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Tag: Life

Blogger: prakash jain at Prakash...
इन दिनों जब कोई हाल पूछता है, चुभता है, क्यों ये सवाल पूछता है झूठ ही कह भी दो,कुशलता चाहे लगता है मानो, 'क्यों है'पूछता है ऑनलाइन हर कोईखुशहाल ही दिखा, झाँका ज़िन्दगी में हर शख्स झुझता है मैं मेरे 'मैं'में रहूँ, तुम अपने 'मैं'में रहो, बुलबुला 'हम'का उछ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   11:32am 22 Jun 2019 #LIFE
Blogger: Sanjay Grover at saMVAD-JUNCTIon...
ग़ज़ल ज़िंदगी की जुस्तजू में ज़िंदगी बन जाढूंढ मत अब रोशनी, ख़ुद रोशनी बन जारोशनी में रोशनी का क्या सबब, ऐ दोस्त!जब अंधेरी रात आए, चांदनी बन जागर तक़ल्लुफ़ झूठ हैं तो छोड़ दे इनकोमैंने ये थोड़ी कहा, बेहूदगी बन जाहर तरफ़ चौराहों पे भटका हुआ इंसान-उसको अपनी-सी लगे, तू वो ग... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   10:03am 18 Feb 2019 #life
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
कॉलेज की सीढियां उतर रही थी, मेरे नीचे की सीढियों पर दो गर्भवती स्त्रियां थी- एक मेरे साथ की ही अध्यापिका थीं और दूसरी थी कॉलेज में काम करने वाली एक मजदूर औरत। एक सम्भल सम्भल कर उतर रही थी, तो दूसरी अपने सिर पर रखी मौरंग की बोरी को ज्यादा सम्भाल कर उतर रही थी या अपने गर्भ म... Read more
clicks 239 View   Vote 0 Like   2:41pm 21 Dec 2017 #life
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
लकड़ी से सहारेपगडंडी के किनारे किनारे धीरे धीरे चलतेवृद्ध सेटकराता है सत्रह अठारह साल कामोबाइल पर वयस्त मार्ड्न युवकबिखर जाती है लाठी और दूसरे हाथ में मजबूती से पकडीकुछ दवाइयांलडखडा जाते है पैरयुवक हल्का सा रुकता है उतारता है रेबन के सन ग्लास कट करता है कॉलकानों से ... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   1:24pm 27 Nov 2017 #life
Blogger: Dr. Kavita Vachaknavee at वागर्थ...
अमेरिका में 'हार्वी' : डूब-उबरने के दिन    - कविता वाचक्नवी यों तो चक्रवात और उसका ताण्डव समाप्त हो चुका है किन्तु किन्तु अभी... [[ This is a content summary only. Visit my website for full links, other content, and more! ]]... Read more
clicks 305 View   Vote 0 Like   10:23pm 4 Sep 2017 #Life
Blogger: Dr. Kavita Vachaknavee at वागर्थ...
महिलाओं के दोष : कविता वाचक्नवी  तीन वर्ष पहले (आज ही के दिन जब यह लेख लिखा गया था) एक तथाकथित लेखिका (म.ग.) के लेख... [[ This is a content summary only. Visit my website for full links, other content, and more! ]]... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   10:17pm 3 Feb 2017 #Life
Blogger: prakash jain at Prakash...
हम सब न जाने कितनी ही कहानियां, अनुभव, दर्द , चिंताएं आदि लिया फिरते हैं। जिसे किसीसे बांटना चाहते हैं, बताना चाहते हैं।  पर किसे? हर बात हर किसीसे तो नहीं कही जाती न ? आप कहेंगे किसी अपने से, पर अपने-अपनों में भी नाना प्रकार के भाव निकलते हैं (क्या सोचेंगे, क्या समझेंगे, क... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   4:02pm 25 Nov 2016 #LIFE
Blogger: vikram pratap at Lost Soul ...
Life has become aimless. No long term goal, nothing, just a boredom, going to work, coming back,  eating, sleeping then again same routine follows. I have tried to change, but not a single endeavor of mine has been converted into success.People remember only the success stories. They give example of them.I have tried but when you don't get what you want, a numbness, a lethargy, a passive attitude overpowers you  and you leave making further effort.Now I am not having any goal, Not a single dream, failure has made me a negative person and I have left any hope to be rise again.Somewhere I read: He who faces the more difficulties, the more hardship, he goes more higher in his life, bu... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   5:16pm 14 Nov 2016 #life
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at Nirantar's..........
One to oneOne to one is the way I likeThinking of someone elseBut face towards meIs what I dislikeInvolving heart with heartMingling mind with mindPassionately connecting Soul to soulLoving each otherIs my way of life?Dr.Rajendra Tela,NirantarLife,soul,heart,mind... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:38pm 2 Jan 2016 #Life
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at Nirantar's..........
Honesty========It is neither easyNor very difficultTo keep one’s Honesty intactEnd of the day It is the priceThat mattersIf one falls prey He is dishonestIf one does notHe remains honest Dr.Rajendra Tela,NirantarHonesty,life31-12-2015... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   7:00am 31 Dec 2015 #Life
Blogger: Sanjay Grover at saMVAD-JUNCTIon...
बहुत पुरानी एक ग़ज़लडूबता हूं न पार उतरता हूंआप पर एतबार करता हूंग़ैर की बेरुख़ी क़बूल मुझेदोस्तों की दया से डरता हूंजब भी लगती है ज़िंदगी बेरंगयूंही ग़ज़लों में रंग भरता हूंअपना ही सामना नहीं होताजब भी ख़ुदसे सवाल करता हूंकरके सब जोड़-भाग वो बोलामैं तो बस तुमसे प्य... Read more
clicks 412 View   Vote 0 Like   8:07am 25 Dec 2015 #life
Blogger: Mahesh Barmate at माही.......
पाँच पांडवों के बीच फँसीद्रौपदी सी हो गयी है ज़िन्दगी।किसका कब साथ निभाऊं कुछ समझ में नहीं आता।जहाँ देखूँ वहीँ पे मेरा अपना खड़ा होता है,पर किसके साथ कहाँ जाऊँ कुछ समझ में नहीं आता।मैंने तो चुना था बस एक कोठुकरा के जाने कितने अनेक कोफिर भी मिले साथ में और चारपाँच कश्तिय... Read more
clicks 239 View   Vote 0 Like   3:00am 17 Dec 2015 #life
Blogger: UDAYVIR SINGH at Zindagi Phir Bhi Hai || ज़िं...
क्यों ?जीवन एक खेल हैआशा-निराशा का मेल हैकभी खुशी हैहोठों पै हंसी है क्यों ?एक पर्दा भी है-झीना सापार उसके है गमों का समन्दरखौपनाक मंजरहम अकेलेनिज को धकेलेचले जा रहे हैंजीवन वन में क्यों ?चलना पड़ता हैनिकलना पड़ता हैखुशियों के डेरे सेआशा के सवेरे सेमजबूरी हैचाहत अधूर... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   5:28pm 2 Dec 2015 #Life
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
मार डालो साले को, मार डालो। भरी बाजार में देखते ही देखते चंद लोगो ने पीट पीट कर एक व्यक्ति को मार डाला। सबके देखते देखते वो लोग जो पीटने में सबसे आगे थे, भीड से निकल कर हवा की तरह गायब हो चुके थे। कुछ ही देर में बाजार का पूरा माहौल ही बदल गया था। एक जिंदा इन्सान अब लाश बन चुक... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   5:31am 26 Oct 2015 #life
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
किनारे पर खड़ा होकर जिंदगी की परछाईयों को निहार रहा हूं. बुढ़ापे में तो परछाईयां भी काटने को दौड़ती हैं -ऐसा सभी कहते सुने हैं. मैं भी थोड़ा हंस देता हूं, थोड़ा मुस्कान बिखेर देता हूं. झुर्रियों वाले चेहरे में सिलवटों में जगह है; रोशनी वहां सिमटी हुई है. उधेड़बुन तो बनी रहती है, ... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   5:48am 10 Sep 2015 #life
Blogger: Kajal Kumar at कथा कहानी...
वह स्‍कूल से नि‍कल कर कॉलेज आया तो उसकी ज़िंदगी में मानो पंख लग गए. नए दोस्त बने. कोई पूछने वाला नहीं, कोई बंदि‍श नहीं. जहां दि‍ल कि‍या वहां घूमे, जो चाहा सो कि‍या. देखते ही देखते तीन साल यूं ही बीत गए. सब ग्रेजुएट हो गए. कुछ नौकरि‍यों में चले गए कुछ आगे पढ़ने लगे. कुछ ने अपने ... Read more
clicks 395 View   Vote 0 Like   9:59pm 5 Jul 2015 #life
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
मौसम रुठा, देह थकान लिए,चीरती गर्मी का दानव,अट्टाहस जिंदगी का,मंद-मंद, मंथरता सेनींद सी पगडंडियों सेगुजरता बूढ़ा।चमड़ी झुलस गयी,हांफ रहा वह,रुका तो थमेगापैर नंगे ही सही,जलन सरसरी दौड़ा रहीतलबे से दिमाग तक।ठिकाना बना नहींपेड़ की ओट सहीहरियाली ठंडक ला रहीवहां सूखा हैकाया ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   12:29pm 3 Jun 2015 #life
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
सोच रहा जिंदगी कैसी है,क्या उड़ने वाले बादलों जैसी है,झोंका हवा का हो सकता है,आंधी-तूफान में कोई भी खो सकता है,अपनापन समेटे हुए लोग मिलेंगे,अनगिनत चेहरे कितना कुछ कहेंगे,अधूरा नहीं कोई ख्वाब यहां है,खुलकर जीने का जहां है,उम्र पड़ाव को पार करती दिख जायेगी,अंतिम सांस तक जिं... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   12:50pm 1 Jun 2015 #life
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
बुढ़ापे की कहानी हैरान कर देती है। यहां दशा ऐसी हो जाती है चीजें लगभग अपने हाथ में नहीं रहतीं। छड़ी का सहारा लिए जब उस वृद्ध व्यक्ति को मैंने देखा तो मेरे भीतर कुछ उथलपुथल हुई। मैं लंबी सोच में पड़ गया। सोचने लगा कि बुढ़ापा आखिर इतना निर्दयी क्यों है? बचपन में हम कितने मासूम ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   12:55pm 27 May 2015 #life
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
‘उम्र से मैंने बहुत सीखा है। वक्त के साथ मैं सीखती गयी। अनगिनत पड़ावों को पार किया और अनुभव ढेरों उपजाये।’ बूढ़ी काकी बोली।मैंने काकी से पूछा,‘बुढ़ापे की कभी ख्वाहिश थी?’काकी मुस्करायी। मेरी ओर देखा। आंखों को पूरी तरह खोलना चाहा, लेकिन वह नामुमकिन था। उसने धुंधली होती आ... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   4:02pm 21 May 2015 #life
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
जिंदगी की खुली किताब है,अक्षरों का बिखराव है,सजीवता का साथ है,उम्र का हिसाब है,मन बोल रहा,तन डोल रहा,कांपते हाथ बिना थके,कदम लड़खड़ाये बिना रुके,हिसाब मांग रही जिंदगी,ये कैसी बंदगी,क्यों बुढ़ापा है हैरान,क्यों इतना परेशान,लेकिन हौंसला रखता हूं,उम्र का स्वाद चखता हूं,विदाई ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   12:44pm 20 May 2015 #life
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
आइना सामने है। उसमें दिखता मैं, और चारों ओर गहरे काले घेरे। चेहरे पर अनेक आड़ी-तिरछी लकीरें चीख-चीख कर कहती हैं कि बूढ़े हो गये हो तुम। शरीर की तमाम कमजोरियां जैसे कम सुनाई देना, कम दिखाई देना यही बयां करते हैं। कुछ दूर चलते ही सांस फूलना, जल्दी थक जाना भी ये कहानी दोहराता ह... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   10:36am 13 May 2015 #life
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
उम्र कह रही है आराम के लिये,कुछ वक्त खुद को देने को,मैं समझ नहीं पा रहा खुद को,वक्त बड़ा या मैं,गाड़ी है जीवन किस्मत की,गति हí... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   1:39pm 6 May 2015 #life
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at Nirantar's..........
Positive ThoughtIf the thoughtIs positiveThe intent rightEvery new dayBecomesA good dayRemaining calmIn difficultiesCool in agonySmiling moreThan cryingMakes lifeEasy and rosyDr.Rajendra Tela,NirantarPositive thought,intent,life, 13-02-05-2015... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   12:56pm 2 May 2015 #Life
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
                                  अकेला चला हूं, अकेले चलूंगा।                   यूं ही ज़िंदगी के सफर में मिलूंगा।।कहां हो सकती है, खुदी की खबर हीबढ़ा पग दिया है, नयी है डगर भी।             ... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   12:28pm 2 May 2015 #life
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