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Tag: माँ

Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
पिता स्वर्ग में रहतेघर मेंबच्चों के संगमां रहती थीं।बच्चों के सुख की खातिरजाने क्या-क्यादुःख सहती थीं।क्या बतलाएं साथी तुमकोमेरी अम्माक्या-क्या थीं?देहरी, खिड़की,छत-आंगनघर का कोना-कोना थीं।चोट लगे तोमरहम मां थींभूख लगे तोरोटी मां थींमेरे मन की सारी बातेंसुनने वा... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   3:14pm 13 May 2019 #माँ
Blogger: सरिता भाटिया at गुज़ारिश ...
माएँ हमेशा अपनी मर्जी चलाती हैंअपने बच्चों को दुखों से बचाती हैंरातों रात जागती हैं ..पानी कहीं चला नही जायेसोचते सोचते जल्दी उठ जाती हैंदुर्गा जैसे अष्ट भुजाओं से काम निपटाती हैंएक हाथ से पानी भरती है ,सब्जी बनाती हैंआटा गूँथती हैंबच्चों को जगाती हैंतभी तो माँ ... माँ ... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   10:46am 12 May 2019 #माँ
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
वह माँ जो ताउम्र हरपल, हरदिन अपने घर परिवार की बेहतरी के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर अपनों को समाज में एक पहचान  देकर खुद अपनी पहचान घर की चार दीवारी में सिमट कर रख देती है और निरंतर संघर्ष कर उफ तक नहीं करती, ऐसी माँ का एक दिन कैसे हो सकता है! घर-दफ्तर के जिम्मेदारी के बीच द... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   2:40am 11 May 2019 #माँ
Blogger: Kopal at नन्ही कोपल...
विश्व कविता दिवस पर पढ़िएछुपकर माँ से लिपस्टिक लगाती है जाने कब वो सयानी हो जाती है ।माँ की साड़ी को पहन वो इतराती है आंचल में सुरमुई सी हो जाती है ।माँ की तरह रसोई सम्हालती है अपने हुनर से वो सयानी हो जाती है ।पिता के दुःख में कंधा बन जाती है दुःख सुख में वो सयानी हो जाती है... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   10:09am 21 Mar 2018 #माँ
Blogger: धीरज झा at कलमबाज़ ( धीर...
हर ‘वो’ जिससे सीखा उन सबको नमन   __________________________________________ “गुरु” लिखने बोलने में छोटा सा शबाद मगर इस शब्द के मायने इतने बड़े हैं कि इसके बिना पूरा ब्रह्माण्ड ही अर्थहीन है । हर वो विशिष्ट व्यक्ति जिसका नाम हम बड़े अदब से लेते हैं उन सबने अपने गुरुओं से ही सीखा और उनके गुरुओं... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   1:18pm 9 Jul 2017 #माँ
Blogger: Archana saxena at राहें ...
हाँ तुमने सही कहा था माँहाँ तुमने सच ही कहा था माँलेकिन मैं ही था नादान शायद मैं ही था अंजानइस दुनिया के इंसानों सेमुखोटे पहने हुए हैवानो सेकि कुछ ऐसे गलत लोग तेरे जीवन में भी आयेंगेफिर अपनी चिकनी-चुपड़ीबातों से तुम्हे भ्रमित करवायेंगेबस तुम रहना इनसे बहुत हीसावध... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   2:34pm 3 Jun 2017 #माँ
Blogger: सु-मन (Suman Kapoor) at बावरा मन...
माँ !जलाया है मैंने आस्था की डोरी से अखंड दीप तुम्हारे चरणों में किया है अर्पित मुखरित सुमन मस्तक पर लगा कर चन्दन टीका किया अभिषेक तुम्हारा ओढ़ाई तारों भरी चुनरी रोपा है मैंने आस का बीज हाथ जोड़ किया तुम्हारा वन्दन पढ़ा देवी पाठ की क्षमा प्रार्थना फल नैवेद्य कर अर्पण किय... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   8:01am 20 Oct 2015 #माँ
Blogger: vijay kumar sappatti at कविताओं के मन...
माँ को मुझे कभी तलाशना नहीं पड़ा;वो हमेशा ही मेरे पास थी और है अब भी .. !लेकिन अपने गाँव/छोटे शहर की गलियों में ,मैं अक्सर छुप जाया करता था ;और माँ ही हमेशा मुझे ढूंढती थी ..!और मैं छुपता भी इसलिए था कि वो मुझे ढूंढें !!....और फिर मैं माँ से चिपक जाता था ..!!!अहिस्ता अहिस्ता इस तलाश की ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   2:34am 6 Jun 2015 #माँ
Blogger: सरिता भाटिया at गुज़ारिश ...
सुनोक्या तुम जानते हो ??वातानुकूलित कमरों से सजेतुम्हारे घर मेंसबसे अधिक पसंद है मुझेउसकी बालकोनीजिसमें से झांकता खुला आसमांउसमें स्वछन्द विचरते खगअहसास दिलाते हैं मुझेखुले आसमां के नीचेमाँ का एक कमरे का घरमाँ की मीठी झिड़कियों से महकतावो खुला आँगन............................................ Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   11:35am 24 May 2015 #माँ
Blogger: Himkar Shyam at शीराज़ा [Shiraza]...
1. सारी ख़ुशियाँ कर देती अर्पण माँ समर्पण 2. माँ का आँचल जैसे कड़ी धूप में शीतल छाया 3. साया बनके सदा रहती साथ माँ अहसास 4. आशा-विश्वास दया, क्षमा व त्याग माँ अनुराग 5. मन की बात पढ़ लेती हैं माएँ बिना बताये 6. माँ की दुआएँ हर लेती बलाएँ धन्य हैं माएँ 7. माँ वरदान मा... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   7:00am 10 May 2015 #माँ
Blogger: Rachana Dixit at रचना रवीन्द्...
स्त्री नम्रता, विनम्रता आभूषण है स्त्रिओं के स्त्री हूँ, सो लोभ संवरण न कर सकी.अपने से बड़ों ने बुरा किया या सोचा मेरे लिए,समझा आशीर्वाद, रख लिया सर माथे पर.छोटों ने कहा कुछ भी,अबोध है, नासमझ हैं...समझा लिया मन को. कहते हैं पेड़ में फूल लगें,तो झुक जाता है.लगे फल तो झ... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   4:38am 10 May 2015 #माँ
Blogger: vijay kumar sappatti at कविताओं के मन...
संसार में सबसे अच्छा ,सबसे सच्चा और सबसे प्यारा शब्द सिर्फ और सिर्फ "मां "ही है ! आज अम्मा को गए २६ बरस बीत गए. अम्मा से मेरा रिश्ता ईश्वर से जुड़ने का ही है वो कहते है न, since God can not be everywhere so he created mothers !आज वो शरीर रूप में भले ही न हो , पर मैंने उन्हें हमेशा अपने पास ही पाया . मैं जो कुछ भी हू... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   2:43am 13 Jan 2015 #माँ
Blogger: Shiv Nath Kumar at मन का पंछी...
(फोटो गूगल से साभार)माँ तेरे यादों की हर चीज समेट कर रख दी है सहेज कर मन में जो कभी पानी तो कभी बादल बन बरस जाती हैं मन में ही मैं सहेजता हूँ उन बूंदों को मैं बहने नहीं देना चाहता उनको उन बूंदों में भीगना अच्छा लगता है माना मन रोता है कई बार त... Read more
clicks 270 View   Vote 0 Like   9:28am 27 Oct 2014 #माँ
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
मै नही देती हक किसी कोमुझे जीता या हारा कहने कामुझे नही होती खुशीअपनी झूठी तारीफ सुन करमुझे तकलीफ भी नही होतीजब बेगाने इंगित करते है कमियां मेरीमुझे नही मिलती राहतपरायी संत्वनाओं से किसी पलनही बहते मेरे आंसूजब खो जाती है मेरी कोई चीजऐसा नही मुझे खुशी या गममहसूस नही ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   9:21am 17 Oct 2014 #माँ
Blogger: Dr. M.P. Pandey 'Nand' at नन्दानन्द (NANDAN...
माँ तुम कितनी भोली हो, माँ तुम कितनी भोली हो।तुम ही मेरी पूजा अर्चन, तुम ललाट की रोली हो।।माँ तुम कितनी भोली हो, माँ तुम कितनी भोली हो।।तुमने धरती सम धारणकर, मुझको हरदम ही है पाला,भूख सही है हरदम तुमने, पर मुझको है दिया नेवाला,नही कदम जब मेरे चलते, ऊंगली पकड़ संग हो ली हो।... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   4:57pm 27 Sep 2014 #माँ
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
तीन सौ पैंसठ दिनों में वैसे देखें तो गिनती से ज्यादा दिन भी हो जाते हैं हर नये दिन सूरज उगने के साथ दिन को एक नाम देने के बहाने कई मिल जाते हैं रोज ही आते जाते हैं जिन रास्तों पर उन्हीं रास्तों के लोग किसी दिन कुछ अलग तरीके से पेश आते हैं दो एक बच्चे मोहल्ले के सुबह सुबह शु... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   12:23pm 5 Sep 2014 #माँ
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
दर्द में मुस्कुरा के देखो तोगीत खुशियों के गा के देखो तोजीत लोगे तमाम दुनिया तुमदाव खुद पे लगा के देखो तोहौंसला है तो साथ देता हैवक़्त को आज़मा के देखो तोहद भी होती है ज़ुल्म सहने कीशान से सर उठा के देखो तोअपना ही अक्स दिखेगा उसमेंमाँ के नज़दीक जा के देखो तोबाप दे देगा जो भी ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   7:44am 3 Aug 2014 #माँ
Blogger: सरिता भाटिया at गुज़ारिश ...
कभी कभी लेटे लेटे उठकर बैठ जाती क्योंकि ठिठुरने लगती मैं अचानक तो सोचती वो ऐसा क्यों हो ?वो भी तो ध्यान रख सकता है मेरा जैसे मैं अहसास कर लेती हूँ जब भी सोये सोये लगता मुझे वो ठिठुर रहा है ओढाती उसे चादर वो जब पढ़ते पढ़ते सो जाता उतारती उसका चश्मा रख देती ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   4:28am 21 Jun 2014 #माँ
Blogger: अपर्णा त्रिपाठी at palash "पलाश"...
कामता आज जब काम करने आयी तो उसके साथ करीब तीन साल की छोटी बच्ची भी थी। आते ही बोली- बीबी जी ये मेरी बहन की बेटी है, इसी को लेने मै गांव गयी थी। इसके जनम के साथ ही मेरी बहन मर गयी थी, और मेरा जीजा साल भीतर ही दूसरी को ब्याह लाया। पहले तो थोडा ठीक रहा , मगर अब तो इस बेचारी को दूध की ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   5:39pm 15 Feb 2014 #माँ
Blogger: moomal at moomal Darshna...
माँ बनाती थी रोटी पहली गाय की , आखरी कुत्ते कीएक बामणी दादी कीएक मेथरानी बाई कीहर सुबह सांड आ जाता थादरवाज़े पर गुड़ की डली के लिएकबूतर का चुग्गाकिडियो का आटाग्यारस, अमावस, पूर्णिमा का सीधाडाकौत का तेलकाली कुतिया के ब्याने पर तेल गुड़ का सीरासब कुछ निकल आता थाउस घर से , ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   5:29pm 5 Jan 2014 #माँ
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
"Excuse me aunty . . ." " झूठ मूठ नाम रख लिया वाणी , दुर्वाणी हुई जा रही हो "  यह शब्द हैं वाणी जी की लड़कियों श्रेया और श्रुति के और बोले हैं अपनी माँ से. . . .  मैंने आज इस नोक झोंक का काफी देर आनंद लिया , और कुछ पंक्तियाँ लिख गयीं माँ और बेटियों पर , वे वाकई खुश किस्मत हैं कि उन्हे... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   4:32am 9 Oct 2013 #माँ
Blogger: ajay kumar jha at ब्लॉग बुलेटि...
तुमने तो कथा लिख दी प्रभु सबके हिस्से अभिनय में कोई श्रेष्ठ,कोई अनाड़ी और उतार दिया रंगमंच पर …. कुछ संवाद याद रहे,कुछ भूल गए शरीर और दिल-दिमाग के मध्य बड़ी परेशानी है पर पर्दा गिरने से पहले कुछ न कुछ तो करते ही जाना है !नींद में भी बहती है सपनों की गहरी लम्बी&nb... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   8:35am 3 Oct 2013 #माँ
Blogger: ajay kumar jha at ब्लॉग बुलेटि...
अम्मा की एक नहीं कई तस्वीरें उभरती हैं बाल संवारती अम्मा सपनों को एहसासों को - शब्द देती अम्मा धर्मयुग ढूंढती चम्मच गिनती न मिलने पर हमारी शामत लाती माइग्रेन के विस्फोटक दर्द में रोती खिलखिलाती,चिढाती,लूडो में हारकर लड़ती अम्मा बिगड़ी चीजों को श... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   1:29pm 2 Oct 2013 #माँ
Blogger: sudha bhargava at तूलिकासदन...
माँ /सुधा भार्गव -बेटा ,एक ही बिल्डिंग में आमने- सामने के फ्लैट में हम लोग रहते हैं मगर मिले मुद्दत हो गई ।-मुद्दत --!कमाल करती हो माँ !तीन दिन पहले ही तो आया था ।-तीन दिन ही सही ,हमारे लिए तो तीन युगों के बराबर हैं ।-क्या बताऊँ --!दफ्तर में बहुत काम था । देर से घर आया । आते ही ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   5:35pm 2 Sep 2013 #माँ
Blogger: नारी , NAARI at नारी का कविता...
 माँ, ये नाम है एक अंतहीन विस्तार काजीवन का, और जीवन के अवतार काचेहरे की झुर्रियों से टपकतीगरिमा का नाम है माँज़िंदगी की हर तारीख मेंपंचांग सी है माँकभी सोचा है माँ के उच्चारण मेंचंद्रबिन्दु क्यूं लगा हैमाँ  की गोद में सर रखकर वो शीतलता मिलती हैजो किसी वातानुकूलित कमर... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   12:00pm 17 Aug 2013 #माँ
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