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Tag: हरिवंशराय बच्चन

Blogger: kuldeep thakur at उजाले उनकी या...
कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना थाभावना के हाथ ने जिसमें वितानों को तना थास्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारास्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना थाढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर, कंकड़ों कोएक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना हैहै अँधेरी रात पर दी... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   12:12pm 4 Jan 2015 #हरिवंशराय बच्चन
Blogger: kuldeep thakur at उजाले उनकी या...
जो बीत गई सो बात गई जीवन में एक सितारा थामाना वह बेहद प्यारा थावह डूब गया तो डूब गयाअम्बर के आनन को देखोकितने इसके तारे टूटेकितने इसके प्यारे छूटेजो छूट गए फिर कहाँ मिलेपर बोलो टूटे तारों परकब अम्बर शोक मनाता हैजो बीत गई सो बात गई जीवन में वह था एक कुसुमथे उसपर नित्य नि... Read more
clicks 356 View   Vote 0 Like   11:30pm 14 Sep 2013 #हरिवंशराय बच्चन
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
आज मुझसे बोल, बादलहरिवंशराय बच्चनआज मुझसे बोल, बादल!तम-भरा तू, तम-भरा मैं,ग़म-भरा तू, ग़म भरा मैं,आज तू, अपने हृदय से हृदय मेरा तोल, बादल!आज मुझसे बोल, बादल! आग तुझमें, आग मुझमें,राग तुझमें,   राग मुझमें,आ मिलें हम आज अपने द्वार उर के खोल, बादल!आज मुझसे बोल, बादल! भेद यह मत देख दो प... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   1:14pm 26 Jun 2012 #हरिवंशराय बच्चन
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
हरिवंशराय बच्चन 11. यह पपीहे की रटन हैयह पपीहे की रटन है !बादलों  की घिर घटाएंभूमि की लेती बलाएं ,खोल दिल देती दुआएं –देख किस उर में जलन है?यह पपीहे की रटन है !जो  बहा  दे, नीर आया,आग का फिर तीर आया,वज्र भी बेपीर आया –कब रुका इसका वचन है?यह पपीहे की रटन है !यह न पानी से बुझेगी,यह न ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   1:45pm 21 Mar 2012 #हरिवंशराय बच्चन
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
हरिवंशराय बच्चन 10. साथी, सो न, कर कुछ बातसाथी, सो न, कर कुछ बात !बोलते    उडुगण   परस्पर,तरु  दलों  में मन्द ‘मरमर’,बात  करतीं सरि-लहरियां कूल से जल-स्नात!साथी, सो न, कर कुछ बात !बात  करते   सो  गया  तू,स्वप्न  में फिर  खो गया तू,रह  गया  मैं  और  आधी  बात, आधी रात!साथी, सो न, कर कुछ बात ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   12:30am 29 Feb 2012 #हरिवंशराय बच्चन
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
हरिवंशराय बच्चन 9. कहते हैं तारे गाते हैंकहते  हैं,  तारे  गाते हैं!सन्नाटा वसुधा पर छाया,नभ में हमने कान लगाया,फिर भी अगणित कंठों का यह राग नहीं हम सुन पाते हैं!कहते  हैं,  तारे  गाते हैं!स्वर्ग सुना करता यह गाना,पृथ्वी ने तो बस यह जाना,अगणित  ओस-कणों में  तारों के नीरव आंसू... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   12:30am 28 Feb 2012 #हरिवंशराय बच्चन
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
हरिवंशराय बच्चन 8. तुम तूफ़ान समझ पाओगेतुम तूफ़ान समझ पाओगे?गीले बादल, पीले रजकण,सूखे पत्ते, रूखे तृण घनलेकर चलता करता ‘हरहर --- इसका गान समझ पाओगे?तुम तूफ़ान समझ पाओगे?गंध-भरा यह मंद पवन था,लहराता  इससे मधुवन था,सहसा इसका टूट गया जो स्वप्न महान, समझ पाओगे?तुम तूफ़ान समझ पा... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   1:40am 1 Feb 2012 #हरिवंशराय बच्चन
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ !डॉ. हरिबंशराय बच्चनअग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ !वृक्ष हों भले खड़े,हों  घने,  हों बड़े,एक पत्र-छांह भी मांग मत, मांग मत, मांग मत !अग्नि पथ ! अग्नि पथ ! अग्नि पथ !तू न थकेगा कभी!तू न थमेगा कभी!तू न मुड़ेगा कभी ! -- कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ !अग्नि पथ ! अग्नि पथ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   2:46am 25 Jan 2012 #हरिवंशराय बच्चन
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