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Tag: प्रेरक प्रसंग

Blogger: HARSHVARDHAN SRIVASTAV at हिन्दी चिट्ठ...
बादशाह अकबर के जमाने में 'दुल्ला भट्टी' नाम का एक मशहूर डाकू था। वह अमीरों को लूटता था और जरूरतमंदों की मदद करता था। अकबर के सैनिक इसे पकड़ने में असफल रहे क्योंकि लोग उसे छिपा लेते थे। एक बार वह एक गरीब परिवार की 'सुन्दर मुंदरिये' नामक लड़की की शादी में भाई बन कर आया।... Read more
clicks 305 View   Vote 0 Like   6:00pm 13 Jan 2016 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
     सन् 1979, बनबसा जिला-नैनीताल का वाकया है। उन दिनों मेरा निवास वहीं पर था । मेरे घर के सामने रिजर्व कैनाल फौरेस्ट का साल का जंगल था। उन पर काले मुँह के लंगूर बहुत रहते थे।     मैंने काले रंग का भोटिया नस्ल का कुत्ता पाला हुआ था। उसका नाम टॉमी था। जो मेरे परिवार ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   10:06am 10 Mar 2015 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
     सन् 1979, बनबसा जिला-नैनीताल का वाकया है। उन दिनों मेरा निवास वहीं पर था । मेरे घर के सामने रिजर्व कैनाल फौरेस्ट का साल का जंगल था। उन पर काले मुँह के लंगूर बहुत रहते थे।     मैंने काले रंग का भोटिया नस्ल का कुत्ता पाला हुआ था। उसका नाम टॉमी था। जो मेरे परिवार ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   10:06am 10 Mar 2015 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: Dharmendra Google at dharmendra61...
एक हीरा व्यापारी था जो हीरे का बहुत बड़ा विशेषज्ञ माना जाता था, किन्तु गंभीर बीमारी के चलते अल्प आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी। अपने पीछे वह अपनी पत्नी और बेटा छोड़ गया। जब बेटा बड़ा हुआ तो उसकी माँ... [[ This is a content summary only. Visit my website for full links, other content, and more! ]]... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   3:20pm 20 Jun 2013 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: Dharmendra Google at dharmendra61...
एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोजाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहां से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए भी पकाती थी, वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी जिसे कोई भी ले सकता था। एक... [[ This is a content summary only. Visit my website for full links, other content, and more! ]]... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   1:24pm 13 Jun 2013 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
प्रेरक प्रसंग-39संयम का पाठबात 1926की है। गांधी जी दक्षिण भारत की यात्रा पर थे। उनके साथ अन्य सहयोगियों के अलावा काकासाहेब कालेलकर भी थे। वे सुदूर दक्षिण में नागर-कोइल पहुंचे। वहां से कन्याकुमारी काफ़ी पास है। इस दौरे के पहले के किसी दौरे में गांधी जी कन्याकुमारी हो आए थ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   6:25am 18 Aug 2012 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
प्रेरक प्रसंग-33बरबादी की वेदनाप्रस्तुत कर्ता : मनोज कुमारहम एक ग़रीब देश के निवासी हैं। कोई भी उपयोगी चीज़ नष्ट करना राष्ट्र की हानि ही है। उसमें खाने-पीने की चीज़ की हानि तो पाप ही माना जाना चाहिए। बात 1930 की है। बापू की दांडी यात्रा शुरू हो चुकी थी। बापू जहां पहुंचते हज़ारो... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   3:21am 22 Apr 2012 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
प्रेरक प्रसंग-31साधारण दिखने वाले व्यक्तिनील साहबों के आतंक को समझने के लिए गांधी जी चंपारण आना चाहते थे। उस वक़्त आचार्य जे.बी. कृपलानी जी मुज़फ़्फ़रपुर के कॉलेज में पढाते थे। गांधी जी से उनका परिचय था। लिहाजा गांधी जी ने कृपलानी जी को पत्र लिख कर अपने आने का कारण और स... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   12:30am 8 Apr 2012 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: मनोज कुमार at राजभाषा हिंद...
प्रेरक प्रसंग-30 पुन्नीलाल नाई और गांधी जीप्रस्तुत कर्ता : मनोज कुमारआज के प्रेरक प्रसंग में एक दुर्लभ तस्वीर और रोचक प्रसंग पेश कर रहा हूं। यह वाकया गांधी जी का लोगों को प्रोत्साहित करने का एक अद्भुत उदाहरण है। बात 1939 की है। उस समय गांधी जी देश के ही नहीं सारे विश्व के श... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   12:30am 1 Apr 2012 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: Roshan Vikshipt at "ऐसी वाणी बो...
एक बार भीष्म पितामह हस्तिनापुर में मुनि शम्पाक का सत्संग कर रहे थे। भीष्म ने प्रश्न किया, ‘मुनिवर, हम धनी और निर्धन, दोनों को किसी न किसी रूप में असंतुष्ट व दुखी देखते हैं। आपकी दृष्टि में जिसके पास अथाह धन है, जिस पर लक्ष्मी की कृपा है, वह दुखी और असंतुष्ट किस कारण रहता ह... Read more
clicks 273 View   Vote 0 Like   8:02am 9 Mar 2012 #प्रेरक प्रसंग
Blogger: Roshan Vikshipt at "ऐसी वाणी बो...
पुराणों, जैन ग्रंथों और अन्य प्राचीन साहित्य में तप की व्याख्या विभिन्न प्रकार से की गई है। कुछ साधु कई-कई दिन धूप में निरंतर खड़े रहते हैं और दावा करते हैं कि वे तपस्या कर रहे हैं। मुनियों का संथारा भी तपस्या का ही एक रूप है।भगवान श्रीकृष्ण तपस्या की व्याख्या करते हुए ... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   8:05am 2 Mar 2012 #प्रेरक प्रसंग
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