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Tag: vastu

Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
खिड़कीखिड़कीऐसीहोयजो, ऊँचीएकसमान।समानदरवाजेरहे, दर-दरहोसम्मान।।दर-दरहोसम्मान, आयकेआएंसाधन।बिनाकमायादौड़, आएकरोड़ोंकाधन।।कह‘वाणी’कविराज, रखअच्छेसमयखिड़की।सुन्दरपड़ोसिनसे, बातेंकरावेखिड़की।।शब्दार्थ: साधन= स्रोतभावार्थ:  खिड़कियोंकीऊँचाइयोंमेंअंतररखदियात... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   8:19am 17 Mar 2020 #vastu
Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
दक्षिण-पश्चिम रोड़दक्षिण-पश्चिम रोड़ है, है मालिक श्रीराम । जीवन साधारण चले, सीधा-सादा काम ।। सीधा-सादा काम, मिले वहां दाल-रोटी। खीर-पूड़ी के ख्वाब, रहेगी सेहत मोटी।। कह ‘वाणी’ कविराज, आय ना संकट के क्षण। नहीं चढ़ाव-उतार, ठीक-ठाक रहे दक्षिण ।।शब्दार्थ:ख्वाब = स्वप्न, सेह... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   11:56am 9 Mar 2020 #vastu
Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
रचो कमरा नैऋतकाम करे श्रीमानजी, रख दिल में ईमान । ले पैसा मेहनत का, सब जाने भगवान ।। सब जाने भगवान, खाय ना फूटी कौड़ी । जीवन बीता जाय, मिली ना इज्जत थोड़ी ।। कह ‘वाणी’ कविराज, बिन अपराध धरे दाम । रचो कमरा नैऋत,बिन कहे होय सब काम ।। शब्दार्थ: कौड़ी = अत्यल्प राशि, नैऋत = पश्चिम-... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   7:01am 6 Mar 2020 #vastu
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श्रेष्ठतम् मकानचार तरफ ओपन रहे, वह श्रेष्ठतम् मकान । जगह छोड़ते समय तो, निकले सबकी जान ।। निकले सबकी जान, जान को यूँ समझाले । हवा रोशनी आय, भवन अमृत के प्याले ।। कह ‘वाणी’ कविराज, जहां अंधेर हर तरफ । बच्चे हो बीमार, घर में रोय चार तरफ ।।शब्दार्थ:ओपन = खुला, श्रेष्ठतम् = सबसे ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   6:54am 6 Mar 2020 #vastu
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गली-गलीगली-गली मतलब बड़ा, नैऋत ऊँची जाय । जावे ईशान ढ़लती, ढल-ढल सिक्का आय ।। ढल-ढल सिक्का आय, हो नव नंद का वासा । बजावे रोज-रोज, ढोल तन्दूरा ताशा ।। कह ‘वाणी’ कविराज, गलियाँ भी देखना तुम । फिर बनाना मकान, या फिरोगली-गली तुम ।।शब्दार्थ:नैऋत्य = पश्चिम-दक्षिण भाग, ढल-ढल सिक्का ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   6:36am 6 Mar 2020 #vastu
Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
गहरी नींवखोद नींव तुम जब कहो, बैठो छाता तान । आय गाय के सिंग तो, आप हो भाग्यवान ।। आप हो भाग्यवान, मिले पत्थर से सोना । सुख शांति देय ईंट,पड़े ना कुछ भी खोना ।। कह ‘वाणी’ कविराज,ताम्र-पात्र लावे मोद । स्वर्ण-घट आय चार, और गहरी नींव खोद ।शब्दार्थ:: ताम्र-पात्र = तांबे के घड़े बर... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   6:25am 6 Mar 2020 #vastu
Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
हाईटमंजिल पहली जब बने, ऊँची रख हाईट । दूजी में जो कम करे, जेब होय ना टाईट ।। जेब होय ना टाईट, गिनो खिड़की-दरवाजे । ऊपर तुम कम रखो, बजे नित्य नए बाजे ।। कह ‘वाणी’ कविराज, कहे कुछ भीमत कर फिल । सब जल-जल जल जाय, जाय मकान नौ मंजिल ।।शब्दार्थ:दूजी = दूसरी, बाजे = वाद्य-यंत्र, फिल = किसी ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   8:27am 5 Mar 2020 #vastu
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घर के बीच कुआँघर के बीच कुआँ जहाँ, जल्दी देओ मूंद । फर्शी करदो तुम वहाँ, एक रहे ना बूंद ।। एक रहे ना बूंद, करो जहाँ पूजा-पाठ । टैंक खोदो ऐसा, ज्यूँ साईकिल-मरगाट ।। कह ‘वाणी’ कविराज, जो नैऋत्य कोण रचे । ओवर-हेड टंकी, सदा सुखी रहे घर के ।।शब्दार्थ:मूंद = किसी खड्डे को भरना, रचे = न... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   8:17am 5 Mar 2020 #vastu
Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
पानी के टैंकरच पानी के टैंक को, ईशान कोण जाय । मान आपका यूँ बढ़े, लक्ष्मी दौड़ी आय ॥ लक्ष्मी दौड़ी आय, टैंक रखना विषम नाप। गहरा जितना होय, होय उतने धनी आप॥ कह'वाणी'कविराज, आप राजा वह रानी। भरे दासी पानी, होंगे न आप पानी-पानी॥शब्दार्थ:ईशान = भवन के पूर्व-उत्तर का भाग, विषम ना... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   8:09am 5 Mar 2020 #vastu
Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
कर्ज करे जब खेलकोड़े मन पर यूँ पड़े, कर्ज करे जब खेल । घाणी चलीन बैल की, निकल गया सब तेल । निकल गया सब तेल, लगे हो शनिमहाराज । खुश रहे वर्षों तक, वे सब भारी नाराज ।। कह ‘वाणी’ कविराज, आय सब दौड़े-दौड़े । पूछते हाथ जोड़, रहे अब कितने कोड़े ।।शब्दार्थ: कोड़े = चाबुक, घाणी = कोल्हूभ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   6:11am 5 Mar 2020 #vastu
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शेरमुखी भूमिशेरमुखी जब प्लाट हो, हो पश्चिम का रोड़ । बढ़े खूब बिजनिस वहाँ, आवे ग्राहक दौड़ । आवे ग्राहक दौड़, भरी जेब हाथ थैला । जेब होवे खाली, आधा ले जाय थैला ॥ कह 'वाणी'कविराज, सदा रहोगे तुम सुखी । करे उधार निहाल, भूमि ले लो शेरमुखी ॥शब्दार्थ:बिजनिस = व्यापार, निहाल = बहुत... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   5:12am 5 Mar 2020 #vastu
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जीनाउनका मकान यूँ बना, उत्तर जीना देय । नीचे डब्ल्यू,सी, बनी, बाथरूम भी देय ।। बाथरूम भी देय, गई लक्ष्मी छोड़ रूम । ढूंढ रहे श्रीमान, गली-गली में अब घूम ।। कह वाणी’ कविराज,बिना मित्र नहीं जीना । जीना बदल जीना, जीना सिखाय जीना ।।शब्दार्थ:डब्ल्यू,सी, = लेट्रिन, जीना = सीढ़ी/जीव... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   11:45am 4 Mar 2020 #vastu
Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
सौ गुणी आपकी आयआय आपकी जब घटे, घट-घट में दुख होय । खुल्लम-खुल्ला सब हँसे, छिप-छिप कर सब रोय ।। छिप-छिप कर सब रोय, करो मिल-जुल एक काम । दौड़े धन धन्नाट, ले तेरे घर विश्राम ।। कह ‘वाणी’ कविराज, जल की टंकियां बनाय । जहाँ नैऋत्य कोण, सौ गुणी आपकी आय ।।शब्दार्थ: नैऋत्य = पश्चिम = दक्ष... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   11:25am 4 Mar 2020 #vastu
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कर्जाकर्जा-कर्जा क्या करे, क्यों न करे यह काम । उत्तर दिशा दिवार के, लगाय थोड़े दाम ।। लगाय थोड़े दाम, गिरा कर कर दो छोटी । उत्तर में हो रोड़, लगा दो खिड़की मोटी ।। कह ‘वाणी’ कविराज, ईशान में दरवाजा । दिखे न पाँव-निशान, ऐसा भगे वह कर्जा ।।शब्दार्थ: दाम = खर्चाध्धन, मोटी = बड़ीभ... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   11:15am 4 Mar 2020 #vastu
Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
पैसापैसा-पैसा क्या करे, करले ऐसा काम । जहाँ तिजोरी तुम रखो,लो कुबेर का नाम । लो कुबेर का नाम, न रखते कोई देखे । ऐसे खिड़की द्वार, विद्व-जन के ही देखे ।। कह ‘वाणी’ कविराज, कभी था ऐसा-वैसा । पूजे सौ-सौ गाँव, बढ़ा ऐसा यह पैसा ।।शब्दार्थ: विद्व-जन = विद्वान, पूजे = खूब सम्मान दभावार... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   11:09am 4 Mar 2020 #vastu
Blogger: Amrit "wani" at भारतीय वास्त...
भागे कर्जा कर्जा हो जब आपके, ऐसा करना आप । ढाल बढ़ा दो भूमि का, ईशान कोण माप ।। ईशान कोण माप, करो और अधिक नीचे । नैऋत करो ऊँचा, उतारे कर्जा नीचे ।। कह ‘वाणी’ कविराज, भवन ले पहला दर्जा । डरता-डरता चार, दिनों में भागे कर्जा ।।शब्दार्थ:ढाल = ढलान, दर्जा = श्रेणी भावार्थ:जीवन में क... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   8:54am 4 Mar 2020 #vastu
Blogger: DAYANANDA SHASTRI at विनायक वास्त...
जानिए की किस मन्त्र के जाप से किस दिशा का होगा वास्तु दोष( प्रभाव )दूर या कम---आजकल शायद ही कोई ऐसा घर हो जो वास्तु दोष से मुक्त हो। वास्तु दोष का प्रभाव कई बार देर से होता है तो कई बार इसका प्रभाव शीघ्र असर दिखने लगता है।पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार इसका कारण यह है कि स... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   2:53am 27 Sep 2015 #vastu
Blogger: gajadhar dwivedi at धर्म चक्र...
गृह निर्माण से पूर्व दिशा-विदिशाओं का ज्ञान एवं इसका शोधन करना अत्यंत आवश्यक है। दिशा विहीन निर्माण से मनुष्य जीवन भर भ्रमित होकर दु:ख, कष्टादि का भागी होता है। वास्तु शास्त्र में दिशा ज्ञान हेतु सिद्धान्त ज्योतिष के तहत दिक्साधन की प्रक्रिया पूर्वकाल में विभिन्न र... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   12:43am 31 Mar 2013 #vastu
Blogger: gajadhar dwivedi at धर्म चक्र...
हमारे पूर्व आचार्यों, ऋषि-मुनियों ने गंभीर अध्ययन व अनुसंधान के द्वारा वास योग्य भूमि के विषय में उत्कृष्ट ज्ञान प्राप्त कर जनकल्याण की भावना से वास्तुशास्त्र विषय ज्ञानराशि को प्रदान किया है। इस संसार में मनुष्य या मनुष्येत्तर प्राणी अथवा कोई भी पदार्थ पंचतत्व के... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   2:55am 28 Feb 2013 #vastu
Blogger: gajadhar dwivedi at धर्म चक्र...
किसी भी नगर या ग्राम में नए स्थान पर घर बनाने के कार्य का नाम वास्तु (गृहारंभ) है। इसे ही भवन की नींव कहा जाता है। इसी के आधार पर झोपड़ी से लेकर ऊंची-ऊंची अट्टालिकाओं का निर्माण होता है। इसी प्रारंभिक कार्य के विषय में जो कर्तव्य होते हैं उसे वास्तु विचार कहा जाता है। भविष... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   3:05am 25 Jan 2013 #vastu
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