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Tag: ग़ज़ल

Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
प्यार करते रहे  *******   तुम न समझे फिर भी हम कहते रहे   प्यार था हम प्यार ही करते रहे !   छाँव की बातें कहीं, और चल दिए   जिंदगी की धूप में जलते रहे !   तुम न आए जब, जहां हँसता रहा   जिंदगी रूठी औ हम ठिठके रहे !   चैन दमभर को न आया था कभी   और तुम कहते हो, हम हँस... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   9:47am 13 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: M VERMA at जज़्बात...
खाना नाही, बिजली आउर पानी नाही बाइ शहर में आउर कौनो परेशानी नाही बा मनई क देखा कान कुतर देहलेस चूहवालागेला कि इ शहर में चूहेदानी नाही बादेखे के पहलवान जैसन लोग दिख जालन  सच सुना कि इहा मगर जवानी नाही बाइज्जत आबरू क लूटन रोज क बात हौ बतावा के कही कि इ राजधानी नाही बा इन ल... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   3:54am 13 Apr 2019 #ग़ज़ल
Blogger: Himkar Shyam at शीराज़ा [Shiraza]...
हज़ारों रंग ख़ुशबू से  बना गुलदान है भारत कई तहज़ीब,भाषा,धर्म की पहचान है भारत कहीं गिरजा, कहीं मस्जिद, शिवाला और गुरुद्वाराकभी होली कभी क्रिसमस कभी रमज़ान है भारत कोई नफ़रत भी बोता तो पनपती है मोहब्बत हीअज़ब जादू है माटी में, कोई वरदान है भारत चलो मिलकर बचाएँ हम इसे फ़िरक़... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   4:50am 16 Aug 2018 #ग़ज़ल
Blogger: Rajeev Bharol at इन्द्रधनुष...
पुराने दोस्तों की मेज़बानी याद आयेगीतुम्हें महलों में भी बस्ती पुरानी याद आयेगीवो फुर्सत की दुपहरी और वो फरमाइशी नगमेतुम्हें परदेस में आकाशवाणी याद आएगीसमंदर का सुकूं बेचैन कर देगा तुम्हें जिस दिननदी की शोख लहरों की रवानी याद आएगीफकीरी सल्त्नत है हम फकीरों की तुम्... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   6:01am 1 Mar 2018 #ग़ज़ल
Blogger: अरुण कुमार निगम at अरुण कुमार नि...
ग़ज़ल पर एक प्रयास -आप कितने बड़े हो गए हैंवाह चिकने घड़े हो गए हैंपाँव पड़ते नहीं हैं जमीं पेकहते फिरते, खड़े हो गए हैंदिल धड़कता कहाँ है बदन मेंहीरे मोती जड़े हो गए हैंपत्थरों की हवेली बनाकरपत्थरों से कड़े हो गए हैंशान शौकत नवाबों सरीखीफिर भी क्यों चिड़चिड़े हो गए हैं ।अरुण कुमा... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   12:54pm 1 Jul 2017 #ग़ज़ल
Blogger: कूड़ा-करकट at कूड़ा-करकट ...
  ग़ज़ल मिर्ज़ा ग़ालिब की और फोटों खींचे हैं  मैंने                                                                                        -  आमिर'विद्यार्थी'                                           &... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   1:22pm 23 Jun 2017 #ग़ज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- प्राण शर्मा वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर हैं और इन दिनों ब्रिटेन में अवस्थित हैं। आप ग़ज़ल के जाने मानें उस्तादों में गिने जाते हैं। आप के "गज़ल कहता हूँ'और 'सुराही'काव्य संग्रह प्रकाशित हैं, साथ ही साथ अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं। ग़ज़ल -1 - प्राण शर्मा... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   6:30pm 15 Jun 2017 #ग़ज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- प्राण शर्मा वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर हैं और इन दिनों ब्रिटेन में अवस्थित हैं। आप ग़ज़ल के जाने मानें उस्तादों में गिने जाते हैं। आप के "गज़ल कहता हूँ'और 'सुराही'काव्य संग्रह प्रकाशित हैं, साथ ही साथ अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं। जब किसीसे जब कभी झ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   6:30pm 8 May 2017 #ग़ज़ल
Blogger: Himkar Shyam at शीराज़ा [Shiraza]...
हरे जंगल जो कटते जा रहे हैंयहाँ मौसम बदलते जा रहे हैं किधर जाएँ यहाँ से अब परिंदेनशेमन सब उजड़ते जा रहे हैं नयेपन की हवा ऐसी चली हैउसी रंगत में ढ़लते जा रहे हैं नयी तहज़ीब में ढलता ज़मानारिवायत को बदलते जा रहे हैं सिखाते हैं सलीका हमको दीयेहवाओं में जो जलते जा रहे हैं ... Read more
clicks 278 View   Vote 0 Like   1:23pm 5 Jun 2016 #ग़ज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
मिले थे दिल जहाँ दिल से वहीँ इक बार आ जाना, मुहब्बत कितनी है हम से कसम तुमको बता जाना| रचनाकार परिचय:- अनन्त आलोक साहित्यलोक , बायरी , ददाहू , सिमौर हिमाचल प्रदेश 173022 Mob: 09418740772 Email: anantalok1@gmail.com रही मजबूरियां होंगी वफ़ा हम कर नहीं पाए, निभाया हमने हर रिश्ता सदा ही बा-वफ़ा जाना... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   6:30pm 21 Sep 2015 #ग़ज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
ये रिश्ते और ये शादी सभी केवल बहाना ....है , मुहब्बत वो तराना है जो सबको गुनगुनाना है | रचनाकार परिचय:- अनन्त आलोक साहित्यलोक , बायरी , ददाहू , सिमौर हिमाचल प्रदेश 173022 Mob: 09418740772 Email: anantalok1@gmail.com चला है कौन सा नम्बर तुम्हारी आइडी है क्या , मुझे इतना बता देना तुम्हारा क्या ठिकाना ..... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   6:30pm 21 Aug 2015 #ग़ज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
ख़ुशी की बात होठों पर ग़मों की रात होठों पर , चले आओ कि होने दो सनम बरसात होठों पर | रचनाकार परिचय:- अनन्त आलोक साहित्यलोक , बायरी , ददाहू , सिमौर हिमाचल प्रदेश 173022 Mob: 09418740772 Email: anantalok1@gmail.com बड़ा जालिम जमाना है फँसा देगा सवालों में , मैं आने दे नहीं सकता तुम्हारी बात ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   6:30pm 21 Jul 2015 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
           अंदाज़े-वयांज़िंदगीका....जरूरीनहींज़िंदगीकोघुट-घुटकेजियाजाए | चलोआजज़िंदगीकाअंदाज़े-वयांलियाजाए | खुशीपातेहैंजोअपनीशर्तोंपेजियाकरतेहैं ..शर्त  यही  कि सदापरमार्थ  हित  जियाजाए ..| यूंतोपीनेकेकितनेबहाने हैं  ज़मानेमें, लुत्फ़हैजबजाम... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   6:48pm 3 Nov 2014 #ग़ज़ल
Blogger: dimple sirohi at ज़िक्र-ए-ख़या...
वो कामयाब क्या हुए, इतरा रहे हैं यूंजैसे कि उनके पांव के नीचे जमीं नहीं।परवाने जल के मर गए, शमा न बुझ सकीबदले हजार दौर, मगर रोशनी रही।हमने दिए जलाए थे इक इश्तियाक सेजल जाएगा शहर ही ये सोचा न था कभी।फुरसत के लम्हे मांग के मसरूफियत से तुम,आओ कि बेकरारी की आदत नहीं रही।इजहार... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   12:57pm 26 Jul 2014 #ग़ज़ल
Blogger: dimple sirohi at ज़िक्र-ए-ख़या...
रह गई किस चीज की मुझमें कमी कुछ तो कहोकिस तरह होगी मुकम्मल जिंदगी कुछ तो कहोआज तो जलता हुआ था धूप में मौसम मगर,फिर हवा में आ गई कैसी नमी, कुछ तो कहोआसमां सुनसान है क्यों, गुम खड़े हैं क्यों दरख्त,शहर क्यों उजड़ा हुआ है, तीरगी कुछ तो कहोघंटियों की क्यों सदा आती नहीं मंदिर से अ... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   11:47am 14 Jul 2014 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at ब्लॉगमंच...
सावन की है छटा निरालीधरती पर पसरी हरियालीतन-मन सबका मोह रही हैनभ पर घटा घिरी है कालीमोर-मोरनी ने कानन मेंनृत्य दिखाकर खुशी मना लीसड़कों पर काँवड़ियों की भीघूम रहीं टोली मतवालीझूम-झूम लहराते पौधेधानों पर छायीं हैं बालीदाड़िम, सेब-नाशपाती के,चेहरे पर छायी है लालीलेकि... Read more
clicks 331 View   Vote 0 Like   1:11am 3 Jul 2014 #ग़ज़ल
Blogger: Ashutosh Mishra at My Unveil Emotions...
पीना न तुम शराब ये आदत ख़राब है कहती है हर किताब ये आदत ख़राब है बदनाम तुमने कर दिया देखो शराब को पीते हो बेहिसाब ये आदत ख़राब है कोई सवाल पूछे बला से जनाब कीदेते नहीं जवाब ये आदत ख़राब हैइक घूँट जिसने पी कभी कैसे कहे बुरा हरगिज न हो जवाब ये आदत ख़राब हैतकदीर से ये हुस्... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   8:44am 15 Jan 2014 #ग़ज़ल
Blogger: Ashutosh Mishra at My Unveil Emotions...
पीना न तुम शराब ये आदत ख़राब है कहती है हर किताब ये आदत ख़राब है मुफलिस को भी नवाब जो पल भर में बना दे उसको जहर ख़िताब ये आदत ख़राब है बदनाम कर दिया है खुद तुमने शराब को पीते हो बेहिसाब ये आदत ख़राब है इक घूँट जिसने पी कभी कैसे कहे बुरा हरगिज न हो जवाब ये आदत ख़राब है ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   8:44am 15 Jan 2014 #ग़ज़ल
Blogger: Ketan Kanaujia at खामोश पहलू...
हर ग़ज़ल का अपना एक नशा होता है, जिसके ख़ुमार का मज़ा ग़ज़ल कहने वाला और सुनने वाला दोनों लेते हैं... ग़ालिब, मीर, दाग़, फैज़, फ़राज़, फ़िराक, इकबाल, बशीर, कैफ़ी, जिगर...  सभी ने अपने पढ़ने और सुनने वालो को बे-इन्तेहा अजीज़ सुखन दिए हैं... शायर रहे न रहे उसकी ग़ज़ल किसी न किसी बज़्म को ता-वक़्त र... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   5:01pm 22 Oct 2013 #ग़ज़ल
Blogger: Arun Sharma at प्रणय - प्रेम -...
फाईलु / फाइलातुन / फाईलु / फाइलुनवज्न : २२१, २१२२, २२१, २१२नैनो के जानलेवा औजार से बचें,करुणा दया ख़तम दिल में प्यार से बचें,पत्थर से दोस्त वाकिफ बेशक से हों न हों,है आईने की फितरत दीदार से बचें,आदत सियासती है धोखे से वार की,तलवार से डरे ना सरकार से बचें,महँगाई छू रही अब आसमान क... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:28am 24 Jun 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर at वीरांशवीरां...
अब हमने धक्का देना छोड़ दिया है! रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है | या हम दाना हुए या तुम में वो बात नहीं, या इश्क ने ही जादू टोना छोड़ दिया है | रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है… कोई पूछे तो अब भी तेरा ही नाम लेते हैं, मुद्दत [...]... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   4:39am 4 Jun 2013 #ग़ज़ल
Blogger: वीर at वीरांशवीरां...
मेरे लफ्ज़ मुझसे पराये तो नहीं, मेरी तरह वो तुम्हें पसंद आये तो नहीं | क्या लफ़्ज़ों को है गिला-शिकवा बहुत ? क्या कहीं वो भी मेरे सताये तो नहीं | मेरे लफ्ज़ मुझसे पराये तो नहीं… सहरा तक पहुँचती हर एक मौज से पूछो, क्या उसने कोई सफीने डुबाये तो नहीं | मेरे लफ्ज़ [...]... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   4:06am 4 Jun 2013 #ग़ज़ल
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