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Tag: पर्यावरण

Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
कुछ शब्द दोउछालूँ दर्द भर कर हवा मेंनभ चीर कर बरसें बादल उमड़-घुमड़भर जाएताल-तलैयों सेधरती का ओना-कोनाहरी-भरी होधरती।कुछ शब्द दोतट पर जाअंजुलि-अंजुलि चढ़ाऊँस्वच्छ/निर्मलकल-कल बहने लगेगंगा।कुछ शब्द दोगूँथ कर पाप, सारे जहाँ केहवन कर दूँबोल दूँ..स्वाहा!शब्दों से हो सकता ह... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   4:30pm 4 Jun 2019 #पर्यावरण
Blogger: संपाल आंडुप at संपाल आंडुप...
चूँकि मेरी बेटी को सबसे पहले तैयार होकर स्कूल जाना होता है, घर में सबसे पहले वही नहाने जाती है। इसके बाद मेरा नंबर आता है। अक्सर जब मैं नहाने के लिए नल खोलता हूँ, तो उसमें से खौलता गरम पानी कुछ देर के लिए आता रहता है, क्योंकि मेरी बेटी ने गीज़र को तब बंद किया होता है, जब उसने... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   3:39pm 25 Feb 2018 #पर्यावरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
पर्यावरण संदेषित काव्य गोष्ठी ----- \\कल दिनांक २२-१०- १७ को कविवर श्री राजेन्द्र वर्मा के आवास ३/२९, विकास नगर पर एक कविगोष्ठी हुई, जिसमें पटना से पधारे पर्यावरणविद डॉ. मेहता नगेन्द्र सिंह के अलावा स्थानीय कवियों ने भाग लिया। ------कवि-गोष्ठी की शुरुआत प्रसिद्ध कवि-गज़लका... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   4:01am 24 Oct 2017 #पर्यावरण
Blogger: Rakesh Kumar Malviya at राकेश कुमार म...
Anupam Mishra in Kesla Media Conclave: Pic Gagan Nayar बचपन से जिन कुछ बातों पर हम गांव के दोस्त इतराते थे, उनमें एक यह कि हमारे गांव में एक भारतीय आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी ने गुरूकुल ‘सेवा सदन’ स्थापित किया था। जिसे बचपन से ‘सौराज’ सुनते आए, बहुत बाद में यह समझ आया कि यह ‘स्वराज’ होते—होते ‘सौराज’ हो गय... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:00pm 20 Dec 2016 #पर्यावरण
Blogger: Akanksha Yadav at शब्द-शिखर...
चना ज़ोर गरम और पकौड़े  प्याज़ के ...चार दिन मे सूखेंगे कपड़े ये आज के ...आलस और खुमारी बिना किसी काज के ...टर्राएँगे मेंढक फिर बिना किसी साज़ के ...बिजली की कटौती का ये मौसम आया है ...हमारे घर आँगन आज सावन आया है ...भीगे बदन और गरम चाय की प्याली ...धमकी सी गरजती बदली वो काली ...नदियों स... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   3:48pm 5 Aug 2016 #पर्यावरण
Blogger: Hemant Kumar at क्रिएटिव कोन...
                  आज विज्ञापनों की चकाचौंध और बाजारवाद के युग में कोई पत्रिका निकालना और उसके स्तर को बरकरार रखना अपने आप में एक कठिन काम है।खासकर बच्चों की पत्रिकाओं के सन्दर्भ में यह बात ज्यादा लागू होती है।और उस स्थिति में तो और जब आपको यह पत्रिका पूरी तरह ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   8:02pm 8 Jul 2016 #पर्यावरण
Blogger: सरिता भाटिया at गुज़ारिश ...
आओ मिलकर पेड़ लगायें धरती को हम स्वर्ग बनायेंहरियाली कर छाँव बढाकररंग बिरंगे पुष्प खिलाकरइस बगिया को स्वच्छ बनायेंधरती को ...सीता,शबनम,राम,सुनीता अफजल,पीटर,श्याम,अनीताशेर सिंह को साथ बुलायेंधरती को ...यह है तेरा ,वो है मेरा राग द्वेष ने डाला डेरा आओ मिल मतभेद मिट... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   8:42am 4 Jun 2016 #पर्यावरण
Blogger: Dr T S Daral at अंतर्मंथन...
सामने एक शानदार गाड़ी चली जा रही थी। अभी हम उसकी खूबसूरती और शान ओ शौकत की मन ही मन प्रसंशा कर ही रहे थे कि अचानक उसकी एक खिड़की खुली और सड़क पर एक पानी की खाली बोतल फेंक दी गई। बोतल जैसे ही हमारी गाड़ी के पहिया के नीचे आई , एक जोर की आवाज़ आई जैसे टायर फट गया हो। हमने घबराकर गाड़ी स... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   5:36am 26 May 2016 #पर्यावरण
Blogger: Neha at सोचा ना था.......
आज नवभारत में एक ख़बर पढ़ने मिली..मध्यप्रदेश के भिंड ज़िले के किशूपुरा गाँव की प्रियंका भदौरिया ने अपनी शादी के मौके पर ससुराल वालों से चढ़ावे के रूप में गहने की बजाए 10,000 पौधे लाने का संकल्प लिया।उससे भी अच्छी बात ये कि ससुराल वाले उसकी बात से सहमत हुए और अब ये पौधे मायक... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   8:37am 24 Apr 2016 #पर्यावरण
Blogger: Akanksha Yadav at शब्द-शिखर...
याद कीजिये, अंतिम बार आपने गौरैया को अपने आंगन या आसपास कब चीं-चीं करते देखा था। कब वो आपके पैरों के पास फुदक कर उड़ गई थी। सवाल जटिल है, पर जवाब तो देना ही पड़ेगा। गौरैया व तमाम पक्षी हमारी संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा रहे हैं, लोकजीवन में इनसे जुड़ी कहानियां व गीत ... Read more
clicks 296 View   Vote 0 Like   5:24am 20 Mar 2016 #पर्यावरण
Blogger: Akanksha Yadav at शब्द-शिखर...
त्यौहार हमारी सदाशयता, उत्सवधर्मिता और पर्यावरण के प्रति अनुराग के परिचायक होते हैं, पर वास्तव में इसका विपरीत हो रहा है।  दीपावली के इस पावन पर्व पर जरुरी है कि हम इको-फ्रेंडली दीपावली को तरजीह दें।  पारम्परिक सरसों के तेल की दीपमालायें न सिर्फ प्रकाश व उल्लास का ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   2:26pm 22 Oct 2014 #पर्यावरण
Blogger: ललित शर्मा at ललितडॉटकॉम...
मानव सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ। नदियों को मानव ने जीवनोपयोगी साधन जुटाने के साथ आवागमन का माध्यम बनाया। नीलनदी घाटी की सभ्यता, सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर अद्यतन मानव जीवन नदियों पर ही आधारित है। परिवहन का माध्यम नदियाँ नहीं रही परन्तु कृषि कार्य एवं मान... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   10:30pm 9 Oct 2014 #पर्यावरण
Blogger: Kalipad "Prasad" at मेरे विचार मे...
                                                 एक थप्पड़ पड़ता है जब तुम्हेआंसू तुम्हारा बह निकलता है ,कुल्हाड़ी का एक घाव से पेड़ भीसिसक सिसक कर रोता है |तुम तो चिल्लाकर व्याथा अपनी बढाकर ,सब को बता देते हो,वाक... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   12:33am 30 Aug 2014 #पर्यावरण
Blogger: Kalipad "Prasad" at मेरे विचार मे...
चित्र गूगल से साभार                                                                     गर्मी थी तो दिन था शुष्क ,पर उज्वल पवन भी था उन्माद ,वेगवान प्रवल ,न जाने कहाँ से बहा ले आते चंचल ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   5:07am 30 Jul 2014 #पर्यावरण
Blogger: Hemant Kumar at Fulbagiya...
पात्र1पेड़: आम, महुआ, शीशम, पीपल, सेव, लीची2वन देवता, वन देवी3ज्वाला, भैरव, सुरेश4पशु: शेर, हाथी, हिरनसंकेत(अभिनय के लिए पेड़ों का अभिनय करने वाले पात्र अपने शरीर पर उस पेड़ विशेष के पत्ते धारण करें, जिसका वे अभिनय कर रहे हैं, इसी प्रकार मुखौटे लगा कर पशुओं का अभिनय करना ठीक रह... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   1:29pm 1 Apr 2014 #पर्यावरण
Blogger: ललित शर्मा at ललितडॉटकॉम...
शीतला माताकिसी भी राज्य की पहचान उसकी भाषा, वेषभूषा एवं संस्कृति होती है। संस्कृति लोकपर्वों में दिखाई देती है। लोकपर्व संस्कृति का एक आयाम हैं। लोकपर्वों में अंतर्निहीत तत्व होते हैं, जिनके कारण लोकपर्व मनाए जाते हैं। संस्कृति की धारा अविरल बहती है परन्तु इसके पा... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   11:00pm 20 Mar 2014 #पर्यावरण
Blogger: mukesh pandey 'chandan' at मुकेश पाण्डे...
नमस्कार मित्रो आज मैं आप सभी को मध्य प्रदेश के एक बहुत ही प्यारे राष्ट्रीय उद्यान पन्ना राष्ट्रिय उद्यान कि सैर पर ले चलता हूँ . कुछ साल पहले पन्ना राष्ट्रिय उद्यान बाघों की संख्या ख़त्म होने के कारण चर्चा में रहा था . लेकिन  मुख्य वन संरक्षक श्री मूर्ति के प्रयासों स... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   6:47pm 18 Jan 2014 #पर्यावरण
Blogger: सुनील दीपक at जो न कह सके...
मेरे विचार में आधुनिक समाज में विज्ञान व तकनीकी के बेलगाम बाज़ारीकरण से हमारे जीवन पर अनेक दिशाओं से गलत असर पड़ा है. जब इस तरह के विषयों पर बहस होती है तो मेरे कुछ मित्र कहते हैं कि मैं व्यर्थ की आदर्शवादिता के चक्कर में जीवन की सच्चाईयों का सामना नहीं करना चाहता. पर मैं ... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   3:00pm 11 Jan 2014 #पर्यावरण
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
उत्तराखंड की आपदा, केदारनाथ की तबाही से प्रभावित इंसानों ने अपना बहुत कुछ गंवाया है, अपने परिवार को खोया है. वहां रह रहे लोगों ने एक तरह से अपने वजूद को भी गंवाया है. हर गलती इन्सान को कुछ न कुछ सीखने का अवसर देती है. हर संकट से बाहर निकलने के रास्ते मिलते हैं, संकट से लड़ने क... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:13pm 25 Jun 2013 #पर्यावरण
Blogger: प्रमोद जोशी at जिज्ञासा...
हनुमान मोदीनरेन्द्र मोदी ने क्या किसी चमत्कार से 15000 गुजरातियों को  उत्तराखंड की आपदा से बाहर निकाल लिया? या यह जन सम्पर्क का मोदी स्टाइल है। जब से यह खबर छपी है सब के मन में यह सवाल है। क्या है इस कहानी का सच? टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसका स्पष्टीकरण छापा नहीं। यह खबर मोदी या उ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   10:05am 25 Jun 2013 #पर्यावरण
Blogger: प्रमोद जोशी at जिज्ञासा...
उत्तराखंड: बाढ़ के बीच कैसे बचा केदारनाथ मंदिर?डॉ खड्ग सिंह वल्दियामानद प्रोफेसर, जेएनसीएएसआरनदियों के फ्लड वे में बने गाँव और नगर बाढ़ में बह गए. आख़िर उत्तराखंड में इतनी सारी बस्तियाँ, पुल और सड़कें देखते ही देखते क्यों उफनती हुई नदियों और टूटते हुए पहाड़ों के वेग म... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   1:16pm 24 Jun 2013 #पर्यावरण
Blogger: Dr T S Daral at चित्रकथा...
यदि हम पहाड़ों की कद्र करें तो पहाड़ हमें बहुत खुशियाँ प्रदान कर सकते हैं। इस ऊंचे पहाड़ के सामने जाती यह पहाड़ी सड़क बहुत मनमोहक नज़ारा प्रस्तुत करती है। पेड़ पौधों से ढके ये पहाड़ मनुष्य के जीवन की लाइफ़ लाइन हैं।इस तरह के स्लेटी पहाड़ कहीं कहीं ही दिखते हैं। पर्वत ... Read more
clicks 341 View   Vote 0 Like   7:30am 24 Jun 2013 #पर्यावरण
Blogger: प्रमोद जोशी at जिज्ञासा...
'नदी किनारे बसने वालों का परिवार नहीं बचता'बीबीसी हिंदी डॉट कॉम मे चंडी प्रसाद भट्टअपना पर्यावरण बचाने के लिए हिमालयी समाजों के अपने परंपरागत तौर-तरीक़े रहे हैं. विशेष रूप से उत्तराखंड में प्रकृति के संरक्षण की समृद्ध परंपरा रही है.आप ऊपर के इलाक़ों में जाएँ तो पाएँग... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   4:01pm 23 Jun 2013 #पर्यावरण
Blogger: प्रमोद जोशी at जिज्ञासा...
हालांकि हम प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के खतरों के बारे में एक अरसे से बहस करते रहे हैं, पर उत्तराखंड के हादसे ने पहली बार इतनी गम्भीरता से इस सवाल को उठाया है। और उतनी ही गम्भीरता से इस बात को रेखांकित किया है कि व्यवस्था ऐसे हादसों का सामना करने को तैयार नहीं है।इस साल मॉन... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   1:51am 23 Jun 2013 #पर्यावरण
Blogger: satish saxena at मेरे गीत !...
                   यह नहीं समझ आया, कि इंसानियत भूलों से, पहाड़ के नुक्सान को पूरा करने को , इस ग़ज़ल में ऐसा क्या लिखें   कि अर्थ पूरा हो ???                   हमारी बेवकूफियों से पहाड़ रो रहे हैं , नदियाँ क्रोधित हैं , अगर नहीं सुधरे तो अभी बहुत कुछ सहना / करना बाकी है  !लगता भूलों में ही ,यह उ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   6:17am 21 Jun 2013 #पर्यावरण
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