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Tag: talks

Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
एक ऐसी दुनिया जहां हर कोई नौजवानों की बातें करता है, वहां एक नौजवान बूढ़ों की बात कर रहा है.गूगल के गुड़गांव ऑफिस पहुंचने के बाद एक अलग तरह की संस्कृति का पता चला। कार्यस्थल और उससे जुड़े लोगों की सोच जो मेरे जैसे व्यक्ति के लिए शोध का विषय हो सकती है। एक दशक से अधिक समय बीत ग... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   1:57pm 5 Apr 2017 #talks
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वह उमंग और बूढ़ों में भी उपजने वाली तरंग आज के मशीनी युग में कहां गुम हो गयी.दीपावली और होली दो ऐसे पर्व हैं जो भारतीय संस्कृति के रोम-रोम में रच बस गये हैं और अनंतकाल से परंपरागत और उत्साह के साथ मनाये जाते हैं। होली के बारे में भी देश में कई मान्यतायें और रुढ़ियां प्रचलित... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   11:02am 13 Mar 2017 #talks
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हर कोई उड़ना चाहता है। सभी को लगता है, जैसे जिंदगी वे ऐसे बितायेंगे या उन्हें वह सब हासिल होगा, जो उन्होंने कभी चाहा था या चाहते हैं। लेकिन जिंदगी भी कमाल की है, कुछ के पंख आसमान में इतने फैल जाते हैं कि उनके लिए जिंदगी छोटी पड़ जाती है, जबकि कुछ पंख फैलाने में ही जिंदगी बिता ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   2:19pm 19 Aug 2016 #talks
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मैं उसे शुरुआत कह सकता हूं जिस वजह से मैंने नौकरीपेशा जीवन के अहम पहलुओं को करीब से देखा। ऐसे मौके प्रायः कम होते हैं जब आप नये दौर के लिए तैयार हो रहे होते हैं। मैं उस दिन दुविधा में भी था, और दूसरी तरफ खुश भी, क्योंकि मेरा एक मित्र मनीष भी उसी जगह अपने करियर का प्रारंभ कर ... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   9:42am 29 Apr 2016 #talks
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मोगली को दूरदर्शन पर देखने को मैं और मेरा भाई बेताब रहते थे। पड़ोस के कई दोस्त भी उस रोमांच में शरीक हो जाते थे। मनू और विनू तो पागल थे। टीवी देखते हुए अकसर सीढ़ियां चढ़ते हुए विनू फिसल जाता था। पता नहीं वह ऐन वक्त पर ही क्यों पहुंचता था। इसलिए उसे घर से तेज दौड़कर आना पड़ता था... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   3:57pm 2 Apr 2016 #talks
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किताबों को खरीदने की सोच रहा हूं. बहुत समय से कोई उपन्यास नहीं पढ़ा. किताबें पढ़ने के बाद आप खुलापन महसूस कर सकते हैं. मैं नहीं जानता कि हर किसी के साथ ऐसा होता होगा, लेकिन मेरे साथ ऐसा ही है. किताबों की एक नई शेल्फ बनवाने की मैंने सोच रखी है. उसका डिजाइन मेरे दिमाग में घूम रहा... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   2:00pm 22 Oct 2015 #talks
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विचारों की गहरी नदी बहती रहती है। सिलसिला थमता नहीं। विचार ऐसे ही होते हैं। यह उनकी प्रकृति है। मैं खुद से कई बार ढेरों सवाल कर बैठता हूं। सवाल जिनके जबाव मैं तलाश नहीं पाता, वे फिर मेरे जहन में उठते हैं, उबलते हैं। हां, बार-बार, अनेक बार ऐसा होता है क्योंकि यह प्रक्रिया उ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   4:11pm 8 Apr 2015 #talks
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ख्वाहिशों के दरवाज़े बंद हैं, खुलने का नाम नहीं लेते। यह जिंदगी अजीब है। कल कुछ, आज कुछ। शायद परछाइयां नये गीत गा रही हैं। &... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   4:22pm 30 Jan 2015 #talks
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नाम किसी का कुछ भी हो सकता है। बचपन में जो नाम माता-पिता ने रख दिया उसे कई लोगों को जिंदगी भर ढोना पड़ता है। बाद में कई लोग अê... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   11:19am 28 Jan 2015 #talks
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वे चले गये और बिना बताये उनकी आंख हमेशा के लिये लग गयी। पिछले पचास साल से टाइम्स आफ इंडिया के लिये कार्टून बनाने वाले आर.क&#... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:21pm 26 Jan 2015 #talks
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साधारण दृष्टि से देखा जाय तो दोनों में कोई समानता नजर नहीं आती पर अधिक ध्यान से सोचने में जवाब सकारात्मक ही है। जैसे-जैसे नारी स्वतंत्र हुई है और घर के सुरक्षापूर्ण माहौल से बाहर कदम बढ़ाया है उसे तमाम चुनौतियों से निपटना पड़ा चाहें वो शिक्षा के लिये स्कूल या कालिज या ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   8:30am 30 Dec 2014 #talks
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मुझे किसी ने बताया कि गीत-संगीत से आप उदास मन को खुश कर सकते हैं। यह मैंने बहुत बार सुना है, लेकिन इसकी आजमाइश या सीधा प्रसा... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   3:46pm 3 Dec 2014 #talks
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कहा तो यह जाता है कि अशिक्षित लोग ढोंगी और पाखंडी साधु-संतों के चंगुल में पफंस जाते हैं लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं। आज के वैज्ञानिक युग में टीवी और मीडिया के बहुत से साधनों का जितना प्रसार हुआ है उसी के साथ पोंगा-पंथी धार्मिक ढकोसले बाजी का प्रचार प्रसार इतना बढ़ गया... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   11:31am 24 Nov 2014 #talks
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"नदी का बहता पानी नीर है।"उसके वाक्य को मैंने ध्यान से सुना। वह इतना कहकर चला गया। मैंने देखा नदी का बहाव शांत था। वहां लहर&... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   8:25am 19 Nov 2014 #talks
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मौसम की करवट हैरान नहीं करती। समय के साथ उसमें बदलाव जायज़ है। सर्दी का अहसास हो रहा है, बल्कि सर्दी ही हो रही है। मैं आजकल ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   8:11am 17 Nov 2014 #talks
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
मैंने सुना था कि लोग दूसरों की पोस्ट चुरा लेते हैं और अपने ब्लॉग पर चिपका देते हैं। मैं गूगल पर खोज रहा था कि मेरी नजर एक लिंक पर पड़ी। उसपर क्लिक किया तो हैरान रह गया। वह एक ब्लॉग है, जिसपर मेरी एक पोस्ट को मय चित्र लगाया हुआ है। उस पोस्ट को उस ब्लॉगर ने अपने नाम से लिखा हुआ ... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   4:03pm 15 Sep 2014 #talks
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
मैंने सुना था कि लोग दूसरों की पोस्ट चुरा लेते हैं और अपने ब्लॉग पर चिपका देते हैं। मैं गूगल पर खोज रहा था कि मेरी नजर एक लिंक पर पड़ी। उसपर क्लिक किया तो हैरान रह गया। वह एक ब्लॉग है, जिसपर मेरी एक पोस्ट को मय चित्र लगाया हुआ है। उस पोस्ट को उस ब्लॉगर ने अपने नाम से लिखा हुआ ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   4:03pm 15 Sep 2014 #talks
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चकोतरा का पौधा पेड़ की शक्ल ले चुका है। अभी उसकी स्थिति फलों को संभालने की पूरी तरह नहीं, लेकिन वह कोशिश कर रहा है। हमने उसे करीब के आम के पेड़ से बांध कर गिरने से बचाया हुआ है। आम का पेड़ दुर्लभ जाति का है जिसपर अभी फल आने बाकी हैं। चकोतरा पिछले साल से फल दे रहा है। फल पिछले सा... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   8:26am 22 Aug 2014 #talks
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रास्ते में मेरी मुलाकात एक लड़के से हुई जो मेरे पुराने टीचर का शिष्य है। उसने बताया कि वे अब काफी कमजोर हो गये हैं। लेकिन &#... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   3:49pm 19 Aug 2014 #talks
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बरसाती मौसम का अपना आनंद है। गरमी से राहत मिली। पसीना नहीं आया। थकान भी मानो गायब रही। ऊपर से मौसम में ताजगी और ठंडक के का&#... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   11:41am 18 Jul 2014 #talks
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एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले बाॅलीबाॅल खेलने वाले मिल जायेंगे। युवा पूरे जोश में खेलते हैं इस खेल को। हाथों की शक्ति का प्रदर्शन बहुत अहम होता है। फुर्तीलापन भी महत्व रखता है। खेल के फायदे भी कम नहीं। शरीर को चुस्त-दुरुस्त करने का बेहतर तरीका है बाॅलीबाॅल। एक तरह से आप... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   11:29am 12 Jul 2014 #talks
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सूरज काफी तेज चमक रहा है। कमरे में मकड़ी के जाले साफ किए हैं। पंखें नीचे बैठकर गर्मी को मालूम करना कठिन है। घड़ी की टिक-टिक साफ सुनाई दे रही है। कहीं कौआ बोल रहा है। चिड़ियां तो खैर आसपास चहकती ही रहती हैं। पास के घर से बाल्टी के खटकने की आवाज आ रही है। शायद कोई अधेड़ महिला कपड़... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   4:04pm 7 Jul 2014 #talks
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मौसम फिर दगा दे गया। उसे हमने मना नहीं किया कि यहां सुहाना मत हो। अपने मन की करने की जैसे उसने कसम खाई थी। लगता है इंसानी आदतें उसमें कहीं से समा गयी हैं। शायद यही कारण है आजकल मौसम की "सेहत खराब"है।बादलों की उमड़घुमड़ से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी थी। उनकी गर्जन से ऐ... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   7:49am 7 Jul 2014 #talks
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डायरी पता नहीं कहा गयी। शायद कहीं गुमनामी की जिंदगी बशर कर रही है। जालों की सजावट उसपर हो गयी होगी। जिंदगी में मोहब्बत क... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   4:51pm 4 Jul 2014 #talks
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उसके नटखटपने के किस्से धीरे-धीरे मशहूर होते जा रहे हैं। वह अपनी आदत से बाज नहीं आने वाला। हालांकि उसने कोई औपचारिक तौर पर ऐलान नहीं किया वह अपनी शरारतें छोड़ देगा, मगर हमें लगता है कि एक दिन वह ऐसा जरुर करेगा। उसकी मां उसे बच्चा समझती है, लेकिन वह बड़ों को मात देता दिखाई ... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   4:00pm 2 Jul 2014 #talks
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