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Tag: संसार

Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
      ली अपने कार्यस्थल में एक ईमानदार और भरोसेमंद कर्मचारी है। परन्तु फिर भी अपने मसीही विश्वास के निर्वाह के कारण वह अपने आप को औरों से अलग पाता है। और यह उसके व्यावाहारिक जीवन में प्रत्यक्ष दिखाई देता है, जैसे कि जब किसी संगति में कोई अनुचित अथवा भद्दी बातें ह... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   3:15pm 12 Jan 2020 #संसार
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   मैं जानती थी कि अपने जन्मदिवस के उपहार में संसार का नक्शा पाना मेरे बेटे को अच्छा लगेगा। कुछ प्रयास के पश्चात मैंने महाद्वीपों का एक रंगबिरंगा नक्शा खोज लिया, जिसमें प्रत्येक भू-भाग पर उस भाग से संबंधित कुछ चित्र बने हुए थे। पापुआ न्यू गिनि पर वहाँ की एक विशेष तित... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   3:15pm 19 Apr 2017 #संसार
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   मई 20-21, 1927 वायु यान द्वारा उड़ान के इतिहास में एक ’मील का पत्थर’ है। इसी दिन चार्ल्स लिंडरबर्घ ने प्रशान्त महासागर को अपने वायुयान की उड़ान द्वारा अकेले ही पार किया था। इससे पहले और भी उड़ाने थीं जो प्रशान्त महासागर के एक से दूसरे छोर तक हुईं थीं, लेकिन चार्ल्स लिंडरबर्... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   3:15pm 13 Sep 2014 #संसार
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
मन माँगे मोर कहीं वह जंगल में नाचने वाला मोर तो नहीं, जो मन माँगता है है खुद भी तो मयूर पर   यह नहीं जानता है...   या फिर ‘मेरा मन’  मांगता है  ‘तेरे’ का जिसे पता नहीं वह ‘मेरे’ का ही राग अलापता है.. क्या कहा ? यह आंग्ल भाषा का शब्द है ‘ज्यादा’ का जो देता अर्थ है तो कृपण म... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   3:17am 19 Oct 2013 #संसार
Blogger: pankaj kumar at Behtarlife.com बेहतर ल...
संसार भर में प्रचलित कहावतें Proverb 1: God makes three requests of his children: Do the best you can, where you are, with what you have, now. In Hindi : ईश्वर अपने बच्चों से तीन अनुरोध करते हैं: जितना सर्वोत्तम कर सको उतना करो, जहाँ हो वहाँ करो, जो आपके पास उपलब्ध हो उससे करो, और अभी करो. Indian Proverb भारतीय कहावत Proverb 2 : Failing to plan is planning ... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   3:30am 6 Jul 2013 #संसार
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   महान प्रेरित यूहन्ना, वह जो प्रभु यीशु का प्रीय था, उदास था; उसकी आँखों में आँसू थे। पतमोस के टापू पर प्रभु यीशु पर अपने विश्वास के कारण कारावास की सज़ा झेल रहे यूहन्ना ने संसार के अन्त और स्वर्ग के दर्शन पाए थे। अपने एक दर्शन में युहन्ना ने अपने आप को परमेश्वर के सिंहा... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   3:15pm 5 Mar 2013 #संसार
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   कुछ वर्ष पहले मेरा एक मित्र जाने माने जलपोत टाईटैनिक के अवशेषों की प्रदर्शनी देखने गया। प्रदर्शनी देखने आए प्रत्येक दर्शक को टाईटैनिक के टिकिट की प्रतिलिपि दी गई और प्रत्येक टिकिट पर उस जलपोत पर यात्रा करने वाले वास्तविक यात्रियों अथवा कर्मचारियों में से एक का ना... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   3:15pm 24 Feb 2013 #संसार
Blogger: प्रवीण पाण्डेय at न दैन्यं न पल...
यज्ञ क्षेत्र यह विश्व समूचा, होम बने उड़ते विमान जब,विस्मय सबकी ही आँखों में, देखा उनको मँडराते नभ।मूर्त रूप दानवता बनकर, जीवन के सब नियम भुलाकर,तने खड़े गगनोन्मुख, उन पर टकराये थे नभ से आकर।ध्वंस बिछा, ज्वालायें उठतीं,चीखें अट्टाहस में छिपतीं,कहाँ श्रेष्ठता, दिगभ्रम ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   10:30pm 17 Aug 2012 #संसार
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
प्रेम पूर्णता की तलाश है जब मैं, तुम में खो जाती हैतब जो शेष रहता है वही प्रेम है मैं और तुम अधूरे हैं पृथक-पृथकतलाश है हमें पूर्णता कीअनंत काल से हैं आतुर एक होने कोपर कुछ न कुछ आ ही जाता है मध्य में  कभी अहंकार, कभी संसार चलो गिरा दें सारी दीवारें मिटा दें सारे भेदएक बार त... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   3:57am 14 Aug 2012 #संसार
Blogger: S.M.MAasum at हक और बातिल...
संसार में इतने पापी क्यों?ईश्वरीय दूत किसी भी प्रकार से किसी एक क्षेत्र से विशेष नहीं थे और न ही किसी एक क्षेत्र में भेजे गये  यह एक तथ्य है कि लोगों के व्यवहारिक रूप से मार्गदर्शन के लिए दो चीज़ों का होना आवश्यक है।पहली चीज़ यह कि लोग स्वंय इस ईश्वरीय कृपा से लाभ उठाना ... Read more
clicks 268 View   Vote 5 Like   2:51pm 2 Aug 2012 #संसार
Blogger: केवल राम : at चलते -चलते...!...
आध्यात्मिकबोध का अनुभव आत्मा की व्यापकता में है और यह व्यापकता तब बढती है जबमनुष्य खुद को अपने पहले दो रूपों से उपर उठा कर आत्मिक स्वरूप में स्थापितकरता है . अब इस स्तर पर कोई भेद नहीं , कोई भ्रम नहीं, कोईबंधन नहीं अगर कुछ है तो वह है सिर्फ और सिर्फ ईश्वर का बोध और आत्मिकस... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   2:52am 8 Jun 2012 #संसार
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