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Tag: Social

Blogger: S.M.MAasum at हमारा जौनपुर ...
मज़दूर कह रहे हैं आ अब लौट चलें अपने वतन | S.M.Masoom ... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   3:30am 22 May 2020 #Social
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
ये समय सिर्फ मानवता का है... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   7:48pm 18 May 2020 #Social
Blogger: रेखा श्रीवास्तव at मेरा सरोकार...
आज विश्व परिवार दिवस है और यह भी पाश्चात्य सभ्यता से परिचय के बाद मनाने की हमारे देश में आवश्यकता हुई क्योंकि हम सदैव से संयुक्त परिवार और वृहत् परिवार को मान्यता देते रहे और इसीलिए परिवार की यह परिकल्पना विदेशों में बहुत ही इज्जत के साथ देखी जाती है, लेकिन जैसे-जैसे हम विदेशी सभ्यता के संपर्क में आए और हमारे ऊपर उच्च शिक्षा के बाद शहरी संस्कृति का प्रभाव पड़ा तो नई पीढ़ी ने एकल परिवार की परिभाषा समझी। वे संयुक्त परिवार की बजाए एकल परिवार में ज्यादा सुख खोजने लगे, ऐसे में हमारे देश की प्राचीन संस्कृति की धरोहर संयुक्त परिवार टूटने लगे । उनके बीच ज... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   8:26am 17 May 2020 #Social
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
संकट की घड़ियों में उम्मीदें पतवार के समान है... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   6:40am 13 May 2020 #Social
Blogger: S.M.MAasum at हमारा जौनपुर ...
मक़बरा डेरा शाह युसूफ अब बन चूका है सार्वजनिक शौचालय | ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   12:58pm 8 May 2020 #Social
Blogger: Pandit Ji at ई-पोथी...
निवेश क्या है, इसे समझना आवश्यक है। कम्पनी अपने विकास प्रसार के लिए, मार्केट में मिली चुनौतियों से निपटने के लिए,  अपने नये क्षेत्र मे रिसर्च के लिए इत्यादि के लिए जनसहभागिता के माध्यम से धन एकत्रित कर उनका उपयोग निरन्तर करती हैं । इस कारण जनमानस को कम्पनी अपने सहभागी के लिए लाभ का एक हिस्सा भी प्रदान करती है। अतः निवेशकों द्वारा निवेशित धन निवेश है, जो कम्पनी के लाभ-हानि, लाभांश से सीधे तौर पर जुड़े होते हैं ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   9:34am 7 May 2020 #Social
Blogger: Ghanta News at Ghanta News...
कोरोना से लड़ाई कई स्तर पर लड़ी जा रही है, एक तरफ हमारा मेडिकल स्टाफ, सेनिटाइज़र स्टाफ, आवश्यक वस्तुओं और दवाइयों के विक्रेता इस लड़ाई को लड़ रहे हैं तो वहीँ दुसरी तरफ हिचकोले खाती अर्थव्यवस्था को संभालने का ठेका नशे में झूमती देश की टल्ली सेना ने उठा लिया है। हमारे देश पर जब ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   6:43am 6 May 2020 #Social
Blogger: S.M.MAasum at S.M.MAsoom...
घूरती आँखों का दर्द|... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   3:40am 6 May 2020 #Social
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
आम आदमी की मजबूरी... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   9:50am 5 May 2020 #Social
Blogger: S.M.MAasum at S.M.MAsoom...
अकेलेपन का केवल एक इलाज जो आपसे मुहब्बत करे उसे इज़्ज़त दो |... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   8:41am 4 May 2020 #Social
Blogger: S.M.MAasum at S.M.MAsoom...
धर्म से निरपेक्ष की बात करना धोखा है | धर्म और राजनीति |... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   5:26pm 1 May 2020 #Social
Blogger: S.M.MAasum at हमारा जौनपुर ...
बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थों में से एक है सारनाथ जिसके दर्शन को आज जा पहुंचा | अन्य तीन लुम्बिनी, बोधगया और कुशीनगर की सैर पहले ही कर चूका हूँ | जौनपुर का इतिहास बौद्ध धर्म से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है इसलिए भी इन स्थानों को देखने की उत्सुकता मन में बनी रहती है | वैसे तो सारनाथ बहुत बार आया हूँ लेकन आज ऐतिहासिक दृष्टि से इस्पे नज़र डाले का मन बना लिया | सारनाथ में अशोक का चतुर्मुख सिंहस्तम्भ, भगवान बुद्ध का मन्दिर, धामेख स्तूप, चौखन्डी स्तूप, राजकीय संग्राहलय, जैन मन्दिर, चीनी मन्दिर, मूलंगधकुटी और नवीन विहार इत्यादि दर्शनीय हैं। सिंहों की मूर्ति वाला भ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   1:31pm 1 May 2020 #Social
Blogger: S.M.MAasum at हमारा जौनपुर...
https://www.hamarajaunpur.com/2020/04/blog-post_74.html https://www.youtube.com/watch?v=Xedo2Fx60gQ&t=39s अग्रहरि समाज पुरातन हनुमान मंदिर प्रेमराजपुर जौनपुर... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   2:10pm 29 Apr 2020 #Social
Blogger: S.M.MAasum at हमारा जौनपुर...
जौनपुर के साहित्यकार ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   11:34am 29 Apr 2020 #Social
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
ना तो सारे मुसलमान जमाती होते हैं और ना ही हर जमाती को कोरोना हुआ है और ना ही जमाती जानबूझकर बीमार हुए हैं। जो गलती मैजमेंट से हुई हो उसकी सज़ा भी उनकी जगह बीमारों को नहीं दी जा सकती है, बल्कि बीमारों के साथ सहानुभूति होनी चाहिये। हालांकि जैसी गलती मरकज़ मैनजेमेंट से हुई, वैसी गलती कम हो या फिर ज़्यादा परंतु उस समय हर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे में हो रही थी। लॉक डाउन होने तक हर जगह भीड़ जमा हो रही थी, धार्मिक ही नहीं सामाजिक और राजनैतिक कार्यक्रमों में भी... मरकज़ मैनेजमेंट की बड़ी गलती थी कि एडवाइज़री के बावजूद हज़ारों लोग जुटते रहे। हालांकि लॉक डाउन के बाद जो ल... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   1:02pm 28 Apr 2020 #Social
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
घर और दफ्तर के बीच झूलते रहना ही मेरी विवशता है, लेकिन इस विवशता में खिन्नता नहीं है, बल्कि उसी में आनंद और उत्साह लेने की मेरी प्रवृत्ति है। लेकिन इन दिनों परिस्थितियाँ कुछ भिन्न है, कोरोना वायरस के चलते लाॅकडाउन होने से जिन्दगी घर की चारदीवारी के चूल्हे-चौके के साथ ही टेलीविजन, मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया तक सिमटा हुआ है। इस समय टेलीविजन पर देश-दुनिया के दीनता भरे हाल-समाचारों की खिन्नता के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला रामायण व्यथित मन को कुछ शांति अवश्य प्रदान कर रहा है। हर दिन रामायण देखने के बाद मुझे मेरे अपने उत्तराखंडी रामलीला की बहुत ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   3:23am 26 Apr 2020 #Social
clicks 59 View   Vote 0 Like   11:35am 20 Apr 2020 #Social
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
इंसान अकेला ही इस दुनिया में आया है और अकेला ही जाएगा... एक मशहूर कहावत है कि "खाली हाथ आएं है और खाली हाथ जाना है।" फिर भी हम हर वक्त, इसी जुस्तजू में रहते हैं कि कैसे हमारा माल एक का दो और दो का चार हो जाएँ! जबकि सभी जानते हैं कि हम एक मुसाफिर भर हैं, और सफ़र भी ऐसा कि जिसकी हमने तमन्ना भी नहीं की थी। और यह भी पता नहीं कि कब वापिसी का बुलावा आ जाए! और वापिस जाना-ना जाना भी हमारे मर्ज़ी से नहीं है। कितने ही हमारे अपने यूँ ही हँसते-खेलते चले गए। वापिस जाने वालों में ना उम्र का बंधन होता है, ना रुतबे-पैसे का। इस दुनिया का एक बहुत बड़ा सच यह है कि यहाँ गरीब बिना इलाज के मर ज... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   3:47pm 19 Apr 2020 #Social
Blogger: रेखा श्रीवास्तव at मेरा सरोकार...
वर्तमान समय बच्चों , अभिभावकों , शिक्षकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। वैसे तो अब शिक्षा सत्र के बदल जाने से कुछ परिवर्तन आ ही गया है लेकिन फिर भी एक लम्बी छुट्टी के बाद बच्चों को स्कूल आने पर कुछ नया उत्साह रहता है। यद्यपि सत्र अप्रैल से शुरू होने लगा है लेकिन जुलाई का महीना भी प्रवेश की दृष्टि से , नए स्कूल की दृष्टि से और नए माहौल में नए बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है। अबोध बच्चों को एक नया ज्ञान और एदिशा शिक्षक को देनी होती है और बच्चों के लिए घर की चहारदीवारी से निकल कर और माँ को छोड़ कर कहीं और, किसी और के साथ रहना और रुकना थोड़ा मुश्... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   12:16pm 18 Apr 2020 #Social
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
मुसलमानों की आज की हालात के सबसे बड़े गुनाहगार अपने ज़ाती फायदे के लिए इमोशंस को भड़काकर टुकड़ों में बांटने वाले फ़िरको के दलाल हैं, या फिर अपने इमोशंस भड़काकर झूठ फैलाने वाले राजनैतिक दलाल हैं। इमोशनल तकरीरें देकर बेवकूफ बनाने वालों के चक्कर में पड़कर हमने सब को अपने से दूर कर लिया। आज कोई हमारा नाम नहीं लेना चाहता है। कोई हमारे हक़ में आवाज़ नहीं उठाना चाहता है। और जो आज उठा भी रहे हैं या साथ लेकर चल भी रहें हैं तो लिखकर रख लो कि अगर हम आज भी इमोशंस भड़काने वालों की बातों में आते रहे, तो कल वो भी साथ नहीं आने वाले हैं। सबसे पहले तो यह सोच दिल से निकाल दीजिये कि क... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   7:32am 18 Apr 2020 #Social
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
बड़ी हैरत की बात है कि जो लोग ऑफिसों में डाइवर्सिटी के नाम पर महिलाओं के अधिकारों पर ज़ोर देते हैं, बराबरी की बाते करते हैं, इसके नाम पर बड़ी-बड़ी नीतियां बनाते हैं, आखिर वही लोग महिलाओं की ही तरह सदियों से दबे-कुचले और सामाजिक पिछड़ेपन का दंश झेल रहे लोगों को आरक्षण दिए जाने के खिलाफ क्यों हो जाते हैं? क्या ऑफिसों में महिलाओं को नौकरी और सम्मान की व्यवस्था भी उसी तरह की कोशिश नहीं है जैसी कोशिश सदियों से सामाजिक दुर्व्यवहार झेल रही क़ौमों को बराबरी पर लाने के लिए नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के ज़रिये की जाती है? अगर हाँ, तो फिर यह दोहरा रवैया क्यों? ऑफिसों म... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   1:38pm 15 Mar 2020 #Social
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
दिल्ली की केजरीवाल सरकार के लिए कोई भी विचार बनाने से पहले हमारे लिए यह जानना अति आवश्यक है कि दिल्ली सरकार के पास प्रशासनिक अधिकार नहीं है। दिल्ली में सर्विस मैटर मोदी सरकार ने 2014 में ही नोटिफिकेशन लाकर LG के अधीन कर दिया था, मतलब दिल्ली सरकार के किसी भी अधिकारी/कर्मचारी की रिपोर्टिंग दिल्ली सरकार को नहीं है बल्कि LG को है। दिल्ली सरकार के अधीन आने वाला कोई भी अधिकारी/कर्मचारी अगर अपने दायित्वों को नहीं निभाता है, कामचोरी या गलत तरीके से काम करता है, रिश्वतखोरी में लीन होता है तो दिल्ली सरकार उसके ऊपर कोई एक्शन नहीं ले सकती है, सिर्फ कार्यवाही के लिए शि... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   6:05am 2 Mar 2020 #Social
Blogger: योगेश शर्मा at "अभिनन्दन "...
तेरे फ़लक से दोस्त मेरा आस्मां जुदा है तेरा अलग है मालिक मेरा अलग ख़ुदा है मेरे फ़लक में तारों के रंग दूसरे हैं सूरज के चमकने के ढंग दूसरे हैं ज़मीन एक ही है लेकिन हवा जुदा है तेरा अलग है मालिक मेरा अलग ख़ुदा है ग़लती से अपना चेहरा है बहुत मिलता जुलता दोनों की रग़ों में है लाल रंग पलता पँख एक से हैं परवाज़ अलग अपनी दिल के धड़कने की आवाज़ अलग अपनी एक दिल ने अम्मी अम्मी एक दिल ने माँ कहा है तेरा अलग है मालिक मेरा अलग ख़ुदा है लिखावटें अलग हैं अलफ़ाज़ दूसरे हैं मतलब बताने वाले उस्ताद दूसरे हैं लेकिन सबक नया अब एक सा पढ़ा है रब से भी ज़्यादा अपना, मज़हब कहीं बड़ा है कश्त... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   11:12am 12 Jan 2020 #Social
Blogger: Asha News at Alirajpur News, News Alirajpur Toda...
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन अंतर्गत नगर पालिका परिषद अलीराजपुर में आजीविका मेला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप मे नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती सेना पटेल एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता उपाध्यक्ष नगरपालिका परिषद् संतोष (मकु) परवाल, विशेष अतिथि के रूप में प्रभारी कल... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   9:05am 21 Dec 2019 #social
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
बलात्कार जैसी घटनाओं के लिए पुरुषों में "पुरुष" होने का दंभ भी एक कारण है। पुरुषों को बचपन से यह ही यह अहसास दिलाया जाता है कि वह पुरुष होने के कारण महिलाओं से अलग हैं, उनका होना ज्यादा अहमियत रखता है। अगर हम बचपन से बेटों को विशेष होने और लड़कियों को कमतर होने का अहसास कराना बंद कर दें तो स्थिति काफी हद तक सुधर सकती है। क्योंकि इसी अहसास के साथ जब वह बाहर निकलते हैं तो लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार करने में मर्दानगी समझते हैं। उनकी नज़रों में लड़कियां वस्तु भर होती हैं। यह सब इसलिए है क्योंकि बचपन से बेटों और बेटियों में फर्क किया जाता है। समाज बेटिय... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   6:20am 8 Nov 2019 #Social
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