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Tag: लोक उक्ति में कविता

Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
जिस धारा का पानी पिया उसे बहुत कम लोग याद रखते हैंजिसकी रोटी खायी उसके गीत गाने वाले विरले मिलते हैंजो पेड़ छाया प्रदान करता है उसकी जड़ नहीं काटनी चाहिएजिस कुएं से पानी लिया हो उसमें पत्थर नहीं फेंकना चाहिएउस पेड़ के कटने की दुआ मत करो जो सबको धूप से बचाती हैधिक्कार उस मु... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   12:30am 26 Feb 2020 #लोक उक्ति में कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
मुर्गा अपने दड़बे पर बड़ा दिलेर होता है अपनी गली का कुत्ता भी शेर होता है दुष्ट लोग क्षमा नहीं दंड के भागी होते हैं लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं हज़ार कौओं को भगाने हेतु एक पत्थर बहुत है सैकड़ों गीदड़ों के लिए एक शेर ही ग़नीमत है बुराई को सिर उठाते ही कुचल देना चाहिए च... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   2:30am 21 Feb 2019 #लोक उक्ति में कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
मुर्गा अपने दड़बे पर बड़ा दिलेर होता है अपनी गली का कुत्ता भी शेर होता है दुष्ट लोग क्षमा नहीं दंड के भागी होते हैं लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं हज़ार कौओं को भगाने हेतु एक पत्थर बहुत है सैकड़ों गीदड़ों के लिए एक शेर ही ग़नीमत है बुराई को सिर उठाते ही कुचल देना चाहिए च... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   2:30am 21 Feb 2019 #लोक उक्ति में कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
मक्खन की हंड़िया सिर पर रखकर धूप में नहीं चलना चाहिए बारूद के ढ़ेर पर बैठकर आग का खेल नहीं खेलना चाहिए छोटा से पैबंद न लगाने पर बहुत बड़ा छिद्र बन जाता है धारदार औजारोंं से खेलना खतरे से खाली नहीं होता है काँटों पर चलने वाले नंगे पांव नहीं चला करते हैं चूहों के कान होते हैं ... Read more
clicks 276 View   Vote 0 Like   2:30am 26 Nov 2018 #लोक उक्ति में कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
मक्खन की हंड़िया सिर पर रखकर धूप में नहीं चलना चाहिए बारूद के ढ़ेर पर बैठकर आग का खेल नहीं खेलना चाहिए छोटा से पैबंद न लगाने पर बहुत बड़ा छिद्र बन जाता है धारदार औजारोंं से खेलना खतरे से खाली नहीं होता है काँटों पर चलने वाले नंगे पांव नहीं चला करते हैं चूहों के कान होते हैं ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   2:30am 26 Nov 2018 #लोक उक्ति में कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
जब तक चूजे अंडे से बाहर न आ  जाएं तब तक उनकी गिनती नहीं करनी चाहिए जब तक ताजा पानी न मिल जाए तब तक गंदे पानी को नहीं फेंकना चाहिए भालू को मारने से पहले उसके खाल की कीमत नहीं लगानी चाहिए मछली पकड़ने से पहले ही उसके तलने की बात नहीं करनी चाहिए हाथ आई चिड़िया आसमान उड़ते गिद्द स... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   3:00am 19 May 2018 #लोक उक्ति में कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
अच्छाई सीखने का मतलब बुराई को भूल जाना होता है। प्रत्येक सद्‌गुण किन्हीं दो अवगुणों के मध्य पाया जाता है।। बहुत बेशर्म बुराई को भी देर तक अपना चेहरा छुपाने में शर्म आती है। जिस बुराई को छिपाकर नहीं रखा जाता वह कम खतरनाक होती है।। धन-सम्पदा, घर और सद्‌गुण मनुष्य की श... Read more
clicks 284 View   Vote 0 Like   5:51am 12 Jul 2016 #लोक उक्ति में कविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at मयंक की डायरी...
लोक उक्ति में कविता की भूमिका       कविता रावत ने कॉमर्स विषय से एम.कॉम. प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया है। वे घर-दफ्तर की जिम्मेदारी के साथ वर्ष 2009 से निरन्तर अपने ब्लॉग  www.kavitarawatbpl-blogspot-in  पर कविता, कहानी अथवा संस्मरण आदि के माध्यम से अपनी भावनाओं, विचार... Read more
clicks 399 View   Vote 0 Like   2:38pm 12 Jun 2014 #लोक उक्ति में कविता
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