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Tag: Emotions

Blogger: Sanjay Grover at नास्तिक The Atheist...
क्या ईश्वर क़िताबें लिखता है!? हम सब कभी न कभी ऐसे दावों से दो-चार होते रहे हैं। कमाल की बात यह है कि कथित ईश्वर की लिखी और आदमी की लिखी क़िताबों में ज़रा-सा भी अंतर नहीं दिखाई देता। वही पीला क़ाग़ज़, वही काली स्याही ! ईश्वर को लिखनी ही थीं तो ज़रा अलग़ तरह से लिखता कि ग़रीब आदमी भी पढ़ ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   12:44pm 3 Jan 2019 #emotions
Blogger: vikram pratap at Lost Soul ...
 लबों को खामोश कर दिया,पर आँखों को कैसे रोकता,की कभी तो पढ़ लोगे,तुम मेरे दिल की हर दास्तां,ना  हम कुछ कह ही सके, ना चुप रह ही सके।  ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   7:12pm 21 Jan 2017 #emotions
Blogger: vikram pratap at Lost Soul ...
And he replied:"Either have a courage to make your dreams true, or don't dream too much. They are not for weak persons".... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   7:59pm 30 Dec 2016 #emotions
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at Nirantar's..........
The path of correctionThough your memoriesBrings tears in my eyesIncrease my desperationI do not curse youFor your betrayalI believe it to be because ofMy emotional heartFailure of my mindTo judge your truthOn the contraryI thank you for yourRuthless behaviorWhich has led me to?The path of correctionEstablishing a balance betweenHeart and the mindTake a well thought decisionNot get entrappedIn the web of emotionsDr.Rajendra Tela,NirantarLove,betrayal,emotions,life1-1-2016... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   5:55am 1 Jan 2016 #emotions
Blogger: anil kant at मेरी कलम - मेर...
तुम नहीं हो फिर भी हो. दिन भर महकता है ये घर. इसमें बसी है खुशब तुम्हारीू. मैं नहीं खोलता खिड़कियाँ सारीं और आहिस्ता से खोलता हूँ दरवाज़े इसके. कि तुम अब भी हो, यहाँ हर कोने में. सुबहें दोपहरों तक खींच ले जाती हैं खुद को जैसे तैसे. शामें बहुत याद दिलाती हैं तुम्हारीं. तुम जब थी... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   4:46am 13 Jul 2015 #Emotions
Blogger: anil kant at मेरी कलम - मेर...
हम सब एक दिन चले जाने के लिए ही आये हैं लेकिन क्या हम वो कुछ कभी कर पाए जो करने के लिए हमारा दिल आ आकर गवाहियाँ देता है. मन काउंसलर बना हमें बार बार समझाता है कि तुम ये नहीं, ये करने के लिए बड़े भले लगते हो.कितनी दफा सुनते हैं हम अपने काउंसलर मन की आवाजों को. क्या अन्य तमाम तरह ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   4:44am 13 Jul 2015 #Emotions
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at Nirantar's..........
Some timesWhen the mindOver rulesThe heartOne has to stopSacrificeThe wishesKill the desiresresulting in a decisionThat ultimatelyDoes not prove to beThe right decisionOnly to remainIn the memoryThroughout the lifeAs a regretfulDecision106-51-27-2-2014Dr.Rajendra Tela,NirantarDecision,emotions,heart,mind ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   6:18pm 27 Feb 2014 #emotions
Blogger: Shesha Chaturvedi at Elixired...
एक आदमी कब से खड़ानगाड़ा बजा रहा हैशायद बाहर मुझे बुला रहा हैमैं अभी गहरी नींद में हूँमुझ तक उसकी हर आवाज़ आ रही हैपर आँखें किसी सपने को बहुत देर से चबा रहीं हैंवह कुछ देर और चीखता हैबेबस होकर फिर थोडा झींकता हैमैं, अब भी अन्दर बंद हूँखुद को महफूज़ महसूस करते हुएइस शोर स... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   3:34pm 23 Nov 2013 #Emotions
Blogger: Amit Agarwal at Safarnaamaa... सफ़रना...
                                                                  (Image courtesy:Web)सरकती नमी है ज्यूँ ठूँठमें-  बस चन्दकोंपलें और फिर क्षय चिर- स्थाई,यूँहीलरज़ती हो तुम–मुझमेंसमाई!Translation:Sprouts...Quiver you in me like the damp,in a stump-sproutsa few more,and decayUndying!Explanation:Sorry darlings, it can’t be explained...it can only be felt!!... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   6:10am 25 Feb 2013 #emotions
Blogger: तुषार राज रस्तोगी at तमाशा-ए-जिंदग...
हे करुनामयरात के अँधेरे मेंजब तुमसो जाते थेतब एक आत्माभटकती थीएक घर कीतलाश मेंजहाँ मुझप्यासेको पानी, पानीचाहियें थाकुएं कीछाँव चाहियें थीपीपल के वृक्ष कीछैया परजब तुमनेदिन केउजाले में वो घर दियातब वहाँन तोपीपल ही थान था वहकुआँमेर प्यासएक प्यास हीरह गईरह गईएक भटक... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   9:40pm 10 Jan 2013 #Emotions
Blogger: तुषार राज रस्तोगी at तमाशा-ए-जिंदग...
मेरे मन मस्तिष्कके तारों कोवीणा मत बनने देना भगवन क्योंकी वह वीणा जो स्वर निकलती हैये परिवेश उसेनहीं स्वीकार पायेगा स्वयं मैं भीपथराया साअनजान रास्ते पर बिना स्वर केउस वीणा कोछेड़ देता हूँजिसके स्वर सेईश्वर तुझे भी रोनान आ जायेवो दर्द तेरीपत्थर की बुतको भी तोड़ देग... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   10:13pm 8 Jan 2013 #Emotions
Blogger: anil kant at मेरी कलम - मेर...
ऐसा लग आने पर भी कि शाम अँधेरे से घिरने को है वह उसके आने की प्रतीक्षा करता रहता। वहीँ प्रतीक्षा के मुहाने पर खड़ा हो प्रतीक्षा करते रहना न जाने उसने कहाँ से सीखा था। या कि शायद समय के प्रवाह के साथ बहते बहते वह स्वंय ही इसका आदी हो चुका था . और जब लड़की आती तो वह हमेशा उससे क... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   8:09am 17 Nov 2012 #Emotions
Blogger: anil kant at मेरी कलम - मेर...
आर्थिक सिक्योरिटी भी बड़ी चीज़ है !!कभी कभी लगता है कि जैसे जो होना था वो न होकर कुछ और ही होना होता गया . इतनी उलझने और उसपर से नींद का ना आना . रात तीन बजे तक करवटें बदलते रहे . और उस होने और न होने के मध्य स्वंय को झुलाते रहे . रह रहकर झींगुरों के स्वर और मेढकों के टर-टराने के स्... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   9:45am 18 Oct 2012 #Emotions
Blogger: Shesha Chaturvedi at "Elixir-ed"...
A day when we'll realize our dreams, do what we want to. A day when somebody in a dire need for money will win a lottery; a guy at a beer bar will get a free beer; someone will get back one's love; the couple who have been working day and night will pay off all their bills; a man who has been saving for the day will enjoy all his savings; a critically ill guy will get well. A day when system will change, life will change; a day when we will fulfill all our responsibilities and live a free, untangled life or as some say a day when we all will die .Tomorrow is a day that no one has ever seen or been into, but we all fear, worry, plan, dream and live for it."...though Tomorrow never comes." ... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   9:01am 5 May 2012 #Emotions
Blogger: anil kant at मेरी कलम - मेर...
सुबह से शाम तक तुम्हारी आवाज़ के लिए तरसता रहा. हमारी स्मृतियों के आईने में तुम्हारा होना खोजता रहा. उलट-पलट के उन बीत गए बेतरतीब पलों की श्रंखलित कड़ियाँ बनाने का प्रयत्न करता रहा किन्तु हर नए क्षण यह ख़याल हो आता की किस पल को कहाँ जोडूँ. हर लम्हा जो तुम्हारे साथ बिताया है ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:06pm 15 May 2011 #Emotions
Blogger: anil kant at मेरी कलम - मेर...
कल शाम जब रेल प्लेटफोर्म को छोड़ चली गयी, बाद उसके मुझे उदासियों ने आ घेरा. और फिर हर नए सैकण्ड लगने लगा कि तुम मुझसे दूर, बहुत दूर चली जा रही हो. हालांकि हम एक ही शहर में होते हुए भी रोज़ कहाँ मिल पाते थे किन्तु फिर भी ना जाने क्यों यह कैसा सिलसिला है जो थमता ही नहीं. शाम बीती ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:57am 12 May 2011 #Emotions
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