिन में टेलीविज़न पर एक अंग्रेजी फिल्म "The Hurricane"आ रही थी I यह एक बॉक्सर "रूबल कार्टर"के जीवन पर आधारित है जिसको अदालत के गलत निर्णय के कारण उम्र कैद हो जाती है I जेल में रह कर वह अपने जीवन पर एक किताब लिखता है I उसी किताब को पढ़ कर एक लड़का बड़ा प्रभ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   5:04pm 29 Mar 2017 #
Blogger: mohinder
अधिकतर लोग यह समझते हैं कि वह जानते हैं प्रसन्न  रहने के लिए क्या करना चाहिए I विभिन्न लोग भिन्न भिन्न कारणों को प्रसन्न रहने के लिए आवश्यक  मानते हैं I  आईये इस विषय पर और आगे बढ़ने से पहले हम यह जान लें कि मृत्यु के करीब लोगों पर किये गए सर्वेक्षण में उनके कौन से मुख्य पछत... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   5:44pm 13 Mar 2017 #
Blogger: mohinder
बात का अब क्या कहना दिल की कह गया कोई मिल गयी उसको मंजिल टूट  कर रह गया कोई दोस्त ही ना रहा अपना फिर भी सह गया कोई बूँद भर भी नहीं बरसी बाढ़ में  बह गया कोई ईंट बस एक वहां सरकी बाँध फिर ढह गया कोई ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   3:55pm 27 Feb 2017 #
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दिल में तेरी यादों का गुलाब खिल तो आया है साथ हिस्से में मगर कुछ कांटे भी मेरे आये हैं सोचता हूँ क्यों कोई नहीं मिलता अपनों सा यहाँ फिर याद आता है मुझे हम इस देश में पराये हैं पहले हर आवाज पर लगता था कि कोई आया है जानता हूँ अब कोई नहीं दस्तक देती ये हवायें हैं जिस्म तो... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   7:50pm 23 Nov 2016 #
Blogger: mohinder
हर घडी न तलाशो नक्शे कदम कुछ दूर तो अपने दम पर चलो बोझ से ख्वाहिशोँ के थक जाओगे दिल मेँ अरमान कम ले कर चलो गुजरी बातोँ का चर्चा क्योँ हर घडी झगडे पुराने सभी दफन कर चलो ठोकरेँ न कहीँ तेरा हौँसला तोड देँ राहे सफर मेँ ऐसा जतन कर चलो काफिला  मँजिल तक पहुँचायेगा भूल जा... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   11:34am 6 Aug 2015 #
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हल बैल फिर खेत निरायी कहीं बीज कहीं पौध रोपायी हरी कौपले, कोमल डालियाँ समय से बने सुनहरी बालियाँ खलिहानों से दुकानों तक दुकानों से घर की रसोई रसोई से फिर थाली तक किस पर क्या-क्या बीता किस ने है क्या-क्या झेला कुछ जग जाहिर है इस दूरी में और कुछ न कहने की मजबूरी में कच्ची मि... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:12am 10 Jul 2015 #
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जीवन क्या है? जन्म और मृत्यु के बीच एक अन्तराल कभी दीर्घ अनुभूति, कभी लघु आभास जीवन एक चित्रपट (कैन्वॅस) काल की लेखनी उकेरती जिस पर कभी सूक्ष्म, कभी वृहद रेखाचित्र धीर गम्भीर या फिर मधुर सुहास जीवन एक चित्रपट (कैन्वॅस) भाग्य व कर्म की तूलिकाएँ भरतीं जिसमें भावनाओं के वि... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   5:02am 18 Jun 2015 #
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क्या नहीँ है आज यहाँ मेरे लिये कोई दुआ है फली यहाँ मेरे लिये हजार दुश्मन  तो कोई बात नहीँ तुम तो मेरे हो ना यहाँ मेरे लिये बस्ती-ए-ख्वाब से एक बार गुजरा ठहरना लाजिम अब यहाँ मेरे लिये महफिल मेँ बस इक तेरे आने से सब कुछ नया-नया यहाँ मेरे लिये मुझसे नजरेँ फेरे लेने से पह... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   4:48am 18 Jun 2015 #
Blogger: mohinder
धूप से रहगुजर की सायोँ से वास्ता रखा हो सका जहाँ तक बीच का रास्ता रखा सिर्फ दोस्ती ही नहीँ निभाई है यहाँ मैँने दुश्मनोँ से भी है बराबर का राब्ता रखा कुछ मीठे और कुछ कडवे घूँट पीने पडे बना के मैँने मगर जुँबा का जायका रखा राहोँ मेँ मुझे जहाँ भी चिराग सोये मिले मैँने आ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   7:19am 17 Jun 2015 #
Blogger: mohinder
मेरा प्रकाशित कविता सँग्रह "दिल का दर्पण" नीचे दिये लिंक पर जा कर प्राप्त किया जा सकता है.  पुस्तक का मुल्य रु. 105 मात्र  + रु 40 पोस्टेज है. http://www.infibeam.com/Books/dil-ka-darpan-mohinder-kumar/9789381394212.html#variantId=P-M-B-9789381394212 मोहिन्दर कुमार  ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   6:00am 17 Jun 2015 #
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कई झूठे अफसाने हैँ फिजाओँ मेँ किससे बोलेँ और क्या कहा जाये जब भी कभी बोलने की सोची है दिल का मश्वरा था चुप रहा जाये दर्द रह रह कर  दिल मेँ उठता है खुद सह लो जब तलक सहा जाये वक्त की धार ही सबकी किस्मत है साथ बह लो इसके गर बहा जाये सभी काफिलोँ की अपनी मँजिल है जिसकी मँज... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   4:51am 16 Jun 2015 #
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डँगरेयाँ चरान्दे चरान्दे घा छम्मण पौँदेँ पौँदे ऐ जिन्द्डी बेहाल होई बिन दाँणेयाँ पराल होई तू कुत्थु दिक्खी सकेया खूँगेयाँ पेराँ जो घाह दित्ते रौनकाँ देया ओ मेरम्माँ दिन मुज्जो तू सिआह दित्ते बुज्झी चुक्की लौ हुण ताँ ऐथू जुग्नू हन्न गवाह मत्ते मर्जिया दा हुण म... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   5:31am 25 May 2015 #
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कभी गलियारे मेँ यादोँ के कभी बँजारे बन राहोँ पर न जाने क्या ढूँढते हैँ हम भूलाना था जिसे हमको वही सब  याद करते हैँ रेत के भँवर मेँ डूबते हैँ हम कभी मौसम जो भाते थे और मँजर जो लुभाते थे उन्हीँ से आज ऊबते हैँ हम न आने वाला है अब कोई न मनाने वाला है अब कोई खुद से जाने क्य... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   5:28am 25 May 2015 #
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गर्व से सर उठाये पर्वत की शिखरोँ को सूर्य की किरण  सर्वप्रथम व अंतिम किरण अंत तक निज दिन चूमती है परंतु चकित हूँ यह फिर भी हरित नहीँ होती हरित होती हैँ घाटियाँ जीवन वहीँ विचरता है किँचित यह ओट देने का श्राप है अथवा दमन का प्रतिशोध कि जल की एक बूँद नहीँ ठहरती यहाँ जल ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   5:25am 25 May 2015 #
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शरीर एक नाव है    एँव आत्मा एक यात्री यही सत्य है सभी कहते हैँ यदि यह सत्य भी है महान तो शरीर ही हुआ ना जीवन भर ढोता रहा जो इस यात्री का बोझ जो केवल मूक साथी था इस घाट से उस घाट की बीच की दूरी का इस आशा मेँ इस पर सवार किंचित यह नाव  समय  के धारे के विपरीत बह कर उसे मिला देगी... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   10:32am 20 Apr 2015 #
Blogger: mohinder
तुम बिन क्या हाल है मेरा सब कुछ पूछो यह न पूछो बाहर से कोई जान न पाये भीतर क्या है हाल न पूछो बसंत छाई  है  उपवन मेँ पलाश  उपजा मेरे मन मेँ गँधहीन पुष्पोँ से सज्जित पत्रहीन स्वय़ँ से लज्जित जिसे देख कर सभी सराहेँ क्षितिज लालिमा की रेखायेँ फूलदान के लिये नहीँ खरा जँगल... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   10:11am 11 Mar 2015 #
Blogger: mohinder
पेशावर (पाकिस्तान) के एक स्कूल मेँ आतँकवादियोँ द्वारा निर्दोश बच्चोँ की हत्या और उनके परिजनोँ के दुख से उपजी कुछ पक्तियाँ समर्पित हैँ.... इस घटना की जितनी निन्दा की जाये कम है... साथ ही अपराधियोँ के लिये बडे से बडा दण्ड भी कम रहेगा... शायद फाँसी भी कम पड जाये. झर गये आशाओँ क... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   10:27am 18 Dec 2014 #
Blogger: mohinder
मैँने भर लिया आगोश मेँ चाँद को चाँदनी पर जहाँ मेँ फेरा लगाती रही भुला गम को ये जहाँ बसा तो लिया उदासी पर हर शाम डेरा लगाती रही पहले पहल बनाई तेरी तस्वीर के रँग दोबारा फिर कागज पर उतर न सके रातोँ के घने काले अँधेरे सँवर न सके यूँ किरणेँ सूरज की सवेरा सजाती रही जीने के ल... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   7:19am 28 Nov 2014 #
Blogger: mohinder
मैँने हुस्न वालोँ की जिद देखी है मैँने दिवानेपन की हद भी देखी है रहेगी किताबोँ मेँ फसाना बन कर जीस्ते-सफर मेँ वो गर्द भी देखी है ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:27am 21 Oct 2014 #
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