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Tag: Hindi poem on nature

Blogger: Rajeev Ranjan Giri at अनुगूँज (Anugoonj)...
फिर चलता हूँ गर रुकता हूँमैं तपता हूँ मैं गलता हूँकिस्मत कह लो, सूरज कह लोफिर उगता हूँ गर ढलता हूँउजियारे सब तुमही रख लोअंधियारे में मैं रहता हूँजुगनू कह लो, दीपक कह लोफिर जलता हूँ गर बुझता हूँमंजिल मुबारक तुमको, मैं तोराहों से पत्थर चुनता हूँइंसाँ कह लो, झरना कह लोफिर ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   9:13am 26 Jun 2016 #Hindi poem on nature
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