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Blog: उच्चारण

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--नहीं हुआ है देश में, अभी शीत का अन्त।कुहरे से इस साल तो, शीतल हुआ बसन्त।।--कुहरे-सरदी ने किये, कीर्तिमान सब ध्वस्त।सूरज की गति देखकर, हुए हौसले पस्त।।--नहीं दिखाई दे रहा, वासन्ती संगीत।कुहरे से इस साल तो, है सूरज भयभीत।।--सरदी हाड़ कँपा रही, बिगड़ गया परिवेश।उत्तर भारत मे... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   8:30pm 17 Jan 2022 #दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--उत्तरायणी पर्व को, ले आया नववर्ष।तन-मन में सबके भरा, कितना नूतन हर्ष।।--मकर राशि में आ गये, अब सूरज भगवान।नदिया में स्नान कर, करना रवि का ध्यान।‍।--भारत में इस पर्व के, अलग-अलग हैं नाम।विविधताओं में एकता, सुन्दर-सुखद-ललाम।।--चारों ओर भरा हुआ, लोगों में उल्लास।सुधरेगा परिव... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   8:30pm 13 Jan 2022 #मकर संक्रान्ति
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
रोग अगर दिखलाई दे तो,कभी न करना जादू-टोना।अपने पैर पसार चुका है,पूरी दुनिया में कोरोना।।बाहर नहीं निकलना घर से,घर में पूरा समय बिताओ।हर घंटे हाथों को धोओ,साफ-सफाई को अपनाओ।अपनी पुस्तक को दोहराओ,यह अनमोल समय मत खोना।अपने पैर पसार चुका है,पूरी दुनिया में कोरोना।।शीतल प... Read more
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सुप्त भावों को जगाने,आ गया नव वर्ष फिर से।जश्न खुशियों का मनाने,आ गया नव वर्ष फिर से।--प्रीत की पसरी खुमारी देश में,लग रहा है शीत भारी देश में,कामनाएँ उमड़ती फिर से पुरातन,भावनाएँ लग रही हैं आज नूतन,नवल भावों को जगाने,आ गया नव वर्ष फिर से।1।--करीने से सब सँवरते आज तो,झूमकर स... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   8:30pm 2 Jan 2022 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!जनसेवक खाते हैं काजू,महँगाई खाते बेचारे!!--काँपे माता-काँपे बिटिया, भरपेट न जिनको भोजन है,क्या सरोकार उनको इससे, क्या नूतन और पुरातन है,सर्दी में फटे वसन फटे सारे!नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!--जो इठलाते हैं दौलत पर... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   8:30pm 29 Dec 2021 #जनसेवक खाते हैं काजू
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--सन्नाटा पसरा है अब तो,गौरय्या के गाँव में।दम घुटता है आज चमन की,ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।--नहीं रहा अब समय सलोना,बिखर गया ताना-बाना,आगत का स्वागत-अभिनन्दन,आज हो गया बेगाना,कंकड़-काँटे चुभते अब तो,पनिहारी के पाँव में।दम घुटता है आज चमन की, ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।--परम्परा क... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   9:00pm 27 Dec 2021 #खोज रहे हैं शीतल छाया
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सुबह करते हैं, शाम करते हैं हर खुशी तेरे नाम करते हैं ओढ़ करके ग़मों की चादर कोकाम अपना तमाम करते हैंजब भी दैरो-हरम में जाते हैंआपका एहतराम करते हैं देख करके जईफ लोगों को हम अदब से सलाम करते हैं ज़िन्द्ग़ी चार दिन का खेला है किसलिए कत्लो-आम करते हैंआशिकों की य... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   7:30pm 17 Dec 2021 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सरदी पड़ती ग़ज़ब की, गया दिवाकर हार।मैदानी भूभाग में, कुहरे की है मार।।--लकड़ी-ईंधन का हुआ, अब तो बड़ा अभाव।बदन सेंकने के लिए, कैसे जले अलाव।।--हैं काजू-बादाम के, आसमान पर भाव।मूँगफली को खाइए, मेरा यही सुझाव।।--शीतलता की मार से, निर्धन है भयभीत।बच्चे-बूढ़ों के लिए, कठिन झेल... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   8:30pm 14 Dec 2021 #नियमन में है खोट
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
48वीं वैवाहिक वर्षगाँठ(5 दिसम्बर, 2021)--बस इतना उपहार चाहिए।ममता का आधार चाहिए।।जीवन जीने की है आशा,चलता रहता खेल-तमाशा,सुर की मृदु झनकार चाहिए।ममता का आधार चाहिए।।वाद-विवाद भले फैले हों,अन्तस कभी नहीं मैले हों,आपस में मनुहार चाहिए।ममता का आधार चाहिए।।सबकी सुनना, अपनी ... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   8:30pm 3 Dec 2021 #48वीं वैवाहिक वर्षगाँठ
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
ॉगुजरने लगा है, सफर धीरे-धीरेकठिन धीरे-धीरे, सरल धीरे-धीरे किये हैं जो करतब भुगतने पड़ेंगेपीना पड़ेगा गरल धीरे-धीरे यहाँ पाप और पुण्य दोनों खड़े हैंकरनी पड़ेगी पहल धीरे-धीरे जीवन  हिस्सा सभी हैं हमारेसुनानी पड़ेगी ग़ज़ल धीरे-धीरे मेहनत से अपना नहीं जी ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   8:30pm 1 Dec 2021 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
"दोहा छन्द"      दोहा छन्द अर्धसम मात्रिक छन्द है। इसके प्रथम एवं तृतीय चरण में तेरह-तेरह मात्राएँ तथा द्वितीय एवं चतुर्थ चरण में ग्यारह-ग्यारह मात्राएँ होती हैं। दोहा छन्द ने काव्य साहित्य के प्रत्येक काल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिन्दी काव्य जगत में दोहा... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   7:30pm 28 Nov 2021 #दोहा छन्द
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
काम कुछ करते नही बातें बनाना जानते हैं।महफिलों में वो फकत जूते ही खाना जानते हैं।।मुफ्त का खाया है अब तक और खायेंगे सदा,जोंक हैं वो तो बदन का खून पीना जानते हैं।राम से रहमान को जिसने लड़ाया आज तक,वो मजहब की आड़ में रोटी पकाना जानते हैं।गाय की औकात क्या? हम दुह रहे हैं साँ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   8:30pm 23 Nov 2021 #
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--कातिक की है पूर्णिमा, सजे हुए हैं घाट।सरिताओं के रेत में, मेला लगा विराट।।--एक साल में एक दिन, आता है त्यौहार।बहते निर्मल-नीर में, डुबकी लेना मार।।--गंगा तट पर आज तो, उमड़ी भारी भीड़।लगे अनेकों हैं यहाँ, छोटे-छोटे नीड़।।--खिचड़ी गंगा घाट पर, लोग पकाते आज।जितने भी आये यहाँ, ... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   8:30pm 19 Nov 2021 #दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
खादी और खाकी दोनों में बसते हैं शैतान।अचरज में है हिन्दुस्तान! अचरज में है हिन्दुस्तान!! --तन भूखा है, मन रूखा है खादी वर्दी वालों का,सुर तीखा है, उर सूखा है खाकी वर्दी वालों का,डर से इनके सहमा-सहमा सा मजदूर-किसान!अचरज में है हिन्दुस्तान! अचरज में है हिन्दुस्तान!!-- म... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   8:30pm 14 Nov 2021 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
उगते ढलते सूर्य का, छठपूजा त्यौहार।कोरोना के काल में, छठ माँ हरो विकार।। अपने-अपने नीड़ से, निकल पड़े नर-नार।सरिताओं के तीर पर, उमड़ा है संसार।। अस्तांचल की ओर जब, रवि करता प्रस्थान।छठ पूजा पर अर्घ्य तब, देता हिन्दुस्थान।। परम्पराओं पर टिका, अपना भारतव... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   4:43am 10 Nov 2021 #दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
मेरे भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर, कर रही हूँ प्रभू से यही कामना।लग जाये किसी की न तुमको नजर,दूज के इस तिलक में यही भावना।।चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,उन्नति के शिखर पर हमेशा चढ़ो,कष्ट और क्लेश से हो नही सामना।दूज के इस तिलक में यही भावना।।थालियाँ रोली चन्दन की सजती ... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   8:30pm 5 Nov 2021 #भइयादूज
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
दीप खुशियों के जलाओ, आ रही दीपावली।रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।क्या करेगा तम वहाँ, होंगे अगर नन्हें दिये,चाँद-तारों को करीने से, अगर रौशन किये,हार जायेगी अमावस, छा रही दीपावली।नित्य घर में नेह के, दीपक जलाना चाहिए,उत्सवों को हर्ष से, हमको मनाना चाहिए,पथ हमें प्रका... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   10:30am 30 Oct 2021 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आज अहोई-अष्टमी, दिन है कितना खास।जब तक माँ जीवित रही, रखती थी उपवास।।वो घर स्वर्ग समान है, जिसमें माँ का वास।अब मेरा माँ के बिना, मन है बहुत उदास।।बचपन मेरा खो गया, हुआ वृद्ध मैं आज।सोच-समझकर अब मुझे, करने हैं सब काज।।तारतम्य टूटा हुआ, उलझ गये हैं तार।कहाँ मिलेगा अब मुझे, म... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   8:30pm 27 Oct 2021 #दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
नद-नालों, सरिताओँ को जो,खुश हो करके अंग लगाती।धरती की जो प्यास बुझाती,वो पावन गंगा कहलाती।। आड़े-तिरछे और नुकीले,पाषाणों को तराशती है।पर्वत से मैदानों तक जो,अपना पथ खुद तलाशती है।गोमुख से सागर तक जाती।वो पावन गंगा कहलाती।। फसलों को नवजीवन देती,पुरखों का ... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   8:30pm 15 Oct 2021 #गोमुख से सागर तक जाती
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--रावण का वध हो गया, गयी बुराई हार।विजयादशमी विजय का, पावन है त्यौहार।१। --जो दुष्टों के दलन का, करता काम तमाम।उसका होता राम सा, जग में ऊँचा नाम।२। --मर्यादाओं का रखा, जिसने भी आधार।होती है उस राम की, जग में जय-जयकार।३। --त्यौहारों का कीजिए, नहीं कभी उपहास।सब पर्वों के म... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   8:30pm 14 Oct 2021 #जग में ऊँचा नाम
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
गीत-ग़ज़ल, दोहा-चौपाई,गूँथ-गूँथ कर हार सजाया।नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,हमने छन्दों को अपनाया।। कल्पनाओं में डूबे जब भी,सुख से नहीं सोए रातों को।कम्प्यूटर पर अंकित करके,कहा आपसे सब बातों को।जब मौसम ने ली अँगड़ाई,हमने उसका गीत बनाया।नवयुग का व्यामोह छोड़कर ,हम... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   8:30pm 10 Oct 2021 #हमने छन्दों को अपनाया
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
मालिक कोई और है, जीव किरायेदार।सब उसके ही हाथ में, कितना दे अधिकार।। माता के नवरात्र की, महिमा बड़ी अपार।मानव चोला है मिला, लो परलोक सुधार।। नौ दिन तक दुर्गा जपी, फिर मुर्गा से प्यार।धोखा खुद को दे रहे, कुछ तो करो विचार।। साबुन से धोया बहुत, आया नहीं निखार।गधा ... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   8:30pm 8 Oct 2021 #पढ़ गीता के श्लोक
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
रात में उगता हुआ माहताब हैज़िन्दगी इक खूबसूरत ख़्वाब हैथा कभी ओझल हुआ जो रास्ताअब नज़र आने लगा मेहराब हैआसमां से छँट गयीं अब बदलियाँअब खुशी का आ गया सैलाब हैपत्थरों में प्यार का ज़ज़्बा बढ़ाअब बगीचे में ग़ुलों पर आब हैफूल पर मँडरा रहा भँवरा रसिकएक बोसे के लिए बेताब ह... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   7:30pm 3 Oct 2021 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
माता दशमी तिथि को, चली गयीं परलोक।तब से अब तक हृदय में, भरा हुआ है शोक।।--पैंसठ वर्षों तक रहा, सिर पर माँ का हाथ।जब से माँ सुरपुर गयी, मैं हो गया अनाथ।।--श्रद्धा से मैं श्राद्ध को, करता हूँ निष्पन्न।होते माँ के नाम से, सभी कार्य सम्पन्न।।--लेकर भोजन थाल को, जला सुगन्धित ध... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   8:30pm 30 Sep 2021 #माता जी का श्राद्ध
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
मतलब पड़ा तो सारे, अनुबन्ध हो गये हैं।नागों के नेवलों से, सम्बन्ध हो गये हैं।।बादल ने सूर्य को जब, चारों तरफ से घेरा,महलों में दिन-दहाड़े, होने लगा अँधेरा,फिर से घिसे-पिटे तब, गठबन्ध हो गये हैं।नागों के नेवलों से, सम्बन्ध हो गये हैं।।सब राज-काज देखा, भोगे विलास-वैभव,दम तोड... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   8:30pm 23 Sep 2021 #गीत
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