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Blogger: Pradeep Soni
कल चाँद का एक झूठ मैंने पकड़ लिया  कहता था तुझे छत पर रोज रात देखता है ! तुम भी उससे नज़रें मिलाये खड़ी रहती हो देर तक  और इसी बात पर कमबख्त! रात भर जलाता था ... कल चाँद का एक झूठ मैंने पकड़ लिया ! हुआ यूँ के कल धुप से मुलाक़ात हुई, इत्तेफाकन ! जाने क्यों मेरे झरोखे से झाँक रही... Read more
clicks 418 View   Vote 1 Like   4:08am 2 Sep 2012 #lier
Blogger: Pradeep Soni
एक तो 'तुम' हो और एक... 'मेरे मन' में तुम हो  तुम हो जीवंत, कुछ सोचती-विचारती-स्वीकारती  मेरे मन में तुम हो बिन कहे समझती-ह्रदय को झंकारती एक तो 'तुम' हो और एक... 'मेरे मन' में तुम हो  तुम हो देह की सीमाओं में बंधी भावनाओं को संभालती मेरे मन में तुम हो परिधियों से अनभिज्ञ उन्म... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   9:28am 26 Mar 2012 #hindi
Blogger: Pradeep Soni
कुछ बिखरा हुआ सन्नाटा है, कुछ सिमटा हुआ आसमान है दिन गुजरा है सिकुड़- सिकुड़ कर, रात होने को हलकान है  नहीं कुछ ख़ास नहीं, बस एक सर्दियों की शाम है जम गए सब राह-औ-दर, बेज़ारियों के बस निशान हैं  उम्मीदे वस्ल कहाँ जा दुबकी, ठिठुरते से सब अरमान हैं  नहीं कुछ ख़ास नहीं, बस एक स... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   10:18pm 8 Jan 2012 #hindi
Blogger: Pradeep Soni
बहुत गुमसुम सी है फिज़ा तेरी रुखसती के बाद कुछ  रुखी  सी  है  हवा  इस  बेरुख़ी  के  बाद   अबके जो  जाना  हो तो,  बहारें  छोड़ती  जाना परेशां हो के तड़पती  है शाम फुरसती के बाद  इस बार जो जाओ तो ज़रा देखती जाना  कितने बेजान हो जाते है लफ्ज़ शायरी के बाद  पैगाम-ए-दीदार-ए-य... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   11:27pm 21 Sep 2011 #hindi
Blogger: Pradeep Soni
--------बहुत दिनों बाद लिखी गयी ये रचना मित्रता दिवस पर एक मित्र की मुस्कान के नाम-------- मुझे पता है ! तुम केवल मुस्कान नहीं सागर की ख़ामोशी हो, बस लहरों का गान नहीं अनंत का एकाकीपन हो, सिर्फ आसमान नहीं पाञ्चजन्य का नाद हो, केवल वंशी की तान नहीं नहीं! तुम केवल मुस्कान न... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:16pm 9 Aug 2011 #shubhada
Blogger: Pradeep Soni
                     जब मैंने कहा कि .... आसमां में बादल के टुकड़े कितने भले हैं  वल्लरियाँ मिल रहीं पेड़ों से कैसे गले हैं  चिड़ियों के चहकनें में कितनी बाते छुपी हैं  शाम को घर लौटते पक्षी कितने सुखी हैं  तुम समझीं नहीं....ये सब तुम्हारे बारे में ही था                      जब मैंन... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   2:07pm 25 Apr 2011 #hindi
Blogger: Pradeep Soni
कुछ शब्द श्रृंगार और प्रणय को समर्पित... मेरी आतुरता का आज दो प्रत्युत्तर प्रिये ! विकलता को विरक्तियों में मिल जाने दो  पलकों के बोझ से मुंद जाने दो नयन प्रिये ! भावनाओं को अभिव्यक्तियाँ बन जाने दो वेणी की कारा से केश करो मुक्त प्रिये ! वर्जनाओं को प्रणय में विल... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   1:23am 7 Feb 2011 #प्रणय
Blogger: Pradeep Soni
(आज कुछ शेर दिलजलों के नाम ... इश्क ने दी थी इनके दरवाजे पे भी दस्तक ...पर ये वक़्त पर चाबी नहीं खोज पाए शायद... अब इन्हें यकीन है कि इस ताले कि कोई चाबी ही नहीं और खुद को दीवारों में कैद किये हुए हैं ! इश्क को दर्द का पर्याय इन्ही ने बताया होगा... कुछ भी हो इन्हें देख कर मुहब्बत ग... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   1:25am 30 Jan 2011 #one sided love
Blogger: Pradeep Soni
आती जाती है तेरी याद मेरे पास अक्सर  दरिया-ए-अश्क बुझाता है फिर ये प्यास अक्सर  रात पिघलती है और आँखों से बही जाती है... कशिश जो थी तेरे इश्क की ,क्या थी-ना थी  सब धुल सा गया अश्क़ थे कुछ यूँ बरसे ... कसमसाहट मेरी बन, ये ज़ख्म दिए जाती है ... मुड़े थे तेरी ज़ानिब यूँ फ़िर... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   10:57am 31 Dec 2010 #दरिया-ए-अश्क
Blogger: Pradeep Soni
छत पर देखा बैठें हैं वो उदासी लपेटे देख कर उन्हें मुस्करानें को जी चाहता है  अब भी ओढ़े है चेहरे पे उस पल को वो मानो वक़्त गुजर जाये,पर लम्हा ठहर जाता है चेहरे से अपने गर्द को हटाते नहीं और  कहतें हैं धुआं धुआं सा 'सब' नजर आता है  काँटों पर पड़ा था कभी पग उनका  हर फ़... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   8:01pm 21 Oct 2010 #सब
Blogger: Pradeep Soni
क्या हुआ मुझे,मैं फिर इस ओर मुड़ गया रास्ता जाना-पहचाना है, पर - तेरी गलियों को मैं समझ नहीं सकता... क्यों ऐसा लगा अगले मोड़ पे तुम हो तुम्हारी ही आहट थी - वो आवाज मैं भूल तो नहीं सकता ... मैं बढ़ चला उस ओर अनजाने  आकर्षित था मैं, पर - यूँ ही मुझे कुछ खींच तो नहीं सकता ... न... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   9:10pm 19 Sep 2010 #poem
Blogger: Pradeep Soni
तुम पास होती ... साथ होती, तो तुम्हारे बारे में सोचता ! अब इतनी दूर हो तुम के, बस! सोच कर रह जाता हूँ ... तुम सामने होती ... मुझे सुनती, तो कह देता वह बात ! अब इधर उधर की ही , बस! पूछ कर रह जाता हूँ ... तुम पलटती ... मुझे देखती, तो मैं भी मुस्कुरा देता ! अब तुम गुजर जाती हो और, बस! घूर... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   4:47pm 20 Jul 2010 #hindi
Blogger: Pradeep Soni
वो सपने ही क्या ,जिन्हें तू जागे और भुला दे .... सपनें हो तो ऐसे हों ,जो तेरी नींदों को उड़ा दें .... झलकें जो हरेक शह में ,हर एक अंदाज में तेरे .... उठें एक टीस बनके और मन को तेरे हिला दें .... जिन्हें पाना ही मकसद हो ,जिन्हें जीना ही तमन्ना .... कुछ बात हो ऐसी के ,तू अपनी हस... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   7:41am 18 Jun 2010 #सपने
Blogger: Pradeep Soni
जैसे भी हो यार पतंगे ,उड़ सकते हो तुम .... जलती फड़कती शम्माओं से भिड़ सकते हो तुम.... लौ का कोई दोष नहीं है ,उसकी फ़ितरत ही कातिल है .... कातिलों से भी मगर एक तरफ़ा प्यार कर सकते हो तुम.... पंछियों की सी आवाज़ नहीं, उनसी ऊँची परवाज नहीं ... अपनी गुंजन से फिर भी हलचल कर सकते हो तु... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   2:11pm 12 Jun 2010 #यार पतंगे
clicks 118 View   Vote 0 Like   12:00am 1 Jan 1970 #
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