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Tag: संस्मरण

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
संस्मरण(बाबा नागार्जुन और मेरा परिवार)        अपनी यादों के पिटारे में से मैं आज एक संस्मरण साझा कर रहा हूँ। बात सन् 1989 की है। उन दिनों जनकवि बाबा नागार्जुन मेरे निवास पर ठहरे हुए थे। वे हम लोगों को अपनी बहुत सारी रचनाएँ भी सुनाते थे।        मेरे दोनों ... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   12:46pm 1 Sep 2020 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
छोटे गुरु का, बड़े गुरु का, नाग लो! भाई, नाग लो।नागपंचमी के दिन, इसी नारे के शोर से, हम बच्चों की नींद टूटती। ऊँघते, आँखें मलते, घर के बरामदे में खड़े हो, नीचे झाँकते.. गली के चबूतरे पर कुछ किशोर, नाना प्रकार के नागों की तस्वीरों की दुकान सजाए बैठे हैं! मन ललचता, तब तक दूसरे बच्चों... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:54am 25 Jul 2020 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
     एक अप्रैल अन्तर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस यूँ तो हर साल ही आता है। परन्तु मुझे इस दिन गुलबिया दादी की बहुत याद आती है।     बात आज से 45 वर्ष पुरानी है। मैंने उन दिनों इण्टर की परीक्षा दी थी। नजीबाबाद के मूर्ति देवी सरस्वती इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य श्री आर.ए... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   7:00pm 31 Mar 2020 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at "धरा के रंग"...
      खटीमा से 27 किमी दूर कुमाऊँ का पर्वतीय द्वार टनकपुर नाम का एक छोटा नगर है। जहाँ की एक बुजुर्ग महिला कमला देवी का गठिया-वात का इलाज अमर भारती आयुर्वेदिक अस्पताल, खटीमा में मेरे यहाँ से चल रहा था।      किन्तु अचानक लॉकडाउन हो गया। दवाई खत्म होने पर उसकी तकलीफ... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   11:16am 30 Mar 2020 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at शब्दों का दंग...
        अभी दो दिन पहले की ही तो बात है। घर में राशन, दालें आदि समाप्त हो गये थे। पूरा नगर लॉकडाउन था। आवाजाही बिल्कुल बन्द थी। मैंने स्थानीय किराना व्यापारी को फोन करके घर का सामान लिखवा दिया। लेकिन उसने कहा कि सामान तो मैं पैक करके रख दूँगा। मगर लेकर कैसे जाओगे? ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   1:21pm 29 Mar 2020 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
 बात सत्तावन साल पुरानी है हमारे पड़ोस में एक वृद्ध महिला रहती थी। जिसको पूरा मुहल्ला अम्मा के नाम से पुकारता था, लेकिन उनका नाम हरदेई था।    उन दिनों हमने एक गइया पाली हुई थी। घर में हम लोग सुबह गुड़ के साथ मट्ठा पी लिया करते थे। और माता जी उसके लिए घास लेने चली जात... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   8:30pm 5 Jan 2020 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
एक पुराना संस्मरण--       बात लगभग 60 वर्ष पुरानी है। श्री रामचन्द्र आर्य मेरे मामा जी थे जो आर्य समाज के अनुयायी थे। उनके मन में एक ही लगन थी कि परिवार के सभी बच्चें पढ़-लिख जायें और उनमें आर्य समाज के संस्कार भी आ जायें। बिल्कुल यही विचारधारा मेरे पूज्य पिता जी की ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   8:30pm 4 Jan 2020 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
"संस्मरण-बाबा नागार्जुन"स्कूटर से यात्रा करते हुए डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक', बाबा नागार्जुन और वाचस्पति शर्मा।     बाबा नागार्जुन की तो इतनी स्मृतियाँ मेरे मन व मस्तिष्क में भरी पड़ी हैं कि एक संस्मरण लिखता हूँ तो दूसरा याद हो आता है। मेरे व वाचस्पति जी (... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   12:30pm 3 Jan 2020 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
पहले सुबह होती थी, शाम होती थी, अब लोहे के घर में, पूरी रात होती है। वे दिन, रोज वाले थे। ये रातें, साप्ताहिक हैं। बनारस से जौनपुर की तुलना में, बनारस से लखनऊ की दूरी लंबी है। रोज आना जाना सम्भव नहीं है। ये रास्ते सुबह/शाम नहीं, पूरी रात निगल जाते हैं और उफ्फ तक नहीं करते!लखनऊ ... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   5:59am 21 Sep 2019 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
ट्रेन बहुत देर से रुकी थी। उस प्लेटफॉर्म पर रुकी थी जहाँ उसे नहीं रुकना चाहिए। ऐसे रुकी थी जैसे पढ़ाई पूरी करने के बाद, नौकरी की तलाश में, अनचाहे प्लेटफार्म पर, कोई युवा रुक जाता है। ट्रेन बहुत देर से रुकी थी। मैं बाहर उतरकर देखने लगा..माजरा क्या है? कब होगा हरा सिगनल?मेरे इ... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   7:03am 12 Jul 2019 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
गरमी के तांडव से घबराकर घुस गए ए. सी. बोगी में। दम साधकर बैठे हैं लोअर बर्थ पर। बाहर प्रचण्ड गर्मी, यहाँ इतनी ठंडी कि यात्री चादर ओढ़े लेटे हैं बर्थ पर! ए. सी.बोगी में गरमी तांडव नहीं कर पाती, गेट के बाहर चौकीदार की तरह खड़ी हो, झुनझुना बजाती है। पैसा वह द्वारपाल है जो हर मौसम क... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   5:28am 18 Jun 2019 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
अच्छा हैबनारस कीपूरी एक युवा पीढ़ीदेखे बिनाजवान हो गई लेकिनअपने किशोरावस्था मेंहमने खूब देखेकर्फ्यू।गंगा तट के ऊपर फैलेपक्के महाल की तंग गलियों मेंकर्फ्यू का लगनाबुजुर्गों के लिएचिंता का विषय,बच्चों/किशोरों/युवाओं के लिएउत्सव के शुरू होने काआगाज़ होता था!स्कूलों... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   2:43pm 27 Apr 2019 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
बनारस की एक गलीगली में चबूतराचबूतरे पर खुलतीबड़े से कमरे की खिड़कीखिड़की से झाँकोकमरे में टी.वी.टी.वी. में दूरदर्शनएक से बढ़कर एकसीरियलहम लोग, बुनियाद, नीम का पेड़सन्डे की रंगोली, चित्रहार, रामायण..सुबह हो या शामतिल रखने की खाली जगह भी न होती थीचबूतरे से कमरे तकजब शुरू होते ... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   7:09am 25 Apr 2019 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
लोहे के घर की खिड़की से बाहर झाँक रहे हैं एक वृद्ध। सामने की खिड़की पर उनकी श्रीमती जी बैठी हैं। वे भी देख रही हैं तेजी से पीछे छूटते खेत, घर, मकान, वृक्ष....। ढल रहे हैं सुरुज नारायण। तिरछी होकर सीधे खिड़की से घर में घुस रही हैं सूरज की किरणें। जल्दी-जल्दी, बाय-बाय, हाय-हैलो कर ल... Read more
clicks 224 View   Vote 0 Like   6:28am 24 Apr 2019 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
गली मेंबच्चे खेलते थेक्रिकेटबड़ेपान की दुकान के पासखड़े-खड़ेदेर तकसुनते रहते थे कमेंट्रीबूढ़ेचबूतरे पर बैठ करकोसते रहते थे..क्रिकेट ने बरबाद कर दियादेश को।देश कितना बर्बाद हुआ, नहीं पता!टेस्ट, वन डे, ट्वेंटी-ट्वेन्टीघरेलू, विश्वकप, आई.पी.यलक्रिकेट का इतना फैला बाजा... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   6:19am 24 Apr 2019 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
ढूँढ रहा था अपने ही शहर की गलियों में भटकते हुए बचपन का कोई मित्र जिसके साथ खेले थे हमने आइस-पाइस, विष-अमृत या लीलो लीलो पहाड़िया. हार कर बैठ गया पान की एक दुकान के सामने चबूतरे पर. बड़ी देर बाद एक बुढ्ढा नजर आया. बाल सफ़ेद लेकिन चेहरे में वही चमक. ध्यान से देखा तो वही बचानू था! ज... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   7:27am 21 Apr 2019 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
वो पतला सा शॉल      आज से ठीक अट्ठारह साल पुरानी बात है। उत्तराखण्ड को जन्मे हुए उस समय एक मास ही हुआ था और उसके पहले मनोनीत मुख्यमन्त्री थे नित्यानन्द स्वामी। मा. नित्यानन्द स्वामी से मेरा बहुत पुराना सम्बन्ध था। उस समय मैं खटीमा में पूर्व माध्यमिक विद्यालय ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   8:12am 9 Dec 2018 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
‘‘आर्य समाज:बाबा नागार्जुन की दृष्टि में’’ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')        राजकीय महाविद्यालय, खटीमा में हिन्दी के विभागाध्यक्ष वाचस्पति शर्मा थे । बाबा नागार्जुन अक्सर उनके यहाँ प्रवास किया करते थे । इस बार भी जून के अन्तिम सप्ताह में बाबा का प्रवास खटी... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:45am 17 Nov 2018 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
मेरी पुस्तक "स्मृति उपवन"से एक संस्मरण-"तू से आप और सर"(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') --     लगभग तैंतालीस साल पुरानी बात है। उस समय उत्तराखण्ड राज्य नही बना था। विशाल उत्तर-प्रदेश था। मेरा निवास उन दिनों नेपाल सीमा पर बसे छोटे से स्थान बनबसा में हुआ करता था। बन... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   4:56am 10 Nov 2018 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
बाबा नागार्जुन के साथ बागों की सैरइसी वर्ष प्रकाशित मेरी पुस्तक "स्मृति उपवन” से एक संस्मरण-       बाबा नागार्जुन ने अपने यायावर स्वभाव को अन्त तक जी भरके जिया। इसका जीता जागता प्रमाण मुझे बाबा के साथ बिताये गये कुछ दिनों में मिला।      बाबा को आम ... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   7:23am 3 Nov 2018 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
गोधूली बेला थी। दून अपने निर्धारित समय से लेट थी मगर अपने काम से छुट्टी के बाद अनुकूल समय पर मिल गई थी और हवा से बातें कर रही थी। हमेशा की तरह खाली खिड़की ढूंढ कर मैं खिड़की के पास बैठ चुका था और खिड़की से बाहर का नजारा लेने में मशगूल था। सई नदी के ऊपर से जब ट्रेन गुजरी तो न... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   7:40am 30 Oct 2018 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
कोटा पटना का लेट होने का कोटा अभी पूरा नहीं हुआ है। लेट, और लेट, और और लेट होती चली जा रही है।  कोटा से चलकर रात में आनी थी मथुरा, भोर में आई। सुबह, दिन में बदलने जा रहा है लेकिन यह रुक रुक, छुक छुक चल रही है। भाप का इंजन होता तो इसकी छुक छुक कर्ण प्रिय होती। बिजली का इंजन है, छ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   11:46am 22 Oct 2018 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
संस्मरणगुरू सहाय भटनागर बदनाम नहीं रहेसम्बन्धों में हों जहाँ, छोटी-बड़ी दरार।धरती पर कैसे कहें, उसे सुखी परिवार।।जिस प्रकार दुनिया में आने का कोई मुहूर्त नहीं होता, उसी प्रकार दुनिया से जाने का भी कोई समय नहीं होता। मेरे अभिन्न मित्र श्रीगुरू सहाय भटनागर के बारे... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   1:59am 1 Aug 2018 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
मित्रों!स्व. गोपालदास नीरज से जुड़ी एक स्मृति प्रस्तुत कर रहा हूँ। जब मैं अन्तिम बार “नीरज” जी से मिला था।     दिनांक 27 मई, 2013 को खटीमा में एक आलइण्डिया मुशायरा एवं कविसम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसका उद्घाटन उत्तराखण्ड के महामहिम राज्यपाल श्री अजीज कुरैशी ने क... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   10:27am 20 Jul 2018 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
वो फर्स्ट अप्रैलवाकया 2013 का है। उस समय मेरे पिता श्री घासीराम जी की आयु 90 वर्ष की है। 90 साल की उम्र में भी वे अपने दैनिक कार्य स्वयं ही करते हैं। यों तो उनके लिए निचली मंजिल पर भी स्नानगृह बना है। मगर उसमें गीजर नही लगा है। इसलिए पूरे जाड़ों-भर वह प्रति दिन सुबह 10 बजे स्न... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   3:09am 1 Apr 2018 #संस्मरण
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