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Tag: Vyangya

Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
पहली बार किसी फाईव स्टार होटल में घुसने का मौका था एक दोस्त के साथ. तय हुआ था कि एक एक कॉफी पी जायेगी. एक कोई वहाँ बिल और १०% टिप देगा. बाहर आकर आधा आधा कर लेंगे. इसी बहाने फाईव स्टार घूम लेंगे. छात्र जीवन था. बम्बई में पढ़ रहे थे. एक जिज्ञासा थी कि अंदर से कैसा रहता होगा फाईव स्टार. छोटे शहर के मध्यम वर्गीय परिवार से आये हर बालक के दिल में उस जमाने में ऐसी जिज्ञासायें कुलबुलाया करती थीं. बम्बई से जब घर जाया करते थे तो वहाँ रह रहे मित्रों के सामने अमिताभ बच्चन वगैरह के नामों को इग्नोर करना बड़ा संतुष्टी देता था जैसे उनसे बम्बई में रोज मिलते हों और उनका कोई आकर्ष... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   10:54pm 5 Sep 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
मैने देखा है जो चुप रहता है और सीधा होता है, उसका फायदा सब लोग उठाते हैं. अब जरा सी आत्मा, बेचारा चूहा, क्या हालत कर डाली है सबने उसकी. कहाँ तो गजब का मान सम्मान था. गणेश जी तक उस पर बैठ कर सवारी करते थे. हर समय लड्डू के पास बैठा कर रखते थे कि जितना खाना है खाओ. उसके नाम लेकर शेर लिखे जाते थे: मूषक वाहन गजानना बुद्धिविनायक गजानना।.. और एक आज का समय आया है. अब गणेश जी भी यात्रा पर कम ही निकलते हैं और जब कभी कहीं जाना भी हो, तो ऐसा माहौल है कि बिना बुलेट प्रूफ गाड़ी में निकल ही नहीं सकते. चूहा वहाँ से भी बरखास्त! बस पुरानी फोटूओं में उनके साथ दिख जाता है. सिर्फ पूजा का सामा... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   10:05pm 21 Aug 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
किसी का मर जाना उतना कष्टकारी नहीं होता जितना की उस मर जाने वाले के पीछे उसी घर में छूट जाना. जितने मूँह, उतने प्रश्न, उतने जबाब और उतनी मानसिक प्रताड़ना. सुबह सुबह देखा कि बाबू जी, जो हमेशा ६ बजे उठ कर टहलने निकल लेते है, आज ८ बज गये और अभी तक उठे ही नहीं. नौकरानी चाय बना कर उनके कमरे में देने गई तो पाया कि बाबू जी शान्त हो गये हैं. इससे आप यह मत समझने लगियेगा कि पहले बड़े अशान्त थे और भयंकर हल्ला मचाया करते थे. यह मात्र तुरंत मृत्यु को प्राप्त लोगों का सम्मानपूर्ण संबोधन है कि बाबू जी शांत हो गये और अधिक सम्मान करने का मन हो तो कह लिजिये कि बाबू जी ठंड़े हो गये. बा... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   1:06am 9 Aug 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
१२ वीं के परिणाम घोषित हो गये. लड़कियों ने फिर बाजी मार ली – ये अखबार की हेड लाईन्स बता रही हैं. जिस बच्ची ने टॉप किया है उसे ५०० में से ४९६ अंक मिले हैं यानि सारे विषय मिला कर मात्र ४ अंक कटे. बस! 4 नंबर कटे? ये कैसा रिजल्ट है भाई? हमारे समय में जब हम १० वीं या १२ वीं की परीक्षा दिया करते थे तो मुझे आज भी याद है कि हर पेपर में ५ से १० नम्बर तक का तो आऊट ऑफ सिलेबस ही आ जाता था. अतः उतने तो हर विषय में घटा कर ही नम्बर मिलना शुरु होते थे. यहाँ आऊट ऑफ सिलेबस का अर्थ यह नहीं है कि किताब में वो खण्ड था ही नहीं. वो तो बकायदा किताब में था मगर मास्साब बता देते थे इसे छोड़ दो, ये नहीं ... Read more
clicks 289 View   Vote 0 Like   10:01pm 31 Jul 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
अस्पतालों में ऑक्सीजन की भीषण कमी हो गई। हाहाकार मचा। जिसको जो समझ में आ रहा था वो उस पर तोहमत लगा रहा था। दोषारोपण हेतु लोगों को खोजा जा रहा था। कई दशकों पहले परलोक सिधार चुके लोग भी चपेट में आ रहे थे। जानवरों के डॉक्टर तक व्हाटसएप पर फेफड़ों में ऑक्सीजन की कमी न आने देने के उपाय बता रहे थे। एक ओर जहाँ भीषण कमी थी वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन बिखरी पड़ी थी। कोई कहता था कि दो सिलेंडर फलानी जगह हमारे पास हैं, जरूरत मंद संपर्क करें। किसी के पास पाँच होते थे। दिया गया फोन उठता नहीं था। वे जरूरतमंदों को व्हाटसएप पर खोज रहे थे और जरूरतमंद उन्हें अस्पताल... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   10:21pm 19 Jun 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
किस्मत कुछ ऐसी रही कि जहाँ भी पहुंचते हैं तो लगता है वक्त कह रहा है ‘थोड़ा देर कर दी यार तुमने आने में, वरना तो क्या जलवा देखते’. वो तो हमने खैर पैदा होने में भी देर कर दी वरना 1947 के पहले पैदा हो गए होते तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कहलाते. एक दो 1945 और 1946 की पैदाईश वालों को तो मैं भी जानता हूँ जो खुद को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बता बता कर सांसद हो लिये जबकि स्वतंत्रता प्राप्ति के समय 1 बरस और दो बरस के ही थे. मगर कौन चैक करने जाता है? वरना अगर चैक करने की प्रथा होती तो इनके चरित्र चैक होने के बाद तो एक भी वोट न मिलता. ... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   12:25am 13 Jun 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
किस्मत कुछ ऐसी रही कि जहाँ भी पहुंचते हैं तो लगता है वक्त कह रहा है ‘थोड़ा देर कर दी यार तुमने आने में, वरना तो क्या जलवा देखते’. वो तो हमने खैर पैदा होने में भी देर कर दी वरना 1947 के पहले पैदा हो गए होते तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कहलाते. एक दो 1945 और 1946 की पैदाईश वालों को तो मैं भी जानता हूँ जो खुद को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बता बता कर सांसद हो लिये जबकि स्वतंत्रता प्राप्ति के समय 1 बरस और दो बरस के ही थे. मगर कौन चैक करने जाता है? वरना अगर चैक करने की प्रथा होती तो इनके चरित्र चैक होने के बाद तो एक भी वोट न मिलता. ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   12:25am 13 Jun 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
मांसाहारी को यह सुविधा रहती है कि मांसाहार न उपलब्ध होने की दशा में वो शाकाहार से अपना पेट भर ले. उसे भूखा नहीं रहना पडता. जबकि इसके विपरीत एक शाकाहारी को, शाकाहार न उपलब्ध होने की दशा में कोई विकल्प नहीं बचता. वो भूखा पड़ा मांसाहारियों को जश्न मनाता देख कुढ़ता है. उन्हें मन ही मन गरियाता है. वह खुद को कुछ इस तरह समझाता है कि देख लेना भगवान इनको इनके किए की सजा जरुर देगा. ये जीव हत्या के दोषी हैं और फिर चुपचाप भूखा सो जाता है.... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   1:32am 16 May 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
प्रकृति प्रद्दत मौसमों से बचने के उपाय खोज लिये गये हैं. सर्दी में स्वेटर, कंबल, अलाव, हीटर तो गर्मी में पंखा, कूलर ,एसी, पहाड़ों की सैर. वहीं बरसात में रेन कोट और छतरी. सब सक्षमताओं का कमाल है कि आप कितना बच पाते हैं और मात्र बचना ही नहीं, सक्षमतायें तो इन मौसमों का आनन्द भी दिलवा देती है. अमीर एवं सक्षम इसी आनन्द को उठाते उठाते कभी कभी सर्दी खा भी जाये या चन्द बारिश की बूँदों में भीग भी जायें, तो भी यह सब सक्षमताओं के चलते क्षणिक ही होता है. असक्षम एवं गरीब मरते हैं कभी लू से तो कभी बाढ़ में बह कर तो कभी सर्दी में ठिठुर कर. कुछ मौसम ऐसे भी हैं जो मनुष्य ने बाजारवाद... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   11:53pm 1 May 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
सर्दी की सुबह। घूप सेकने आराम से बरामदे में बैठा हुआ अखबार पलट रहा था गरमागरम चाय की चुस्कियों के साथ। भाई साहब, जरा अपने स्वास्थय का ध्यान रखिये। इतने मोटे होते जा रहे हैं। ऐसे में किसी दिन कोई अनहोनी न घट जाये, आप मर भी सकते हैं। ये बात हमसे तिवारी जी कह रहे हैं। भला कैसे बर्दाश्त करें इस बात को। हमने भी पलट वार किया कि भई तिवारी जी, आप दुबले पतले हैं तो क्या आप अमर हो लिये, कभी मरियेगा नहीं। खबरदार जो इस तरह की उल्टी सीधी बात हमसे की तो और वो भी सुबह सुबह। ... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   12:18am 12 Apr 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
सर्दी की सुबह। घूप सेकने आराम से बरामदे में बैठा हुआ अखबार पलट रहा था गरमागरम चाय की चुस्कियों के साथ। भाई साहब, जरा अपने स्वास्थय का ध्यान रखिये। इतने मोटे होते जा रहे हैं। ऐसे में किसी दिन कोई अनहोनी न घट जाये, आप मर भी सकते हैं। ये बात हमसे तिवारी जी कह रहे हैं। भला कैसे बर्दाश्त करें इस बात को। हमने भी पलट वार किया कि भई तिवारी जी, आप दुबले पतले हैं तो क्या आप अमर हो लिये, कभी मरियेगा नहीं। खबरदार जो इस तरह की उल्टी सीधी बात हमसे की तो और वो भी सुबह सुबह। ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   12:18am 12 Apr 2021 #Vyangya
Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
सफलता का शार्ट कट होता है। लेकिन जो यह कहते हैं कि सफलता का कोई शार्ट कट नहीं होता, वे दरअसल बेवकूफ हैं। शार्ट कट के साथ सफलता पाना उतना ही आसान है, जितना लेखन में पुरस्कार पाना। शार्ट कट के लिए भी मेहनत करनी पड़ती है। बिना मेहनत करे तो आजकल बाप भी अपने बेटों को जायदाद में हिस्सा नहीं देता। मेरे दिल में उन लोगों के प्रति विशेष जगह है, जो शार्ट कट के रास्ते चलकर बड़े या महान बने हैं। मैं खुद शार्ट कट के दम पर लेखक बना हूं। बता दूं, लेखक बनने में न मैंने बहुत अधिक पापड़ बेले न बड़े लेखकों की चिरौरी ही की। लिखते-लिखते लेखक बन गया। मैंने किताबें लिखने या प्रकाशकों ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   2:09am 28 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
तिवारी जी एक अत्यन्त जागरूक नागरिक हुआ करते थे। जागरूकता का चरम ऐसा कि सरकार अगर पटरी से जरा भी दायें बायें हुई और तिवारी जी आंदोलन पर। हर आंदोलन का अपना अपना अंदाज होता है जो कि उस आंदोलन के सूत्रधार पर निर्भर करता है। तिवारी जी के आंदोलनों का अंदाज ईंट से ईंट बजा देने वाला होता था। मजाल है कि तिवारीजी आंदोलन पर हों और सरकार का कोई भी मंत्री चैन से सो पाये। सोना तो दूर की बात है, बैठना भी मुश्किल हो जाता था। सरकार की पुरजोर कोशिश होती कि अव्वल तो तिवारी जी आंदोलन पर बैठे ही न और अगर बैठ गए हैं तो जितना जल्दी हो सके, उनकी मांगें मान कर आंदोलन खत्म करवाया ज... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   12:52am 28 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
अमां, छोड़िए भी- क्या कीजिएगा इतनी प्राइवेसी का! व्हाट्सएप या फेसबुक पर रहकर प्राइवेसी पर चिंता जतलाना हमें शोभा नहीं देता। वहां हमने प्राइवेसी लायक कुछ रख छोड़ा ही नहीं फिर काहे की हाय-हाय, काएं-काएं। व्हाट्सएप अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर कह तो रहा है कि सबकी प्राइवेसी सुरक्षित है, तो मान लीजिए- है। हैरान हूं, प्राइवेसी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनका सवेरा ही आज क्या खाया, आज क्या पिया, आज क्या पहना, आज कहां की सैर की, आज किस करवट बिस्तर पर सोए- टाइप स्टेटस अपडेट करने से होता है। जिन्हें जरा-सी छींक भी आ जाए तो तुरंत फेसबुक पर पोस्ट कर देते हैं। फिर कम... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   7:19am 21 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
आम जन हैं तो आम जन की तरह ही सुबह सुबह उठते ही फेसबुक खोल कर बैठ जाते हैँ। वो जमाने अब गुजरे जब मियां फाकता उड़ाया करते थे या लोग कहा करते थे कि समय बिताने के लिए, करना है कुछ काम, शुरू करो अंताक्षरी, ले कर हरि का नाम!! फेसबुक पर रोज का पहला काम कि अपनी आखिरी पोस्ट पर कितने लाइक आए और दूसरा वो जो फेसबुक मुस्तैदी से बताता है कि आज किस किस का जन्म दिन है। १०० -२०० मित्र थे तो हर एक दो दिन में एकाध का जन्म दिन होता था बस १ जनवरी और १ जुलाई को कुछ ज्यादा लोगों का। ५० पार लोगों में अधिकतर उस जमाने को याद कर सकते हैं जब मोहल्ले के चाचा बच्चों को स्कूल ले जाकर भर्ती करा दे... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   12:50am 21 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
भावनाएं चारों तरफ आहत हो रही हैं। किसी की ज्यादा, किसी की कम। भावनाएं भी इतना नाजुक हो गई हैं कि बात-बात पर आहत हो बैठती हैं। सोचती ही नहीं कि कब किस बात पर आहत होना है। बस आहत होने से मतलब। कुछ की भावनाएं तो इस बात पर ही आहत हो जाती हैं कि व्हाट्सएप पर संदेश देखने के बाद भी जवाब क्यों नहीं दिया। तो कुछ की इस बात पर कि शादी को एक साल हुआ अभी तक कोई गुड न्यूज क्यों नहीं! दरअसल, आहत भावनाओं का भी अपना बाजार है। किस टाइप की भावना को आहत करके मशहूर होना है, इस बात का खास ध्यान रखा जाता है। सोशल मीडिया के जमाने में भावनाएं बिजली की गति से आहत होती हैं। मसलन, किसी की भ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   12:17am 20 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
जैसे बचपन में रेल गाड़ी के साथ साथ चाँद भागा करता था और रेल रुकी और चाँद भी थम जाता था। चाँद को भागता देखने के लिए रेल का भागना जरूरी है। जो इस बात को समझता है वो जानता है कि देश के विकास को देखना है तो खुद का विकसित होते रहना आवश्यक है। खुद का विकास रुका तो देश का विकास रुका ही नजर आयेगा। हम आप सब मिलकर ही तो देश होते हैँ। ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   10:20pm 14 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
प्रेमिका जब भूतपूर्व हो जाती है तब वह अधिक आकर्षित करती है। उसके प्रति चाह और चार्म बढ़ जाता है। नॉस्टेल्जिया बना रहे ऐसा मन करता है। जीवन में उमंग और तरंग वापस लौट आती है। तब बीवी का भी इतना डर नहीं रहता। बार-बार दिल करता है वेलेंटाइन डे भूतपूर्व प्रेमिका संग ही सेलिब्रेट किया जाए। बता दूं कि मैं- जमाने की परवाह किए बगैर- अपना हर वेलेंटाइन डे भूतपूर्व प्रेमिका संग ही मनाता हूं। यह बात मैं अपने निजी अनुभव के आधार पर कह रहा हूं कि भूतपूर्व प्रेमिका संग वेलेंटाइन मनाने में जो सुख है, वो बीवी संग मनाने में नहीं। हो सकता है कि पत्नीव्रत पतियों को मेरी बात अ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   12:43am 14 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
तो, किसान आंदोलनकारी नहीं आंदोलनजीवी हैं! और उनके समर्थक परजीवी। देश में सचमुच रामराज्य आया हुआ है। कोई किसी को कुछ भी कह-बोल सकता है। ध्यान केवल इस बात का रखना है कि स्वर में असहमति या आलोचना का पुट न हो। नहीं तो भक्त मंडली तैयार खड़ी है समझाने को। उनके समझाने में भी प्रायः दादागिरी झलकती है। मगर झेलिए कि आप न्यू इंडिया में हैं। इस वक़्त किस्म-किस्म के जीवी मेरे मन-मस्तिष्क में उमड़ रहे हैं। बात बुद्धिजीवी से बहुत आगे निकल चुकी है। मैं बुद्धिजीवियों को ही अब तक जीवियों की पहचान समझता था लेकिन मुझे क्या पता था कि यहां आंदोलनजीवी भी हैं। मगर आंदोलनजीविय... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   3:12am 12 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
भीतर से अर्थव्यवस्था की हालत जो हो पर बाहर से टनाटन बनी हुई है। बढ़ते सेंसेक्स ने अर्थव्यवस्था को पहाड़ पर चढ़ा दिया है। दलाल पथ पर रौनक बढ़ गई है। तेजड़ियों के चेहरे खिल गए हैं। ठंड में गर्मी का एहसास हो रहा है। शेयर सोना उगल रहे हैं। मगर देश की धरती के सोना उगलने वाले किसान 60 दिन से आंदोलनरत हैं, उनकी चिंता किसी को नहीं। वार्ता पर वार्ताएं हो रही हैं किंतु नतीजा कोई नहीं निकल रहा। सरकार अपनी पर अड़ी है, किसान अपनी पर डटे हैं। खैर… शेयर बाजार बिन पिए ही झूम रहा है। निवेशकों का वन टू का फोर कर रहा है। विश्लेषक अभी और तेजी का राग अलापा रहे हैं। जितने मुंह उतनी बा... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   2:06pm 9 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
इतिहास गवाह है, बचपन से लेकर जवानी तक मैंने एक भी टीका नहीं लगवाया। डॉक्टर्स ने भतेरा समझाया, घर वालों ने खूब जिद की लेकिन मैं अड़ा रहा। क्यों लगवाऊं टीका? नहीं लगवाता। मेरी मर्जी। कान खोलकर सुन ले हर कोई मैं कोरोना का टीका भी नहीं लगवाऊंगा। ईश्वर जाने टीके में क्या हो! टीका लगते ही कहीं मैं बुद्धिजीवी बन गया तो! टीका लगते ही कहीं मैं ज्ञानी बन गया तो! टीका लगते ही कहीं मेरा हृदय परिवर्तन हो गया तो! टीका लगते ही कहीं मैं खुद में मिथुन चक्रवर्ती को महसूस करने लगा तो! नहीं, नहीं इतना बड़ा रिस्क मैं कतई नहीं ले सकता। बिना टीके के ही मेरी जिंदगी ठीक-ठाक चल रही ह... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   12:55pm 8 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
ठंड आतंक मचाए हुए है। रजाई से बाहर निकलने का मन नहीं करता। न नहाने का दिल करता है। जी करता है पूरे टाइम रजाई में सिकुड़े पड़े रहो। लेकिन मैं दाद देता हूं उन चोरों को जो भीषण ठंड में भी चोरी कर रहे हैं। ठंड में चोरी करना आसान काम नहीं। जब लोग अपनी-अपनी रजाइयों में छिपे-दुबके बैठे होते हैं, तब चोर उनके घरों में चोरी करने उतरते हैं। एक तरफ ठंड का सितम, दूसरी तरफ पकड़े जाने का डर। फिर भी, वे अपने कर्तव्य पर डटे रहते हैं। पापी पेट क्या-क्या नहीं करवा लेता। आज के जमाने में चोरी करना पाप थोड़े है! बदलते समय के साथ चोरी के तरीके भी काफी बदल गए हैं। कुछ चोरियां अब ऐसी भी है... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   2:46am 7 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
तिवारी जी सुबह से पान की दुकान पर बैठे बार बार थूक रहे थे। पूछने पर पता चला कि बहुत गुस्से में हैं और गुस्सा थूक रहे हैं। वह इस मामले में एकदम आत्म निर्भर हैं। खुद ही मसला खोजते हैं, खुद ही गुस्सा हो जाते हैं और फिर खुद ही गुस्सा थूक कर शांत भी हो जाते हैं। उनका मानना है कि पान खाकर यूं भी थूकना तो है ही, फिर क्यूँ न साथ गुस्सा भी थूक दिया जाए। ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   11:41pm 6 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
बाजार को पूरा बजट समझ आ गया। सेंसेक्स ने दो कों के गाल सुर्ख हो गए। अर्थव्यवस्था को पंख लग गए। सरकार ने अपनी पीठ थपथपाई। फिलहाल, मैं यह समझने की जुगत में जुटा हूं कि बजट में ऐसा क्या खास रहा, जो सेंसेक्स ताबड़तोड़ बढ़ लिया। वैसे, सेंसेक्स के गिरने और बढ़ने का कोई गणित नहीं है। यह कब किस बात पर ढह जाए और किस बात पर बढ़ जाए, कोई नहीं जानता। यह अपनी हंसी हंसता और अपने आंसू रोता है। लोग यह समझते हैं कि शेयर बाजार में बहार आई हुई है। हर तरफ हरियाली ही हरियाली है। मगर उनको क्या पता कि यह कितना बड़ा जालिम भी है, पलभर में लाखों-करोड़ों स्वाहा कर डालता है। अभी पिछले ही दिनो... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   2:41pm 6 Feb 2021 #Vyangya
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
जैसे एक आदमी होते हैं कई आदमी उसी तरह एक युग में होते हैं कई युग. कलयुग के इस सेल्फी युग में जब व्यक्ति फोन खरीदने निकलता है तब उसमें फोन की नहीं, उस फोन में लगे कैमरे की खूबियाँ देखता है.. फोन की साऊन्ड क्वालिटी में भले ही थोड़ी खड़खड़ाहट हो, चाहे जगह जगह सिगनल लूज हो जायें.. मगर कैमरे की रिजल्ट चौचक होना चाहिये. यहाँ चौचक से यह तात्पर्य नहीं है कि तस्वीर की डीटेल एकदम विस्तार से दिखाये. अच्छे और चौचक रिजल्ट वाले कैमरे का यहाँ अर्थ है कि हम भले ही सच में कैसे भी दिखते हों, फोटो में कैमरा हमें सलमान और पत्नी को कटरीना दिखाये. बाकी की सारी डीटेल विस्तार से छिपाये, ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   12:41am 17 Jan 2021 #Vyangya
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