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Tag: Poem

Blogger: Sweta sinha at मन के पाखी...
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के जीवित ज्वालामुखी, शांत राख में दबी चिनगारियाँ, सैनिक मेरे देश के। हुंकार मृत्यु की जयघोष विजय, शत्रुओं की हर आहट पर तुमुलनाद करती दुदुंभियाँ, सैनिक मेरे देश के। माँ-बाबू के कुम्हलाते नेत्रों की चमकती रोशनी, सिंदूरी साँझ में प्रतीक्षित विर... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: Sweta sinha at मन के पाखी...
सूर्य की किरणें निचोड़ने पर उसके अर्क से गढ़ी आकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। चाँदनी की स्वप्निल डोरियों से उकेरे रेखाचित्र स्निग्ध,धवल बुनावट,यथार्थ की मोहक कलाकृतियाँ, सैनिक मेरे देश के। पर्वतों को गलाकर बाजुओं में धारते, वज्र के परकोटे, विषबुझी टहनियाँ, सैनिक मेरे देश के। लक्ष्मण रेखा, सीमाओं के जीवित ज्वालामुखी, शांत राख में दबी चिनगारियाँ, सैनिक मेरे देश के। हुंकार मृत्यु की जयघोष विजय, शत्रुओं की हर आहट पर तुमुलनाद करती दुदुंभियाँ, सैनिक मेरे देश के। माँ-बाबू के कुम्हलाते नेत्रों की चमकती रोशनी, सिंदूरी साँझ में प्रतीक्षित विर... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   9:10am 1 Jul 2020 #Poem
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
दो पीठ के बीच का फांसला मुड़ने के बाद ही पता चल पाता है हालांकि इन्च भर दूरी उम्र जितनी नहीं पर सदियाँ गुज़र जाती हैं तय करने में "ईगो" और "स्पोंड़ेलाइटिस" कभी कभी एक से लगते हैं दोनों फर्क महसूर नहीं होता दर्द होता है मुड़ने पे पर मुश्किल भी नहीं होती जरूरी है बस एक ईमानदार कोशिश दोनों तरफ से एक ही समय, एक ही ज़मीन पर हाँ ... एक और बात ज़रूरी है मुड़ने की इच्छा का होना ... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   4:05pm 22 Jun 2020 #Poem
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
कुछ अच्छे के लिये कुछ छोडना ही पडता है ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   10:26am 12 Jun 2020 #Poem
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
इन्तजार में महबूब, जरा पलकें तो बिछायें वक्त पर पहुचना, हमेशा अच्छा नही लगता... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   3:26pm 10 Jun 2020 #Poem
Blogger: रेखा श्रीवास्तव at hindigen...
वो संगतराश जिसे लोग पत्थर दे जाते थे कुछ अपने होते थे और कुछ पराये भी होते , वह उन्हें तराश कर ढाल देता एक आकार में । रास्ते के वे पत्थर मुखर हो उठते । आते वे और ले जाते, किसी ने सजा लिया घर में और किसी ने भेंट कर दिया । किसी ने बैठाकर मंदिर में, उन्हें टकसाल बना लिया । वो जिंदगी भर उन बेतरतीब पत्थरों को रूप देता रहा, आकार देता रहा सिर्फ हुनर के लिए लेकिन उसका खरीददार कोई न था । पत्थर मेरा तो हकदार भी हम तुम्हें गढने का शौक था फिर उस आकृति से क्या ? कभी सवाल किया - तो दुत्कार दिया तुम्हारा हुनर मेरे ही पत्थरों पर निखरा वर्ना कौन जानता था ? ये आकृतियाँ भ... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   6:38pm 9 Jun 2020 #Poem
Blogger: BHARAT THAKUR at आपकी जिंदगी...
व्यक्तियों में प्रधान जो है बुद्धिमान बुद्धिमानों का कमान है भाषा ज्ञान ज्ञानों की विशेषता विविध भाषा ज्ञान विविध भाषाओँ के जानकार सचमुच महान l १ l ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   4:59pm 2 Jun 2020 #Poem
Blogger: BHARAT THAKUR at आपकी जिंदगी...
आज फिर उन बातों को हवा दे गई जिसे दवा रखा था हृदय के किसी कोने में आज फिर उसे जगा गई मन शांत, तन शिथिल, धड़कन तेज़ और शिलाओं को क्षणभंगु का आभास करा गई... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   4:55pm 2 Jun 2020 #Poem
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
dreams never ends but it needs celebration whenever it comes true.... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   7:26am 26 May 2020 #Poem
Blogger: Mukesh Kumar Sinha at जिंदगी की राह...
क्या लिखी जा सकती है कविताजो हो तुम्हे समर्पितजिसके शब्द शब्द मेंतुमसे जुड़ा हर एहसास हो समाहितजैसे, बहती नदी सा कलकल करता बहावऔर दूर तलक फैली हरियालीअंकुरण व प्रस्फुटन की वजह सेदे रही थी सुकून भरी संतुष्टिपर वहींसमुद्र व उसका जल विस्तारबताता है नसुकून से परेजिंदगी... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   9:49am 18 May 2020 #POEM
Blogger: रेखा श्रीवास्तव at hindigen...
जिसे न कोई रोपे जग मेंं, खुद ब खुद उगता बढ़ता हूँ नहीं धूप वर्षा की जरूरत रहते जिसमें शूल ही शूल, ्हाँ मैं शूल हूँ बबूल ! नहीं चाहिए खाद औ पानी फिर भी करके मैं मनमानी जहाँ तहाँ उग ही आता हूँ चाहे धरती हो प्रतिकूल हाँँ मैं हूँ बबूल !... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   1:30pm 17 May 2020 #Poem
Blogger: रेखा श्रीवास्तव at hindigen...
हाइकु ये धरा हिली वो महसूस किया हिला ये जिया। *** भय में जीना मरने से बुरा है दण्ड निरा है। *** जीवन अब अनुशासित जीना नहीं है खोना। *** विश्व आ रहा अब पीछे हमारे वेदों के द्वारे। *** कोरोना क्या है? प्रकृति की सज़ा है एक रज़ा है । *** ... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   8:37am 17 May 2020 #Poem
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari at कवितायन...
क्या बड़े लोग केवल भोंपू की तरह ही होते हैं?... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   6:34am 16 May 2020 #Poem
Blogger: BHARAT THAKUR at आपकी जिंदगी...
वह गॉंव की धरती पीले पीले सरसो देखे हुए आज हुआ मुझे बरसो खेतो की मस्ती और बादल की हस्ती कहती है मुझसे आजाओ तुम बस्ती l १ l पीपल के पत्ते, सावन की राते याद हमें है उनकी सताते पेड़ो की छाया और ममता की माया कहती है क्यों तुमने हमें भुलाया l 2 l जीवन के दिन होते है छोटे आजाओ घर तुम मेरे बेटे पनघट की पानी, बचपन जवानी कहती है मुझसे कहानी पुरानी सावन के दिन तो लगते सुहाने फिर क्यों हो तुम इनसे बेगाने l 3 l वह गॉंव की गोरियां, बागो की कलियाँ बुलाती है मुझको अपने गलियां हम है यहाँ, पर मन है वहाँ ... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   12:23pm 12 May 2020 #Poem
Blogger: BHARAT THAKUR at आपकी जिंदगी...
शायरी - मेरी ख़ता नहीं ... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   5:26pm 10 May 2020 #Poem
clicks 28 View   Vote 0 Like   1:41pm 10 May 2020 #Poem
Blogger: Hindi Sansar at HindiSansar...
Husn Shayari in Hindi-सुंदरता की तारीफ शायरी ... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   3:58am 8 May 2020 #Poem
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
एक गाँव की लड़की शहर में पनाह ढूँढती रही अपना नाम बता के अपना पता पूछती रही अपने हिस्से के कुछ किस्से लेकर सबके मन के द्वार खटखटाती थी थोड़ा अपनापन माँगती थी, मुट्ठी भर जमीन चाहती थी कभी किसी ने उसकी परवाह न की पर अब वह खुद भी बेपरवाह हो चुकी है न घर मिला न मन मिला न मान मिला न ठौर न ठिकाना मिला सबने कहा वह गँवारू है किसी काम की नहीं न शहर के लायक न किसी घर के लायक पर अब वह उदास नहीं रहती, अब उसकी चुप्पी टूट चुकी है वह पलायन न करेगी, ढ़ीठ होकर बढ़ेगी वह देसी बोली बोलती है, उसे गर्व है अपनी बोली पर वह गाँव की गँवार है, उसे गर्व है अपने गँवारूपन ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   5:55pm 1 May 2020 #Poem
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
समय का यह दौर जीवन की अहमियत, जीवन की ज़रुरत सिखा रहा है मुश्किल के इस रंगमहल में आशाओं का एक झरोखा जिसे, पत्थर का महल बनाने में सदियों पहले बंद किया था हमने अब खोलने का वक्त आ गया है ताकि एक बार फिर लौट सके, सपनों का सुन्दर संसार सूरज की किरणों की बौछार बारिश की बूंदों की फुहार हो सके चाँदनी की आवाजाही आ सके हवाएँ झूमती नाचती गाती हम ताक सकें आसमान में चाँद तारों की बैठक आकृतियाँ गढ़ती बादलों की जमात पक्षियों का कलरव रास्ते से गुजरता इंसानी रेला हमारी ज़रूरतों के सामानों का ठेला हम सुन सकें हवाओं का नशीला राग बादलों की गड़गड़ाहट धूल म... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   5:33pm 26 Apr 2020 #Poem
Blogger:  at काव्यरचना ...
हृदय आज उठा मचल देख गगन पनघट पर चन्द्र की गागर हिलोर तारे मनहुं हुए जलज नव दल, नव पुष्प कमल नव प्रभात किरण नवल गूंज उठा खगकुल चहल महक उठा विश्व महल ओस की ज्यों बूंद सजी सुमन के जा माथ लगी भ्रमर करे गूंज गीत पूरा ब्लॉग www kavyarachana.blogspot.com अर्चना मिश्रा... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   4:29pm 25 Apr 2020 #Poem
clicks 99 View   Vote 0 Like   4:05pm 23 Apr 2020 #Poem
Blogger: nilesh mathur at आवारा बादल...
प्रेमी हूँ मैं... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   12:49pm 22 Apr 2020 #Poem
clicks 65 View   Vote 0 Like   9:16am 21 Apr 2020 #Poem
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
सबकुछ मिट्टी से पैदा होकर फिर उसी में मिल जाता है राजा हो या रंक सबका अंत एक-सा होता है। उसी का जीवन सार्थक है जो गलतियों से फायदा उठाता है हमेशा जीते रहेंगे सोचने वालों का जीवन बेकार हो जाता है समय किसी अस्तबल में खूंटे से बंधे घोड़े जैसा नहीं रहता है प्रतिकूल समय में अपने आपको उसके अनुकूल ढ़ालना पड़ता है ऐसा कोई घाव नहीं जिस पर वक्त मरहम नहीं लगा पाता है रण कौशल दिखलाने वालों का ही इतिहास लिखा जाता है जहाँ फरिश्ते भी कदम रखने से डरें वहाँ मूर्ख दौड़े चले जाते हैं बुद्धिमान सत्य तो मूर्ख झूठ का पता लगाकर खुश होते हैं सब गधे चार पाँव वाले नहीं होते हैं मू... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   10:46am 20 Apr 2020 #Poem
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