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Tag: ghazal

Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
प्यार की है फिर ज़रूरत दरमियाँहर तरफ हैं नफरतों की आँधियाँनफरतों में बांटकर हमको यहाँख़ुद वो पाते जा रहे हैं कुर्सियाँखुलके वो तो जी रहे हैं ज़िन्दगीनफ़रतें हैं बस हमारे दरमियाँजबसे देखा है उन्हें सजते हुएगिर रहीं हैं दिल पे मेरे बिजलियाँऔर मैं किसको बताओ क्या कहूँसबस... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:27am 12 Jul 2019 #Ghazal
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
उल्फत में इस तरह से निखर जाएंगे एक दिनहम तेरी मौहब्बत में संवर जाएंगे एक दिनएक तेरा सहारा ही बहुत है मेरे लिएवर्ना तो मोतियों से बिखर जाएंगे एक दिनहमने बना लिया है मुश्किलों को ही मंज़िलयूँ ग़म की हर गली से गुज़र जाएंगे एक दिनजिनके लिए लड़ती है उनकी माँ की दुआएँदुनिया भी ड... Read more
clicks 158 View   Vote 1 Like   6:06am 15 Apr 2019 #Ghazal
Blogger: Sanjay Grover at saMVAdGhar संवादघर...
ग़ज़लमैं अपने देश में रहामैं पशोपेश में रहासदा तक़लीफ़ में रहाज़रा आवेश में रहावही होगा मेरा रक़ीबजो कई वेश में रहामैं क्यों ईमानदार हूंबहुत वो तैश में रहान मैं अमीर में रहान ही दरवेश में रहा-संजय ग्रोवर15-03-2019... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   10:03am 15 Mar 2019 #ghazal
Blogger: Sanjay Grover at saMVAdGhar संवादघर...
ग़ज़लराज खुल जाने के डर में कभी रहा ही नहींकिसीसे, बात छुपाओ, कभी कहा ही नहींमैंने वो बात कही भीड़ जिससे डरती हैये कोई जुर्म है कि भीड़ से डरा ही नहीं !जितना ख़ुश होता हूं मैं सच्ची बात को कहकेउतना ख़ुश और किसी बात पर हुआ ही नहींकिसीने ज़ात से जोड़ा, किसीने मज़हब सेमगर मैं ख़ुदस... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   11:16am 26 Apr 2018 #ghazal
Blogger: Sanjay Grover at saMVAdGhar संवादघर...
ग़ज़लया तो बेईमानी-भरी दुनिया से मैं कट जाऊंया कि ईमान के चक्कर में ख़ुद निपट जाऊंतुम तो चाहते हो सभी माफ़िया में शामिल होंतुम तो चाहोगे मैं अपनी बात से पलट जाऊं न मैं सौदा हूं ना दलाल न ऊपरवालालोग क्यों चाहते हैं उनसे मैं भी पट जाऊं मेरे अकेलेपन को मौक़ा मत समझ लेनाकिसी ... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   10:43pm 24 Apr 2018 #ghazal
Blogger: Sanjay Grover at saMVAD-JUNCTIon...
ग़ज़लताज़गी-ए-क़लाम को अकसरयूं अनोखा-सा मोड़ देता हूंजब किसी दिल से बात करनी होअपनी आंखों पे छोड़ देता हूंसिर्फ़ रहता नहीं सतह तक मैंसदा गहराईयों में जाता हूंजिनमें दीमक ने घर बनाया होवो जड़ें, जड़ से तोड़ देता हूं08-07-1994कैसी ख़ुश्क़ी रुखों पे छायी हैलोग भी हो गए बुतों जैसेमैं भ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   10:32am 25 Jan 2018 #Ghazal
Blogger: Sanjay Grover at saMVAdGhar संवादघर...
ग़ज़लउनकी ख़ूबी मुझे जब ख़राबी लगीउनको मेरी भी हालत शराबी लगीउम्र-भर उनके ताले यूं उलझे रहेवक़्त पड़ने पे बस मेरी चाबी लगीउनके हालात जो भी थे, अच्छे न थेउनकी हर बात मुझको क़िताबी लगीउनके पोस्टर पे गांधीजी चस्पां थे परउनके गुंडों की नीयत नवाबी लगीमिलना-जुलना मुझे उनका अ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   1:19pm 24 Jan 2018 #ghazal
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
यह तो है कि मैं यहाँ तन्हा नहींतुझसे भी तो पर कोई रिश्ता नहींतिश्नगी तो है मयस्सर आपकीजुस्तजू दिल में मगर रखता नहींसाज़िशों से जिसकी हों ना यारियांआज कोई भी बशर मिलता नहींनफरतें इस दौर का तोहफा हुईंदिल किसी का भी यहाँ दुखता नहींबन गया है मुल्क का जो हुक्मरां ज़ालिमों... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   6:23am 20 Dec 2017 #Ghazal
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
मेरी यादों में आके क्या करोगे आस दिल में जगा के क्या करोगे ज़माने का बड़ा छोटा सा दिल है सबसे मिल के मिला के क्या करोगे अगर राहों में ही वीरानियाँ हों इतनी बातें बना के क्या करोगे नफरतें और बढ़ जाएंगी दिल में ऐसी बातों में आ के क्या करोगे जो दिल नाआशना ही हो चुके हों फ़क़त रिश... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   6:20am 15 Dec 2017 #Ghazal
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
उधर से चिलमन सरकता दिखाई देता हैइधर नशेमन फिसलता दिखाई देता हैतुझे पता क्या तेरे फैसले की कीमत हैमेरा वजूद बदलता दिखाई देता हैउमड़-उमड़ के जो आते हैं मेघ आँगन मेंफटा सा आँचल तरसता दिखाई देता हैकई रातों से भूखा सो रहा था जो बच्चाआज फिर माँ से उलझता दिखाई देता हैझूठे वादो... Read more
clicks 449 View   Vote 0 Like   10:24am 7 Jun 2016 #Ghazal
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
कहो कब तलक यूँ सताते रहोगे  कहाँ तक हमें आज़माते रहोगे  सवालों पे मेरे बताओ ज़रा तुम  यूँ कब तक निगाहें झुकाते रहोगे  हमें यूँ सताने को आख़ीर कब तक  रक़ीबों से रिश्ते निभाते रहोगे  वो ग़म जो उठाएँ हैं सीने पे तुमने  बताओ कहाँ तक छुपाते रहोगे  -शाहनवाज़ सिद्दीकी... Read more
clicks 339 View   Vote 0 Like   5:44am 25 May 2016 #Ghazal
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
हज़ारों साज़िशें कम हैं सियासत की अदावत कीहर इक चेहरे के ऊपर से नकाबों को हटाता चलकभी सच को हरा पाई हैं क्या शैतान की चालें?पकड़ ले आइना हाथों में बस उनको दिखाता चलकरो कुछ काम ऐसे भी अदावत 'इश्क़'हो जाएंरहे इंसानियत ज़िंदा, मुहब्बत को निभाता चलभले कैसा समाँ हो यह, बदल के रहने ... Read more
clicks 303 View   Vote 0 Like   4:42am 23 Feb 2016 #Ghazal
Blogger: Sanjay Grover at saMVAdGhar संवादघर...
मालिक़ के जैसा होने में उसको आराम है अब पता चला ग़ुलाम क्यों ग़ुलाम हैमुर्दों के जैसी ज़िंदगी चुनते हैं बार-बारफिर पूछते हैं क्यों यहां जीना हराम हैऊंचाईओं की चाह को मरना ही एक राहअब मर ही गए हो तो देखो कितना नाम है10-02-2016जब काम नहीं था तो मैं बारोज़गार थाफिर छोड़ दिया उसको मुझ... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   8:50am 16 Feb 2016 #ghazal
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
गणतंत्र दिवस पर आप सभी को ढेरों शुभकामनाएँ!हर दिल लुभा रहा है, यह आशियाँ हमाराहर शय से दिलनशी है, यह बागबाँ हमाराहर रंग-ओ-खुशबुओं से हर सूं सजा हुआ हैगुलशन सा खिल रहा है, हिन्दोस्ताँ हमाराहो ताज-क़ुतुब-साँची, गांधी-अशोक-बुद्धासारे जहाँ में रौशन हर इक निशाँ हमाराहिंदू हो ... Read more
clicks 307 View   Vote 0 Like   8:09am 26 Jan 2016 #Ghazal
Blogger: Sanjay Grover at saMVAdGhar संवादघर...
ग़ज़ल ज़िंदगी की जुस्तजू में ज़िंदगी बन जाढूंढ मत अब रोशनी, ख़ुद रोशनी बन जारोशनी में रोशनी का क्या सबब, ऐ दोस्त!जब अंधेरी रात आए, चांदनी बन जागर तक़ल्लुफ़ झूठ हैं तो छोड़ दे इनकोमैंने ये थोड़ी कहा, बेहूदगी बन जाहर तरफ़ चौराहों पे भटका हुआ इंसान-उसको अपनी-सी लगे, तू वो ग... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   1:54pm 17 Dec 2015 #ghazal
Blogger: Sanjay Grover at नास्तिक The Atheist...
ग़ज़लइस सदी की आस्था को देखकर मैं डर गयाबच्चे प्यासे मर गए और दूध पी पत्थर गयामाना अमृत हो गया दो दिन समंदर का बदनउस ज़हर का क्या करें जो आदमी में भर गयाहिंदू भी नाराज़ मुझसे और मुसलमां भी ख़फ़ाहोके इंसा यार मेरे! जीतेजी मैं मर गयादर्द को इतना जिया कि दर्द मुझसे डर गयाऔर फिर ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   12:41pm 4 Dec 2015 #Ghazal
Blogger: राजेंद्र कुमार at भूली-बिसरी या...
जनता का हक़ मिले कहाँ से, चारों ओर ‪दलाली है |‪चमड़े का दरवाज़ा है और ‪कुत्तों की रखवाली है ||‪मंत्री, नेता, अफसर, मुंसिफ़ सब जनता के सेवक हैं |ये जुमला भी प्रजातंत्र के मुख पर ‪भद्दी गाली है ||उसके हाथों की ‪कठपुतली हैं सत्ता के ‪शीर्षपुरुष |कौन कहे संसद में बैठा ‪गुंडा और मवाली... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:19am 29 Nov 2015 #Ghazal
Blogger: Sanjay Grover at saMVAdGhar संवादघर...
ग़ज़लबिलकुल ही एक जैसी बातें बोल रहे थेवो राज़ एक-दूसरे के खोल रहे थेतहज़ीब की तराज़ू भी तुमने ही गढ़ी थीईमान जिसपे अपना तुम्ही तोल रहे थेअमृत तो फ़क़त नाम था, इक इश्तिहार थाअंदर तो सभी मिलके ज़हर घोल रहे थेवो तितलियां भी तेज़ थीं, भंवरे भी गुरु थेमिल-जुलके, ज़र्द फूल पे जो डोल रहे ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   5:03pm 12 Oct 2015 #ghazal
Blogger: Ghanshyam Maurya at मेरी बात...
तुमसे मिलने के बहाने तलाशने होंगे।फिर से वो ठौर सुहाने तलाशने होंगे।        हमारी आशिकी परवान चढ़ी थी जिनसे,तमाम ख़त वो पुराने तलाशने होंगे।हमारे दरमियां क्‍यूँ सर्द सी खामोशी है,हमको इस दूरी के माने तलाशने होंगे।शुरू हो दौर फिर से गुफ्तगू का मेरे सनम,हमें ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   1:22pm 27 Sep 2014 #GHAZAL
Blogger: Ghanshyam Maurya at मेरी बात...
लबों पे बोल नहीं पर जु़बान रखता हूँ।चुके हैं तीर मगर मैं कमान रखता हूँ।किसी तरह भी मयस्‍सर हो पेट को रोटी,सुबह से शाम हथेली पे जान रखता हूँ।कभी कहीं भी खु़द को ओढ़ता बिछाता हूँ,मैं अपने साथ ही अपना मकान रखता हूँ।जहॉं भी जाऊँ सवालों के वार होते हैं,मैं अपने चेहरे पे अपना ... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   4:40pm 11 Sep 2014 #GHAZAL
Blogger: Ghanshyam Maurya at मेरी बात...
तबीयत शायराना हो रही है। मोहब्‍बत एक बहाना हो रही है।जुबॉं को खोलने से डर रहा हूँ,कलम मेरा फ़साना ढो रही है।तुझे सुनने की चाहत अब तो ख़ुद ही,लगा कोयल का गाना हो रही है।उमड़ती है मेरे अश्‍कों की गंगा,करम मेरा पुराना धो रही है।वो बोले शेर अपने मत पढ़ो तुम,मोहब्‍बत अब निशा... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   11:42am 18 Jul 2014 #GHAZAL
Blogger: yaadein at Yaadein...
मेरा घर फिर  मुझे पुकार रहा है आज मेरी राह को  निहार रहा है मेरा उस घर मेँ क्या  किरदार रहा है? बचपन मेरा उस मिट्टी  मेँ उधार रहा है मेरा घर फिर मुझे  पुकार रहा है वो जमीँ अब जिसमेँ  आम का दरख्त न रहा अपनोँ के लिए अपनोँ के  पास वक्त न रहा अपनोँ के बीच आज  कोई रब्त न ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   8:24pm 20 Apr 2014 #ghazal
Blogger: yaadein at Yaadein...
मै तो चलता गया जगत मे, पीछे था कुछ छूट गया।  कोई प्रेमी ऐसा आया , मुझसे मुझको लूट गया।। कंचन वर्णो मे लिपटी थी, शर्मा के खुद मे सिमटी थी,  देख रहा था उसी का सपना , जगा कि वो सब टूट गया।। पहले तो अनजान थि मुझसे, नही हुई पहचान थि उससे। पर जब से देखा मैने उसको, पानी का न घूँ... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   8:21pm 17 Apr 2014 #ghazal
Blogger: yaadein at Yaadein...
"अभी कुछ बात बाकी है ।" अभी कुछ बात बाकी है, कुछ मुलाकात बाकी है। जो तेरे संग बितानी है, अभी कुछ रात बाकी है।। मै तेरा हूँ,तू मेरी है, अभी कुछ कह नही सकता । मगर तुम बात ये मानो, कि तेरे बिन रह नही सकता ।। जो तुझको बताने हैं, कई जज्बात बाकी है। अभी कुछ---------------। मुझे भी खौ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   8:17pm 14 Apr 2014 #ghazal
Blogger: yaadein at Yaadein...
अपने ही इस अहं मेँ  यूँ चूर हो गये । अपनोँ से अपने आप  ही हम दूर गये ॥ जिन दरख्तोँ के साये मेँ  बीता था ये बचपन । उन दरख्तोँ को काटने  को हम मजबूर गये ॥ जिन्दगी तुझे अपने अन्दाज  मैँ जीने चले थे हम । खुद जिन्दगी के  फैसले मन्जूर गये ॥ बन्दगी मेँ तेरी ए खुदा  इतने हु... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   8:02pm 2 Apr 2014 #ghazal
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