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Tag: हिन्दी

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at आपका ब्लॉग...
दया सभ्यता प्रेम समाहित जिसके बावन बरनों मेंशरणागत होती भाषाएं जिसके पावन चरनों मेंजिसने दो सौ साल सही है अंग्रेजों की दमनाईधीरज फिर भी धारे रक्खा त्याग नहीं दी गुरताईतुमको अब तक भान नहीं है हिन्दी की करूणाई काजिसने सबको गले लगाया ममतारूपी माई कालेकिन बातें चल निक... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:09am 15 Sep 2018 #हिन्दी
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
              हिन्दी के विरुद्ध षडयंत्र ...डा श्याम गुप्त             स्वतन्त्रता के आन्दोलन के साथ हिन्दी की प्रगति का रथ भी तेज़ गति से आगे बढ़ा और हिन्दी राष्ट्रीय चेतना की प्रतीक बनी| स्वाधीनता आन्दोलन का नेतृत्व यह जानता था कि लगभग १०... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   11:42am 6 Sep 2016 #हिन्दी
Blogger: HARSHVARDHAN SRIVASTAV at हिन्दी चिट्ठ...
हिंदी को लेकर अमूमन दो तरह की बातें होती हैं। एक तो यह है कि अंग्रेजी के दबाव में हिंदी का क्षरण हो रहा है। स्कूलों में शुरू से ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होती है, जिससे बच्चे हिंदी लिखना-पढ़ना नहीं सीख पा रहे हैं। हिंदी बोलना हीनता का लक्षण माना जाता है और हिंदी बोलने वा... Read more
clicks 370 View   Vote 0 Like   5:22pm 9 Jan 2016 #हिन्दी
Blogger: HARSHVARDHAN SRIVASTAV at हिन्दी चिट्ठ...
इसे महज इत्तेफाक कहें, या शर्म की बात कि मातृभाषा अपने ही देश में वजूद खोती नजर आ रही है। आज ऐसा माहौल बन गया है कि जो हिंदी में बोलता है या जिसे अंग्रेजी नहीं आती, उसे लोग कम पढ़ा-लिखा समझते हैं या उसका मजाक उड़ाते हैं। यही वजह है कि ज्यादातर लोग अपने बच्चों को हिंदी स्कूल भ... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   3:02pm 19 Oct 2015 #हिन्दी
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
कल गण्तंत्र दिवस था, सोचा घर पर बैठे रहने से तो अच्छा है कि किसी समारोह में शामिल हो लिया जाय, किन्तु सर्दी बहुत ज्यादा होने के कारण दिल्ली तक जाने की हिम्मत नही जुटा सकी, सो सोचा पास के ही किसी संस्थान में चलते हैं, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की इच्छा नही थी, तो पास के ही एक... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   2:17pm 28 Jan 2015 #हिन्दी
Blogger: pawan kumar mishra at 'दि वेस्टर्न ...
हिंदी का उन्नयन: समस्यायें और समाधानभारतएकलोकतान्त्रिकदेशहै। लोकतंत्रमेंजनमतकेआधारपरनीतियांतयकीजातीहैं।जोलोगजनप्रतिनिधित्वकेइच्छुकहोतेहैंवहजनताकेपास जातेहैंऔरजनकल्याणहेतुअपनाएजेंडाउनकेसम्मुख रखतेहैं। जिसकाएजेंडाजनताकोसहीलगताहैजनताउसे... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   2:09pm 3 Dec 2014 #हिन्दी
Blogger: pawan kumar mishra at 'दि वेस्टर्न ...
  भारत एक लोकतान्त्रिक देश है।  लोकतंत्र में जनमत के आधार पर नीतियां तय की जाती हैं।  जो लोग जनप्रतिनिधित्व के इच्छुक होते हैं वह जनता  जाते हैं और जनकल्याण हेतु अपना एजेंडा उनके सम्मुख  रखते हैं।  जिसका एजेंडा जनता को सही लगता है जनता उसे अपना प्रतिनिधि चु... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   2:09pm 3 Dec 2014 #हिन्दी
Blogger: प्रमोद जोशी at जिज्ञासा...
हिंदी पत्रकारिता का हिंदी से क्या रिश्ता है?0Submitted by admin on Sat, 2014-09-13 18:35प्रमोद जोशीपूर्व संपादक, हिन्दुस्तानहिंदी के नाम पर हम दो दिन खासतौर से मनाते हैं। पहला हिंदी पत्रकारिता दिवस, जो 30 मई 1826 को प्रकाशितहिंदी के पहले साप्ताहिक अख़बार ‘उदंत मार्तंड’ की याद में मनाया ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   6:41am 14 Sep 2014 #हिन्दी
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
हिन्दी-- एतिहासिक आइना एवं वर्तमान परिदृश्य ...डा श्याम गुप्त का आलेख....             हिन्दी भाषा की वर्तमान स्थिति के परिदृश्य मेंविभिन्न परिस्थितियों व स्थितियों पर दृष्टि डालने के लिए पूरे परिदृश्य को निम्न कालखण्डों में देखा जा सकता है---     ... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   6:05pm 13 Sep 2014 #हिन्दी
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at आपका ब्लॉग...
क्या जरुरी है की इश्क करें और बेकरार हो जाएँ चोरी करें और फरार हो जाएँ जुर्म करें और गिरफ्तार हो जाएँ भलाई करें और कुसूरवार हो जाएँइंतजार करें और चौकीदार हो जाएँ दिन काटें सोकर और बेकार हो जाएं देते रहें मशवरें और सलाहकार हो जाएँ बिक जाएँ सियास... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   12:38pm 16 Sep 2013 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
हाथी धरती पर पाए जाने वाले सबसे ताकतवर जीवों में से हैं. इनका वजन 5 से 7 टन तक होता है और ऊँचाई 11 फुट तक. वे बड़े-बड़े वृक्षों को उखाड़ फेंकने की क्षमता रखते हैं. लेकिन चिडियाघरों, सर्कसों और ट्रेनिंग की जगहों पर उन्हें लोहे की जंजीरों से बांधकर रखा जाता है. वे चाहें तो एक झटक... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   6:47am 1 Nov 2012 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
मैं असीम त्रिवेदी को कुछ दिन पहले तक नहीं जानता था. गिरफ्तारी के बाद जाना. उनके कार्टून्स भी उसके बाद ही देखे. मुझे कोई बहुत उच्च कोटि के कार्टूनिस्ट नहीं लगे.  भ्रष्टाचार के विरोध में साधारण स्तर के कार्टून्स बनाते हैं जो ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ की साईट और फेसबुक पेज ... Read more
clicks 309 View   Vote 0 Like   11:38am 11 Sep 2012 #हिन्दी
Blogger: readers editor at आनंद जोशी...
भारत में हिन्दी को लेकर भले ही अभी हम संतुष्ट न हों, लेकिन विदेशों में हिन्दी बढ़ रही है। इसका श्रेय एक ओर विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों को है, वहीं विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों, सरकारी व निजी संस्थाओं और संगठनों को भी है, जिनके निरन्तर प्रयास हिन्दी को आगे बढ़ा ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   7:45am 4 Sep 2012 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
जेएनयू में कोरियन लैंगुएज से बीए करते हुए टर्किश/तुर्की भाषा का ऑप्शनल कोर्स लिया था. दो सेमेस्टर तक पढ़ा था, हफ्ते में एक क्लास; मतलब कुल मिलाकर 30-35 क्लासेज. किसी भाषा को सीखने के लिए 30-35 क्लासेज बहुत ज्यादा नहीं हैं और फिर जो तुर्की से टीचर आये थे उनकी अंग्रेजी माशाअल्ला... Read more
clicks 327 View   Vote 0 Like   4:46pm 19 Aug 2012 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
गर्मी की छुट्टी चल रही है आजकल. डेली रूटीन का पूरा मामला तो अपने देश के सिस्टम जैसा हो गया है. कब सोना है कब खाना है सब मन की मर्जी पर. खैर ऐसे दिनों का भी आनंद लेना चाहिए फिर पता नहीं ऐसा वक्त मिले या नहीं. तो आज सोकर उठे 11 बजे. जल्दी सोकर उठने पर अच्छा लगता है. उठते ही हाथ फोन ... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   4:35am 6 Aug 2012 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
कोरियाई भाषा में एक कहावत है “작은 고추가 맵다 (छागन खोच्छुगा मैप्ता)” जिसका मतलब होता है कि ‘छोटी मिर्ची ज्यादा तीखी होती है’. इस कहावत का प्रयोग लम्बाई-चौड़ाई में छोटे व्यक्ति को हल्के में नहीं लेने के अर्थ में होता है. पर आजकल कोरिया में इस कहावत पर से लोगों का विश्वास उठ गया... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   4:51pm 15 Jul 2012 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
 पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा और पांचवां भाग भी पढ़ें …… नागार्जुन पर यह आरोप अक्सर लगाया जाता रहा है की अपनी कविताओं में वे छंद और शिल्प के प्रति उदासीन हैं।सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए की यह उदासीनता भाषा और शिल्प की अज्ञानता के कारण है या जानबूझकर अपनाई गयी है। नागार्ज... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   7:14am 15 Jul 2012 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
प्रस्तुत है “नागार्जुन का काव्य संसार” श्रृंखला की वह कड़ी जिसका नागार्जुन के प्रशंसकों को शायद सबसे ज्यादा इंतज़ार होगा- बाबा नागार्जुन की व्यंग्यप्रधान कविताओं की चर्चा। पोस्ट थोड़ी बड़ी ज़रूर है पर विश्वास कीजिए एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद आप अंत तक पढेंगे। त... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   7:11am 15 Jul 2012 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
इस भाग को पढने से पहले इस श्रृंखला का पहला, दूसरा और तीसरा भाग पढ़ें। इस भाग में नागार्जुन की कविताओं में आर्थिक यथार्थ और राष्ट्रीयता की भावनाकी चर्चा होगी। नागार्जुन के काव्य में आर्थिक यथार्थ नागार्जुन स्वयं हमेशा गरीबी और बेकारी से त्रस्त रहे। इसलिए उनकी कविताओ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   7:05am 15 Jul 2012 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
पिछली पोस्ट में आपने  बाबा नागार्जुन का काव्य संसार - पहला भाग पढा। अब प्रस्तुत है इस श्रृंखला का दूसरा भाग। इसमें हम नागार्जुन की रागबोध की कविताओं पर चर्चा करेंगे।नागार्जुन की कविताओं कों हम मुख्यतः चार श्रेणियों में रख सकते हैं। पहली, रागबोध की कविताएँ ज... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   6:43am 15 Jul 2012 #हिन्दी
Blogger: सतीश चन्द्र सत्यार्थी at scsatyarthi.com...
जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में बीए करने के दौरान हिन्दी कविता का एक ऑप्शनल कोर्स लिया था. उसमें एक पेपर प्रेजेंट करना था किसी आधुनिक कवि के ऊपर. तो मैंने इसके लिए बाबा नागार्जुन को चुना था और जो पेपर मैंने बनाया और प्रेजेंट किया था उसे यहाँ इस ब्लॉग पर डाल रहा हूँ. सा... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   6:26am 15 Jul 2012 #हिन्दी
Blogger: उन्मुक्त at छुट-पुट...
इस चिट्ठी में, आज के दिन सौ साल पहले वीरता के कारनामे की चर्चा है।Courtesy - The Folio Societyआज का दिन ऐतिहासिक है। आज ही के दिन सौ साल पहले, १७ जनवरी १९१२ को रॉर्बट फाल्कन स्कॉट (Robert Falcon Scott) ने दक्षिणी  ध्रुव पर कदम रखा था। लेकिन स्कॉट इस यात्रा से वापस नहीं आये। लौटते समय उनकी और उनके साथिय... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   4:03pm 17 Jan 2012 #हिन्दी
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