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Tag: ग़ज़ल

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
हिम्मत अभी नहीं हारी हैजंग ज़िन्दगी की जारी है--मोह पाश में बँधा हुआ हूँये ही तो दुनियादारी है--ज्वाला शान्त हो गई तो क्यादबी राख में चिंगारी है--किस्मत के सब भोग भोगनाइस जीवन की लाचारी है--चार दिनों के सुख-बसन्त मेंमची हुई मारा-मारी है--हाल भले बेहाल हुआ होजान सभी को ही प्... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   2:42am 26 Nov 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--बहता जल का सोता है हाथ-हाथ को धोता है --फूल कहाँ से पायेगा वो जो काँटों को बोता है --जिसके पास अधिक है होता वही अधिकतर रोता है --साथ समय के सब सम्भव है क्यों धीरज को खोता है  --फसल उगेगी कैसे अच्छी नहीं खेत को जोता है --मुखिया अच्छा वो कहलाता जो रिश्तों को ढो... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   2:13am 26 Oct 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--आज फिर बारिश डराने आ गयीचैन लोगों का चुराने आ गयी--बादलों से फलक मैला हो गयापर्वतों पर कहर ढाने आ गयी--आसमाँ में चमकती यह रौशनीजलजलों का गीत गाने आ गयी--लीलने को अब नहीं कुछ भी बचाआपदा आफत मचाने आ गयी--जिन्दगी के आशियाने ढह गयेमुफलिसों को भी सताने आ गयी--जब जरूरत थी नदारद ह... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   1:00am 20 Aug 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--ये भी सहीऔरवो भी सही हैहारे का हथियार केवल यही है।--लबों ने सहारा लिया है कहन मेंकहावत के जरिये ही बातें कही है--चलें सिंह-शायर अलग राह अपनीगंगा बनारस में उलटी बही है--वही बन गया आदमी दोजहाँ मेंहिदायत बुजुर्गों की जिसने सही है--जो लिक्खा नहीं मायने क्या है उसकेबताता जमा-... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   7:30pm 19 Jul 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
जीवन की हकीकत का, इतना सा है फसानातब तक जहाँ में रहना, जब तक है आबोदानासुख के सभी हैं साथी, दुख का कोई न संगीहोते हैं गमजदा जब, हँसता है तब जमानाघर की तलाश में जो, दर-दर भटक रहे हैंखानाबदोश को तो, मिलता नहीं ठिकानाअपना नहीं बनाया, रहने को आशियानालेकिन लगा रहा है, वो रोज शामिय... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   12:30pm 15 Jun 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--मदहोश निगाहें हैं, खामोश तराना हैमासूम परिन्दों को, अब नीड़ बनाना है--सूखे हुए शजरों ने, पायें हैं नये पत्तेबुझती हुई शम्मा को, महफिल में जलाना है--कुछ करके दिखाने का, अरमान हैं दिलों मेंउजड़ी हुई दुनिया को, अब फिर से बसाना है--हिंसा की चल रहीं हैं, चारों तर... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   6:35pm 29 May 2020 #ग़ज़ल
Blogger: RAVINDRA PRABHAT at परिकल्पना...
।। ग़ज़ल।।- रवीन्द्र प्रभातगमजदा है माहौल बहुत आहट बनाए रक्खो।बच्चों के लिए अपनी मुस्कुराहट बनाए रक्खो।भूख से लड़कर हम जी लेंगे कुछ दिन जरूर - मगर ए दोस्त तिश्नगी की तरावट बनाए रक्खो।स्याह अंधेरों में उम्मीदों की सुबह ढूढों मगर- इन अंधेरों के खिलाफ बगावत बनाए रक... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   9:55am 7 May 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--दुष्ट कोरोना जगत में कर दिया क्या आपनेमंजिलें है दूर फिर भी चल पड़े सब मापने--शब्द लिख कर दिये हैं डायरी के पृष्ठ भीबन्द हैं बाजार सब जाये कहाँ अब छापने--हल नहीं निकला अभी योगी लगे हैं जुगत मेंजाप-तप निष्फल किए हैं बिनबुलाये ताप ने--शक्ति का निकला दिवाला आलमी सरदार ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   11:41am 3 May 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--सभी को बैठकर घर में, कोरोना को हराना हैहमें हर हाल मे,  अब जिन्दगी अपनी बचाना है--अलग रहकर समूहों से, दिखाना अपनी ताकत कोसफल अभियान को करके, महामारी भगाना है--हमारी एक कोशिश से, भला होगा जमाने कागुजर जायेंगे दुख के दिन, तो अच्छा वक्त आना है--जरूरी वस्तुएँ भरपूर हैं, अपने व... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   7:30pm 12 Apr 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--चमन में मुस्कराहट अब खिजां के बाद आयेगीउजड़ जायेगा जब गुलशन तभी इमदाद आयेगी--भयानक जलजलों के सामने होंगे खड़े तब ही मकानों में अगर पुख्ता कभी बुनियाद आयेगी--अभी मासूम पौधों में समझदारी नदारत हैगुजर जायेंगे जब लम्हे हमारी याद आयेगी--जमीं को कर दिया बंजर नये साइंसदानो... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   7:30pm 7 Apr 2020 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
सियाह रात है, छाया बहुत अन्धेरा हैअभी तो दूर तलक भी नहीं सवेरा हैअभी तो तुमसे बहुत दिल के राज़ कहने हैंमगर फलक़ पे लगा बादलों का डेरा हैछटेंगी काली घटाएँ तो बोल निकलेंगेगमों के बोझ का साया बहुत घनेरा हैहमारे घोंसलों में जिन्दगी सिसकती हैकुछ दरिन्दों ने आज अपना मुल्क... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   12:57am 6 Feb 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
ग़ज़ल 142 : आप से क्या मिले---आप से क्या मिले ,फिर न ख़ुद से मिलेउम्र भर को मिले दर्द के  सिलसिलेवो निगाहे झुकीं, फिर उठीं. फिर झुकींख़्वाब दिल में न पूछो कि क्या क्या खिलेतुम गले से लगा लो अगर प्यार सेदूर हो जाएँगे सारे शिकवे  गिलेउसने नफ़रत से आगे पढ़ा ही नहींफिर दिलों के मिटें... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   6:56am 23 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
2122---1212--112/22एक ग़ज़ल : गर्द दिल से अगर--गर्द दिल से अगर उतर जाएज़िन्दगी और भी  निखर जाएकोई दिखता नहीं  सिवा तेरेदूर तक जब मेरी नज़र जाएतुम पुकारो अगर मुहब्बत सेदिल का क्या है ,यहीं ठहर जाएडूब जाऊँ तेरी निगाहों मेंयह भी चाहत कहीं न मर जाएएक हसरत तमाम उम्र रहीमेरी तुहमत न उसके सर ... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   6:59am 11 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
212---212---212---212फ़ाइलुन---फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ाइलुनबह्र-ए-मुतदारिक मुसम्मन सालिम---------एक ग़ज़ल : आदमी का कोई अब---आदमी का कोई अब भरोसा नहींवह कहाँ तक गिरेगा ये सोचा नहीं’रामनामी’ भले ओढ़ कर घूमताकौन कहता है देगा  वो धोखा नहींप्यार की रोशनी से वो महरूम हैखोलता अपना दर या दरीचा नहींउनके व... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:39am 9 Jan 2020 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
212---212---22फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़े’लुनबह्र-ए-मुतदारिक मुसद्दस मक़्तूअ’ अल आख़िर ---------------एक ग़ज़ल 139 : दिल में जो अक्स है उतरा--दिल में  इक अक्स जब उतरादूसरा  फिर कहाँ  उभराबारहा दिल मेरा  टूटाटूट कर भी नहीं बिखराकौन वादा निभाता  है कौन है क़ौल पर ठहरा ?शम्मअ’ हूँ ,जलना क़िस्मत में... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   6:09am 26 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
मूल बहर  112---112---112---112-फ़अ’लुन ----फ़अ’लुन---फ़अ’लुन--फ़अ’लुनबहर-ए-मुतदारिक मुसम्मन मख़्बून -----एक ग़ज़ल 138 : दिल ख़ुद ही तुम्हारा आदिल है --दिल ख़ुद ही तुम्हारा आदिल हैसमझो क्या सच क्या बातिल हैउँगली तो उठाना  है   आसाँकब कौन यहाँ पर कामिल हैटूटी कश्ती, हस्ती मेरीदरिया है ,ग़म है, साहि... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   5:46am 26 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
212---212----212----212- फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ैलुन-------------क्या कहूँ मैने किस पे लिखी है ग़ज़लसोच जिसकी थी जैसी ,पढ़ी है ग़ज़लदौर-ए-हाज़िर की हो रोशनी या धुँआसामने आइना  रख गई है  ग़ज़ल  लोग ख़ामोश हैं खिड़कियाँ बन्द करराह-ए-हक़ मे खड़ी थी ,खड़ी है ग़ज़लवो तक़ारीर नफ़रत का करते रहेप्यार की लौ जगाती ... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   6:18am 23 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
ग़ज़ल 1361222---1222---1222---1222तुम्हारे हुस्न का जल्वा ,  ख़ुदा रख्खे हिफ़ाज़त मेंये रश्क़-ए-माह-ए-कामिल है,क़मर जलता अदावत मेंतेरी उल्फ़त ज़ियादा तो मेरी उलफ़त है क्या कमतरज़ियादा कम का मसला तो नहीं होता है उल्फ़त मेंपहाडों से चली नदियाँ बना कर रास्ता अपनातो डरना क्या  ,फ़ना होना है जब राह-ए-मु... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   11:46am 21 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--कैसे लिखूँ ग़ज़ल का मतला, मक्ता कैसे पाऊँ मैंवनवासी दुनिया में कैसे, अपने शेर सजाऊँ मैं-- नहीं रहे अब झाड़ी जंगल, भटक रहा हूँ राहों मेंपात-पात में छुपे शिकारी, कैसे जान बचाऊँ मैं--आफताब़-माहताब़ उन्हीं के, जिनके केवल नाम बड़ेलिख करके अनमोल फसाने, बोलो कहाँ लगाऊँ मैं--सो... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   1:08am 19 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
फ़ऊलुन---फ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन122-------122------122-------122बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम--------------ग़ज़ल  : तेरे हुस्न की सादगी---तेरे हुस्न की  सादगी  का असर हैन मैं होश में हूँ ,न दिल की ख़बर हैयूँ चेहरे से पर्दा   गिराना ,उठानाइसी दम से होता है शाम-ओ-सहर हैसवाब-ओ-गुनह का मै इक सिलसिला हूँअमलन... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   5:52am 4 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुन122-------122------122------122बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम ---------------एक ग़ज़ल : नहीं जानता हूँ कौन हूँ--नहीं जानता  कौन हूँ ,मैं कहाँ हूँउन्हें ढूँढता मैं  यहाँ   से वहाँ  हूँतुम्हारी ही  तख़्लीक़ का आइना बनअदम से हूँ निकला वो नाम-ओ-निशाँ हूँबहुत कुछ था कहना ,नह... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   6:08am 2 Dec 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
2122--        -1212--     --22फ़ाइलातुन---मफ़ाइलुन---फ़े’लुनएक ग़ज़ल : मेरे जानाँ --मेरे जानाँ ! न आजमा  मुझकोजुर्म किसने किया ,सज़ा मुझकोजिन्दगी तू ख़फ़ा ख़फ़ा क्यूँ हैक्या है मेरी ख़ता ,बता  मुझकोयूँ तो कोई नज़र नहीं  आताकौन फिर दे रहा सदा मुझकोनासबूरी की इंतिहा क्या  हैज़िन्दगी तू ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   11:53am 28 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
122---122---122---122फ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुनबह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम---------एक ग़ज़ल : भले ज़िन्दगी से हज़ारों ---भले ज़िन्दगी से  हज़ारों शिकायतजो कुछ मिला है उसी की इनायतफ़ऊलुन---फ़ऊलुन--फ़ऊलुन--फ़ऊलुनबह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिमये हस्ती न होती ,तो होते  कहाँ सबफ़राइज़ , शराइत ,ये रस्म-ओ-... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   5:10am 11 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
एक ग़ज़ल : झूठ इतना इस तरह ---2122---2122---212झूठ इतना इस तरह  बोला  गयासच के सर इलजाम सब थोपा गयाझूठ वाले जश्न में डूबे  रहे -और सच के नाम पर रोया गयावह तुम्हारी साज़िशें थी या वफ़ाराज़ यह अबतक नहीं खोला गयाआइना क्यों देख कर घबरा गएआप ही का अक्स था जो छा गयाकैसे कह दूँ तुम नहीं शामिल र... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   5:18am 9 Nov 2019 #ग़ज़ल
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
--नहीं रहा अब समय पुरानाख़ुदगर्ज़ी का हुआ ज़माना--कैसे बुने कबीर चदरियाउलझ गया है ताना-बाना--पसरी है सब जगह मिलावटनकली पानी नकली दाना--देशभक्त हैं दुखी देश मेंलूट रहे मक्कार खज़ाना--आजादी अभिशाप बन गयीहुआ बेसुरा आज तराना--दीन-धर्म के फन्दे में हैमानवता का अब अफसाना--'रूप'... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   1:23am 5 Nov 2019 #ग़ज़ल
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