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Blog: Sourabh Yadav

Blogger: Sorabh Yadav
झूठी बुलंदियों का धुँआ पार कर के आक़द नापना है मेरा तो छत से उतर के आइस पार मुंतज़िर हैं तेरी खुश-नसीबियाँलेकिन ये शर्त है कि नदी पार कर के आकुछ दूर मैं भी दोशे-हवा पर सफर करूँकुछ दूर तू भी खाक की सुरत बिखर के आमैं धूल में अटा हूँ मगर तुझको क्या हुआआईना देख जा ज़रा घर जा सँ... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   9:29am 27 Oct 2012 #
Blogger: Sorabh Yadav
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए।जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए।जिसकी ख़ुशबू से महक जाय पड़ोसी का भी घरफूल इस क़िस्म का हर सिम्त खिलाया जाए।आग बहती है यहाँ गंगा में झेलम में भी कोई बतलाए कहाँ जाके नहाया जाए।प्यार का ख़ून हुआ क्यों ये समझने के लिए हर अँधेरे को उजाले मे... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   12:28pm 13 Sep 2012 #
Blogger: Sorabh Yadav
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए। जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए। जिसकी ख़ुशबू से महक जाय पड़ोसी का भी घर फूल इस क़िस्म का हर सिम्त खिलाया जाए। आग बहती है यहाँ गंगा में झेलम में भी कोई बतलाए कहाँ जाके नहाया जाए। प्यार का ख़ून हुआ क्यों ये समझने के लिए हर अँधेरे को उजाल... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   12:28pm 13 Sep 2012 #
Blogger: Sorabh Yadav
मेरा गीत चाँद है ना चाँदनीन किसी के प्यार की है रागिनीहंसी भी नही है माफ कीजियेखुशी भी नही है माफ कीजियेशब्द - चित्र हूँ मैं वर्तमान काआइना हूँ चोट के निशान कामै धधकते आज की जुबान हूँमरते लोकतन्त्र का बयान हूँकोइ न डराए हमे कुर्सी के गुमान सेऔर कोइ खेले नही कलम के स्वाभ... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   9:43am 13 Aug 2012 #
Blogger: Sorabh Yadav
क्या खोया, क्या पाया जग मेंमिलते और बिछुड़ते पग  मेंमुझे किसी से नहीं शिकायतयद्यपि छला गया पग-पग मेंएक दृष्टि बीती पर डालें, यादों की पोटली टटोलें!पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानीजीवन एक अनन्त कहानीपर तन की अपनी सीमाएँयद्यपि सौ शरदों की वाणीइतना काफ़ी है अंतिम दस्तक पर, खुद ... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   8:36am 24 Feb 2012 #अटल बिहारी वाजपेयी
Blogger: Sorabh Yadav
हर गाम पे हुशियार बनारस की गली मेंफ़ितने भी हैं बेदार बनारस की गली मेंऐसा भी है बाज़ार बनारस की गली मेंबिक जाएँ ख़रीदार बनारस की गली मेंहुशियारी से रहना नहीं आता जिन्हें इस पारहो जाते हैं उस पार बनारस की गली मेंसड़कों पर दिखाओगे अगर अपनी रईसीलुट जाओगे सरकार, बनारस की ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   4:44pm 12 Feb 2012 #najeer banarasi
Blogger: Sorabh Yadav
दुखों की स्याहियों के बीचअपनी ज़िंदगी ऐसीकि जैसे सोख़्ता हो।जनम से मृत्यु तक कीयह सड़क लंबीभरी है धूल से हीयहाँ हर साँस की दुलहिनबिंधी है शूल से हीअँधेरी खाइयों के बीचअपनी ज़िंदगी ऐसीकि ज्यों ख़त लापता हो।हमारा हर दिवस रोटीजिसे भूखे क्षणों नेखा लिया हैहमारी रात है... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   11:09am 28 Jan 2012 #
Blogger: Sorabh Yadav
तुम्‍हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबीहैमगर ये आँकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी हैउधर जमहूरियत का ढोल पीटे जा रहे हैं वोइधर परदे के पीछे बर्बरीयत है, नवाबी हैलगी है होड़-सी देखो अमीरी औ' गरीबी मेंये गांधीवाद के ढाँचे की बुनियादी खराबी हैतुम्‍हारी मेज चाँदी की तुम्‍... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   12:43pm 8 Jan 2012 #hindi kavita
Blogger: Sorabh Yadav
काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास मेंउतरा है रामराज विधायक निवास मेंपक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैतइतना असर है ख़ादी के उजले लिबास मेंआजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरहजो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश मेंपैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा देंसंसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास म... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   8:30am 3 Jan 2012 #काजू भुने
Blogger: Sorabh Yadav
ये लफ्ज़ आईने हैं मत इन्हें उछाल के चल अदब की राह मिली है तो देखभाल के चल कहे जो तुझसे उसे सुन, अमल भी कर उस पर ग़ज़ल की बात है उसको न ऐसे टाल के चल सभी के काम में आएंगे वक्त पड़ने पर तू अपने सारे तजुर्बे ग़ज़ल में ढाल के चल मिली है ज़िन्दगी तुझको इसी ही मकसद से संभाल खुद क... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   10:22am 14 Nov 2011 #कुँअर बेचैन
Blogger: Sorabh Yadav
किताबें झाँकती है बंद अलमारी के शीशों से बड़ी हसरत से तकती है महीनों अब मुलाक़ातें नही होती जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थी अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के परदे पर बड़ी बैचेन रहती है किताबें उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है जो ग़ज़लें वो सुनाती थी कि जिन... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   6:12am 10 Nov 2011 #गुलज़ार
Blogger: Sorabh Yadav
अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मेरी तन्हाई की कौन सियाही घोल रहा था वक़्त के बहते दरिया में मैंने आँख झुकी देखी है आज किसी हरजाई की वस्ल की रात न जाने क्यूँ इसरार था उनको जाने पर वक़्त से पहले डूब गए तारों ने बड़ी दानाई की उड़ते... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   11:51am 9 Nov 2011 #qateel shifai
Blogger: Sorabh Yadav
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोशिश ह... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   10:11am 8 Nov 2011 #सौरभ यादव
Blogger: Sorabh Yadav
क्या सच है, क्या शिव, क्या सुंदर? शव का अर्चन, शिव का वर्जन, कहूँ विसंगति या रूपांतर?          वैभव दूना, अंतर सूना, कहूँ प्रगति या प्रस्थलांतर? ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   10:03am 8 Nov 2011 #सौरभ यादव
Blogger: Sorabh Yadav
अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।। सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर। छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा।। लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे। उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़ निज प्यारा।। बरसाती आँखों के ब... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   5:10pm 2 Nov 2011 #sahitya
Blogger: Sorabh Yadav
मुझ से चाँद कहा करता है-- चोट कड़ी है काल प्रबल की, उसकी मुस्कानों से हल्की, राजमहल कितने सपनों का पल में नित्य ढहा करता है| मुझ से चाँद कहा करता है-- तू तो है लघु मानव केवल, पृथ्वी-तल का वासी निर्बल, तारों का असमर्थ अश्रु भी नभ से नित्य बहा करता है। मुझ से चाँद कहा करता है-- तू अ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   11:25am 1 Nov 2011 #
Blogger: Sorabh Yadav
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद, आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है! उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता, और फिर बेचैन हो जगता, न सोता है। जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ? मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते; और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी चाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   12:54pm 17 Sep 2011 #
Blogger: Sorabh Yadav
जला अस्थियां बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल। कलम, आज उनकी जय बोल जो अगणित लघु दीप हमारे तूफानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल। कलम, आज उनकी जय बोल पीकर जिनकी लाल शिखाएं उगल रही सौ लपट दिश... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   12:47pm 17 Sep 2011 #
Blogger: Sorabh Yadav
समय की शिला पर मधुर चित्र कितनेकिसी ने बनाए, किसी ने मिटाए। किसी ने लिखी आँसुओं से कहानीकिसी ने पढ़ा  किन्तु दो बूंद पानीइसी में गए बीत दिन ज़िन्दगी केगई घुल जवानी, गई मिट निशानी।विकल सिन्धु के साध के मेघ कितनेधरा ने उठाए, गगन ने गिराए। शलभ ने शिखा को सदा ध्येय माना,किस... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   12:44pm 17 Sep 2011 #
Blogger: Sorabh Yadav
जो फैलाने चले हैं मुल्क़ में दहशत धमाकों से वही छुपते फिरा करते हैं इक मुद्दत धमाकों से न ख़बरों में उछाल आया, न बाज़ारों में सूनापन न बिगड़ी मुल्क़ के माहौल की सेहत धमाकों से वही हल्ला, वही चीखें, वही ग़ुस्सा, वही नफ़रत हमें अब हो गई इस शोर की आदत, धमाकों से ये दहशतग़र्द अब इस बात स... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   12:12pm 11 Sep 2011 #
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