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Blog: do patan ke bich

Blogger: ranjit
बिहार के सीमांत जिले अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में पोरस बॉर्डर से होकर जो समस्याएं प्रवेश कर रही हैं, उनके दूरगामी परिणाम घातक होंगे। सतत घुसपैठ ने जहां इन इलाकों को मानव से लेकर मवेशी तस्करों का पसंदीदा ठिकाना बना दिया है, वहीं गरीबी, जनसंख्या विस्फोट, धार... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   11:42am 30 Jun 2014 #
Blogger: ranjit
 दहाये हुए देस का दर्द-87कोशीके कछार पर स्थित मेरा गांव सिमराही बाजार, जिला- सुपौल, बिहार आज राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। आज यहां नरेंद्र मोदी के कदम पड़ने वाले हैं,जो पटना विस्फोट में मारे गये भरत रजक के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंच रहे हैं। गांव से आने वाले म... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   12:33pm 2 Nov 2013 #
Blogger: ranjit
यह है कोसी का कछार। रेणु साहित्य के अलावा अन्यत्र इस इलाका के आर्थिक पिछड़ेपन और दुरुह भूगोल की चर्चा बहुत कम हुई है। इस इलाके के दुरुह भूगोल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेज शासन के दौरान यहां काम करने वाले अधिकारी को अंडमान की तरह अलग से विशेष भत्ता दिय... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   1:12pm 3 Oct 2013 #
Blogger: ranjit
समंदर ! अगर रास्ता आगे से बंद न किया गया होता अगर दिल्ली इस कदर बिल्ली न हुई होतीऔर बहती हुई हवा रोकी न गयी होतीऔर निकले हुए आंसू, पोंछे गये होते,सच कहते हैं समंदरतब तेरी शान में हम गड्ढे वाले भी गाते पूनम की रात, ज्वार-भाटे के गीत  ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   10:27am 7 Sep 2013 #
Blogger: ranjit
बच्चा कोई भी होबीच खेल से बांह पकड़कर खींच लाओ,तो रोता है  कुछ चॉकलेट लेकर चुप हो जाता है कुछ चॉकलेट फेंककर भी चुप नहीं होतामगर हम नहीं समझतेशायद इसलिए कि हम चॉकलेट देने और बांह मरोड़ने के आगेसोच ही नहीं पाते... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   6:46am 9 Jun 2013 #Kavita
Blogger: ranjit
   वह पानी का जीव कभी नहीं था पर पानी के पास ही रहता आया, सदियों से पानी के बिल्कुल पास, मगर लहरों से बहुत दूर हालांकि युगों के साथ उसके रंग बदलते रहे  लेकिन उसके मुंह का गंध कभी नहीं बदला  रत्ती भर भोथरा नहीं हुआ उसकी चोंच का नोक तमाम नारे और तमाम अकाल के बाद भी  वह बगुला ह... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   1:19pm 25 May 2013 #Kavita
Blogger: ranjit
केंद्र सरकार का मनरेगा और राज्य सरकार का विकास का मोहक नारा के बीच बिहार में मजदूर दिवस के क्या मायने हैं। रोजी-रोटी के लिए परदेस की यात्रा और पलायन की पीड़ा। यही बिहार के कामगारों की गाथा है। पहले भी थी और आज भी है। हिंदी दैनिक राष्ट्रीय सहाराके पटना संस्करण में प्रकाश... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   7:49am 1 May 2013 #
Blogger: ranjit
दहाये हुए देस का दर्द - 86पूजा, कबूला और चढ़ावा ! फसल में दाना नहीं आया, तो ग्राम देवता को कबूला। रोग नहीं छूट रहा, तो सिंघेश्वर भगवान को कबूला। बेटा नहीं जनम रहा, तो बाबा वैद्यनाथ को कांवर भरकर जल चढ़ाने का कबूला। बारिश के लिए टोटका, तो बाढ़ नहीं आने के लिए भी टोना-टोटका। चढ़ावा क... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   8:30am 30 Apr 2013 #
Blogger: ranjit
दहाये हुए देस का दर्द - 86पूजा, कबूला और चढ़ावा ! फसल में दाना नहीं आया, तो ग्राम देवता को कबूला। रोग नहीं छूट रहा, तो सिंघेश्वर भगवान को कबूला। बेटा नहीं जनम रहा, तो बाबा वैद्यनाथ को कांवर भरकर जल चढ़ाने का कबूला। बारिश के लिए टोटका, तो बाढ़ नहीं आने के लिए भी टोना-टोटका। चढ़ावा क... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   8:30am 30 Apr 2013 #
Blogger: ranjit
 अवाम होने के मजाक में मुंह मूंदकर रोते जाना आंख खोलकर सोये रहना हमारी नियति नहीं, अवसाद हैबगुल-ध्यान में है "मसीहा''बायें हाथ में जाल, दायें में हथियार हैहमेशा आस्तीन में छिपा था जवाबआज भी दर-दर भटक रहा मूल सवाल है... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   10:49am 23 Mar 2013 #Kavita
Blogger: ranjit
एक पीढ़ी तैयार होगीलूटे हुए पैसों के पालने में झूलती हुईघोटाले के उड़नखटोले में उड़ती हुईबेईमानी की छत के नीचे  सोती हुई हर फिक्र को हवा में उ़डाती हुई यह पीढ़ी जवान होगी शायद अनजान ही रहेगी इतिहास सेठीक उसी समय एक दूसरी पीढ़ी भी रहेगी लूटे हुए खेतों में रोती हुई छीने हुए घ... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   8:26am 11 Mar 2013 #Kavita
Blogger: ranjit
आपऔर आपे का तापतपने से क्या होता है हमने लोहे को चटकते देखा है।चैत्य की दूब से पूछोसावनी अहंकार के बारे मेंहां,रोशनी पकाता और परोसता है सूरज प्रकाश खाने वालों को ब्लैकहोल कहते हैं ।... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   1:02pm 16 Nov 2012 #Kavita
Blogger: ranjit
 ताले जितने थे सबके सब तोड़े जा चुके  और हम अब भी चाबी संभाल रहे  जवाब नहीं हमारा पहले खाते हम थे मेमियाता था मेमना  अब हम खाते भी हैं, मेमियाते भी हैं... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   11:36am 2 Nov 2012 #Kavita
Blogger: ranjit
     अपने वजूद के पतंग में   अक्सर भरोसे की डोरी बांधता हूं    और    उस मैदान का आंसू पोंछता हूं    जिसका धावक दौड़ हार गया है    भरोसा जरूरी है   आदमी के लिए    मैं भटकी नदी को समुद्र का पता बताता हूं    बछड़ा जरूर कूदेगा      मैं उख़ड़े खूंटे गाड़ रहा हूं ... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   7:07am 25 Sep 2012 #Kavita
Blogger: ranjit
पड़ोसी पेटजरूआ न कहेपानी पीकर डकारते  रहे बाप कई-कई  रातकई-कई  सालपेट को कोई कितना परतारेपानी पीकर कब तक कोई डकारता  रहेअब आती है भूख, तो चलते हैं हाथजलता है दिमाग आप कह सकते हो मुझे द्रोहीराजनीतिक विरोधी या बहका हुआ कोई अलोकतांत्रिक नहीं, मुझे नहीं है विश्वासमैं प्रजा... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   1:41pm 24 Sep 2012 #Kavita
Blogger: ranjit
बिहार की धरती दर्शन और अध्यात्म के लिए सदियों से प्रसिद्ध रही है। आदि काल में बुद्ध, महावीर, नागार्जुन, गार्गी, मैत्रयी और याज्ञवलक्य ने बिहार का मान बढ़ाया तो प्राचीन काल में चाणक्य ने अपने तत्व ज्ञान से दुनिया को चकित किया। आधुनिक काल में महिर्षी मेंही ने इस परंपरा को ... Read more
clicks 247 View   Vote 0 Like   8:25am 23 Sep 2012 #
Blogger: ranjit
बिहार की धरती दर्शन और अध्यात्म के लिए सदियों से प्रसिद्ध रही है। आदि काल में बुद्ध, महावीर, नागार्जुन, गार्गी, मैत्रयी और याज्ञवलक्य ने बिहार का मान बढ़ाया तो प्राचीन काल में चाणक्य ने अपने तत्व ज्ञान से दुनिया को चकित किया। आधुनिक काल में महिर्षी मेंही ने इस परंपरा को ... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   8:25am 23 Sep 2012 #
Blogger: ranjit
दहाये हुए देस का दर्द-85बिहारके कोशी अंचल को जूट की खेती के लिए भी जाना जाता है। उत्पादन के लिहाज से यह इलाका पश्चिम बंगाल और असम के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा जूट उत्पादन केंद्र रहा है। कोशी अंचल के पूर्णिया, कटिहार,मधेपुरा,सुपौल,अररिया और किशनगंज के लाखों किसानों के लिए ... Read more
clicks 300 View   Vote 0 Like   12:54pm 8 Sep 2012 #
Blogger: ranjit
बिहार के विभिन्न दियारा और टाल क्षेत्रों में मध्य बिहार से भी ज्यादा खून बहे हैं, लेकिन इस पर बहस नहीं होती । शायद सरकारों  ने दियारा को अलग दुनिया मान रखी है। दियारा की हिंसा पर "द पब्लिक एजेंडा'' के हालिया अंक में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। ऊपर की तस्वीर डाउनलोड कर यह र... Read more
clicks 278 View   Vote 0 Like   8:01am 1 Sep 2012 #
Blogger: ranjit
जलना कोयले की नियति है। यह बात दीगर है कि जलने की कहानी हमेशा एक जैसी नहीं होती। बाहर जलने पर यह काला धुआं देता है, लेकिन बंद खदानों में जले तो धुएं का रंग झक-झक सफेद हो जाता है। झारखंड की आगग्रस्त झरिया, कुजू आदि कोलियरी के विशाल भू-भाग में कोयले की यह लीला आज भी जारी है। स... Read more
clicks 263 View   Vote 0 Like   2:27pm 28 Aug 2012 #
Blogger: ranjit
धन अर्जित करना अब चाहत नहीं, बल्कि हवश हो गयी  है। इसके लिए लोग हर हद को पार कर रहे हैं। डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है। लेकिन बिहार में धरती के इन भगवानों ने पैसों के लिए हजारों महिलाओं के गर्भाशय बेवजह निकाल डाले। द पब्लिक एजेंडा ने अपने हालिया अंक में इस हैरतअंगे... Read more
clicks 257 View   Vote 0 Like   7:51am 17 Aug 2012 #
Blogger: ranjit
                   1विश्व का नक्शा बहुत पेचीदा हैआड़ी-तिरछी  रेखाओं की "ओझरी" है दुनियाएटलस पर छड़ी रखकर बताया था विद्यालय के "मास्साब" ने यह अमेरिका और यहां रहा सीरिया कांगो, सोमालिया,वाशिंगटन,जेनेवा से वियतनाम तक देश-देश, दरिया-दरियासमंदर से ज्वालामुखी तकघूमती थी ''मास्स... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   7:58am 16 Aug 2012 #Kavita
Blogger: ranjit
नेपाल की समकालीन राजनीति में बाबू राम भट्टराइ शायद अकेले नेता हैं, जो जमीनी हकीकत को समझते हैं। अन्य नेपाली माओवादी नेताओं की तरह भट्टराइ किसी यूटोपिया में नहीं जीते। नेपाल-भारत के संबंधों पर वे दूसरे नेताओं की तरह अपनी जनता को गुमराह नहीं करते। आज जब नेपाल के तमाम बड़... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   9:57am 13 Aug 2012 #
Blogger: ranjit
नेपाल की समकालीन राजनीति में बाबू राम भट्टराइ शायद अकेले नेता हैं, जो जमीनी हकीकत को समझते हैं। अन्य नेपाली माओवादी नेताओं की तरह भट्टराइ किसी यूटोपिया में नहीं जीते। नेपाल-भारत के संबंधों पर वे दूसरे नेताओं की तरह अपनी जनता को गुमराह नहीं करते। आज जब नेपाल के तमाम बड़... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   9:57am 13 Aug 2012 #
Blogger: ranjit
नेपाल की समकालीन राजनीति में बाबू राम भट्टराइ शायद अकेले नेता हैं, जो जमीनी हकीकत को समझते हैं। अन्य नेपाली माओवादी नेताओं की तरह भट्टराइ किसी यूटोपिया में नहीं जीते। नेपाल-भारत के संबंधों पर वे दूसरे नेताओं की तरह अपनी जनता को गुमराह नहीं करते। आज जब नेपाल के तमाम बड़... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   9:57am 13 Aug 2012 #
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