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Tag: poem of unity

Blogger: Sujit Kumar Lucky at  ...
इन राहों से कितने बिछड़े,जहाँ हर सुबह महफ़िल बनती थी,पूछते थे खबर हर यारों की, तेरे रंग मेरे रंग बादलों सी सजती,मन सपने बुनती संवरती..और फिर धुँधली सी परती !क्या में क्या तु, क्या कोसे किसको,तेरी नियत मेरी फिदरत..जाने कब कैसी किस्मत !लौट आना मेरी गली कभी,या मिल जाना किस मोड़ ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   7:01pm 11 Oct 2012 #poem of unity
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