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Tag: ज़ज्बात

Blogger: M VERMA at जज़्बात...
ख़बर ये है कि ख़बरों में वो ही नहींजिनकी ये ख़बर है.डर से ये कहीं मर न जाएंबस यही डर है.लूटेरे भी लूटेंगे किसको?लुटा हुआ ये शहर है.दवा भला असर करे कैसे?शीशियों में तो ज़हर है.मंजिल तोइस रास्ते पर है ही नहींअँधा ये सफर है.खौफजदा,गुमनाम सा, दुबका हुआये शेरे-बब... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   7:51am 13 May 2019 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain at मंतव्य...
मुझे हमेशा से ही पसंद थे लाल पीले रंग,बारिश में भीगना, वो मिट्ठी की सौंधी महकछोटे बच्चो से घंटों धींगा मस्ती करना..उन्हें परेशान करनाजाड़ों की सर्द सुबहो मेंपापा के साथ उनकी रजाई में दुबके पड़े रहनागर्मियों की दोपहरी में औंधे पड़े कॉमिक्स पढनाअपनी गन्दी सी ड्राइंग पर इत... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   2:26pm 16 Sep 2013 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain at मंतव्य...
कितनी आसानी से कह दिया था मैंनेकी निभा लूँगा मैं तुम्हारे बिना, अब याद भी नहीं करूँगा तुम्हे मगर तुम हर पल याद आते होजब किसी कठिन क्षण मेंनहीं होता है कोई सहाराजब नहीं समझ पाता हूँदुनियादारी के दांव पेचजब याद आते है वो पलजो नसीब हुए थे सिर्फ तुम्हारी वजह सेएक तुम्हारे ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   9:24am 11 Aug 2013 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain at मंतव्य...
वो ऐसा ही कोई अगस्त का महीना थाजब तुम थे और मैं थाऔर साथ थी नक्की की वर्तुल लहरेचांदनी रातें और शीतल हवाएंइतने दिनों के हमारे रिश्ते को जब एक नाम मिलावो ऐसा ही कोई अगस्त का महीना था...कहते है पहाडो में प्रेम की जड़े होती है सबसे गहरी,वही बहा करती है प्रेम की बयारसबसे गहरी, स... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   3:53am 9 Aug 2013 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain at मंतव्य...
मुझे शब्द पसंद थे तुम्हे मौन..मुझे भीड़ चाहिए थी, तुम्हे एकांत..मुझे अफसाने उकसाते थे, तुम्हे जमीन की हकीकत..मुझे बागी बन जाना था, तुम्हे तुम्हारे संस्कार रोकते थे.....फिर भी मुझे तुम पसंद थे, तुम्हे मैंऔर अब जान मैं बिलकुल तुम्हारे जैसा हो गया हूँ..ना मुझे शब्दों से प्यार रह... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   12:53pm 30 Jul 2013 #ज़ज्बात
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at "निरंतर" क...
दर्द के खामोशसमंदर कोबहुत शिद्दत सेसम्हाल करसीने में दबा रखा हैडरता हूँकहीं ज़ज्बात उफन करबाहर ना आ जाएँदर्द देने वालों चेहरों कोबेनकाब ना कर देदुनिया कोउनकी हकीकत सेरूबरू ना करा देमुंह दिखाने केलायक ही ना छोड़े949-67-15-12-2012शायरी,मोहब्बत,ज़ज्बात ,दर्द ,Dr.Rajendra Tela"Nirantar"... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   6:48am 6 Feb 2013 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain at मंतव्य...
क्यूँ घर भर का काज करे है वोक्यूँ दुनिया भर से लाज करे है वोक्यूँ खेल सके ना मन से वो,क्यूँ सहन करे है सब कुछ वोहै वो भी भैया जैसी ही पर भैया सा प्यार नहीं मिलताहै इंसा वो भी उस जैसे हीपर इंसा सा मान नहीं मिलता... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   7:02am 6 Nov 2012 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain at मंतव्य...
जब माँ साथ हो तो किसी दुआ की ज़रूरत ही नही...जब माँ साथ हो तो फिर से बच्चा बन जाने को जी चाहता है....जब माँ साथ हो तो क्यूँ उसकी गोद में सिर रखकर सो जाने को जी चाहता है...क्यूँ दिल भारी हो तो माँ से लिपट कर रोने को जी चाहता है...क्यूँ उसकी आँखो का एक आँसू परबत सा भारी लगता है...कैसे बि... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   5:46am 2 May 2012 #ज़ज्बात
Blogger: kamal k. jain at मंतव्य...
आखिर हम लोग क्यूँ निराशा को बुरा मानते है. ये नैराश्य भी तो जीवन का अहम् अंग है. अगर इन्सान की जिंदगी में महज खुशियाँ ही तो शायद उसको इनके मायने भी मालूम न हो... पर अगर किसी इन्सान को लाख गम उठाने के बाद ख़ुशी की एक छोटी सी भी खबर सुने दे तो वो उसे सहरा में पानी की बूँद नजर आती ... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   5:23am 3 Oct 2011 #ज़ज्बात
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