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Tag: गीत

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--दुर्गम पथरीला पथ है, जिसमें कोई सोपान नहीं।मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।--रहते हैं आराध्य देव, उत्तुंग शैल के शिखरों में,कैसे दर्शन करूँ आपके, शक्ति नहीं है पैरों में,चरणामृत मिल जाए मुझे, ऐसा मेरा शुभदान नहीं।मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।--त... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   7:30pm 11 Jul 2020 #गीत
Blogger: सरिता भाटिया at गुज़ारिश ...
घर में रहना , घर में रहना , घर में ही रहना है .... https://www.youtube.com/watch?v=qQ_UZ2N9EG8... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   10:55am 4 Jun 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--पीला-पीला और गुलाबी,रूप सभी को भाया है।लू के गर्म थपेड़े खाकर,फिर कनेर मुस्काया है।।--आया चलकर खुला खजाना,फिर से आज कुबेर का।निर्धन के आँगन में पनपा,बूटा एक कनेर का।कोमल और सजीले फूलों ने,मन को भरमाया है।लू के गर्म थपेड़े खाकर,फिर कनेर मुस्काया है।।--कितनी शीतलता देती ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   1:12am 2 Jun 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--ख़ाक सड़कों की अभी तो छान लो।धूप में घर को बनाना ठान लो।।--भावनाओं पर कड़ा पहरा लगा,दुःख से आघात है गहरा लगा,मीत इनको ज़िन्दग़ी का मान लो।धूप में घर को बनाना ठान लो।।--काल का तो चक्र अब ऐसा चला,आज कोरोना ने दुनिया को छला,वेदना के रूप को पहचान लो।धूप में घर को बनाना ठान लो।।... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   12:14pm 28 May 2020 #गीत
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at साहित्यमेव ज...
फूल खिलने लगे गुलशन के मगर,फूल गुमसुम हैं कितने घर के मगर.कौन आया जहाँ में ये हलचल हुई.आज डरने लगे लोग खुद से मगर.दौड़ती-भागती ज़िन्दगी है थमी,न आये समझ क्या गलत क्या सही.सबकी आँखों में कितने सवालात हैं,उनके उत्तर नहीं हैं मिलते मगर. लोग हैरान हैं और परेशान हैं,खोजते मिलके... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   6:11pm 22 May 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--भूख बन गई है मजबूरी,सड़कों पर हैं राजदुलारे।नहीं मिल रही है मजदूरी,कोरोना से सारे हारे।।--तन से बहता बहुत पसीना,दूभर हुआ आज है जीना, अपने घर जाने को आतुर,घूम रहे हैं मारे-मारे।नहीं मिल रही है मजदूरी,कोरोना से सारे हारे।।--आश्वासन पर देश चल रहा,जन-गण को सन्देश छल रहा,झूठे ... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   12:41am 19 May 2020 #गीत
Blogger: Sudha Singh at मेरी जुबानी : ...
नवगीत: अंतर के पट खोल (16 ,11)        ☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️अंतर के पट खोल तभी तो                   मन होवे उजियार।मानव योनि मिली है हमको                 इसे न कर बेकार  ।।अंतस में हो अँधियारा जब,              दिखता सबकुछ स्याह ।मन अधीर हो अक... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   6:30pm 18 May 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--कोमल, कोंपल, नवपल्लव,चंचलता से लहराते हैं।नाजुक हरे मुलायम कल्ले, ही किसलय कहलाते हैं।। --चलना कहलाता है जीवन, सरिताएँ ये कहती हैं, इसीलिए अनवरत चाल से,कल-कल करके बहती हैं,सूरज और चन्द्रमा हमको,पाठ यही सिखलाते हैं।नाजुक हरे मुलायम कल्ले, ही किसलय कहलाते हैं।। --... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   7:30pm 15 May 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--ममता की मूरत माता की,हरदम याद सताती है।कष्ट-क्लेश दुख की घड़ियों में,याद बहुत माँ आती है।।--जीव-जन्तुओं को भी होते,बच्चे प्राणों से प्यारे।सुत हों या हो सुता,जननि की आँखों के होते तारे।नजर-टोक का लगा डिठोना,माँ कितना सुख पाती है।कष्ट-क्लेश दुख की घड़ियों में,याद बहुत म... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   7:30pm 9 May 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--तालाबन्दी में हमने, ईमान बदलते देखे हैं।आड़ धर्म की ले करके, इंसान बदलते देखे हैं।।--कोरोना आया भारत में, सबको सबक सिखाने को,निर्मल नीर हुआ नदियों का, पावन हमें बनाने को,मौलाना की बोली में, फरमान बदलते देखे हैं।आड़ धर्म की ले करके, इंसान बदलते देखे हैं।।--भारी पाला दिखा ज... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   7:30pm 29 Apr 2020 #गीत
Blogger: akhilesh at BHOJPURIGEETMALA...
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); गायक : सुनील छैला बिहारी, तृप्ती शक्याफिल्म/एल्बम: प्यार के बोखारगीतकार: संगीतकार: लेबल:  टी सीरीजगोरे गोरे मुखड़ा गे लिलिया कारी तोरी केसियो रे जानजान रे कारी तोरी केसियो रे जानजान रे मुखड़ा रे देखी मनवा मोर हरषावै रे जानजान रे मुखड़ा रे देखी मन... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   6:27pm 19 Apr 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--पतझड़ के मौसम में,सुन्दर सुमन कहाँ से लाऊँ मैं?वीराने मरुथल में,कैसे उपवन को चहकाऊँ मैं?बीज वही हैं, वही धरा है,ताल-मेल अनुबन्ध नही,हर बिरुअे पर धान लदे हैं,लेकिन उनमें गन्ध नही,खाद रसायन वाले देकर,महक कहाँ से पाऊँ मैं?वीराने मरुथल में,कैसे उपवन को चहकाऊँ मैं?उड़ा ले ... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   12:28am 16 Apr 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सुख का सूरज...
--जब बसन्त का मौसम आता,गीत प्रणय के गाता उपवन।मधुमक्खी-तितली-भँवरे भी,खुश हो करके करते गुंजन।।--आता है जब नवसंवतसर,मन में चाह जगाता है,जीवन में आगे बढ़ने की,नूतन राह दिखाता है,होली पर अच्छे लगते हैं,सबको नये-नये व्यंजन।मधुमक्खी-तितली-भँवरे भी,खुश हो करके करते गुंजन।। ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   6:30am 24 Mar 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--भटक रहा है आज आदमी, सूखे रेगिस्तानों में।चैन-ओ-अमन, सुकून खोजता, मजहब की दूकानों में।--मालिक को उसके बन्दों ने, बन्धक आज बनाया है,मिथ्या आडम्बर से, भोली जनता को भरमाया है,धन के लिए समागम होते, सभागार-मैदानों में।--पहले लूटा था गोरों ने, अब काले भी लूट रहे,धर्मभीरु भक्तों को... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   1:11am 11 Mar 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--आँचल में प्यार लेकर,भीनी फुहार लेकर.आई होली, आई होली,आई होली रे!--चटक रही सेंमल की कलियाँ, चलती मस्त बयारे।मटक रही हैं मन की गलियाँ,  बजते ढोल नगारे।निर्मल रसधार लेकर, फूलों के हार लेकर,आई होली,  आई होली,आई होली रे!--मीठे सुर में बोल रही है, बागों में कोयलिया।  ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   2:04am 25 Feb 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--जाने कहाँ खो गया अपना, आज पुराना गाँव।नहीं रही अपने आँगन में, आज नीम की छाँव।।--घर-घर में हैं टैलीवीजिन, सूनी है चौपाल,छाछ-दूध-नवनीत न भाता, चाय पियें गोपाल,भूल गये नाविक के बच्चे, आज चलानी नाव।नहीं रही अपने आँगन में, आज नीम की छाँव।।--पहले जैसा निश्छल बचपन, नहीं द... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   1:35am 18 Feb 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--आँख जब खोली जगत में, तभी था मधुमास पाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--हूँ पुराना दीप, लेकिन जल रहा हूँ,मैं समय के साथ, फिर भी चल रहा हूँ,पर्वतों को काट करके, रास्ता मैंने बनाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--था कभी शोला, अभी शबनम हुआ,साल मेरी जिन्दगी स... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   8:30pm 2 Feb 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--आँख जब खोली जगत में, तभी था मधुमास पाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--हूँ पुराना दीप, लेकिन जल रहा हूँ,मैं समय के साथ, फिर भी चल रहा हूँ,पर्वतों को काट करके, रास्ता मैंने बनाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--था कभी शोला, अभी शबनम हुआ,साल मेरी जिन्दगी स... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   8:30pm 2 Feb 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--उतरी हरियाली उपवन में,आ गईं बहारें मधुवन में,गुलशन में कलियाँ चहक उठीं,पुष्पित बगिया भी महक उठी, अनुरक्त हुआ मन का आँगन।आया बसन्त, आया बसन्त।१।--कोयल ने गाया मधुर गान,चिड़ियों ने छाया नववितान,यौवन ने ली है अँगड़ाई,सूखी शाखा भी गदराई,बौराये आम, नीम-जामुन।आया बसन्त... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   7:30pm 29 Jan 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--दशकों से गणतन्त्र दिवस पर, राग यही दुहराया है।होगा भ्रष्टाचार दूर, बस मन में यही समाया है।।--सिसक रहा जनतन्त्र हमारा, चलन घूस का जिन्दा है,देख दशा आजादी की, बलिदानी भी शर्मिन्दा हैं,रामराज के सपने देखे, रक्षराज ही पाया है।होगा भ्रष्टाचार दूर, बस मन में यही सम... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   11:58pm 25 Jan 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--नया वर्ष स्वागत करता है,पहन नया परिधान।सारे जग से न्यारा, अपना है गणतंत्र महान॥--ज्ञान गंग की बहती धारा,चन्दा-सूरज से उजियारा।आन-बान और शान हमारी,संविधान हम सबको प्यारा।प्रजातंत्र पर भारत वाले,करते हैं अभिमान।सारे जग से न्यारा, अपना है गणतंत्र महान॥--शीश मुकु... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   7:30pm 23 Jan 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--हिमगिरि के शिखरों से चलकर,कलकल-छलछल, बहती अविरल,कुदरत का उपहार कहाँ है?निर्मल गंगा धार कहाँ है??--मैदानों पर रूप निखारा,दर्पण जैसी निर्मल धारा,अर्पण-तर्पण करने वाली,सरल-विरल चंचल-मतवाली,पौधों में भरती हरियाली,अमल-धवल गुंजार कहाँ है?निर्मल गंगा धार कहाँ है??--भवसागर से पा... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   11:30am 18 Jan 2020 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!जनसेवक खाते हैं काजू,महँगाई खाते बेचारे!!--काँपे माता-काँपे बिटिया, भरपेट न जिनको भोजन है,क्या सरोकार उनको इससे, क्या नूतन और पुरातन है,सर्दी में फटे वसन फटे सारे!नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!--जो इठलाते हैं दौलत पर... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   2:02am 29 Dec 2019 #गीत
Blogger: Sudha Singh at मेरी जुबानी : ...
माटी मेरे गाँव की विधा :मुक्त गीतमाटी मेरे गाँव की, मुझको रही पुकार।क्यों मुझको तुम भूल गए, आ जाओ एक बार।।बूढ़ा पीपल बाँह पसारे ।अपलक तेरी राह निहारे।।अमराई कोयलिया बोले।कानों में मिसरी सी घोले।।ऐसी गाँव की माटी मेरीजिसको तरसे संसार।।क्यों मुझको तुम भूल गए, आ जाओ ... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   4:47pm 25 Dec 2019 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--मानवता के लिए,सलीबों को अपनाया।लोहे की कीलों से,अपना तन जिसने बिंधवाया।आओ उस यीशू को,हम प्रणाम करें!उस बलिदानी का,आओ गुणगान करें!!--सेवा का पावन पथ,जिसने दिखलाया।जातिवाद के भेद-भाव से,जिसने मुक्त कराया।आओ उस यीशू को,हम प्रणाम करें!उस बलिदानी का,आओ गुणगान करें!!--घूम-घूम ... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   12:55am 24 Dec 2019 #गीत
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