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Tag: बासुदेव अग्रवाल

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मन वांछित जब हो नहीं, प्राणी होता क्रुद्ध।बुद्धि काम करती नहीं, हो विवेक अवरुद्ध।।नेत्र और मुख लाल हो, अस्फुट उच्च जुबान।गात लगे जब काम्पने, क्रोध चढ़ा है जान।।सदा क्रोध को जानिए, सब झंझट का मूल।बात बढ़ाए चौगुनी, रह रह दे कर तूल।।वशीभूत मत होइए, कभी क्रोध के आप।काम बिगाड़े... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   4:21am 10 Feb 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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(मुक्तक शैली की रचना)अर्थव्यवस्था चौपट कर दी, भ्रष्टाचारी सेठों ने।छीन निवाला दीन दुखी का, बड़ी तौंद की सेठों ने।केवल अपना ही घर भरते, घर खाली कर दूजों का।राज तंत्र को बस में कर के, सत्ता भोगी सेठों ने।।कच्चा पक्का खूब करे ये, लूट मचाई सेठों ने।काली खूब कमाई करके, भरी तिजौ... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   4:15am 10 Feb 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122 2122 2122 212जब से अंदर और बाहर एक जैसे हो गये,तब से दुश्मन और प्रियवर एक जैसे हो गये।मन की पीड़ा आँख से झर झर के बहने जब लगी,फिर तो निर्झर और सागर एक जैसे हो गये।लूट हिंसा और चोरी, उस पे सीनाजोरी है,आजकल तो जानवर, नर एक जैसे हो गये।अर्थ के या शक्ति के या पद के फिर अभिमान में,आज... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   5:18am 4 Feb 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बहर :- 122*3+ 12 (शक्ति छंद आधारित)(पदांत 'रोटियाँ', समांत 'एं')लगे ऐंठने आँत जब भूख से,क्षुधा शांत तब ये करें रोटियाँ।।लखे बाट सब ही विकल हो बड़े, तवे पे न जब तक पकें रोटियाँ।।तुम्हारे लिए पाप होतें सभी, तुम्हारी कमी ना सहन हो कभी।रहे म्लान मुख थाल में तुम न हो, सभी बात मन की कह... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   3:06pm 21 Jan 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122  2122  2122  212जनवरी के मास की छब्बीस तारिख आज है,आज दिन भारत बना गणतन्त्र सबको नाज़ है।ईशवीं उन्नीस सौ पच्चास की थी शुभ घड़ी,तब से गूँजी देश में गणतन्त्र की आवाज़ है।आज के दिन देश का लागू हुआ था संविधान,है टिका जनतन्त्र इस पे ये हमारी लाज है।सब रहें आज़ाद हो रोजी कमाएँ ... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   12:40pm 4 Jan 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बहर:- 22  121 22,  22  121 22(पदांत का लोप, समांत 'आरी')ममता की जो है मूरत, समता की जो है सूरत,वरदान है धरा पर, ये बेटियाँ हमारी।।माँ बाप को रिझाके, ससुराल को सजाये,दो दो घरों को जोड़े, ये बेटियाँ दुलारी।।जो त्याग और तप की, प्रतिमूर्ति बन के सोहे,निस्वार्थ प्रेम रस से, हृदयों को सींच मो... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   7:53am 18 Dec 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 221 1221 1221 122मूली में है झन्नाट जो, आलू में नहीं है,इमली सी खटाई भी तो निंबू में नहीं है।किशमिश में लचक सी जो है काजू में नहीं है,जो लुत्फ़ है भींडी में वो कद्दू में नहीं है।बेडोल दिखे, गोल सदा, बाँकी की महिमा,जो नाज़ है बरफी में वो लड्डू में नहीं है।जितनी भी करूँ तुलना मैं घर... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   11:33am 4 Dec 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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मधुवन महकत, शुक पिक चहकत,जन-मन हरषत,  मधु रस बरसे।कलि कलि सुरभित, गलि गलि मुखरित,उपवन पुलकित, कण-कण सरसे।तृषित हृदय यह, प्रभु-छवि बिन दह,दरश-तड़प सह, निशि दिन तरसे।यमुन-पुलिन पर, चित रख नटवर,'नमन'नवत-सर, ब्रज-रज परसे।।*****जनहरण विधान:- (कुल वर्ण संख्या = 31 । इसमें चरण के प्रथम 30 वर... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   8:03am 15 Nov 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बम बम के हम उद्घोषों से, धरती गगन नाद से भरते।बोल 'बोल बम'के पावन सुर, आह्वाहन भोले का करते।।पर तुम हृदयहीन बन कर के, मानवता को रोज लजाते।बम के घृणित धमाके कर के, लोगों का नित रक्त बहाते।।हर हर के हम नारे गूँजा, विश्व शांति को प्रश्रय देते।साथ चलें हम मानवता के, दुखियों की ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   4:41am 11 Nov 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 212*4जो गिरे हैं उन्हें हम उठाते रहे,दर्द में उनके आँसू बहाते रहे।दीप हम आँधियों में जलाते रहे।लोग कुछ जो इन्हें भी बुझाते रहे।जो गरीबी की सह मार बेज़ार हैं,आस जीने की उन में जगाते रहे।राह मज़लूम की तीरगी से घिरी,रस्ता जुगनू बने हम दिखाते रहे।खुद परस्ती ओ नफ़रत के इस दौ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   6:38am 5 Nov 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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सोया पड़ा हुआ शासन,कठिन बड़ा अब पेट भरण,शरण कहाँ? केवल शोषण,***ले रहा जनतंत्र सिसकी,स्वार्थ की चक्की चले,पाट में जनता विवस सी।***चुस्त प्रशासन भी बेकार,जनता सुस्त निकम्मी,लोकतंत्र की लाचारी।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया2-05-20... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   6:53am 15 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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2212*4 (हरिगीतिका छंद आधारित)(पदांत 'को जाने नहीं', समांत 'आन')प्रतिरूप बालक प्यार का भगवान का प्रतिबिम्ब है,कितना मनोहर रूप पर अभिमान को जाने नहीं।।पहना हुआ कुछ या नहीं लेटा किसी भी हाल में,अवधूत सा निर्लिप्त जग के भान को जाने नहीं।।चुप था अभी खोया हुआ दूजे ही पल रोने लगे,मनम... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   6:43am 15 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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नर्तत त्रिपुरारि नाथ, रौद्र रूप धारे।डगमग कैलाश आज, काँप रहे सारे।।बाघम्बर को लपेट, प्रलय-नेत्र खोले।डमरू का कर निनाद, शिव शंकर डोले।।लपटों सी लपक रहीं, ज्वाल सम जटाएँ।वक्र व्याल कंठ हार, जीभ लपलपाएँ।।ठाडे हैं हाथ जोड़, कार्तिकेय नंदी।काँपे गौरा गणेश, गण सब ज्यों बंदी... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   1:25pm 10 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122*2रोग या कोई बला है,जिस में नर से नर जुदा है।हाय कोरोना की ऐसी,बंद नर घर में पड़ा है।दाव पर नारी की लज्जा,तंत्र का चौसर बिछा है।हो नशे में चूर अभिनय,रंग नव दिखला रहा है।खुद ही अपनी खोदने में,आदमी जड़ को लगा है।आज मतलब के हैं रिश्ते,कौन किसका अब सगा है।लेखनी मुखरित 'नमन'... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   12:59pm 5 Oct 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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अत्याचार देख भागें,शांति शांति चिल्लाते,छद्म छोड़ अब तो जागें।***पीड़ा सारी कहता,नीर नयन से बहता,अंधी दुनिया हँसती।***बाढ कहीं तो सूखा है,उजड़ रहे वन सिसके,मनुज लोभ का भूखा है,***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया28-04-20... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   9:19am 20 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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भारी रोग निसड़्लो आयो, कोरोना,सगलै जग मैं रुदन मचायो, कोरोना,मिनखाँ नै मिनखाँ सै न्यारा, यो कीन्यो,कुचमादी चीन्याँ रो जायो, कोरोना।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया30-08-20... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   5:59am 9 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 212×4जगमगाते दियों से मही खिल उठी,शह्र हो गाँव हो हर गली खिल उठी।लायी खुशियाँ ये दीपावली झोली भर,आज चेह्रों पे सब के हँसी खिल उठी।आप देखो जिधर नव उमंगें उधर,हर महल खिल उठा झोंपड़ी खिल उठी।सुर्खियाँ सब के गालों पे ऐसी लगे,कुमकुमे हँस दिये रोशनी खिल उठी।आज छोटे बड़े के म... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   6:38am 5 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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(1222   1222   1222   1222)नहीं जो चाहते रिश्ते अदावत और हो जाती,न होते अम्न के कायल सियासत और हो जाती,दिखाकर बुज़दिली पर तुम चुभोते पीठ में खंजर,अगर तुम बाज़ आ जाते मोहब्बत और हो जाती।घिनौनी हरकतें करना तुम्हारी तो सदा आदत,बदल जाती अगर आदत तो फ़ितरत और हो जाती।जो दहशतगर्द हैं ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:30am 5 Sep 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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शारद वंदन:-वंदन वीणा वादिनी,मात ज्ञान की दायिनी,काव्य बोध का मैं कांक्षी।***राम नाम:-राम नाम है सार प्राणी,बैल बना तू अंधा,जग है चलती घाणी।***सरयू के तट पर बसी,धूम अयोध्या में मची,ज्योत राम मंदिर की जगी।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया12-08-20... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   11:39am 22 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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212×4रोज ही काम को टालते आलसी,ज़िंदगी बोझ में काटते आलसी।आसमां में बनाते किले रेत के,व्यर्थ की सोच को पालते आलसी।लौट वापस कभी वक्त आता न जो,छोड़ कल पे गवाँ डालते आलसी।आदमी के लिए कुछ असंभव नहीं,पर न खुद पे यकीं राखते आलसी।हाथ पे हाथ धर यूँ ही'बैठे 'नमन',भाग्य को दोष दे कोसते आल... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   5:18am 7 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र :- 122*4बुझी आग फिर से जलाने लगे हैं,वे फितरत पुरानी दिखाने लगे हैं।गुलों से नवाजा सदा जिनको हम ने,वे पत्थर से बदला चुकाने लगे हैं।जबाब_उन की हिम्मत लगी जब से देने,वे चूहों से हमको डराने लगे हैं।दुनाली का बदला मिला तोप से जब,तभी होश उनके ठिकाने लगे हैं।मजा आ रहा देख अब उ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   5:05am 7 Aug 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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सरिता दूषित हो रही,व्यथा जीव की अनकही,संकट की भारी घड़ी।***नीर-स्रोत कम हो रहे,कैसे खेती ये सहे,आज समस्या ये बड़ी।***तरसै सब प्राणी नमी,पानी की भारी कमी,मुँह बाये है अब खड़ी।***पर्यावरण उदास है,वन का भारी ह्रास है,भावी विपदा की झड़ी।***जल-संचय पर नीति नहिं,इससे कुछ भी प्रीति नहिं,स... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   4:49am 11 Jul 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 22  22  22  22  22  2खुशियों ने जब साथ निभाना छोड़ दिया,हमने भी अपने को तन्हा छोड़ दिया।झेल गरीबी को हँस जीना सीखे तो,गर्दिश ने भी साथ हमारा छोड़ दिया।हमें पराई लगती ये दुनिया जैसे,ग़ुरबत में अपनों ने पल्ला छोड़ दिया।थोड़ी आज मुसीबत सर पे आयी तो,अहबाबों ने घर का रस्ता छोड़ द... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   7:12am 4 Jul 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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मूर्खों की पीठों पर चढ़कर, नित चालाक बनाते काम।मूर्ख जुगाली करते रहते, मग्न भजे अपने ही राम।सिर धुन धुन फिर भाग्य कोसते, दूजों को वे दे कर दोष।नाम कमा लेते प्रवीण जो, रह जाते हैं मूर्ख अनाम।।मूर्खों के वोटों पर करते, नेता सत्ता-सुख का पान।इनके ही चंदे पर चलते, ढोंगी बाबा क... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   2:28am 9 Jun 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122  2122  2122  212इश्क़ के चक्कर में ये कैसी फ़ज़ीहत हो गयीक्या किया इज़हार बस रुस्वा मुहब्बत हो गयी।उनके दिल में भी है चाहत, सोच हम थे खुश फ़हम,पर बढ़े आगे, लगा शायद हिमाकत हो गयी।खोल के दिल रख दिया जब हमने उनके सामने,उनकी नज़रों में हमारी ये बगावत हो गयी।देखिये जिस ओर नकली ही... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   4:12am 3 Jun 2020 #बासुदेव अग्रवाल
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