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Tag: ग़ज़ल

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
सियाह रात है, छाया बहुत अन्धेरा हैअभी तो दूर तलक भी नहीं सवेरा हैअभी तो तुमसे बहुत दिल के राज़ कहने हैंमगर फलक़ पे लगा बादलों का डेरा हैछटेंगी काली घटाएँ तो बोल निकलेंगेगमों के बोझ का साया बहुत घनेरा हैहमारे घोंसलों में जिन्दगी सिसकती हैकुछ दरिन्दों ने आज अपना मुल्क... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   12:57am 6 Feb 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
ग़ज़ल 142 : आप से क्या मिले---आप से क्या मिले ,फिर न ख़ुद से मिलेउम्र भर को मिले दर्द के  सिलसिलेवो निगाहे झुकीं, फिर उठीं. फिर झुकींख़्वाब दिल में न पूछो कि क्या क्या खिलेतुम गले से लगा लो अगर प्यार सेदूर हो जाएँगे सारे शिकवे  गिलेउसने नफ़रत से आगे पढ़ा ही नहींफिर दिलों के मिटें... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   6:56am 23 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
2122---1212--112/22एक ग़ज़ल : गर्द दिल से अगर--गर्द दिल से अगर उतर जाएज़िन्दगी और भी  निखर जाएकोई दिखता नहीं  सिवा तेरेदूर तक जब मेरी नज़र जाएतुम पुकारो अगर मुहब्बत सेदिल का क्या है ,यहीं ठहर जाएडूब जाऊँ तेरी निगाहों मेंयह भी चाहत कहीं न मर जाएएक हसरत तमाम उम्र रहीमेरी तुहमत न उसके सर ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   6:59am 11 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
212---212---212---212फ़ाइलुन---फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ाइलुनबह्र-ए-मुतदारिक मुसम्मन सालिम---------एक ग़ज़ल : आदमी का कोई अब---आदमी का कोई अब भरोसा नहींवह कहाँ तक गिरेगा ये सोचा नहीं’रामनामी’ भले ओढ़ कर घूमताकौन कहता है देगा  वो धोखा नहींप्यार की रोशनी से वो महरूम हैखोलता अपना दर या दरीचा नहींउनके व... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   5:39am 9 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
212---212---22फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़े’लुनबह्र-ए-मुतदारिक मुसद्दस मक़्तूअ’ अल आख़िर ---------------एक ग़ज़ल 139 : दिल में जो अक्स है उतरा--दिल में  इक अक्स जब उतरादूसरा  फिर कहाँ  उभराबारहा दिल मेरा  टूटाटूट कर भी नहीं बिखराकौन वादा निभाता  है कौन है क़ौल पर ठहरा ?शम्मअ’ हूँ ,जलना क़िस्मत में... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   6:09am 26 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
मूल बहर  112---112---112---112-फ़अ’लुन ----फ़अ’लुन---फ़अ’लुन--फ़अ’लुनबहर-ए-मुतदारिक मुसम्मन मख़्बून -----एक ग़ज़ल 138 : दिल ख़ुद ही तुम्हारा आदिल है --दिल ख़ुद ही तुम्हारा आदिल हैसमझो क्या सच क्या बातिल हैउँगली तो उठाना  है   आसाँकब कौन यहाँ पर कामिल हैटूटी कश्ती, हस्ती मेरीदरिया है ,ग़म है, साहि... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   5:46am 26 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
212---212----212----212- फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ैलुन-------------क्या कहूँ मैने किस पे लिखी है ग़ज़लसोच जिसकी थी जैसी ,पढ़ी है ग़ज़लदौर-ए-हाज़िर की हो रोशनी या धुँआसामने आइना  रख गई है  ग़ज़ल  लोग ख़ामोश हैं खिड़कियाँ बन्द करराह-ए-हक़ मे खड़ी थी ,खड़ी है ग़ज़लवो तक़ारीर नफ़रत का करते रहेप्यार की लौ जगाती ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   6:18am 23 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
ग़ज़ल 1361222---1222---1222---1222तुम्हारे हुस्न का जल्वा ,  ख़ुदा रख्खे हिफ़ाज़त मेंये रश्क़-ए-माह-ए-कामिल है,क़मर जलता अदावत मेंतेरी उल्फ़त ज़ियादा तो मेरी उलफ़त है क्या कमतरज़ियादा कम का मसला तो नहीं होता है उल्फ़त मेंपहाडों से चली नदियाँ बना कर रास्ता अपनातो डरना क्या  ,फ़ना होना है जब राह-ए-मु... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   11:46am 21 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--कैसे लिखूँ ग़ज़ल का मतला, मक्ता कैसे पाऊँ मैंवनवासी दुनिया में कैसे, अपने शेर सजाऊँ मैं-- नहीं रहे अब झाड़ी जंगल, भटक रहा हूँ राहों मेंपात-पात में छुपे शिकारी, कैसे जान बचाऊँ मैं--आफताब़-माहताब़ उन्हीं के, जिनके केवल नाम बड़ेलिख करके अनमोल फसाने, बोलो कहाँ लगाऊँ मैं--सो... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   1:08am 19 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
फ़ऊलुन---फ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन122-------122------122-------122बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम--------------ग़ज़ल  : तेरे हुस्न की सादगी---तेरे हुस्न की  सादगी  का असर हैन मैं होश में हूँ ,न दिल की ख़बर हैयूँ चेहरे से पर्दा   गिराना ,उठानाइसी दम से होता है शाम-ओ-सहर हैसवाब-ओ-गुनह का मै इक सिलसिला हूँअमलन... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   5:52am 4 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुन122-------122------122------122बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम ---------------एक ग़ज़ल : नहीं जानता हूँ कौन हूँ--नहीं जानता  कौन हूँ ,मैं कहाँ हूँउन्हें ढूँढता मैं  यहाँ   से वहाँ  हूँतुम्हारी ही  तख़्लीक़ का आइना बनअदम से हूँ निकला वो नाम-ओ-निशाँ हूँबहुत कुछ था कहना ,नह... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   6:08am 2 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
2122--        -1212--     --22फ़ाइलातुन---मफ़ाइलुन---फ़े’लुनएक ग़ज़ल : मेरे जानाँ --मेरे जानाँ ! न आजमा  मुझकोजुर्म किसने किया ,सज़ा मुझकोजिन्दगी तू ख़फ़ा ख़फ़ा क्यूँ हैक्या है मेरी ख़ता ,बता  मुझकोयूँ तो कोई नज़र नहीं  आताकौन फिर दे रहा सदा मुझकोनासबूरी की इंतिहा क्या  हैज़िन्दगी तू ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   11:53am 28 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
122---122---122---122फ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुनबह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम---------एक ग़ज़ल : भले ज़िन्दगी से हज़ारों ---भले ज़िन्दगी से  हज़ारों शिकायतजो कुछ मिला है उसी की इनायतफ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुनबह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिमये हस्ती न होती ,तो होते  कहाँ सबफ़राइज़ , शराइत ,ये रस्म-ओ-... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   5:10am 11 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
एक ग़ज़ल : झूठ इतना इस तरह ---2122---2122---212झूठ इतना इस तरह  बोला  गयासच के सर इलजाम सब थोपा गयाझूठ वाले जश्न में डूबे  रहे -और सच के नाम पर रोया गयावह तुम्हारी साज़िशें थी या वफ़ाराज़ यह अबतक नहीं खोला गयाआइना क्यों देख कर घबरा गएआप ही का अक्स था जो छा गयाकैसे कह दूँ तुम नहीं शामिल र... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   5:18am 9 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--नहीं रहा अब समय पुरानाख़ुदगर्ज़ी का हुआ ज़माना--कैसे बुने कबीर चदरियाउलझ गया है ताना-बाना--पसरी है सब जगह मिलावटनकली पानी नकली दाना--देशभक्त हैं दुखी देश मेंलूट रहे मक्कार खज़ाना--आजादी अभिशाप बन गयीहुआ बेसुरा आज तराना--दीन-धर्म के फन्दे में हैमानवता का अब अफसाना--'रूप'... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   1:23am 5 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
221----2122---// 221--2122ग़ज़ल’क़ानून की नज़र में ,सब एक हैं ’-बता कररखते रसूख़वाले  , पाँवो  तले दबा करकल तक जहाँ खड़ा था ,"बुधना"वहीं खड़ा हैलूटा है रहबरों  ने,सपने  दिखा दिखा  करजब आम आदमी की आँखों में हों शरारेकर दे नया सवेरा ,सूरज नया  उगा करक्या सोच कर गए थे ,तुम आइना दिखानेअंधों की ... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   6:09am 21 Oct 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
2122---2122---2122फ़ाइलातुन--फ़ाइलातुन--फ़ाइलातुनबह्र-ए-रमल मुसद्दस सालिम--------------------------एक ग़ज़ल : दुश्मनी कब तक-----दुश्मनी कब तक निभाओगे कहाँ तक  ?आग में खुद को जलाओगे  कहाँ  तक  ?है किसे फ़ुरसत  तुम्हारा ग़म सुने जोरंज-ओ-ग़म अपना सुनाओगे कहाँ तक ?नफ़रतों की आग से तुम खेलते होपैरहन अपना बचा... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   1:28pm 19 Oct 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
212---212---22फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़अ’लुनबह्र-ए-मुत्दारिक मुसद्दस सालिम मक़्तूअ’-----इश्क़ करना ख़ता क्यों है ?इश्क़ है तो छुपा  क्यों है ?जाविदाँ हुस्न है  उनकाइश्क़ फिर नारवा क्यों है?बाब-ए-दिल गर खुला है तोलौट आती सदा क्यों है ?ज़िन्दगी बस बता मुझकोबेसबब तू ख़फ़ा क्यों है ?आब-ओ-गिल से बने ह... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   11:57am 17 Oct 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
21----121---121---122बह्र-ए-मुतक़ारिब असरम मक़्बूज़  मक़्बूज़ सालिम-----------एक ग़ज़लसब को अपनी अपनी पड़ी हैमन-आँगन  दीवार  खड़ी  हैअच्छे दिन कैसे आएँगे  ?सत्ता ही जब ख़ुद लँगड़ी  हैराह नुमाई  क्या करता ,वोनाक़ाबिल है ,सोच सड़ी  हैकैसे उतरे चाँद  गगन  से ?राहू-छाया द्वार  खड़ी   हैबिन ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   5:44am 14 Oct 2019 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
जन्मदिन पर शब्द नूतन गढ़ रहा हूँमैं अभी तक आपको ही पढ़ रहा हूँ--जिन्दगी में हैं बहारें आपसे ही आपके कारण समय से लड़ रहा हूँ--नाखुदा की आप ही पतवार होआपके कारण अगाड़ी बढ़ रहा हूँ --नित नये अध्याय अब भी जोड़ता हूँकामनाओं में नगीने जड़ रहा हूँ --साथ मत तुम छोड़ देना रास्ते ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   2:40am 29 Sep 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
1222---1222---1222---1222मुफ़ाईलुन--मुफ़ाईलुन---मुफ़ाईलुन---मुफ़ाईलुनबह्र-ए-हज़ज मुसम्मन सालिम-------------------------------एक ग़ज़लमैं अपना ग़म सुनाता हूँ ,वो सुन कर मुस्कराते हैंवो मेरी दास्तान-ए-ग़म को ही नाक़िस बताते हैंबड़े मासूम नादाँ हैं  ,खुदा कुछ अक़्ल दे उनकोकिसी ने कह दिया "लव यू" ,उसी पर जाँ लुटाते हैंख़... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   6:20am 13 Sep 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
2122-----1222फ़ाअ’लातुन---मुफ़ाईलुनबह्र-ए-मुशाकिल मुरब्ब: सालिम-----------------------ग़ज़ल :  जान-ए-जानाँ से क्या माँगूजान-ए-जानां से  क्या  माँगूदर्द-ए-दिल की दवा माँगूहुस्न उनका क़यामत हैदाइमी की  दुआ  माँगूक़ैद हूँ जुर्म-ए-उल्फ़त मेंउम्र भर की सज़ा  माँगूज़िन्दगी भर नहीं  उतरेइश्क़ का व... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   4:51am 11 Sep 2019 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
खिजाओं से बहारों की, कभी उम्मीद मत करनाघटाओं में सितारों की, कभी उम्मीद मत करनाभले हों दूर वे घर से, मगर अपने तो अपने हैंगैरों से सहारों की, कभी उम्मीद मत करनाहुए गद्दीनशीं जो हैं, लुटा भरपूर दौलत कोयहाँ उनसे सुधारों की, कभी उम्मीद मत करनागरज से ही डराते हैं, बरसते जो नही... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   10:30pm 3 Aug 2019 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
खिजाओं से बहारों की, कभी उम्मीद मत करनाघटाओं में सितारों की, कभी उम्मीद मत करनाभले हों दूर वे घर से, मगर अपने तो अपने हैंगैरों से सहारों की, कभी उम्मीद मत करना हुए गद्दीनशीं जो हैं, लुटा भरपूर दौलत कोयहाँ उनसे सुधारों की, कभी उम्मीद मत करनागरज से ही डराते हैं, बरसते ज... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   6:33am 23 Jul 2019 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
सिर छिपाने के लिए, इक शामियाना चाहिएप्यार पलता हो जहाँ, वो आशियाना चाहिएराजशाही महल हो, या झोंपड़ी हो घास कीसुख मिले सबको जहाँ, वो घर बनाना चाहिएदाँव भी हैं-पेंच भी हैं, प्यार के इस खेल मेंइस पतंग को, सावधानी से उड़ाना चाहिएमुश्किलों से है भरी, ये ज़िन्दग़ानी की डगरआ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   2:02am 21 Jul 2019 #ग़ज़ल
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