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Tag: बालकविता

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
खेल-कूद में रहे रात-दिन,अब पढ़ना मजबूरी है।सुस्ती - मस्ती छोड़,परीक्षा देना बड़ा जरूरी है।।--मात-पिता,विज्ञान,गणित है,ध्यान इन्हीं का करना है।हिन्दी की बिन्दी को,माता के माथे पर धरना है।।--देव-तुल्य जो अन्य विषय है,उनके भी सब काम करेगें।कर लेंगें, उत्तीर्ण परीक्षा,अपन... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   7:30pm 23 Sep 2020 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--सूरज चमका नील-गगन में।फैला उजियारा आँगन में।।काँधे पर हल धरे किसान। करता खेतों को प्रस्थान।।मेहनत से अनाज उपजाता।यह जग का है जीवन दाता।।खून-पसीना बहा रहा है।स्वेद-कणों से नहा रहा है।।जीवन भर करता है काम।लेता नही कभी विश्राम।।चाहे सूर्य अगन बरसाये।चाहे घटा गगन म... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   1:52am 21 Sep 2020 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--आ गई बरसात तो,अमरूद गदराने लगे।स्वच्छ जल का पान कर,डण्ठल पे इतराने लगे।।--डालियों पर एक से हैं,रंग में और रूप में।खिल रहे इनके मुखौटे,गन्दुमी सी धूप में।।--कुछ हैं छोटे. कुछ मझोले,कुछ बड़े आकार के।मौन आमन्त्रण सभी को,दे रहे हैं प्यार से।--किसी का मन है गुलाबी,और किसी ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   10:29am 28 Aug 2020 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
जो शिव-शंकर को भाती है बेल वही तो कहलाती है  तापमान जब बढ़ता जाता पारा ऊपर चढ़ता जाता अनल भास्कर जब बरसाता लू से तन-मन जलता जाता  तब पेड़ों पर पकती बेल गर्मी को कर देती फेल इस फल की है महिमा न्यारी गूदा इसका है गुणकारी  पानी में कुछ देर भिगाओ घोट... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   1:21am 24 May 2020 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
गर्मी का मौसम है आया।आड़ू और खुमानी लाया।। आलूचा है या कहो बुखारा।काला-काला कितना प्यारा।। खट्टे-मीठे और रसीले।काले-लाल और हैं पीले।।सूरज जब शोले बरसाता।धरती का पारा बढ़ जाता।।तब ये अपना रूप दिखाते।मैदानों की प्यास बुझाते।।अगर चाहते हो सुख पाना।मौसम के सारे फ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   5:56am 8 Jun 2019 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
सूरज ने है रूप दिखाया।गर्मी ने तन-मन झुलसाया।।धरती जलती तापमान से।आग बरसती आसमान से।।लेकिन है भगवान कृपालू।सबका रखता ध्यान दयालू।।कुदरत ने फल उपजाये हैं।जो सबके मन को भाये हैं।।सूखी नदियों की रेती है।लेकिन उनमें भी खेती है।।ककड़ी-खीरा, खरबूजा हैं।और रसीले तरबू... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   1:54am 5 May 2019 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
काले रंग का चतुर-चपल,पंछी है सबसे न्यारा।डाली पर बैठा कौओं का, जोड़ा कितना प्यारा।नजर घुमाकर देख रहे ये,कहाँ मिलेगा खाना।जिसको खाकर कर्कश स्वर में,छेड़ें राग पुराना।।काँव-काँव का इनका गाना,सबको नहीं सुहाता।लेकिन बच्चों को कौओं का,सुर है बहुत लुभाता।।कोयलिया की कु... Read more
clicks 269 View   Vote 0 Like   5:17am 14 Nov 2018 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर,मीठा राग सुनाती हो।आनन-फानन में उड़ करके,आसमान तक जाती हो।।सूरज उगने से पहले तुम,नित्य-प्रति उठ जाती हो।चीं-चीं, चूँ-चूँ वाले स्वर से ,मुझको रोज जगाती हो।।तुम मुझको सन्देशा देती,रोज सवेरे उठा करो।अपनी पुस्तक को ले करके,पढ़ने में नित जुटा करो।... Read more
clicks 3473 View   Vote 0 Like   4:44am 30 Oct 2018 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
मास्साब मत पकड़ो कान।है जुकाम से बहुत थकान।।सरदी से ठिठुरे हैं हाथ।नहीं दे रहे कुछ भी साथ।।नभ में छाये काले बादल।भरा हुआ जिनमें शीतल जल।।आज नहीं लिखने की मर्जी।सेवा में भेजी है अर्जी।।दया करो हे कृपानिधान!छुट्टी दे दो अब श्रीमान।।जल्दी से अब घर जाऊँगा।चाय-... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   1:34pm 16 Sep 2018 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
सीधा-सादा. भोला-भाला।बच्चों का संसार निराला।।बचपन सबसे होता अच्छा।बच्चों का मन होता सच्चा।पल में रूठें, पल में मानें।बैर-भाव को ये क्या जानें।।प्यारे-प्यारे सहज-सलोने।बच्चे तो हैं स्वयं खिलौने।।बच्चों से नारी है माता।ममता से है माँ का नाता।।बच्चों से है दुनियादा... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   2:31pm 14 Jul 2018 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at ब्लॉगमंच...
अपनी बालकृति"हँसता गाता बचपन"सेतख्ती और स्लेटसिसक-सिसक कर स्लेट जी रही,तख्ती ने दम तोड़ दिया है।सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है,कलम टाट का छोड़ दिया है।। दादी कहती एक कहानी,बीत गई सभ्यता पुरानी।लकड़ी की पाटी होती थी,बची न उसकी कोई निशानी। फाउण्टेन-पेन गायब हैं,बॉल पेन फल-... Read more
clicks 323 View   Vote 0 Like   11:22am 6 Jul 2018 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
हरी, लाल और पीली-पीली!लीची होती बहुत रसीली!! गायब बाजारों से केले।सजे हुए लीची के ठेले।। आम और लीची का उदगम।मनभावन दोनों का संगम।। लीची के गुच्छे हैं सुन्दर।मीठा रस लीची के अन्दर।। गुच्छा बिटिया के मन भाया!उसने उसको झट कब्जाया!! लीची को पकड़ा, दिखलाया!भइया ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   3:58am 21 May 2018 #बालकविता
Blogger: लिली मित्रा at मेरी अभिव्यक...
                        (चित्राभार इन्टरनेट)👶👶#बालकविता👶👶👶ग़ुसलखान कीखिड़की पर,रहती थी साबुनकी बट्टी,,जब जाती दोपहरबाद,मिलती थी वहचट्टी-बट्टी😢रक्खे मिलते गुदड़ीके ढेरकतरन-शतरन,जूट भतेर,,बूझ ना पाती करताकौन,,😰चुपके से घुसता,ना कोई टेर,,ए•सी• के फांकों मेंघु... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   7:43am 16 Mar 2018 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
रहता वन में और हमारे,संग-साथ भी रहता है।यह गजराज तस्करों के,जालिम-जुल्मों को सहता है।।समझदार है, सीधा भी है,काम हमारे आता है।सरकस के कोड़े खाकर,  नूतन करतब दिखलाता है।।मूक प्राणियों पर हमको तो,तरस बहुत ही आता है।इनकी देख दुर्दशा अपना,सीना फटता जाता है।। वन्य जीव... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   2:29am 12 Mar 2018 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
लगा हुआ है इनका ढेर।ठेले पर बिकते हैं बेर।।रहते हैं काँटों के संग।इनके हैं मनमोहक रंग।।जो हरियल हैं, वे कच्चे हैं।जो पीले हैं, वे पक्के हैं।।ये सबके मन को ललचाते।हम बच्चों को बहुत लुभाते।।शंकर जी को भोग लगाते।व्रत में हम बेरों को खाते।। ऋतु बसन्त की मन भाई है।अपनी ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   11:30pm 13 Feb 2018 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
यह है अपना चिंकू प्यारा।पूरे घर का राजदुलारा।।इसका रंग बहुत है काला।लेकिन है यह भोला-भाला।।बड़े चाव से खाता गन्ना।रहता है हरदम चौकन्ना।।चिंकू तो है शाकाहारी।बॉल-मिठाई इसको प्यारी।।रोटी-दूध प्यार से खाता।गरमी में यह रोज नहाता।।यह है अपना चौकीदार।बिन वेतन का पह... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   1:28am 7 Jan 2018 #बालकविता
Blogger: लिली मित्रा at मेरी अभिव्यक...
                       (चित्राभार इन्टरनेट)#बालकविताचिड़िया रानी बड़ी सयानीअपने मन की हो तुम रानी।  छोटे छोटे पैरों से तुमफुदक फुदक कर चलती हो।जाँच परख कर अच्छे सेफिर चोंच से दाना चुगती हो।बड़ी गजब की फुर्तिली होचंचल कोमल शर्मिली हो।कभी घास पर कभी डाल परचीं- च... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   2:09pm 17 Dec 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
 "गिलहरी"बैठ मजे से मेरी छत पर,दाना-दुनका खाती हो!उछल-कूद करती रहती हो,सबके मन को भाती हो!!तुमको पास बुलाने को,मैंमूँगफली दिखलाता हूँ,कट्टो-कट्टो कहकर तुमको,जब आवाज लगाता हूँ,कुट-कुट करती हुई तभी तुम,जल्दी से आ जाती हो!उछल-कूद करती रहती हो,सबके मन को भाती हो!!नाम गिलहरी, ब... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   1:49am 2 Dec 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
जिस दिन लाल जवाहर ने था,जन्म जगत में पाया।उसका जन्मदिवस भारत मेंबाल दिवस कहलाया।।मोती लाल पिता बैरिस्टर,माता थी स्वरूप रानी।छोड़ सभी आराम-ऐश को,राह चुनी थी बेगानी।।त्याग वकालत को नेहरू ने,गांधी का पथ अपनाया।उसका जन्मदिवस भारत मेंबाल दिवस कहलाया।।आजादी पाने की खात... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   12:30am 14 Nov 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
धक्का-मुक्की रेलम-पेल।आयी रेल-आयी रेल।।इंजन चलता सबसे आगे।पीछे -पीछे डिब्बे भागे।।हार्न बजाता, धुआँ छोड़ता।पटरी पर यह तेज दौड़ता।।जब स्टेशन आ जाता है।सिग्नल पर यह रुक जाता है।।जब तक बत्ती लाल रहेगी।इसकी जीरो चाल रहेगी।।हरा रंग जब हो जाता है।तब आगे को बढ़ जाता है।।बच्... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   12:53am 3 Oct 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
धूप और बारिश से,जो हमको हैं सदा बचाते।छाया देने वाले ही तो,कहलाए जाते हैं छाते।। आसमान में जब घन छाते,तब ये हाथों में हैं आते।रंग-बिरंगे छाते ही तो,हम बच्चों के मन को भाते।। तभी अचानक आसमान से,मोटी-मोटी बूँदें आई।प्रांजल ने उतार खूँटी से,छतरी खोली और लगाई।। प्रा... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   9:56am 2 Oct 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
सीधा-सादा, भोला-भाला।बचपन होता बहुत निराला।।बच्चे सच्चे और सलोने।बच्चे होते स्वयं खिलौने।।पल में रूठें, पल में मानें।बच्चे बैर कभी ना ठानें।।किलकारी से घर गुंजाते।धमा-चौकड़ी खूब मचाते।।टी.वी. से मन को बहलाते।कार्टून इनके मन भाते।।पापा जब थककर घर आते।बच्चे खुशियो... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   1:52am 20 Aug 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
सावन की है छटा निरालीधरती पर पसरी हरियालीतन-मन सबका मोह रही हैनभ पर घटा घिरी है कालीमोर-मोरनी ने कानन मेंनृत्य दिखाकर खुशी मना लीसड़कों पर काँवड़ियों की भीघूम रहीं टोली मतवालीझूम-झूम लहराते पौधेधानों पर छायीं हैं बालीदाड़िम, सेब-नाशपाती के,चेहरे पर छायी है लालीलेकि... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   4:13am 18 Jul 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
बारिश से भीगा है उपवनहरा हो गया धरती का तनकोयल डाली-डाली डोलेलेकिन पंचम सुर में बोलेपेड़ आम के जब बौरातेतब कोयल के बोल सुहातेयह अपनी धुन में है गातीसबको मीठा राग सुनाती कर्कश सुर में कभी न गानाकागा जैसा मत बन जानाअपनी वाणी मधुर बनाओअच्छी बातों को अपनाओ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   1:00pm 1 Jul 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
बारिश से भीगा है उपवनहरा हो गया धरती का तनकोयल डाली-डाली डोलेलेकिन पंचम सुर में बोलेपेड़ आम के जब बौरातेतब कोयल के बोल सुहातेयह अपनी धुन में है गातीसबको मीठा राग सुनाती कर्कश सुर में कभी न गानाकागा जैसा मत बन जानाअपनी वाणी मधुर बनाओअच्छी बातों को अपनाओ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   1:00pm 1 Jul 2017 #बालकविता
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