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Tag: Munshi Premchand

Blogger: Krishna Kumar Yadav at डाकिया डाक ला...
हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में प्रसिद्ध मुंशी प्रेमचंद के पिता अजायब राय श्रीवास्तव डाकमुंशी के रूप में कार्य करते थे। ऐसे में प्रेमचंद का डाक-परिवार से अटूट सम्बन्ध था। मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए पीढ़ियाँ बड़ी हो गईं। उनकी रचनाओं से बड़ी आत्मी... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   4:41pm 31 Jul 2020 #Munshi Premchand
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी at अनवरत...
- प्रेमचन्द राष्ट्रीयता वर्तमान युग का कोढ़ है. उसी तरह जैसे मध्यकालीन युग का कोढ़ साम्प्रदायिकता थी. नतीजा - दोनों का एक है. साम्प्रदायिकता अपने घेरे के अन्दर पूर्ण शक्ति और सुख का राज्य स्थापित कर देना चाहती थी, मगर उस घेरे के बाहर जो संसार था, उसको नोंचने-खसोटने मे... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   12:40am 28 Aug 2019 #Munshi Premchand
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी at अनवरत...
साम्प्रदायिकता और संस्कृतिप्रेमचन्द'साम्प्रदायिकता और संस्कृति'प्रेमचंद का महत्वपूर्ण लेख है जिस में साम्प्रदायिकता के पाखंड को उजागर करते हुए बताया गया है कि संस्कृति और साम्प्रदायिकता का वही संबंध है जो सिंह और सिंह की खाल ओड़े गधे का होता है।साम्प्रदायिकता स... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   10:19am 31 Jul 2017 #Munshi Premchand
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी at अनवरत...
व्यंग्यहरिशंकर परसाईप्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं। सर पर किसी मोटे कपडे की टोपी, कुरता और धोती पहिने हैं। कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियाँ उभर आई हैं, पर घनी मूंछे चहरे को भरा-भरा बतलाती है।पाँवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बे... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   8:02am 31 Jul 2014 #Munshi Premchand
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी at अनवरत...
 मुंशी प्रेमचन्दयह सवाल टेढ़ा है कि लोग शादी क्यों करते है? औरत और मर्द को प्रकृत्या एक-दूसरे की जरूरत होती है लेकिन मौजूदा हालत में आम तौर पर शादी की यह सच्ची वजह नहीं होती बल्कि शादी सभ्य जीवन की एक रस्म-सी हो गई है। बहरलहाल, मैंने अक्सर शादीशुदा लोगों से इस बारे मे पू... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:24am 31 Jul 2014 #Munshi Premchand
clicks 174 View   Vote 0 Like   7:30pm 30 Oct 2013 #Munshi Premchand
Blogger: दिनेशराय द्विवेदी at अनवरत...
प्रेमचन्द की इस कहानी को ले कर 4 अगस्त के जनसत्ता में किसी 'धर्मवीर'ने अपने लेख "हम प्रेमचंद को जानते हैं"के माध्यम से कानून और नैतिकता के सवाल खड़े किए हैं और प्रेमचन्द की प्रगतिशीलता को उछाला है। जब कि ये कहानी कहती है कि स्त्री-पुरुष का समानता पर आधारित प्रेम किस तरह प... Read more
clicks 228 View   Vote 1 Like   5:14am 5 Aug 2013 #Munshi Premchand
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