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Tag: गज़ल

Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता॥सब कुछ तो है क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता॥वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता॥मैं अपनी ही उलझी हुई राहों ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   12:00am 12 Dec 2019 #गज़ल
Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगेहर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे।इतना आसाँ नहीं लफ़्ज़ों पे भरोसा करनाघर की दहलीज़ पुकारेगी जिधर जाओगे।शाम होते ही सिमट जाएँगे सारे रस्तेबहते दरिया से जहाँ होगे ठहर जाओगे।हर नए शहर में कुछ रातें कड़ी होती हैंछत से दीवारें जुदा हो... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   8:44pm 6 Aug 2019 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
धूप की बैसाखियों को भूल जा  दिल में हिम्मत रख दियों को भूल जाव्यर्थ की नौटंकियों को भूल जा मीडिया की सुर्ख़ियों को भूल जा उस तरफ जाती हैं तो आती नहीं इस नदी की कश्तियों को भूल जाटिमटिमा कर फिर नज़र आते नहीं रास्ते के जुगनुओं को भूल जा हो गईं तो हो गईं ले ले सबक जिंदगी की गल... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   1:39pm 17 Jun 2019 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
अपने शहर की खुशबू भी कम नहीं होती ... अभी लौटा हूँ अपने कर्म क्षेत्र ... एक गज़ल आपके नाम ...झुकी पलकें दुपट्टा आसमानीकहीं खिलती तो होगी रात रानीवजह क्या है तेरी खुशबू की जाना  कोई परफ्यूम या चिट्ठी पुरानीमिटा सकते नहीं पन्नों से लेकिन  दिलों से कुछ खरोंचे हैं मिटानीलड़ाई, ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   11:46am 12 Jun 2019 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
जितनी बार भी देश आता हूँ, पुराने घर की गलियों से गुज़रता हूँ, अजीब सा एहसास होता है जो व्यक्त नहीं हो पाता, हाँ कई बार कागज़ पे जरूर उतर आता है ... अब ऐसा भी नहीं है की यहाँ होता हूँ तो वहां की याद नहीं आती ... अभी भारत में हूँ तो ... अब झेलिये इसको भी ...   कुल्लेदार पठानी पगड़ी, एक पज... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   4:42am 14 May 2019 #गज़ल
Blogger: M VERMA at जज़्बात...
तरकश के सारे तीर चलाये जायेंगेशफ्फाक धवल वस्त्र सिलाये जायेंगे जिनकी आँखे पथरा गयी हैं उनमेंआयातित सपने भे जगाये जायेंगे वायदों के तिलस्मी दीवार के पीछे आस के मृगछौने भटकाये जायेंगे ताकि झूठ का जाल नज़र न आये    देखना अब गंगाजल उठाये जायेंगेये सिलसिला बदस... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   3:51pm 17 Apr 2019 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
यही ज़मीन, यही आसमां, यही सच है  यहीं है स्वर्ग, यहीं नर्क, ज़िन्दगी सच है हसीन शाम के बादल का सुरमई मंज़र  हथेलियों पे सजी रात की कली सच है उदास रात की स्याही से मत लिखो नगमें   प्रभात की जो मधुर रागिनी वही सच है   ये तू है, मैं हूँ, नदी, पत्तियों का यूँ हिलना ये कायनात, प... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   4:13am 4 Feb 2019 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
प्रेम के सब गीत अब लगते हैं बासे दूर जब से हो गया हूँ प्रियतमा से मुड़ के देखा तो है मुमकिन रोक ना लें  नम सी आँखें और कुछ चेहरे उदासेनाम क्या दोगे हमारी प्यास का तुम पी लिया सागर रहे प्यासे के प्यासे आ रहे हैं खोल के रखना हथेली टूटते तारे भी दे देते हैं झांसे उम्र भर थामे ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   2:15am 24 Dec 2018 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
क्यों जुड़े थे तार अपने दरम्याँथा नहीं जब प्यार अपने दरम्याँरात बोझिल, सलवटें, खामोश दिन बोझ सा इतवार अपने दरम्याँप्रेम, नफरत, लम्स, कुछ तो नाम दो क्या है ये हरबार अपने दरम्याँमैं खिलाड़ी, तुम भी शातिर कम नहींजीत किसकी हार अपने दरम्याँछत है साझा फांसला मीलों का क्योंक्य... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   10:22am 3 Dec 2018 #गज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- नाम :- अर्पित शर्मा "अर्पित"शह्र :- शाजापुर (मध्यप्रदेश) जन्म दि :- 28-04-1992 जन्म स्थान :- उज्जैन ( मध्यप्रदेश) ये बारे मुहब्बत है उठाया नहीं जाता,, हाँ दर्द ये मीठा है भुलाया नहीं जाता,, अश्को से समझ लीजे मेरे दिल की कहानी, वो हाल है मेरा के सुनाया नहीं जाता,, तौफीक... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   6:30pm 12 Nov 2018 #गज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- नाम :- अर्पित शर्मा "अर्पित"शह्र :- शाजापुर (मध्यप्रदेश) जन्म दि :- 28-04-1992 जन्म स्थान :- उज्जैन ( मध्यप्रदेश) जहन में वो तो ख़ाब जैसा है, वो बदन भी गुलाब जैसा है,, बंद आँखों से पढ़ भी सकता हूँ,, तेरा चेहरा किताब जैसा है,, मेरी पलके झुकी है सजदे में, दिल भी गंगा के आब जैस... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   6:30pm 22 Oct 2018 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
अध-लिखे कागज़ किताबों में दबे ही रह गए कुछ अधूरे ख़त कहानी बोलते ही रह गए शाम की आगोश से जागा नहीं दिन रात भर प्लेट में रक्खे परांठे ऊंघते ही रह गएरेलगाड़ी सा ये जीवन दौड़ता पल पल रहा खेत, खम्बे, घर जो छूटे, छूटते ही रह गए सिलवटों ने रात के किस्से कहे तकिये से जब  बल्ब पीली रौशन... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   4:50am 22 Oct 2018 #गज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- नाम :- अर्पित शर्मा "अर्पित"शह्र :- शाजापुर (मध्यप्रदेश) जन्म दि :- 28-04-1992 जन्म स्थान :- उज्जैन ( मध्यप्रदेश) सामने कारनामे जो आने लगे,, आईना लोग मुझको दिखाने लगे,, जो समय पर ये बच्चे ना आने लगे, अपने माँ बाप का दिल दुखाने लगे,, फ़ैसला लौट जाने का तुम छोड़ दो, फूल आँ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   6:30pm 8 Oct 2018 #गज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- नाम :- अर्पित शर्मा "अर्पित"शह्र :- शाजापुर (मध्यप्रदेश) जन्म दि :- 28-04-1992 जन्म स्थान :- उज्जैन ( मध्यप्रदेश) कितने हैं परिशां ये बताने नहीं आते, अब हमको किसी तरह सताने नहीं आते,, हम जैसे है वैसे ही नज़र आते है सबको, चेहरे पे हमे चेहरे चढ़ाने नहीं आते,, साहिल से देखत... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   6:30pm 24 Sep 2018 #गज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- नाम :- अर्पित शर्मा "अर्पित"शह्र :- शाजापुर (मध्यप्रदेश) जन्म दि :- 28-04-1992 जन्म स्थान :- उज्जैन ( मध्यप्रदेश) आसमाँ में दिये उछाल दूँ क्या,, चाँद में और नूर डाल दूँ क्या,, आँख लगते ही आसमान में था, रूह को जिस्म से निकाल दूँ क्या,, खुदको आसान वो समझता है, मैं उसे मुश्... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   6:30pm 10 Sep 2018 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
दिन पुराने ढूंढ लाओ साब जी लौट के इस शहर आओ साब जी कश पे कश छल्लों पे छल्ले उफ़ वो दिन विल्स की सिगरेट पिलाओ साब जी मैस की पतली दाल रोटी,पेट फुलपान कलकत्ति खिलाओ साब जी मेज मैं फिर से बजाता हूँ चलो तुम रफ़ी के गीत गाओ साब जी क्यों न मिल के छत पे बचपन ढूंढ लें कुछ पतंगें तुम उडा... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   4:14am 22 May 2018 #गज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- नाम : गुलाब जैन जन्म : २८-०२-१९५३ (हिसार) हरियाणा गतिविधियाँ: * आल इंडिया रेडियो द्वारा मान्य लोक-गायक (हरियाणवी और राजस्थानी भाषाएं) और सूफी गायन के अनेकों कार्यक्रम | * हरियाणवी भाषा के स्व-रचित लोक गीतों की मेरी दो कैसेटस | * क़रीब १० साल तक हिंद... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   3:23am 17 Apr 2018 #गज़ल
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
लम्हे जो गुम हुए थे दराजों में मिल गए दो चार दिन सुकून से अपने निकल गएडट कर चुनौतियों का किया सामना मगरदो आंसुओं के वार से पल भर में हिल गए दुश्मन के तीर पर ही ये इलज़ाम रख दिया किस किस को कहते यार के खंज़र से छिल गए  इतिहास बन गए जो समय पर चले नहीं  बहते रहे दरिया तो समुं... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   3:54am 2 Apr 2018 #गज़ल
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- नाम : गुलाब जैन जन्म : २८-०२-१९५३ (हिसार) हरियाणा गतिविधियाँ: * आल इंडिया रेडियो द्वारा मान्य लोक-गायक (हरियाणवी और राजस्थानी भाषाएं) और सूफी गायन के अनेकों कार्यक्रम | * हरियाणवी भाषा के स्व-रचित लोक गीतों की मेरी दो कैसेटस | * क़रीब १० साल तक हिंद... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   6:30pm 13 Mar 2018 #गज़ल
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
नै   पुछ   मिता   कि - कि   कहानी   छै  हमरबालु   पऽ   साम   चढबैत   जवानी   छै  हमरमरुभूमिमे  बालुके  घोंरस्ँ  दही जम्बै छी हमलोक  पतीयाइ  कहाँ ?  तैं इ  फुटानी छै हमरतला  छोडु,  दु  तला पऽ रहै छी, हम विदेशमेमुदा बिनु  बर्खे चुब... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   3:04pm 13 Mar 2018 #गज़ल
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
छवि : सरिता साहजान की जान सँ बैईढ कऽ मानैत छलीओ छै निर्दय साच्चो हम नै जानैत छलीओ पीठ पाछु छुरा घोपै से हमरा की पताआ हम सदति दुवामे ओकरे माँगैत छलीगैर जाई छलै गोर मे खुट्टी, काँटो जँऽदर्द होई ओकरा मुदा हम कानैत छलीहर एक काज मे हाथ बटाबैत छलियैरोटी ओ पकाबै आँटा हम सानैत ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   1:49pm 23 Feb 2018 #गज़ल
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
डिजे बजतै डांस होतै आधा राति' सँ पार्टी करबै हबेली पऽ ।१४ फरवरी के ब्रेकअप पहिल बर्षगाठ बनेबै हबेली पऽ ।।शाकाहारी, मांसहारी दुनु प्रकारक भरपुर बेवस्था केने छी ।पार्टी चलतै मनोरन्जन होतै बाई नचेबै हबेली पऽ ।।जख्मी दील सब के नेउता भेल कृप्या अहाँ सब पधारु ।दारु च... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   2:10pm 11 Feb 2018 #गज़ल
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
आँखिसँ पुछतै ठोरसँ जबाब चाही ओकराहमर प्राण समर्पित छै गुलाब चाही ओकरातऽ खोलि देलियै आइ हृदयक एकहक पन्नाआखर मोन रखबा लय किताब चाही ओकरामास फागुन मातल छी प्रीतक निशामे हमउकबा उठाबैए लोक शराब चाही ओकरासाँसक कनमा कनमा उसरगि देलियै मगनीमेतोहीं पुछही नऽ आर की आब चाही ओक... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   1:24pm 7 Feb 2018 #गज़ल
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
अहाँके जाईते जग्मगाईत इजोरिया कारी लगैयदिन कटि जाई छै कहुना राति बड़ भारी लगैयछुटलै जहिये अहाँक ठोरक मधुरस के रसपानतहिये सँ आब मिठ भाङ धथुर दारु तारी लगैयबुझा गेलै प्रीतक टेमी साथ छुटलै हाथ छुटलैसुन्सान गुज अन्हरिया घर अङगना बारी लगैयचलिए गेलि तऽ आब कतौ रहु बस खुश... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   1:06pm 3 Feb 2018 #गज़ल
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
बिनु बजेनें चलि एलौं अहाँ ।अप्पन रूप देखा देलौं अहाँ ।।हम अनपढ गवार संगेबिनु बुझ्नैं प्रेम कऽ लेलौं अहाँ ।रस्ता भटकि रहल यात्रीकेसु-मार्ग दर्शन करेलौं अहाँ ।निराश फैलिचुकल मनमेआशाके किरण जरेलौं अहाँ ।मझधारमे अटकल नाहकेखेभके कन्छरि लऽ गेलौं अहाँ ।समाजक कुभेस ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   12:21pm 3 Feb 2018 #गज़ल
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