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Tag: चिंतन

Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
बैठे ठाले कादर्शन है बसचिंतन के किसीकाम में कभी भीनहीं लाना होता हैखाली दिमागको कहते हैं दिमाग वालेशैतान का एक घर होता हैऐसे घरों की बातों कोध्यान में नहींलाना होता हैसब कर रहे होते हैं लागू अपने अपने धंधों पर धंधे पर ही बस नहीं जाना होता है बहुत देर में आती है बहुत ... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   3:54pm 19 Aug 2014 #चिंतन
Blogger: Sanjay Grover at सरल की डायरी Sa...
‘‘राखी बंधवा ले बेटा, बात माना करते हैं, देख बहिनों का कितना मन है, कितनी उदास हो रहीं हैं ; बंधवा ले बेटा।’’ मां कहती है।सरल कसमसा रहा है भीतर ही भीतर मगर बोल कुछ भी नहीं पा रहा। वह समझ नहीं पा रहा कि जो कुलबुलाहट उसके भीतर है, वह सही है या ग़लत, कहे कि न कहे, जैसा वह महसूस करत... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   1:04pm 15 Aug 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
एक भुजंग, एक दादुर भुजंग क्षुधा आतुर दादुर बंदी यतमान भीत भ्रांत भौरान संफेट का नहीं प्रश्न निगीर्ण होता प्राण ना उल्लाप ना आह बस विधि का विधान   एक वरिष्ठ, एक कनिष्ठ वरिष्ठ का रौरव नाद कनिष्ट प्रनर्तित, नाशाद वश्य, विकल्पित, विकांक्ष अवधूत, यंत्रित, निर्वाद प... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   5:04pm 6 Jul 2013 #चिंतन
Blogger: Shekhawat at Rajput World...
जोधा-अकबर सीरियल में इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश करने को लेकर राजपूत समाज का युवा वर्ग काफी आक्रोशित है, ये युवा वर्ग इस सीरियल पर ही नहीं समाज के उन प्रतिष्ठित व स्थापित नेताओं के इस मुद्दे पर चुप रहने को लेकर भी आक्रोशित है| और उनका यह रोष सोशियल वेब साइट्स पर प्रत्यक्ष द... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   2:47am 26 Jun 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
हे मान्यवर!मैंने कब कहा मैं पापी नहीं हूँ लेकिन स्वर्ग की चाहनहीं है मुझेनर्क का भय नहीं हैमुझे  मैं स्वर्ग-नर्क सेऊपर उठ चुका हूँ इसलिए मुझे माफ़ कर दोरसायनों से तृप्त हैंमेरे रोम-रोममुझे उसी में रमने दो उसी में जीने उसी में मरने दो लेकिन स्वर्ग- नर्कके द्वार मत दिखाओ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   11:21am 15 Jun 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
हर सुबहदेखता था सामने धवल शिखरों की अनुपम सुन्दरता उसपर भोर की मनोहर पीली किरण उसका वो शांत सौम्य रूप  ललचाता था  उसपर जाने को उसकी सुन्दरता को करीब से महसूस करनेको उसकी उपत्यकाओं में खुद के प्रतिध्वनित शब्दों का संगीत सबको सुनाने को उसी के शिखरों पर सदा रच बस जाने को ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   12:00am 5 Jun 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
दीवार पर टंगे दर्पण मेंऔर फिर अपने मन में देखेंगे खुद को  हो गंभीर तो दिखेगी अपनी अलग-अलग तस्वीर दीवार का आइना दिखाता है सिर्फ अपना बाह्य शरीर पर मन का आइना दिखाता है वो चेहरे जिसे देख खुद को होता पीर हमें देख जो दुनिया मुस्कराती है शायद सब अच्छा हमारे में पाती हैपर प... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   12:36am 22 Apr 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
(वोयेजर द्वारा करीब ६ खरब किलोमीटर दूर से ली गयी पृथ्वी की तस्वीर) पहचान विस्तृत अंतरिक्ष के  एक दीप्त आकाशगंगा में कण भी नहीं, कण के अंश जैसा यही है पहचान अपनी धरती की और फिर इस वसुधा के चौरासी लाख योनियों में एक हम हैं, सोचो अपनी पहचान! वही पहचान जिसके लिए हम आप आज खड़े ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   12:19am 28 Mar 2013 #चिंतन
Blogger: Sumit at मेरी दुनिया.. ...
प्राचीन काल से ही मनुष्य के मन में यह प्रश्न उठता रहा है कि सृष्टि का आरंभ कब हुआ, कैसे हुआ, क्या यह संभव है कि मनुष्य कभी यह समझ सके कि चाँद, सितारे, आकाशगंगाएं, पुच्छलतारे, पृथ्वी, पर्वत, उसकी ऊँची ऊँची चोटियाँ, जंगल, कीड़े-मकोड़े, पशु, पक्षी, मनुष्य, जीव-जन्तु यह सब कहाँ से ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   2:10pm 27 Feb 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
कवि का सच लोग कहते हैं कविता झूठी है कल्पना का सागर है जिसका यथार्थ से कुछ वास्ता नहींलोग कहते हैं  कवि कविता की आड़ में अपना भड़ास निकलते हैंअपनी  ज़िन्दगीके अँधेरे को छदम रूप देकर कविता का नाम देते है अपनी असहायता को  झूठे शब्द देकर हुंकार का नाम देते हैंलोग कहते है... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   1:27am 18 Feb 2013 #चिंतन
Blogger: Sanjay Grover at सरल की डायरी Sa...
‘मेरे ख़्वाबों में जो आए.....’फ़िल्म समझ में नहीं आई सरल को। करवा-चौथ देखकर तो मन बिलकुल ही उचाट हो गया था। लेकिन गाना जब भी देखता, अच्छा लगता। यह कोई-पूछने बताने की बात नहीं लगती सरल को कि गाना किस भाव से/किस मक़सद से फ़िल्माया गया होगा।उसी भाव से देखता भी रहा सरल। मगर तौलि... Read more
clicks 257 View   Vote 0 Like   4:04pm 17 Feb 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
पत्थर से गुफ्तगूपत्थर से मैंने सबब पूछा क्यों इतने कठोर हो निष्ठुर हो, निर्दय हो  खलनायकी के पर्याय हो कभी किसी के पाँव लगते हो तो ज़ख्मकभी किसी के सर लगते हो तो ज़ख्मऔर उससे भी दिल न भरे तो अंग-भंग क्या मज़ा है उसमे कुछ बताओ तो? तुम दूर रहते हो तो सवाल रहते हो पास तुम्हार... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   11:01pm 2 Feb 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
क़द्र अँधेरे का जिन आँखों ने देखे थे सपने चाँद सितारों के वो जल-जल कर आज अग्नि की धार बने हैं सपने हों या तारें हों, अक्सर टूटा ही करते हैंहो क्यों विस्मित जो टूट कर आज वो अंगार बने हैंअंगारों का काम है जलना, जला देना, पर आशाएं    जो दीप जलें उनके तो रौशन मन संसार बने हैं सं... Read more
clicks 115 View   Vote 1 Like   10:17pm 26 Jan 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
क़द्र रौशनी की जिन आँखों ने देखे थे सपने चाँद सितारों के वो जल-जल कर आज अग्नि की धार बने हैं सपने हों या तारें हों, अक्सर टूटा ही करते हैंहो क्यों विस्मित जो टूट आज वो अंगार बने हैंअंगारों का काम है जलना, जला देना, पर आशाएं    जो दीप जलें उनके तो रौशन मन संसार बने हैं संसार ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   10:17pm 26 Jan 2013 #चिंतन
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
जल! तेरी यही नियति है मनजीवन पथ कुछ ऐसा ही है चुभते ही रहेंगे नित्य शूल हो सन्मार्गी पथिक तो भीउठ ही जाते हैं स्वर-प्रतिकूल छोड़ो  उन औरो की बातेंभर्त्सना करेंगे तेरे ही “स्वजन”जल! तेरी यही नियति है मन एक मृगतृष्णा है स्वर्णिम-कल होंगे यही रवि-शशि-वायु-अनलहोंगे वही सब इ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   4:23am 5 Jan 2013 #चिंतन
Blogger: Shekhawat at Rajput World...
कुँवरानी निशा कँवरआजकल कुछ लोग हीन भावना से इतने ग्रषित है कि दुसरे वर्ग या वर्ण के समाजों के पैमाने से क्षत्रिय समाज की परम्पराओं ,मान्यताओं ,कर्त्यव निष्ठां ,धर्म पालन,यहाँ तक की क्षात्र धर्म की आधार शिला एवं क्षात्र धर्म की जननी परिवार एवं वैवाहिक संस्था तक को आधुन... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   3:45pm 1 Dec 2012 #चिंतन
Blogger: पुंज प्रकाश at मंडली...
Press Trust of India / Mumbai October 04, 2012, 21:05Stating that “rebellion” is the right of every artist, veteran actor and filmmaker Girish Karnad today said reading or possessing books on Naxalism is not a crime.The 74-year-old playwright said Aseem Trivedi, the political cartoonist who was charged with sedition by Mumbai Police, and human rights activist Binayak Sen, accused by the Chhattisgarh Government of having links with Naxals, received different treatment in the cases in which they were arrested.“Aseem Trivedi was granted bail soon after he gathered support from various sections of the society. On the other hand, Binayak Sen was refused bail on several occasions,” Ka... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   5:05pm 4 Oct 2012 #चिंतन
Blogger: पुंज प्रकाश at मंडली...
बड़ी बात बातचीत के लहजे में भी कही जा सकती है . मंडी हॉउस के हकीकत के एक अंश को बड़ी इमानदारी से पेश कर रहें आलोक झा . यह आलेख उनके ब्लॉग लोकरंजन  में शहर दिल्ली और मैं - १ शीर्षक से प्रकाशित है. - माडरेटर मंडली.दिल्ली के मंडी हाउस इलाके को दिल्ली से बिल्कुल अलग करके देखना पड... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   3:50am 24 Sep 2012 #चिंतन
Blogger: पुंज प्रकाश at मंडली...
In May 2011, members of Kabir Kala Manch (KKM), a group of Dalit protest singers and poets from Pune, were accused by the police of being Naxalites. Two KKM members have been in prison for more than a year, while others are hiding, in fear of their safety. The evidence is scanty, mostly to do with supposed ties to Anjali Sontakke, the Naxal ideologue arrested by Maharashtra’s Anti-Terrorist Squad in April last year. Ramu Ramanathan, playwright and part of the KKM Defence Committee, describes their surreal dialogue with the authorities and the ongoing fight for justiceA FEW years ago, I was to modernise Kabir’s dohas in a theatre workshop for architecture students. To make it interestin... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   12:41pm 22 Sep 2012 #चिंतन
Blogger: पुंज प्रकाश at मंडली...
गजाला ऐसा नहीं है कि ये हालत केवल पाकिस्तान में है | कट्टरवाद एक वैश्विक समस्या है | अंजना ओम कश्यप का यह आलेख जनसत्ता 6 जुलाई, 2012 से साभार यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है | - माडरेटर मंडली.पेशावर की गजाला को गीत गाने की जिद की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी। लेकिन उसका ज्यादा बड़ा ग... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   4:18am 7 Jul 2012 #चिंतन
Blogger: श्यामल सुमन at मेरा आईना...
केन्द्र सरकार का तुगलकी - फरमान एकाएक २३-०५-२०१२ को पेट्रोल की कीमत ७-५४ रुपये पैसे प्रति लीटर बढ़ा दी गयी। देश के हर पेट्रोल पम्पों पर अपनी अपनी गाड़ियों के साथ रात १२ बजे तक ग्राहकों की भारी भीड़ ताकि अपने अपने संसाधन और वाहन के हिसाब से वे अधिक से अधिक पेट्रोल भराकर बढ... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   3:20am 31 May 2012 #चिंतन
Blogger: रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) at भड़ास...
कहनेकोतोसाँसेंचलतींहैंयात्रा-क्रमभीप्रतिपलबढ़ताजाताहै।मैंनेतोदेखासौबर्षोंमेंमुश्किलसेकोईएकदिवसजीपाताहै।।अचानकआजअपनेजिन्दगीकेदिनोंकामोटेतौरपरहिसाबकरनेलगा।कहतेहैंकिसाहित्यवैयक्तिकअनुभूतिकीनिर्वैयक्तिकप्रस्तुतिहैऔरआजउसीव्यक्तिगतअनुभवकोआप... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   1:37am 12 May 2012 #चिंतन
Blogger: श्यामल सुमन at मेरा आईना...
हमारे, आपके, प्रायः सबके जीवन में जाने अनजाने कुछ शब्दों के ऐसे प्रयोग होते रहते हैं जिनके शाब्दिक अर्थ कुछ और लेकिन उनके प्रचलित अर्थ कुछ और। मजे की बात है कि शब्दार्थ से अलग (कभी कभी विपरीत भी) अर्थ ही सर्व-स्वीकार्य भी हैं। इस प्रकार के कुछ शब्दों को को समेटते हुए प्रस... Read more
clicks 263 View   Vote 0 Like   2:42am 20 Apr 2012 #चिंतन
Blogger: anju choudhary (anu) at अपनों का साथ...
आप सब दोस्तों की  क्या राय हैं ......आज अभी फेसबुक के माध्यम से ........खामोशी ...बहुत कुछ कहती हैं ...(http://ab8oct.blogspot.in/2012/04/blog-post_07.html...............ब्लॉग) पर जाने का मौका मिला ..वहाँ की पोस्ट पढ़ने के बाद मन खराब हो गया ..कि यहाँ के ब्लोगर्स क्यूँ किसी महिला ब्लोगर को सम्मानीय नहीं समझते ....एक छोटी सी बात ... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   1:24pm 7 Apr 2012 #चिंतन
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