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Tag: चाहत

Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
कहाँ खिलते हैं फूल रेगिस्तान में ... हालांकि पेड़ हैं जो जीते हैं बरसों बरसों नमी की इंतज़ार में ... धूल है की साथ छोड़ती नहीं ... नमी है की पास आती नहीं ... कहने को सागर साथ है पीला सा ... मैंने चाहा तेरा हर दर्द अपनी रेत के गहरे समुन्दर में लीलना तपती धूप के रेगिस्तान में मैंने कोशिश ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   8:16am 30 Mar 2020 #चाहत
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
प्रजा खुशहाल ------------------एक गहन चिंतन वर्ग-उद्भव का, दमित भावना कुछ कर सी गई घर समाज में अन्यों प्रति अविश्वास दर्शित, सत्य में वे परस्पर-सशंकित। व्यक्तिगत स्तर पर नर विकास मननता, कुछ श्रम कर अग्र भी वर्धित सामाजिक तो न एकसम वृद्धि, अनेक विकास के निचले पायदान पर।&nb... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   6:50am 28 Jan 2020 #चाहत
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
 बाप ------दिखता रूखा-सूखा, सख़्त-डाँटता, कदाचित सुस्त-अनावश्यक भीकभी भोला, विश्व-व्यवहारिकता से परे, अबल-असहाय सा कभी। कभी अन्य उसपर हँसते भी दिखते, उड़ाते लोग सादगी का व्यंग कभी किसी दबंग की खुशामद करता, कभी शेखी भी कमतर पर। कभी अर्धांगिनी से झगड़ता, कभी सं... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   5:52pm 4 May 2019 #चाहत
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
स्वर्ण रश्मियों सा छू लेता माँ शिशु को आँचल में छुपाती आपद मुक्त बनाती राहें, या समर्थ हथेलियाँ पिता की थामें उसकी नन्हीं बाहें ! वैसे ही सिमटाये अपने आश्रय में कोई अनजाना, उस अपने को, जिसने उसकी चाहत को ही निज सुख माना !  अपनाते ही उसको पल में  बंध जाती है अविरत ड... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   6:51am 27 Nov 2018 #चाहत
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
ललकार -----------समय यूँ परीक्षा लेता, अनेक कष्ट देकर बनाता सशक्तन बीतता चैन से जीवन, मानव बनने में है बहुत माँग। अब नहीं बालक, जब सब माता-पिता से मिलता पोषण युवा-शिक्षित हो बन्धु, एक पद मिला करने को निर्वाह। विभाग एक जैसों का कुल्य, सबके करने से ही तो प्रगति  न... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   6:14pm 25 Dec 2017 #चाहत
Blogger: लिली मित्रा at मेरी अभिव्यक...
                        (चित्र इन्टरनेट से)                                      तुममे खोकर                         तुमको पाने की चाहत                         तुमको पाकर                         तुममे खोने की चाहत  ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   1:20am 8 May 2017 #चाहत
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
कहाँ खिलते हैं फूल रेगिस्तान में ... हालांकि पेड़ हैं जो जीते हैं बरसों बरसों नमी की इंतज़ार में ... धूल है की साथ छोड़ती नहीं ... नमी है की पास आती नहीं ... कहने को रेतीला सागर साथ है ... मैंने चाहा तेरा हर दर्द अपनी रेत के गहरे समुन्दर में लीलना तपती धूप के रेगिस्तान में मैंने कोशिश ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   4:09am 27 Feb 2017 #चाहत
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
बेतरतीब लम्हों की चुभन मजा देती है ... महीन कांटें अन्दर तक गढ़े हों तो उनका मीठा मीठा दर्द भी मजा देने लगता है ... एहसास शब्दों के अर्थ बदलते हैं या शब्द ले जाते हैं गहरे तक पर प्रेम हो तो जैसे सब कुछ माया ... फूटे हैं कुछ लम्हों के बीज अभी अभी ...टूट तो गया था कभी कापर जागना नहीं च... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   9:23am 26 Jan 2015 #चाहत
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
मन की धुन ---------------मृदुल मन के स्वामी या सेवक, पुनः आपसे है अनुरोध स्व-क्रियाओं को करो सयंमित, और नितत रखो अपने उद्योग। तन का इकतारा, मन की धुन में, अपने को लगाए जा लेकर नाम उस कर्ता का, दायरा अपना बढ़ाए जा। गर्मजोशी और प्रसन्न-मुख से, प्रेम का सुर तू गाए जा  आत्मा ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   11:27am 10 Jan 2015 #चाहत
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at "निरंतर" क...
ये दिल तेरे लिएधडकता क्यूं है ?तेरे बिना तन्हाई काआलम क्यूं है ?दिन के उजाले मेंअन्धेरा क्यूं है ?मेरे सवाल काजवाब दे दोया फिर दिल कीमहफ़िल सज़ा दोऐसे सताने का हकतुम्हें नहीं हैचाहने वालों कोदुत्कारना ठीकनहीं हैन चाहो तोमुस्कारा कर नाकह दोपर इस तरहतडपा कर नामारो17-04-2... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   7:16pm 14 Jun 2012 #चाहत
Blogger: induravisinghj at हृदयानुभूति ....
“तन्हाइयों की आदत अब हो गई हमेंतुम्हारा पास आना,अब भाता नहींयूं फैले हमारी चाहतों के फासले,अब किसी चाहत से,कोई नाता नहीं”दिसम्बर 17, 2011 ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   3:46pm 31 Jan 2012 #चाहत
Blogger: सु-मन (Suman Kapoor) at बावरा मन...
काश ऐसा होता      उड़ सकती मैं भी        खुले आसमां में     पंछियों की तरहबादलों के संग        धीरे –धीरे विचरती                 काश ऐसा होता.........       चल सकती मैं भी    हवा के साथ साथ गुनगुनाती हुई        रागिनी की तरह               काश ऐसा होता..........        पहुंच जाती मैं भी      तारों के गुलिस्ताँ म... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   9:19am 21 Jul 2011 #चाहत
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