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Tag: बंदर

Blogger: विजय राज बली माथुर at विद्रोही स्व-...
चाहे जितनी बंदर सफारियां बना ली जाये समस्या ज्यों की त्यो रहेगी। हमारे अनुभव में तो वृन्दावन जाना हमेशा नुकसानदायक रहा है। परंतु माँ के लगाव के कारण पिताजी भी अक्सर जाते थे और हम लोग बच्चा होने के कारण जाने को बाध्य थे। लेकिन तब ये बंदर इस प्रकार लोगों को परेशान नहीं क... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   12:27pm 19 Aug 2014 #बंदर
Blogger: विजय राज बली माथुर at पूनम वाणी ...
रविवार, 16 अक्तूबर 2011===========  (1) दर्दकोई किसी के आँसू क्यों पोंछे ?कोई किसी का दर्द क्यों मोल ले या सम्हाले ?सब अपने मे व्यस्त अलमस्त बनेदूसरों के क्यों हमदर्द बने?यह जीवन है क्यों खराब करे?यह जीवन है क्यों बर्बाद करे?पल-पल घमंड मे डूबेक्या करने को क्या कर गुजरे।(2) छविएक दो तीनब... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   9:43am 14 Jun 2013 #बंदर
Blogger: Anita nihalani at एक जीवन एक कह...
आजसुबह घर में सत्यनारायण की कथा हुई थी, दिन भर उसकी सुगंध फैली रही. नन्हा भी आज जल्दी उठ गया था, शाम को उसे लेकर माँ के साथ गंगा घाट तक गयी, वह बेहद खुश था, नदी को देखते ही दूर से बोला, गंगा जी ..वापसी में जैसे ताकत भर गयी थी उसमें. इस समय रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, ननद ने पेठे की ... Read more
clicks 322 View   Vote 0 Like   8:29am 18 Sep 2012 #बंदर
Blogger: Anita nihalani at एक जीवन एक कह...
कलजून को पत्र लिखा, कहीं वह नाराज न हो गए हों कि उसने उन्हें मेस ज्वाइन करने को कहा, अब यह तो उनका पत्र आने पर ही मालूम होगा. उसे पूरी आशा है आज उसका पत्र भी आयेगा. सुबह पांच बजे से पहले ही उसकी नींद खुल गयी उमस और गर्मी के कारण. उसने सोचा आज रात से यहीं छत पर सोयेगी जब सुबह छत प... Read more
clicks 321 View   Vote 0 Like   5:08am 17 Sep 2012 #बंदर
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
बंदरटेढ़ी कर देते हैं टाटा-स्काई की छतरीतोड़ देते हैंफोन के तारघुस आते हैं कीचन मेंउठा ले जाते है फल या ताजी बनी रोटियाँनहाते हैं पानी की टंकी में घुस करडालते हैदिन दहाड़े डाकाहमलाठी लेकरबमुश्किल खुद को बचा ही पाते हैं।अकेले हों तोभले भाग जांयमगर जब होते हैं झुण्ड म... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   3:40pm 2 Jun 2012 #बंदर
Blogger: ललित शर्मा at चलती का नाम ग...
पहले भी अयोध्या आया था, तब भी देखा था, अभी भी देखा है, बदला कुछ भी नहीं है, वही विक्रम की सवारी, पहले दो-दो रुपए लेते थे अब 5-5 और 10-10 लेने लगे हैं, लिट्टी चोखा का ठेला, बिड़ला धर्मशाला के समीप होमियोपैथी के डॉक्टर की दुकान, पुलिस चौकी, जलेबी और इमरती की दुकान, सड़क पर घूमते हुए आव... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   10:43am 23 Apr 2012 #बंदर
Blogger: अविनाश वाचस्पति at तेताला...
गिलहरी आई बंदर के साथदोनों पेड़ों की शाखों परदीवारों की मुंडेरों परगलियों में पगडंडियों परजैसे मन में खुशियां...मचलती रहती हैंवैसे ही वे भी मंडराते हैंपर अलग अलग पाए जाते हैंएक साथ देखकर दोनों कोइंसान का सारा जंगलआज मंगल के दिनहतप्रभ है सचमुचपर सब जानते हैंप्‍यार म... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   11:43pm 30 Jan 2012 #बंदर
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