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Tag: व्यंग्य

Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
धीरे-धीरेकम हो रहा थानदी का पानीनदी मेंडूब कर गोता लगाने वाले हों या एक अंजुरी पानी निकाल करतृप्त हो जाने वाले,सभी परेशान थे..बहुत कम हो चुका हैनदी का पानी!बात राजा तक गईजाँच बैठीनदी से ही पूछा गया...पानी क्यों कम हुआ?नदी ने राजा को देखा कुछ बोलने के लिए होंठ थरथराए ... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   5:04am 20 Oct 2020 #व्यंग्य
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन फत्ते, एक रहिन हम.ईर ने कहा चलो शिकार कर आबें,बीर ने कहा चलो शिकार कर आबें,फत्ते बोले चलो शिकार कर आबें,हमऊँ बोले हाँ चलो शिकार कर आबें. ईर ने मारी एक चिरैया,बीर ने मारी दो चिरैयाँ,फत्ते मारे तीन चिरैयाँ,और हम???? हम मारे एक चुखरिया. हा हा हा....हा ह... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   11:01am 4 Oct 2020 #व्यंग्य
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
कुछ लोग नमस्कार करते समय अपनी गर्दन, सिर को इतना ही हिलाते हैं कि बस उसके मन को मालूम चलता है कि नमस्कार की गई।बेचारी गर्दन और बेचारे सिर को तो पता ही नहीं चल पाता कि उनके मालिक ने किसी को नमस्कार करने में उनका दुरुपयोग कर लिया।जिसको नमस्कार की गई उसकी जानकारी की बस कल्प... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   6:23pm 6 Jul 2020 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
जब भीमिलता है सम्मानकहताभीतर का इंसानतूनेरूप बनाया है!तूनेझूठ सुनाया है!दिल में खंजर रख कर सबकोगले लगाया है।जब भी मिलता है सम्मान.....तेराहोता है सब कामबाबूकरते सभी सलामतूनेचाय पिलाया हैतूनेपान खिलाया हैसूटकेस में गड्डी भर-भर,घर पहुँचाया है।जब भी मिलता है सम्मान....त... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   5:08am 14 Jun 2020 #व्यंग्य
Blogger: प्रमोद ताम्बट at VYANGYALOK...
//व्‍यंग्‍य-प्रमोद ताम्बट//          अपन भी कोई कम साइंटिस्ट नहीं हैं। स्कूल में बहुत मेंढकों की चीर-फाड की है। संकट की इस घड़ी में अनुभव का लाभ उठाने में क्या हर्ज है। जब लाखों लोग कोरोना विशेषज्ञ बने चले जा रहे हैं तो अपन में क्या कमी है। बस एक अदद कोरोना का सेम्पल मि... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   3:38am 9 May 2020 #व्यंग्य
Blogger: प्रमोद ताम्बट at VYANGYALOK...
व्यंग्य - प्रमोद ताम्बटमहाशक्तियों ने दुनिया भर में नरसंहार के लिए एक से एक खतरनाक हथियार,गोला-बारूद,और परमाणु असलहे ईजाद किये हैं और न केवल दुनिया के कई मुल्कों को आँखें दिखाई हैं बल्कि कमज़ोर मुल्कों को नेस्तोनाबूद भी किया है। मगर अब,एक अदद तुच्छ वायरस ने उन तमा... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   3:24am 25 Apr 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
मंत्री थे तब उनके दरवाजे कार बँधी रहती थी। आजकल क्वार्टर में रहते हैं और दरवाजे भैंस बँधी रहती है। मैं जब उनके यहाँ पहुँचा वे अपने लड़के को दूध दुहना सिखा रहे थे और अफसोस कर रहे थे कि कैसी नई पीढ़ी आ गई है जिसे भैंसें दुहना भी नहीं आता।मुझे देखा तो बोले - 'जले पर नमक छिड़कने... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   7:00pm 23 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
अजगर करै न चाकरी, पंछी करे न काम।दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।।प्रिय ठलुआ-वृंद! यद्यपि हमारी सभा समता के पहियों पर चल रही है और देवताओं की भांति हममें कोई छोटा-बड़ा नहीं है, तथापि आप लोगों ने मुझे इस सभा का पति बनाकर मेरे कुंआरेपन के कलंक को दूर किया है। नृपति और सेनापति ... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   7:00pm 21 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
शुनिचैव श्‍वापाके च पंडित: समदर्शिन:। (गीता)मेरा नाम 'टाइगर'है, गो शक्‍ल-सूरत और रंग-रूप में मेरा किसी भी शेर या 'सिंह'से कोई साम्‍य नहीं। मैं दानवीर लाला अमुक-अमुक का प्रिय सेवक हूँ; यद्यपि वे मुझे प्रेम से कभी-कभी थपथपाते हुए अपना मित्र और प्रियतम भी कह देते हैं। वैसे मैं... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   7:00pm 19 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
संपादक जी,इस सड़ी गर्मी में अपना तो क्‍या अमरीका और ब्रिटेन जैसे बड़े बड़ों का तेल निकल गया, महाराज। बरसात न होने के कारण हमारे अन्‍नमय कोष में महँगाई और चोरबाजारी के पत्‍थर पड़ रहे हैं, हम बड़े चिंताग्रस्‍त और दुखी हैं; पर यदि अपनी उदारता को पसारा देकर सोचें तो हम क्‍य... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   7:00pm 17 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
लोमड़ी पेड़ के नीचे पहुँची। उसने देखा ऊपर की डाल पर एक कौवा बैठा है, जिसने मुँह में रोटी दाब रखी है। लोमड़ी ने सोचा कि अगर कौवा गलती से मुँह खोल दे तो रोटी नीचे गिर जाएगी। नीचे गिर जाए तो मैं खा लूँ।लोमड़ी ने कौवे से कहा, ‘भैया कौवे! तुम तो मुक्त प्राणी हो, तुम्हारी बुद्धि, ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   7:00pm 15 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
वह अस्तबल नहीं, देश का जाना माना, एक प्राइवेट प्रशिक्षण संस्थान था जहाँ देश भर से घोड़े उच्च शिक्षा के लिए आते। संस्थान में कई घोड़े थे। मालिक चाहता कि सभी घोड़े और तेज दौड़ें. और तेज..और तेज। इस 'और'की हवस को पाने के लिए वह अनजाने में ही घोड़ों के प्रति क्रूर होता चला गया। धीरे-ध... Read more
clicks 584 View   Vote 0 Like   2:55pm 14 Jul 2019 #व्यंग्य
Blogger: krishnakant at बोल कि लब आजा...
(व्यंग्य विधा के पितामह हरिशंकर परसाई का 'वैष्णव की फिसलन'शीर्षक से यह लेख बेहद लोकप्रिय है. यहां पर हेडिंग बदल दी गई है.)वैष्णव करोड़पति है। भगवान विष्णु का मंदिर। जायदाद लगी है। भगवान सूदखोरी करते हैं। ब्याज से कर्ज देते हैं। वैष्णव दो घंटे भगवान विष्णु की पूजा करते ह... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   7:57am 21 Jun 2019 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
वहघाट की ऊँची मढ़ी पर बैठनदी में फेंकता हैकंकड़!नदी किनारेनीचे घाट पर बैठे बच्चेखुश हो, लहरें गिनने लगते हैं...एक कंकड़कई लहरें!एक, दो...सात, आठ, नौ दस...बस्स!!!वहऊँची मढ़ी पर बैठनदी में,दूसरा कंकड़ फेंकता है..।देखते-देखते,गिनते-गिनतेबच्चे भी सीख जाते हैंनदी में कंकड़ फेंकनापहले स... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   7:50am 12 May 2019 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
सोम से रवि तकअलग-अलगसभी भगवानों के दिन निर्धारित हैं।जब हम छोटे थेजाते थे समय निकालनिर्धारित वारनिर्धारित भगवान के दरबारसोमवार-विश्वनाथ जी,मंगलवार-संकटमोचन,बुद्धवार-बड़ा गणेश,बी वार-बृहस्पति भगवान,शुक्रवार-संकठा जी,शनिवार-शनिदेव,रविवार-काशी के कोतवाल, भैरोनाथ के ... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   6:40pm 19 Apr 2019 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
एक दिन ऐसा हुआगड़रिया और भेड़ों के झुण्ड को देखमेरा मन भीभेड़ बनने को हुआ!कूद गया लोहे के घर सेझुण्ड में शामिल हो भेड़ बन गयाएक बूढ़े भेड़ नेमेरी यह हरकत देख ली!धीरे से कान में पूछा..उस झुण्ड से, इस झुण्ड में, क्यों आये हो?पहले तो सकपकायाफिर सम्भल कर बोला..मुझे तुम्हारा नेता, अप... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   9:48am 16 Dec 2018 #व्यंग्य
Blogger: सुनील कुमार सजल at ...Sochtaa hoon......! ...
व्यंग्य-दिन कैसे कैसे ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   5:36am 16 Dec 2018 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
जिसे देखते ही पूरे शरीर मे उत्तेजना बढ़ जाती है उस माल का नाम पटाखा माल है। जो आँच दिखाते ही धड़ाम से फूट जाय, जिसके फूटने पर आपका मन आंनद से भर जय तो समझो वही पटाखा माल है। आँच दिखाते-दिखाते आपकी पूरी बत्ती जल जाय और धड़ाम की आवाज भी कानों में न सुनाई पड़े तो समझो वो पटाखा नहीं,... Read more
clicks 328 View   Vote 0 Like   10:58am 28 Oct 2018 #व्यंग्य
Blogger: Ravindra K Ranjan at My Letter...
- अंशु माली रस्तोगी 'क'ने 'ख'कोखुला खत (यानी ओपन लेटर) लिखा है। 'क'का खत सोशल मीडिया पर जैसे ही वायरल हुआ, हर दिशा में 'हंगामा'मच गया। 'क'के खत को हाथों-हाथ लिया गया। किसी को उस खत में 'सच्चाई'के दर्शन हुए तो किसी को 'सांप्रदायिकता'की बू आई। भक्त लोग तो खत पढ़कर ही भड़क उठे। 'क'को ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   5:06am 22 Oct 2018 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
चांददिन मेंकोई प्रश्न नहीं करतासूरज सेजानता हैसही वहजिसके पास हैसत्ता।सूरजरात में चांद पर रोशनी लुटा कर मौन हो जाता हैजानता हैसही वहजिसके पास हैसत्ता।आम आदमी चिड़ियों की तरहचहचहाता है..वो देखोचांद डूबा,वो देखोसूर्य निकला!वो देखोसूर्य डूबावो देखोचांद निकला... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   3:48am 24 Aug 2018 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
अपराधी कौन ?................नदियाँ सूखती हैं समुंदर के प्यार में समुंदर प्यार करता तोनदियांपहाड़ चढ़ जातीं!किसी नदी की मृत्यु के लिएकोई मनुष्यजिम्मेदार नहीं।...............खिलाड़ी .........................दर्शकों को लगाऔर रेफरी का भी यही निर्णय थाकि ड्रा पर समाप्त हुईशतरंज की यह बाजीलेकिन ख... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   12:31pm 16 Jun 2018 #व्यंग्य
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- विवेक रंजन श्रीवास्तव अधीक्षण अभियंता औ बी ११ विद्युत मण्डल कालोनी रामपुर जबलपुर गर्मी में ठंडक का अहसास पुराने समय की बात है नव रत्न राज दरबार की शोभा थे . राजा उनसे परामर्श लेकर फैसले किया करते थे . अब नोतपा चल रहा है और नव रत्न जड़ी बूटियो में समाहि... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   4:53am 28 May 2018 #व्यंग्य
Blogger: रजनीश ‘साहिल’ at ख़लिश...
एक जंगल था. जैसा कि प्राचीन काल से जितने भी जंगल अब तक हुए हैं और उनमें होता रहा है वैसे ही इस जंगल में भी सालों से एक शेर का राज था और जैसा कि शेर करते रहे हैं वैसे ही ये शेर भी जानवरों को मारता ही था. लेकिन जंगल के बाकी प्राणियों की समस्या यह नहीं कुछ और थी.खरगोश, हिरन, गधे जै... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   6:20pm 6 Apr 2018 #व्यंग्य
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
हम जब छोटे थे तो कक्षा में गुरुजी और घर में बाउजी दंडाधिकारी थे। दोनों को सम्पूर्ण दंडाधिकार प्राप्त था। स्कूल में गलती किया तो मुर्गा बने, घर में गलती किया तो थप्पड़ खाए। एक बार जो कक्षा में मुर्गा बन गया, दुबारा गलती करने का विचार भी मन में आता तो उसकी रूह कांप जाती। अच... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   2:36am 27 Mar 2018 #व्यंग्य
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