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Tag: बासुदेव अग्रवाल

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सोया पड़ा हुआ शासन,कठिन बड़ा अब पेट भरण,शरण कहाँ? केवल शोषण,***ले रहा जनतंत्र सिसकी,स्वार्थ की चक्की चले,पाट में जनता विवस सी।***चुस्त प्रशासन भी बेकार,जनता सुस्त निकम्मी,लोकतंत्र की लाचारी।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया2-05-20... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   6:53am 15 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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2212*4 (हरिगीतिका छंद आधारित)(पदांत 'को जाने नहीं', समांत 'आन')प्रतिरूप बालक प्यार का भगवान का प्रतिबिम्ब है,कितना मनोहर रूप पर अभिमान को जाने नहीं।।पहना हुआ कुछ या नहीं लेटा किसी भी हाल में,अवधूत सा निर्लिप्त जग के भान को जाने नहीं।।चुप था अभी खोया हुआ दूजे ही पल रोने लगे,मनम... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   6:43am 15 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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नर्तत त्रिपुरारि नाथ, रौद्र रूप धारे।डगमग कैलाश आज, काँप रहे सारे।।बाघम्बर को लपेट, प्रलय-नेत्र खोले।डमरू का कर निनाद, शिव शंकर डोले।।लपटों सी लपक रहीं, ज्वाल सम जटाएँ।वक्र व्याल कंठ हार, जीभ लपलपाएँ।।ठाडे हैं हाथ जोड़, कार्तिकेय नंदी।काँपे गौरा गणेश, गण सब ज्यों बंदी... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   1:25pm 10 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122*2रोग या कोई बला है,जिस में नर से नर जुदा है।हाय कोरोना की ऐसी,बंद नर घर में पड़ा है।दाव पर नारी की लज्जा,तंत्र का चौसर बिछा है।हो नशे में चूर अभिनय,रंग नव दिखला रहा है।खुद ही अपनी खोदने में,आदमी जड़ को लगा है।आज मतलब के हैं रिश्ते,कौन किसका अब सगा है।लेखनी मुखरित 'नमन'... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   12:59pm 5 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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अत्याचार देख भागें,शांति शांति चिल्लाते,छद्म छोड़ अब तो जागें।***पीड़ा सारी कहता,नीर नयन से बहता,अंधी दुनिया हँसती।***बाढ कहीं तो सूखा है,उजड़ रहे वन सिसके,मनुज लोभ का भूखा है,***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया28-04-20... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   9:19am 20 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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भारी रोग निसड़्लो आयो, कोरोना,सगलै जग मैं रुदन मचायो, कोरोना,मिनखाँ नै मिनखाँ सै न्यारा, यो कीन्यो,कुचमादी चीन्याँ रो जायो, कोरोना।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया30-08-20... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   5:59am 9 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 212×4जगमगाते दियों से मही खिल उठी,शह्र हो गाँव हो हर गली खिल उठी।लायी खुशियाँ ये दीपावली झोली भर,आज चेह्रों पे सब के हँसी खिल उठी।आप देखो जिधर नव उमंगें उधर,हर महल खिल उठा झोंपड़ी खिल उठी।सुर्खियाँ सब के गालों पे ऐसी लगे,कुमकुमे हँस दिये रोशनी खिल उठी।आज छोटे बड़े के म... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   6:38am 5 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(1222   1222   1222   1222)नहीं जो चाहते रिश्ते अदावत और हो जाती,न होते अम्न के कायल सियासत और हो जाती,दिखाकर बुज़दिली पर तुम चुभोते पीठ में खंजर,अगर तुम बाज़ आ जाते मोहब्बत और हो जाती।घिनौनी हरकतें करना तुम्हारी तो सदा आदत,बदल जाती अगर आदत तो फ़ितरत और हो जाती।जो दहशतगर्द हैं ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   6:30am 5 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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शारद वंदन:-वंदन वीणा वादिनी,मात ज्ञान की दायिनी,काव्य बोध का मैं कांक्षी।***राम नाम:-राम नाम है सार प्राणी,बैल बना तू अंधा,जग है चलती घाणी।***सरयू के तट पर बसी,धूम अयोध्या में मची,ज्योत राम मंदिर की जगी।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया12-08-20... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   11:39am 22 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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212×4रोज ही काम को टालते आलसी,ज़िंदगी बोझ में काटते आलसी।आसमां में बनाते किले रेत के,व्यर्थ की सोच को पालते आलसी।लौट वापस कभी वक्त आता न जो,छोड़ कल पे गवाँ डालते आलसी।आदमी के लिए कुछ असंभव नहीं,पर न खुद पे यकीं राखते आलसी।हाथ पे हाथ धर यूँ ही'बैठे 'नमन',भाग्य को दोष दे कोसते आल... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   5:18am 7 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र :- 122*4बुझी आग फिर से जलाने लगे हैं,वे फितरत पुरानी दिखाने लगे हैं।गुलों से नवाजा सदा जिनको हम ने,वे पत्थर से बदला चुकाने लगे हैं।जबाब_उन की हिम्मत लगी जब से देने,वे चूहों से हमको डराने लगे हैं।दुनाली का बदला मिला तोप से जब,तभी होश उनके ठिकाने लगे हैं।मजा आ रहा देख अब उ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   5:05am 7 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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सरिता दूषित हो रही,व्यथा जीव की अनकही,संकट की भारी घड़ी।***नीर-स्रोत कम हो रहे,कैसे खेती ये सहे,आज समस्या ये बड़ी।***तरसै सब प्राणी नमी,पानी की भारी कमी,मुँह बाये है अब खड़ी।***पर्यावरण उदास है,वन का भारी ह्रास है,भावी विपदा की झड़ी।***जल-संचय पर नीति नहिं,इससे कुछ भी प्रीति नहिं,स... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   4:49am 11 Jul 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 22  22  22  22  22  2खुशियों ने जब साथ निभाना छोड़ दिया,हमने भी अपने को तन्हा छोड़ दिया।झेल गरीबी को हँस जीना सीखे तो,गर्दिश ने भी साथ हमारा छोड़ दिया।हमें पराई लगती ये दुनिया जैसे,ग़ुरबत में अपनों ने पल्ला छोड़ दिया।थोड़ी आज मुसीबत सर पे आयी तो,अहबाबों ने घर का रस्ता छोड़ द... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   7:12am 4 Jul 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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मूर्खों की पीठों पर चढ़कर, नित चालाक बनाते काम।मूर्ख जुगाली करते रहते, मग्न भजे अपने ही राम।सिर धुन धुन फिर भाग्य कोसते, दूजों को वे दे कर दोष।नाम कमा लेते प्रवीण जो, रह जाते हैं मूर्ख अनाम।।मूर्खों के वोटों पर करते, नेता सत्ता-सुख का पान।इनके ही चंदे पर चलते, ढोंगी बाबा क... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   2:28am 9 Jun 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122  2122  2122  212इश्क़ के चक्कर में ये कैसी फ़ज़ीहत हो गयीक्या किया इज़हार बस रुस्वा मुहब्बत हो गयी।उनके दिल में भी है चाहत, सोच हम थे खुश फ़हम,पर बढ़े आगे, लगा शायद हिमाकत हो गयी।खोल के दिल रख दिया जब हमने उनके सामने,उनकी नज़रों में हमारी ये बगावत हो गयी।देखिये जिस ओर नकली ही... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   4:12am 3 Jun 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(तर्ज--न जाओ सैंया)12122 अरकान पर आधारित।मैं भर के आहें तकूँ ये राहें,सजन तु आजा सता न इतना, सता न इतना।सिंगार सोलह मैं कर के बैठी,बिना तिहारे क्या काम इनका, क्या काम इनका।।तु ही है मंदिर तु मेरी मूरत,बसी है मन में ये एक सूरत,सजा के पूजा का थाल बैठी,मैं घर की चौखट पे, दर्श अब दे, द... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   2:53pm 18 May 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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2122/1122   1122   1122   112/22दिल में दरिया-ए- मुहब्बत को उफनता देखो,इसका आँखों की हदें तोड़ उमड़ना देखो।इश्क़ का ऐसा भी होता है असर था न पता,किस कदर बन गये हम सब के तमाशा देखो।जन्नत-ए-दुनिया थी जो पहले कभी,दौर-ए-दहशत ने उसे कैसा उजाड़ा देखो।ले के जायेगी कहाँ होड़ तरक्की की हमें,कितन... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   4:15am 5 May 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122  1212  22दिल में कैसी ये बे-क़रारी है,शायद_उन की ही इंतिज़ारी है।इश्क़ में जो मज़ा वो और कहाँ,इस नशे की अजब खुमारी है।आज भर पेट, कल तो फिर फाका,हमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है।दौर आतंक, लूट का ऐसा,साँस लेना भी इसमें भारी है।जिससे मतलब उसी से बस नाता,आज की ये ही होशियारी है।अब तो ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   4:03am 5 May 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बहर 1222 1222 1222 1222नया आया है संवत्सर, करें स्वागत सभी मिल के;नये सपने नये अवसर, नया ये वर्ष लाया है।करें सम्मान इसका हम, नई आशा बसा मन में;नई उम्मीद ले कर के, नया ये साल आया है।लगी संवत् सत्ततर की, चलाया उसको नृप विक्रम;सुहाना शुक्ल पखवाड़ा, महीना चैत्र तिथि एकम;मिलाएँ हाथ सब से ही, ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   3:34am 25 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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फागुन का मास।रसिकों की आस।।बासंती वास।लगती है खास।।होली का रंग।बाजै मृदु चंग।।घुटती है भंग।यारों का संग।।त्यज मन का मैल।टोली के गैल।।होली लो खेल।ये सुख की बेल।।पावन त्योहार।रंगों की धार।।सुख की बौछार।दे खुशी अपार।।=============निधि छंद विधान:-यह नौ मात्रिक चार चरणों का ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   12:04pm 9 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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होली के सब पे चढ़े, मधुर सुहाने रंग।पिचकारी चलती कहीं, बाजे कहीं मृदंग।।दहके झूम पलाश सब, रतनारे हो आज।मानो खेलन रंग को, आया है ऋतुराज।।होली के रस की बही, सरस धरा पे धार।ऊँच नीच सब भूल कर, करें परस्पर प्यार।।फागुन की सब पे चढ़ी, मस्ती अपरम्पार।बाल वृद्ध सब झूम के, रस की छोड़े ... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   11:59am 9 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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2*15जीभ दिखा कर यारों को ललचाना वो भी क्या दिन थे,उनसे फिर मन की बातें मनवाना वो भी क्या दिन थे।साथ खेलना बात बात में झगड़ा भी होता रहता,पल भर कुट्टी फिर यारी हो जाना वो भी क्या दिन थे।डींग हाँकने और खेलने में जो माहिर वो मुखिया,ऊँच नीच का भेद न आड़े आना वो भी क्या दिन थे।नहीं क... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   10:59am 4 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122   2122   2122   212लग रहा है यार मेरा हमसफ़र होने को है,सद्र जो दिल का था अब तक सद्र-ए-घर होने को है।उनके आने से सँवर जाएगा उजड़ा आशियाँ,घर बदर जो हो रहा था घर बसर होने को है।जो मुहब्बत थी खफ़ा उसने करम दिल पे किया,ऐसा लगता है कि किस्सा मुख़्तसर होने को है।रोज गाएँगे तरा... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   6:25am 4 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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221   2121   1221   212पाएँ वफ़ा के बदले जफाएँ तो क्या करें,हर बार उनसे चोट ही खाएँ तो क्या करें।हम ख्वाब भी न दिल में सजाएँ तो क्या करें,उम्मीद जीने की न जगाएँ तो क्या करें।बन जाते उनके जख्म की मरहम, कोई दवा,हर जख़्म-ओ-दर्द जब वे छिपाएँ तो क्या करें।महफ़िल में अज़नबी से वे जब आय... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   6:13am 4 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र: 1212 1212, 1212 1212ये नीति धार के रहो, बुरा न मानो होली है,कठोर घूँट पी हँसो, बुरा न मानो होली है।मिटा के भेदभाव सब, सभी से ताल को मिला,थिरक थिरक के नाच लो, बुरा न मानो होली है।मुसीबतों की आँधियाँ, झझोड़ के तुम्हें रखे,पहाड़ से अडिग बनो, बुरा न मानो होली है।विचार जातपांत का, रिवाज और ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   5:57am 4 Mar 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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