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Tag: पुस्तक चर्चा

Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
 पुस्तक समीक्षा :अभी न होगा मेरा अंत : निराला का पुनर्पाठछायावादी कविता के प्रमुख उन्नायकों में एक सूर्यकांत त्रिपाठी निराला अपने काव्य की जटिलता और सरलता दोनों ही के कारण आलोचकों के लिए चुनौती रहे हैं – अपने समय में भी और आज भी। अगर यों कहा जाए कि निराला न तो छायावाद ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   8:02pm 13 May 2020 #पुस्तक चर्चा
Blogger: RAVINDRA PRABHAT at परिकल्पना...
आज के दौर में बेहद ताकतवर माध्यम है सोशाल मीडिया। एक ऐसा वर्चुअल वर्ल्ड, एक ऐसा विशाल नेटवर्क, जो इंटरनेट के माध्यम से आपको सारे संसार से जोड़े रखने में समर्थ है। द्रुत गति से सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक संचार का एक बहुत सशक्त माध्यम है सोशल मीडिया। यह मीडिया जि... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   8:32am 13 Apr 2020 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
हर कविता त्योहार है डॉ. एन. लक्ष्मी लंबे समय से हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन-अध्यापन से जुड़ी हैं तथा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में सेवारत हैं। अपनी इस प्रथम काव्यकृति के माध्यम से वे एक संभावनाशील तमिलभाषी हिंदी कवयित्री  के रूप में साहित्य के सुधी पाठकों के ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   7:07pm 21 Jan 2020 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
भूमिका"तेरा मेरा साथ रहे" (2019, कानपुर: माया प्रकाशन) डॉ रामनिवास साहू (1954)  का नया उपन्यास है। इसकी कथा स्त्री-पुरुष संबंध के अलग-अलग रंग के धागों से बुनी गई है। सरल रेखा में चलती इस कथा की नायिका भारतीय समाज की एक सामान्य स्त्री है। स्त्री के रूप में वह सामान्य है, लेकिन उस... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   3:08pm 14 Dec 2019 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
अनामिका: समकालीन स्त्री विमर्श/ डॉ. चंदन कुमारी/2019/ विद्या प्रकाशन,कानपुर/176 पृष्ठ,सजिल्द/ 500 रुपये अभिमत डॉ. चंदन कुमारी की इस समीक्षा-कृति “अनामिका: समकालीन स्त्री विमर्श” की पांडुलिपि का पारायण करते समय बार-बार मुझे एक ओर चंदन कुमारी का जिज्ञासा और उत्सुकता से दी... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   11:29am 11 Jul 2019 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
प्राक्कथन डॉ. सत्यनारायण के ग्रंथ “हरियाणा का सामाजिक एवं साहित्यिक परिदृश्य” की पांडुलिपि देखने का सौभाग्य मिला। इस सामग्री से गुजरते हुए मैं जहाँ लेखक की गहन शोध दृष्टि का कायल होता गया, वहीं इस ग्रंथ की नींव में निहित हरियाणा की सामाजिक और साहित्यिक चेतना से अभ... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   3:42pm 23 Mar 2019 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
उपन्यास को आधुनिक युग का महाकाव्य कहा जाता है. इसका कारण यह है कि इस विधा में महाकाव्य की भाँति संपूर्ण जीवन को समेटने तथा भूत, भविष्य और वर्तमान को एक साथ संबोधित करने की महती संभावनाएँ निहित हैं. यही कारण है कि आधुनिक उपन्यास से हम यह भी अपेक्षा करते हैं कि वह समकालीन ज... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   7:12am 21 Mar 2018 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
23 जुलाई 2017 को हिंदी भवन, नई दिल्ली के सभागार में कवि श्री रामकिशोर उपाध्याय के कविता संग्रह ''दीवार में आले''के लोकार्पण के अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. ऋषभदेव शर्मा द्वारा दिया गया बीज वक्तव्य.... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:44pm 18 Sep 2017 #पुस्तक चर्चा
Blogger: Neha at सोचा ना था.......
"बसचलीतोसबकेबीचहँसते-बतियातेउसेऐसालगाजैसेसारेदिनख़ूबसारीपढ़ाईकरकेघरकीओरलौटरहाहै।तभीख़यालआया-धत्वोतोस्कूलजारहाहै।"इसएकवाक्यमेंबंटीकेमनकीमनस्थितिज़ाहिरहोजातीहै,जबआपकोघरसेज़्यादाबाहरआनंदआनेलगेतोसमझिए कुछ ठीक नहीं है,कुछभावनाएँऐसीहोतींहैंजोआपअं... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   7:24am 2 Dec 2016 #पुस्तक चर्चा
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष को अधिकांश पश्चिमी इतिहासकार सैनिक विद्रोह कहकर खारिज कर देते हैं तो कई अन्य इसे कुछ रियासती राजा-सामंतों द्वारा अपनी सत्ता पुनर्स्थापित करने का प्रयास कहकर इसके महत्व को कम करके आँकते हैं। इस मान्यता को इधर कुछ भारतीय इतिहासक... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   6:30pm 22 Feb 2016 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
साहित्यिक पत्रकारिताआशा मिश्र 'मुक्ता'2016गीता प्रकाशन, हैदराबादमूल्य : 595/- पृष्ठ : 176  शुभाशंसाहिंदी पत्रकारिता का चरित्र आरंभ से ही साहित्यिकता प्रधान रहा है. इसे यों भी कहा जा सकता है कि पत्रकारिता के उदय के साथ ही हिंदी साहित्य में यह विशिष्ट चारित्रिक परिवर्तन घटित... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   11:25am 17 Dec 2015 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
भूमिका क्षणिकाओं अथवा मुक्तकों के अपने इस नए संकलन'धड़क रहा सागर बूँद में' [2015]के साथ कवयित्री शशि कोठारी [1962]एक बार फिर अपने पाठकों के सामने हैं. वैसे इनमें से अधिकतर रचनाओं को वे फेसबुक पर भी प्रस्तुत कर चुकी हैं और वहाँ इन्हें पर्याप्त प्रशंसा मिली है. लघु आकार की इन रच... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   8:10pm 29 Sep 2015 #पुस्तक चर्चा
Blogger: Neha at सोचा ना था.......
मैंने ज्यादा व्यंग्य नहीं पढ़े हैं अगर पढ़ा है तो हरिशंकर परसाई को पढ़ा है,उनसे हटकर कोई व्यंग्य पहली बार पढ़ा..और वो व्यंग्य था ज्ञान चतुर्वेदीका बारामासी. इस व्यंग्य ने पहले तो मुझे अपने नाम के कारण ही आकर्षित किया,कि ऐसी क्या कहानी हो सकती है जिसके लिए बरामासी नाम रखा गय... Read more
clicks 282 View   Vote 0 Like   11:19am 9 May 2015 #पुस्तक चर्चा
Blogger: Neha at सोचा ना था.......
“किताबों से कभी गुज़रो तो यूँ किरदार मिलते हैं गए वक़्त की ड्योढ़ी में खड़े कुछ यार मिलते हैं!”बस कुछ इसी तरह कई किरदारों से मुलाक़ात हुई गुलज़ार की लिखी “ड्योढ़ी” को पढ़ते हुए. यूँ तो गुलज़ार के शब्दों को कई बार सुना है पर उन्हें पहली बार पढ़ा. ड्योढ़ी कई कहानियों का संग्रह है और ह... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   9:21am 9 Apr 2015 #पुस्तक चर्चा
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
अभी कुछ वर्ष पहले दिल्ली में रहने वाले प्रसिद्ध पत्रकार राजीव पंडिता की एक पुस्तक आई थी ‘हेलो बस्तर’। इस पुस्तक के नाम से तो यही अनुमान होता है कि यह बस्तर क्षेत्र से जुड़े सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक आदि विभिन्न पहलुओं के बारे में होगी, किन्तु पुस्तक पढ़ने ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   6:30pm 30 Mar 2015 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
दो शब्दयह सृष्टि प्रेम की लीलाभूमि है. प्रेम ही वह तंतु है जो सृष्टि के विभिन्न पात्रों को परस्पर जोड़ता है – चाहे वे जड़ या चेतन हों, चाहे वे पशु या मनुष्य हों, चाहे वे जलचर या नभचर हों, अथवा चाहे वे स्त्री और पुरुष हों. सृष्टि में विविधता है, अनेकरूपता है, समानताएँ और असमान... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   6:51am 22 Nov 2014 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
भूमिकास्वर्गीय दुर्गा दत्त पांडेय की कविताओं के इस समग्र संकलन की भूमिका लिखते समय मन-मस्तिष्क द्रवित और विचलित है. विश्वास ही नहीं होता कि सदा हँसने-हँसाने वाला वह अंतरंग दोस्त इस तरह रोने के लिए छोड़कर चला गया है. सच, दुर्गा दत्त पांडेय जितने सौम्य थे उतने ही नटखट भी. ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   9:16am 26 Sep 2014 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
भूमिका क्षणिकाओं अथवा मुक्तकों के अपने इस नए संकलन के साथ कवयित्री शशि कोठारी एक बार फिर अपने पाठकों के सामने हैं. वैसे इनमें से अधिकतर रचनाओं को वे फेसबुक पर भी प्रस्तुत कर चुकी हैं और वहाँ इन्हें पर्याप्त प्रशंसा मिली है. लघु आकार की इन रचनाओं से उनका जो कवि व्यक्त... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   4:05pm 21 Sep 2014 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
भूमिका तमाम तरह की उत्तरोत्तर आधुनिकताओं से आक्रांत आज का आदमी स्मृतिलोप से भरे समय में जीने के लिए विवश है. इतिहास उसके हाथ से छूटा जा रहा है और सूचनाओं का अम्बार उसके बोध की धार को वर्तमान के उस बिंदु तक समेटे दे रहा है जिसके पार जाने की दृष्टि धुंधलाने लगी है. ऐसे मे... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   3:42pm 21 Sep 2014 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
पुस्तक चर्चा:ऋषभ देव शर्मा समकाल को समझने की सार्थक कोशिश------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------पतझड़ का इतिहास/ ए. अरविंदाक्षन (कविता संग्रह)/ पृष्ठ – 104/ मूल्य – रु. 125/ 2013/ मानव प्रकाशन, 131, चित्तरंजन एवेन्यू, कोलकाता – 700 073. -------------------------------------------------------------------------------------------... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   2:01pm 21 Jul 2014 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
पुस्तक चर्चा:ऋषभ देव शर्माचलाचली की बेला में ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------त्रिकाल संध्या/ परमजीत स. जज्ज (उपन्यास)/ पृष्ठ – 136/ मूल्य – रु. 250/ 2014/ राजकमल प्रकाशन, दिल्ली------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------पंजाबी भाषा के समर्थ उपन्यासकार परमजी... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   1:54pm 21 Jul 2014 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
पुस्तक चर्चा: ऋषभ देव शर्मा    सलीके से बखिया उधेड़ना----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------आया राम गया राम का दुखड़ा (हास्य-व्यंग्य संकलन)/ एम. उपेंद्र/ पृष्ठ – 124/ मूल्य – रु.400/ 2014/ क्लासिक पब्लिशिंग कंपनी, नई दिल्ली  --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   1:49pm 21 Jul 2014 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
भूमिकासंतोष अलेक्स कई भाषाओं के जानकार हैं तथा कवि और अनुवादक के रूप में इन्होंने अच्छी प्रतिष्ठा अर्जित की है. इस अनूदित कविता संग्रह ‘सहरा की धड़कनें’ के माध्यम से ये हिंदी पाठकों को हजार साल पुरानी अरबी कविताओं से रू-ब-रू करा रहे हैं. बेशक, इनका यह प्रयास स्तुत्य और स... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   6:00pm 5 Jun 2014 #पुस्तक चर्चा
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
भारतीय साहित्य में प्रगतिशील आंदोलन ने साहित्य की कसौटी को बदलने का काम किया तथा सामान्य जन के संघर्ष को विशिष्ट अभिजन की गाथाओं से अधिक महत्व दिया. खास तौर पर कहानीकारों ने इस दिशा में विशिष्ट भूमिका निभाई और साहित्य को आम आदमी के सुख-दुःख के साथ जोड़ा बाहर नहीं बल्कि ... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   4:53pm 17 Apr 2014 #पुस्तक चर्चा
Blogger: RAVINDRA PRABHAT at परिकल्पना...
हिंदी किताबों को ऑनलाइन ख़रीदने का रुझान तेज़ी से बढ़ रहा है। इसी का परिणाम है कि दिव्य प्रकाश दुबे का पहला कहानी-संग्रह ‘टर्म्स एंड कंडीशन्स अप्लाई’ केवल ऑनलाइन माध्यमों से बिककर 1 साल से भी कम समय के अंतराल में बेस्ट सेलर हुआ है। हाल ही में दिव्य प्रकाश की दूसरी किताब... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   10:43am 20 Mar 2014 #पुस्तक चर्चा
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