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Tag: kavita

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   9:26pm 19 Nov 2019 #kavita
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at आपका ब्लॉग...
मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   9:19pm 19 Nov 2019 #kavita
Blogger: rishabh shukla at Mere Man Kee...
नमस्कार, स्वागत है आप सभी का यूट्यूब चैनल "मेरे मन की" पर| "मेरे मन की" में हम आपके लिए लाये हैं कवितायेँ , ग़ज़लें, कहानियां और शायरी| आज हम लेकर आये है कवि आनंद शिवहरे जी की सुन्दर कविता "सो जा नन्हे-मुन्हे सो जा"| आप अपनी रचनाओं का यहाँ प्रसारण करा सकते हैं और रचनाओं का आनंद ... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   11:10am 20 Jul 2018 #kavita
Blogger: अनामिका at कविता...
हर दर के दरवाज़ों की भी अपनी कहानी होती हैकहीं बूढ़े सिसकते मिलते है और कहीँ जवानी रोती हैआंगन-खिड़की है फिर भी दरवाज़ों का अपना खम हैकोई हाथ पसारे बाहर है कोई बाँह फैलाये अंदर हैहर दरवाजे के अंदर जाने कितनी जानें बसतीं हैंबच्चे बूढ़े और जवानों की खूब रवानी रहती  हैसूरत... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   2:57pm 22 Jul 2017 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
कहानियां ज़िन्दगी से शुरू होकर ज़िन्दगी पर ख़त्म होती हैं.खुशी के तारों की छांव में जिंदगी दो पल बदल रही,हवाओं की तरह मचलते हुए सितार सी बह रही,शांत, हिलौरे मारती हुई भी,उम्र की दास्तान जो सच है,अपने में सिमटी हुई और मुस्कान से भर रही,झुर्रियों का रौब नहीं, बेहिचक बढ़ रही,सुन... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   3:25am 6 Jun 2017 #kavita
Blogger: Amit Agarwal at Safarnaamaa... सफ़रना...
                                                            Image from Googleउम्र 68 वर्षख़ुदकीमोटीपेन्शनभी,उसकेकमाऊबेटोंनेउसेपेसमेकरलगवाया10 सालचलनेवाला25 सालवाला  नहीं,जानेक्यासोचकर.. पैसोंकीतोकोईकमी न थी!... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   5:50pm 17 Apr 2017 #kavita
Blogger: Amit Agarwal at Safarnaamaa... सफ़रना...
Image from Googleफफूँदलगी, फटीबोरीसेघुने, सीलेअनाजकीमानिंदटपकतीहैरातटिन-शेडपरनथमतीहै, नबीततीनसोनेदेती. साँय-साँयकरतादमाअस्थि-पंजरमेंसूखे-सलेटीस्तनोंपरस्याह-सफ़ेदधुएँकीलकीरेंबनती-मिटतीं.. रुको, ठहरो, देखोतोज़राCCU केमद्धमप्रकाशमेंनर्सऔरवॉर्डबॉयआलिंगनबद्ध!नाराज़मतहोओ... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   11:39am 22 Jan 2017 #kavita
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
लगा सब धर्मों का मेलाअनपढ़ों का रेलम पेलाअजान में है खिचाव भारीभजन में आत्मा दिल हारीबैठना , गिरिजा में चाहें ,आँख में जब आंसू आएं !मुहब्बत करना सिखलायें कतारें,  लंगर की प्यारे !सभी घर अपने से लागे,सब जगह वही प्यार इज़हार !फ़क़ीरों का अल्हड संसारहमारी सबसे यार... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   3:23am 28 Jul 2016 #kavita
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन' at अंजुमन...
आदिम सभ्यताओं से गुजरते हुयेअहसासों को जगह-२ महकते देखा..सभ्यताएँ वहाँ वस्त्रों की ओट में सिसकते हुयेदम नहीं तोड़तींबल्कि नग्न सौन्दर्य से उठतीसलीके की मादक गन्ध में मदमस्त हो नृत्य करती हैं..भावनाओं को बहने के लिएशब्दों के पुल की आवश्यकता नहीं होतीवे तो एक-दूजे के ग... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   11:30pm 27 Mar 2016 #Kavita
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
कुछ श्राप भी दुनियां में आशीर्वाद हो गए,जब भी तपाया आग ने , फौलाद हो गए !यह राह खतरनाक है, सोंचा ही नहीं था ,हम जैसे सख्तजान भी, बरबाद हो गए !  कितने तो कट गए बिना आवाज किये हीबच वे ही सके, जो कहीं आबाद हो गये !ख़त ध्यान से पढ़ने की जरूरत ही नहीं थी हर शब्द के मन... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   4:01am 26 Mar 2016 #kavita
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन' at अंजुमन...
कविताएँ : रूमीअनुवाद : डॉ. गायत्री गुप्ता ‘गुंजन’------------------------------------------कोई ये ना सोचे कि हम बुरी तरह टूट चुके हैं;कि हममें दरारें पड़ चुकी हैंहम तो केवल अपनी पत्तियाँ गिरा रहे हैं,आने वाले वसन्त के लिए...* * *‘बुरा वक़्त’ सामने से आकर डराता है;पर इसे गुज़र ही जाना है, क्योंकिहर निराशा... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   11:00pm 24 Feb 2016 #Kavita
Blogger: डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन' at अंजुमन...
‘पथिक’ : स्टीफ़न क्रेनअनुवाद : डॉ. गायत्री गुप्ता ‘गुंजन’------------------------------------------------ पथिक..ये देखकर आश्चर्यचकित था, किसत्य की ओर ले जाने वाले मार्ग परपरत दर परत मातम ही पसरा था...‘ओह!’, वह बोला;‘सदियाँ हुईं यहाँ से कोई नहीं गुजरा’..किन्तु जब उसने प्रत्येक परत में एक धारदार चाकू पाया... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   4:06am 5 Feb 2016 #Kavita
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
एक पुरुष गीतकार के लिए, महिलाओं की भावनाओं को उकेरना और उनका गीत चित्र बनाना आसान नहीं होता , काफी समय से अधूरा यह गीत , आज आपकी नज़र है !सो न सकूंगी आसानी से याद दिलाती, रातों में !बंद न हो पाएं  दरवाजेकुछ तो था उन बातों में !ले कंगन मनिहार बेंचने आया इकदिन आँगन... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   6:35am 29 Dec 2015 #kavita
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
दो काल खण्डइस जीवन केऔर उन्हें जोड़तावो इक लम्हाजो हाथ पसारे लेटा है इस तरह दोनों को समेटतामानिंद जिल्द होमेरी जिन्दगी कीकिताब का!!-समीर लाल ’समीर’... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   1:09am 29 Oct 2015 #kavita
Blogger: Anand Kavi Anand at New Hindi Songs Geet Kavita...
हकीम से ही ठन गईये सुनकर तो मेरी भौंहे तन गई।उस नाकारा हकीम से ही ठन गई।जो मेरी बिमारी को लाइलाज बताता है।मोहब्बत नाम का रिवाज़ बताता है।अब क्या करूं सारे ज़माने से दुश्मनी कैसे मौल लूँ।अब हो गई मोहब्बत तो उसे तराजू में कैसे तौल लूँ।ऐ ज़माने तू ही बता कोई कैसे जिए चला जाए?... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   6:34am 27 Sep 2015 #kavita
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
ऐसा क्या करता है आखिर संग तुम्हारा सपने मेंकितनी बार विजेता होकर तुमसे हारा सपने में !पूरे जीवन हमने अक्सर  छल मुस्काते पाया है,निश्छल मन ही रोते देखा, टूटा तारा सपने में !सारे जीवन थे अभाव पर,महलों के आनंद लिएबेबस जीवन को भी होता एक सहारा सपने में !कई बार हम&n... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   5:31am 14 Aug 2015 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
हवायें रूखी हैं,गीलापन कहीं उतर गया,चादरों को ओढ़कर सोने वाले,शाखाओं पर हरियाली संभाल रहे.जिंदगी खो गयी कहीं,किसी कोने से मद्धिम आवाज आ रही,फैला हुआ झुगमुगा उतरता नहीं दिखता,हंसी उजड़ गयी.पत्तों की परतें मिट रहीं,गुमसुम बैठने की आदत है,भूलता जा रहा बहुत कुछ,सन्नाटा पसर र... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   4:13am 6 Jul 2015 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
बुड्ढ़ा सोचता है कि वो क्यों नहीं मरता ?इतने कष्टों  के बाद भी वो  ज़िंदा  क्यों है ?दिखाई नहीं देता, सुनाई  नहीं देता, हज़ारों कष्ट ..ईश्वर  भी भूल गया है, काश उठा ले  अब ..तीमारदार भी  सोचता है  कि ये बुड्ढ़ा क्यों नहीं मरता ?बस जीता  जा रहा है बेवजह, न काम का, न काज का, ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   5:15am 11 Jun 2015 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
हूं मैं कमजोर,लेकिन मजबूती से खड़ा हूं,ढहने की चाह नहीं,पर भरभराकर भी गिरा हूं,मैं हताशा को अचरज से देखता आया हूं,जिंदगी की मुसीबतों से लड़ता आया हूं,रहा नहीं मैं कभी खुद से खफा,हर दर्द की दवा देता आया हूं,देखा है जमाना, उसके रुप भी,यादों को संजोता आया हूं,मैं हूं बुढ़ापा,पुरा... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   9:11am 19 Apr 2015 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
खामोशी है, मद्धिम उजाला,वहां बैठा ओट में कोई,बुजुर्ग अकेला,कमर टिकाये तने से,हताश दिख रहा है,बोल कुछ बोले क्यों,सूरज छिप रहा है।देख रहा इधर-उधर,घबराया है मन,कराहता बीच-बीच में,जर्जर है तन,वह भूखा है,दिन गुजरे,कोई टुकड़ा मिले,वह पेट भरे।जानता है वह किकौन सुनेगा उसकी,न परिव... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   5:20pm 11 Apr 2015 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
भूल जाता हूं कुछ बातों को,दिक्कत है चलने में भी,मानो छिन गयी है आज़ादी,मुबारक मुझे उम्रदराज़ी,सुबह उठकर देख रहा सूरज को,च... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   12:40pm 29 Jan 2015 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
नारी के अरमानों से मत खेलो रे इंसान,नारी बिगड़ गयी तो तुझे कर देगी परेशान,नारी ने जन्मा तुझे, नारी ने दूध पिलाया,सोच ज़रा नारी के तुम पर कितने अहसान,गीले में खुद सोई, सूखे में तुझे सुलाया,तेरे खातिर इस देवी ने भोगे कष्ट महान,तेरे दुख-दर्द में शामिल रही हमेशा नारी,तेरी अर्... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   12:44pm 25 Jan 2015 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
मन क्या कह रहा है,कितना कुछ सह रहा है,उफ! नहीं करता,गम में बह रहा है,विचित्र संयोग है,या किसी का वियोग है,ठहरा, थमा, जा रहा है,चु&... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   4:48pm 12 Dec 2014 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
हर शोख काबिले-काबिल हो ये जरुरी नहीं,हर दुआ को शोख हासिल हो ये जरुरी नहीं,मस्ती में कोई पैदल चले और बात है,हस्ती में कोई पैदल हो ये जरुरी नहीं,जहां पर मुश्किल का खौफ सताता है तुम को,वहां वाकई में मुश्किल हो ये जरुरी नहीं,जिसे पागल समझ कर पागल बन रहे हैं आप,दरअसल वो पागल हो य... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   12:14pm 19 Nov 2014 #kavita
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
बाबा बाबा तुम क्या जानो,भूल गये सब मोह-माया,कहते थे कभी -"सांसारिकता से किसने क्या पाया?"आज तुम गये बदल,करते हो आनाकानी,बहका रहे लोगों को,भ्रम में जनता अनजानी,क्या करोगे भला किसी का बाबा तुम,डर कर जीना सीखा रहे हो,सादा, सरल, बिन भय का जीवन जियो,क्यों भक्तों को बहका रहे हो,बाब... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   4:29pm 18 Nov 2014 #kavita
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