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Tag: फूल

Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
समाधि का फूल “जब गिर जाएगी झूठ की आखिरी दीवार भी भीतर  सुडौल हो जायेगा भावनाओं का नुकीला पत्थर घिसते-घिसते  जो चुभ जाता था खुद को और चुभाया जाता था दूसरों को  जब तृप्त हो जाएगी मन की आखिरी वासना भी  जीने की, यश और साहचर्य की  “जब गिर जाएगी झूठ की आखिरी दीवार भी भीतर सु... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   5:22am 22 Jan 2020 #फूल
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
जैसे एक पवन का झोंका तितली, बादल, फूल, आसमां उड़ते, बनते, खिलते यकसां, देख-देख मुस्काए कोई दिल में रहता शावक जैसा ! पुलक भरा है जोश भरा भी ढहा दिए अवरोध सभी ही, खिले कमल सा रहे प्रफ्फुलित तज दी उर की आह कभी की ! जैसे एक पवन का झोंका या कोई बादल का टुकड़ा, तिरता नभ में हौ... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   7:21am 20 Sep 2019 #फूल
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
आज चौथे दिन भी सुबह हम जल्दी उठे और प्रातः भ्रमण के लिए गये. होटल से उतरकर निचली सड़क पर दायीं ओर एक इमारत थी, जिसके चारों ओर कुछ महिलाएं हाथ में माला लिए जप करती हुई परिक्रमा कर रही थीं. दीवार में समान दूरी पर झरोखे बने थे जिसमें किसी देवी या देवता का चित्र लगा था. यहाँ पर लो... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   4:30am 5 Jun 2019 #फूल
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
      मेरा बेटा, ज़ेवियर, जब छोटा ही था, तो उसे मुझे फूल लाकर देना बहुत पसन्द था। मुझे उसके लाए वे फूल, वे चाहे जंगली घास से तोड़े गए हों, या उसने अपने पिता के साथ जाकर किसी दूकान से खरीदे हों, बहुत अच्छे लगते थे, और मैं उन्हें तब तक संभाल कर रखती थी जब तक के वे इतने नहीं मु... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   3:15pm 15 May 2019 #फूल
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
रास्ते में फूल भी थे  कंटकों से बच निकलने में लगा दी शक्ति सारी, रास्ते में फूल भी थे बात यह दिल से भुला दी ! उलझनें जब घेरती थीं सुलझ जायें प्रार्थना की, किन्तु खुद ही तो रखा था चाहतों का बोझ भारी ! नींद सुख की जब मिली थी स्वप्न नयनों में भरे खुद, मंजिलें जब पास ही... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   10:56am 11 Dec 2018 #फूल
Blogger: राजीव कुमार झा at देहात...
बसंत और फूल एक दूसरे के पूरक हैं.जहां फूल हैं, वहां बारहों महीने बसंत है. बसंत है, तो फूल हैं. फूल बसंत ऋतु के द्योतक है.वनों को प्रकृति का श्रृंगार कहा जाता है.वनों के श्रृंगार से आच्छादित प्रकृति बसंत ऋतु में रंग-बिरंगे फूलों के नायाब गहनों से सज-संवर जाती है. फूलों का यह ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   2:00am 17 Oct 2017 #फूल
Blogger: Kopal at नन्ही कोपल...
                  क्या आप जानते है घर में फूलो की सजावट कैसे करेहमारे घर के ड्राइंग रूम में फूलो की कला पुष्पों की सजावट करते समय यह ध्यान रखे की पुष्प सज्जा देखने में सरल व् आकर्षक हो ।घर की सजावट साधारण है तो बड़े (फ्लावर वास) व बहुत अधिक रंग-बिरंगे फूलों की आवश्... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   3:00pm 2 Oct 2017 #फूल
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
हर भारतवासी देश भक्त है  हर फूल अनोखा है बगिया में   निज रंग और गंध लुटाता हुआ अपने तरीके से  हर पंछी गाता है अपनी ही धुन में    प्यार का इजहार भी करता है  तो हर कोईअपनी तरह से  अपनी माँ को पुकारने का हर बच्चे का  निजी तरीका है  कोई नहीं कह सकता  यही एक मात्र सलीका है  ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   8:39am 3 Mar 2017 #फूल
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
कितना कुछ ही नहीं बहुत कुछ बहुत अच्छा लिखा हुआ बहुत सी जगहों पर नजर आता है सोच में पढ़ जाती है खुद की सोच ही वैसा ही सब कुछ मुझसे भी क्यों नहीं लिखा जाता है लिखना शुरु करो नहीं कि दिन भर का देखा सुना सामने से आ जाता है दूरदर्शन रेडियो अखबार में भी आता है बहुत कुछ मगर हमेशा और... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   3:46pm 15 Sep 2014 #फूल
Blogger: मीनाक्षी at "प्रेम ही सत्...
मेरे घर के गमले में खुश्बूदार फूल खिला हैसफ़ेद शांति धारण किए कोमल रूप से मोहता मुझे .... छोटे-बड़े पत्थर भी सजे हैं सख्त और सर्द लेकिनधुन के पक्के हों जैसे अटल शांति इनमें भी है मुझे दोनों सा बनना है महक कर खिलना फिर चाहे बिखरना हो सदियों से बहते लावे में ... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   2:09pm 24 Aug 2014 #फूल
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
वर्षा को भी मची है जल्दी टिप-टिप बूंदें दूर गगन से ले आतीं संदेश प्रीत के, धरा हुलसती हरियाली पा खिल हँसती ज्यों बोल गीत के ! शिशिर अभी तो गया नहीं है  रुत वसंत आने को है, मेघों का क्या काम अभी से  फागुन माह चढ़ा भर है ! वर्षा को भी मची है जल्दी उधर फूल खिलने को आतुर, ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   10:06am 1 Mar 2014 #फूल
Blogger:  राजीव कुमार झा at यूं ही कभी...
खिल गए पलाश के फूलमंगल कुमकुमकलश मधुरसधूल धूसरित तनमटमैला रंगपास सड़कों सेदूर वनों तकखिल उठा पलाशवर्ष भर विस्मृतरहता अनजानपर अकस्मात्सुन पीहू पुकारमालकौंश रागचटकदार पुष्पलिए सूर्ख  सिंदूरी लाल ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   3:00am 20 Jan 2014 #फूल
Blogger: yashvardhan srivastav at कविता संकलन ...
चित्र साभार : yashvardhan09.blogspot.inफूल खिले है डाली - डाली ।रुत है ये मतवाली ।।ये भी कहते कुछ गाकर ।हँसते - रोते मुस्कुराकर ।।कहते ये होकर दुखी ।हमे मत तोड़ो कभी ।।मत लो हमारे प्राण ।आखिर हम में भी है जान।।... Read more
clicks 328 View   Vote 0 Like   11:12am 7 Jul 2013 #फूल
Blogger: Rachana Dixit at रचना रवीन्द्...
संकेतफूलों का खिलना एकएक सकारात्मकता,एक उत्सव, एक उल्लास, एक उत्पत्ति.पास के एक गांव मेंएक विशेष प्रजाति के बांस का झुरमुटअचानक पट गया फूलों सेऔर पट गएगावं के बुजुर्गों के माथेचिंता की लकीरों से.इन फूलों का खिलना.एक नकारात्मकता, एक विपत्ति.धरती माँ की छाती फटने का संद... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   1:30am 19 May 2013 #फूल
Blogger: vipul chaudhary at मेरी यात्रा क...
रंग वो कहते हैं मैं बदनाम हो गया हूँ, उनकी गली में आम हो गया हूँ. मेरा आना भी उन्हें नागवार गुजरता है, उनके दरीचे का पर्दा भी नया लगता है. छत के फूल भी अब मुरझाने लगे हैं, सीढ़ियों पर भी अब जाले लगने लगे हैं. बदल दिया है समय आने जाने का, नज़र मिलने पर भी रंग अब बदलने लगे हैं. Copyright ... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   12:13pm 10 May 2013 #फूल
Blogger: Rachana Dixit at रचना रवीन्द्...
बसंत विभावरी  बांधी है गठरी वसंत ने जब से,तपने लगी देह हवा की तबसे.मिलन की खुमारी उतरी नहीं थी,जुदाई के आँसू हैं राह में कब से.मायूस फूलों की धड़कन अधूरी,पराग औ भंवरें भी रूठे हैं रब से.पत्तों का पेड़ों से लिखा है बिछुड़ना,धरा पर विचरते ये फिर क्यूँ अजब से.न धानी चुनरिया न ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   1:30am 21 Apr 2013 #फूल
Blogger: नवगछिया समाचार at Naugachia samachar नवगछि...
ऐसे समय में जब देश के अलग-अलग हिस्सों से धार्मिक कट्टरता और असहिष्णुता की खबरें आ रही हैं, पूरी खबर पढ़ने के लिये यहां क्लिक करेंकिसी भी समाचार पर आप अपनी राय या टिप्पणी दे सकते है। इसके लिए naugachianews@gmail.com पर ईमेल करें | ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   5:14am 6 Feb 2013 #फूल
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at "निरंतर" क...
कली खिल जाए पौधे मेंतो फूल खिलना भीआवश्यकफूल खिल जाए पौधे मेंतो महकना भीआवश्यकजन्म लिया इंसान नेतो जीना भी आवश्यकजी भी ले इंसानतो इंसान बन कररहना भी आवश्यक935-53-12-12-2012इंसान,जीवन ,फूल,Dr.Rajendra Tela"Nirantar"... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   5:44pm 29 Jan 2013 #फूल
Blogger: sanjay kumar chourasia at "जीवन की आपाध...
फूल बनने से पूर्व ही बिखर जातीं हैं कलियाँ ,मिल जाते हैं रावण हर घर , हर गलियांना जाने कितनी लड़कियों को पलकों से ढँक आँखें ,रोते देख लो ,झेंपती, उस मासूम को माँ की गोद में लिपटी सिसकती देख लो !झूठी इज्जत की चादर से घर को क्यों ढंकती हो ?अन्यायी , निर्दयी समाज से क्यों डरती ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   8:45am 26 Dec 2012 #फूल
Blogger: Rashmi Savita at मीमांषा- Meemaansha...
तुम्हारे जाने के बाद भी निकले हैं सूरज,खिली है धूप, आया है वसंत, मुस्कुराएँ हैं फूल, और गुनगुनाते रहें हैं भौरें, पर तुम नहीं हो तो चटख नहीं है धूप, उदास है  वसंत, थोडा रुआंसे हैं फूल, और  भवरें गुनगुनाते हैं कभी-कभी किन्हीं नामालुम उदासियों के गीत;तुम चले गए  हो तो भीराहे... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   1:54am 21 Oct 2012 #फूल
Blogger: अविनाश वाचस्पति at नुक्कड़...
इस बार चिडि़यों चींटियों और फूलों को सम्‍मानित करने का है विचार। अगले बरस करेंगे अरहर की दाल मूंग की और मसूर तथा चने की दाल का यथोचित सम्‍मान। किसी को हो आपत्ति तो खेले आकर तीन पत्‍ती तीनों पत्तियां भिन्‍नकलर की हों। प्‍याज, आलू, बैंगन जैसे चेहरों को भी अब कहां छोड़ेंग... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   3:45pm 7 May 2012 #फूल
Blogger: rajneesh at रजनीश का ब्लॉ...
अनायास ही कुछ बूंदें आसमान से आकर जमीन पर गिर पड़ीं नीम दर्द से तपती जमीं पर थोड़ी ठंडक छोड़ती भाप बनती बूंदें कुछ पलों के लिए धूल का गुबार थम सा गया था और भाप होती बूंदों के बचे हिस्सों ने उढ़ा दी थी एक चादर जमीं परकुछ पलों के लिए ठंडी हवा के झोंके में जमीं का दर्द घुलकर गुम ग... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   1:12pm 8 Apr 2012 #फूल
Blogger: sanjay kumar chourasia at "जीवन की आपाध...
पाते तो " पुष्प "हैं रंग , खुशबु , पराग ,ईश्वर  के चरण ,सुन्दरता को बड़ाने की शोभा !" पात "का क्या वो तो देता है पेड़ को ऑक्सीजन, खोता है वक़्त के साथ रंग ,और अंत में आधार भी -पेड़ से होकर निराधार ,भटकता है ,धुल में मिल जाता है किसी को " वह "नहीं भाता उसका " कर्म "किसी को नजर नहीं आ... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   2:00am 5 Apr 2012 #फूल
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