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Tag: दर्शन

Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
जब तक एक भी बनारसी में फक्कड़पन है तब तक यह वाक्य सत्य है कि बनारस में मोक्ष मिलता है। मोक्ष मतलब आवागमन से मुक्त हो जाना। लाभ/हानी से मुक्त हो जाना। जय/पराजय से मुक्त हो जाना। यश/अपयश से मुक्त हो जाना। अपने/पराए से मुक्त हो जाना। मुक्त होने के लिए मुक्त करना आना चाहिए। त... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   8:37am 24 Mar 2019 #दर्शन
Blogger: Jagdanand Jha at Sanskritbhashi संस्कृ...
मैं अपने इस ब्लॉग पर काश्मीर शैव दर्शन के बारे में लिखते रहा हूं। इसका एक साथ संक्षिप्त परिचय इस लेख में उपस्थापित है। काश्मीर शैव दर्शन के गुरु शिष्य परंपरा के बारे में सोमानन्द कृत शिवदृष्टि से बहुत अधिक जानकारी मिल जाती है। इस ग्रंथ में उन्होंने एक ऐतिहासिक घटना क... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   8:16am 6 Nov 2018 #दर्शन
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
निज-निर्णय ---------------लोगों से सीखना ही होगा, निर्भीकता से निज बात कह-कर देते  लोग चाहे उनको पसंद करें या नहीं, जो जँचता प्रस्तुत कर देते। एक उक्ति पढ़ी थी 'Always Take Sides', जो मनानुरूप लगे हम भी सदा उचित न सोच पाते, पूर्वाग्रह-आवरण ओढ़े रहते। बहुदा एक मन बना लेते, परिस्थिति-प... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   5:53pm 28 Apr 2018 #दर्शन
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
भारतीय धर्म, दर्शन राष्ट्र -संस्कृति के विरुद्ध उठती हुई नवीन आवाजें व उनका यथातथ्य निराकरण --- डा श्याम गुप्त --- --------------------------- ----- एक धारावाहिक क्रमिक आलेख--पोस्ट तीन ------ -------------------------------============आजकल हमारे देश में गोंड आदिवासी दर्शन और बहुजन संस्कृति व महिषासुर के नाम प... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   2:58pm 14 Mar 2018 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
जिंदगीचार दिन की नहींफकतएक दिन की होती है।हर दिननई सुबहनया दिननई शाम और..अंधेरी रात होती है।सुबहबच्चे सापंछी-पंछी चहकताफूल-फूल हंसतादिनजैसे युवाकभी घोड़ाकभी गदहाकभी शेरकभी चूहाशामजैसे प्रौढ़ढलने को तैयारभेड़-बकरी की तरहगड़ेरिए के पीछे-पीछेचलने को मजबूररातजैस... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   7:09am 17 Dec 2017 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
देखो! सुनो! समझो! तब बोलो।बोलो तो..जोर-जोर से बोलोपूरे आत्मविश्वास से बोलोदो चार और सुनें कि तुमनेक्या देखा? क्या सुना? और क्या समझा?विचलित मत होनाजब वे बोलेंचिल्लाने मत लगना..झूठ! झूठ!तुम गलत! तुम गलत!मैं सही! मैं सही!ध्यान से सुननाउन्होंने क्या बोलाऔर समझनाकि यहउनका देख... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   5:30am 15 Jan 2017 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
दुखी इन्सान ने कहा  मेरा वक्त ख़राब चल रहा हैवक्त हँसने लगा उसने कहावो वाला समय कितना अच्छा था!वक्त फिर हँसने लगाउसने ईश्वर से प्रार्थना कियाहे प्रभु!मेरा वक्त ख़राब चल रहा है, अच्छा कर दो!मेरा प्रसाद स्वीकार करोपुजारी ने प्रसाद चढ़ा कर आशीर्वाद दियापंडित जी नेलम्बी ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   7:11am 16 Oct 2016 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
(१)भरम दौड़घर से मन्दिर तकपरसाद पेट मेंदुनियाँमुठ्ठी में!..............(२)धूप धूप धरती परघूमने चली।भीग गये कपड़ेबादल ने किये झगड़ेहो गई पागलदिखी कोई बदली धूपकलियों कोचूमने चली।..................(३)चिड़िया आ चरी आखा चरी खापढ़ चरी पढ़पिंजड़ा लिखसपना लिखकैद हो जाउड़ गई तो बाज पकड़ ले जाये... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   3:04pm 5 Jun 2016 #दर्शन
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
नवयुग तारक------------------एक महापुरुष अवतरण भारत -धरा पर, बाबाओं के देश छाप छोड़ी स्व-व्यक्तित्व की, मानवता कृतज्ञ-उऋण निर्लेष। भारतवासी तो सदा मननशील, चराचर विश्व के जीवन-मरण प्रश्न स्व-भाँति परिभाषा देते रहें, कुछ को सुहाना अन्यों को अनुचित। 'वसुधैव कुटुम्बकम'सिद्धा... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   5:04am 14 Apr 2016 #दर्शन
Blogger: पीताम्बर शम्भू at Peetamber Shambhoo...
आज 14 फरवरी है... हम सभी जानते हैं कि विश्वभर में इस दिन को वेलंटाइन डे के रूप में मनाते हैं। लेकिन कभी ये सोचा है कि इसको क्यों मनाया जाता है और मनाने की जरूरत क्यों हैं..?? तो इस बात का सीधे तौर पर उत्तर यह है कि हम सभी पाश्चात्य संस्कृति के गुलाम हैं, जो कुछ पश्चिम में बीता या ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   7:08pm 13 Feb 2016 #दर्शन
Blogger: राजीव कुमार झा at देहात...
कहा जाता है कि किसी भी समाज की संस्कृति,रीति-रिवाज,धर्म,दर्शन का व्यापक प्रभाव उस समाज के लेखकों,चित्रकारों,कलाकारों,फिल्मों पर भी पड़ता है.कई लेखकों की लेखनी,चित्रकारों के चित्रों,फिल्मकारों की फिल्मों में उनका व्यापक नजरिया सामने आता है जो कहीं न कहीं उसके अपने समा... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   2:30am 23 Aug 2015 #दर्शन
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
विकास-सिद्धांत  ---------------------गणना - पत्रक है समक्ष, क्यूँ सशंकित परिणाम उपलब्ध से जीवन-स्पंदन शनै प्रक्रिया, लेकिन माप तो होगा कर्म से। कर्म-विज्ञान पर हुआ बहुत चिंतन, हर जीव का भाग्य करते तय  ज्योतिषियों की बात छोड़ भी दी जाए, क्या मंथन हो सकते विषय ?  कहते है... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   11:01am 8 Aug 2015 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
मेरी पलकों से पहलेखुलती हैंतुम्हारी पलकेंउठकर देखता हूँफेंक चुके होअंधेरे की चादरगिरा चुके होलाल चोलामेरे मुँह धोने, खाने-पीने, कपड़े पहनकर काम पर निकलने तक तोटंच होझक्क सफेद धोती-कुर्ता पहनदौड़ने लगते हो आकाश मेंन जाने कहाँ जाना रहता है तुम्हें !मियाँ की दौड़ मस्जिद ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   6:45pm 10 Jun 2015 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
मेरी पलकों से पहलेखुलती हैंतुम्हारी पलकेंउठकर देखता हूँफेंक चुके होअंधेरे की चादरगिरा चुके होलाल चोलामेरे मुँह धोने, खाने-पीने, कपड़े पहनकर काम पर निकलने तक तोटंच होझक्क सफेद धोती-कुर्ता पहनघोड़े के रथ पर बैठदौड़ने लगते हो आकाश मेंन जाने कहाँ जाना रहता है तुम्हें !मिय... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   6:45pm 10 Jun 2015 #दर्शन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
कोई मतवाला मंजिल तक फूल उगाये जाने किसने गंध चुरायी है सबने, स्वेद बहाया जाने किसने स्वप्न सजाये हैं सबने ! कोई मतवाला मंजिल तक जाने का दमखम रखता, पीछे चले हजारों उसके घावों पर मरहम रखता ! राह बनायी जाने किसने कदम अनेकों के पड़ते, देख उसे ही तृप्त हो रहे पहुँचेग... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   7:33am 5 Jan 2015 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
हे ईश्वर!कड़ाकी ठण्ड मेंकैसा है रे तू?गरम पानीमिलता है क्या नहाने को?मैं तोरजाई में दुबकाफेसबुक का मजा ले रहा हूँचुटकुले पढ़ रहा हूँतू?चैन से सोया है न!धरती, आकाश, आग, हवा,पानी सूर्य, चन्द्र, ग्रह, नक्षत्र.....इतना सब दिया तूनेकि आज तक ठीक-ठीक जान भी नहीं पाया कितना दिया तूने!न ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   4:20pm 14 Dec 2014 #दर्शन
Blogger: Jagdanand Jha at Sanskritbhashi संस्कृ...
        वैशेषिक दर्शन में पदार्थों का विश्लेषण किया गया है। यह दर्शन भौतिक शास्त्र का आद्य प्रवर्तक है, जिसमें पदार्थों के विशिष्टतत्व एवं पार्थक्य को दर्शाया गया है।        कणाद द्वारा प्रणीत होने के कारण इसे कणाद दर्शन तथा प्रकाश का अभाव ‘तम’ को प्रतिपादित किया जाने स... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   9:35am 30 Oct 2014 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
कुत्ते दौड़ते हैं बीच सड़क परइस पार से उस पारउस पार से इस पारकभी कोईबाइक के सामने आ जाता हैकभी कोईकार के सामने आ जाता हैबाइक के सामनेआदमी की टांग टूटती हैकार के सामनेकुत्ते की टांग टूटती हैकुत्ता किसी से टकराना नहीं चाहतावह चाहता हैरोटी का एक टुकड़ाभूख बड़ी कुत्ती ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:30pm 20 Oct 2014 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
न जाने मुझे किस बात का भय रहता है!अँधेरे सेगली में भौंकतेकुत्तों सेछत पर कूदतेबंदरों सेखेत में भागतेसर्पों सेअब नहीं डरता।दुश्मनों के वार सेदोस्तों के प्यार सेखेल में हार सेदो मुहें इंसान सेभूत सेभगवान सेअब नहीं डरता।जानता हूँमान अपमानदेते हैंसुख दुःखइस जीवन में... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   3:56am 12 Oct 2014 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
रेल की दो पटरियों में ट्रेन नहीं, लोहे के कई घर लिये पूरा शहर दौड़ता है। पूरा शहर लोहे का बना होता है। लोहे के शहर में घर, कंकरीट के शहर में बने घरों की तरह कई प्रकार के होते हैं। एक ही शहर में महल, एक मंजिले, दो मंजिले, बहुमंजिले या कच्चे मकानों की तरह एक ही ट्रेन में ए.सी., स्... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   2:22pm 12 Feb 2014 #दर्शन
Blogger: सुज्ञ at सुज्ञ...
प्रत्येक धर्म के मूल में करूणा, प्रेम, अनुकम्पा, निःस्वार्थ व्यवहार, जीवन का आदर, सह-अस्तित्व जैसे जीवन के आवश्यक मूल्य निहित हैं। दया, परोपकार, सहिष्णुता वास्तव में हमारे ही अस्तित्व को सुनिश्चित बनाए रखने के लिए हैं। चूंकि जीने की इच्छा प्राणीमात्र की सबसे बड़ी और सर... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   2:31pm 3 Aug 2013 #दर्शन
Blogger: सुज्ञ at सुज्ञ...
प्रत्येक धर्म के मूल में करूणा, प्रेम, अनुकम्पा, निःस्वार्थ व्यवहार, जीवन का आदर, सह-अस्तित्व जैसे जीवन के आवश्यक मूल्य निहित हैं। दया, परोपकार, सहिष्णुता वास्तव में हमारे ही अस्तित्व को सुनिश्चित बनाए रखने के लिए हैं। चूंकि जीने की इच्छा प्राणीमात्र की सबसे बड़ी और सर... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   2:31pm 3 Aug 2013 #दर्शन
Blogger: अमिता नीरव at अस्तित्व...
वो दोनों बस इससे पहले एक ही बार मिले थे। और उस वक्त दोनों ने ही एक-दूसरे को ज्यादा तवज्ज़ो नहीं दी थी। इस बार भी दोनों मिले तो लेकिन गर्माहट-सी नहीं थी। शायद दोनों को पिछली मुलाक़ात याद भी नहीं आई। वो दुराव भी याद नहीं था। इस बार मिले तब भी दोनों ही तरफ हल्की-हल्की झेंप थी...... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   3:32am 11 Jun 2013 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
कुछ घालमेल हो रहा है। चित्रों का आनंद लेते-लेते कविता बन जा रही है। अपने ब्लॉग "चित्रों का आनंद"में गंगा जी की कुछ तस्वीरें लगाने लगा तो एक कविता अनायास बन गई। अब उसे यथा स्थान यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ।घोंघाकभीतुममे थाजीवन !रेत कुरेदने पर निकल आये हो बाहर।अब खाली होअसहाय... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   2:01pm 18 Jan 2013 #दर्शन
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
घर पहुँचने से पहले ही बारिश की फुहार शुरू हो गई। बारिश तेज हो जाने, भीग जाने और भीग कर बीमार पड़ जाने की चिंता ने बाइक की स्पीड तेज कर दी। तभी खयाल आया, “रूक सकता नहीं, घर जल्दी पहुँचना ही है, बारिश तेज हो जायेगी तो भीगना तय है। क्यों न सावन की इस फुहार का आनंद लिया जाय!”बाइक ... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   2:10pm 25 Jul 2012 #दर्शन
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