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Tag: गद्य

Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
परिच्छेद– १३ यहकथासुनानेकेबाद, मुनिजाबालिनेएकतिरस्कार-पूर्णस्मितसंगअपनेपुत्र हरितवअन्यतपस्वियोंसेकहा : 'तुमसबदेखचुकेहोंकिकैसेइसकथामेंहमसबकोऔरहमारेउरोंको इतनादीर्घबाँधनेकीशक्तिहै।औरयहकाम-पीड़ितजीवहैजोअपनेदोषकारणस्वर्ग-पतितहुआ, औरपृथ्वीपरश... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   5:37pm 16 Jun 2019 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
परिच्छेद– १०इसपरिशेषकथाकेअति-कठिनश्रमहेतुमैंसृष्टि-गुरु (अभिभावक) गिरिसुतापार्वतीवपरमेश्वरदोनोंकीवन्दनाकरताहूँ, जिनकीदोअर्ध-देहोंकीएकवपु रचना बनतेहुएनतोसन्धिनभेदकोलक्षितहोतीहै। मैंविश्वस्रजानारायणकोनमनकरताहूँ, जिनकेद्वारानर्सिंह-रूपहर्षसेआ... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   9:10am 26 May 2019 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
परिच्छेद - ९ (भाग -२)-----------------------------"उसकेकुछदिवसबीतजानेपर, मेघनादपत्रलेखासहितआयाऔरउसकोअंतः-कक्षअंदरलाया; औरजगहदूरसेहीनमस्कारकरचुकी, चंद्रापीड़नेस्मितसेप्रीतिप्रकाशितकी, औरउठकरअतिशयदर्शितआदरसहितपत्रलेखाकोआलिंगन-बद्धकरलिया; क्योंकियद्यपिस्वभावसेप्रिय... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   11:38am 11 May 2019 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
परिच्छेद - ९ (भाग -१)----------------------------"गंधर्व-पार्थिवोंकोविदाकहकर, पूर्णहर्ष, उत्सुकतावविस्मय-पूरितउसनेअपनीसेना-मध्यअपनेकक्षमेंप्रवेशकिया; औरशेषराजसदोंकोप्रणामकरके, उसनेवैशम्पायनवपत्रलेखाकेसंगअधिकतरदिवसबिताया, कहतेहुए, 'महाश्वेतानेऐसाकहा, ऐसाकादम्बरीने, ऐसाम... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   12:00pm 20 Apr 2019 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR at Journey...
परिच्छेद - ८ (भाग -२)----------------------------"उसकीविदाईपरचन्द्रापीड़किशोरियोंद्वाराअनुसरितहुआचलागया, जोउसकेविनोदहेतुकादम्बरीकेआदेशपरप्रतिहारीद्वाराभेजीगईथी, वीणावबाँसुरी, गायन-निपुण, पाँसेवचित्रकारीकीक्रीड़क, अनुभवीचित्रकारवश्लाघ्यकाव्यकेगवैयी; उसेपूर्व-परिचितकेयूर... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   11:39am 30 Mar 2019 #गद्य
Blogger: Alpana at Vyom ke Paar...व्योम क...
परिवर्तन जीवन का  शाश्वत नियम है.जो इस पल है बिलकुल वैसा ही अगला पल नहीं होगा यह भी तय है..यह सब हमेशा से ही सुनते आये हैं और सुनते रहेंगे ,महसूस करना और इस कथन को जीने में भी फर्क है...जब इस कथन को जीना पड़ता है ,तब तकलीफ होती है .बीता हुआ कल लौटेगा नहीं ..उस कल की यादें रह जाएँग... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   4:39pm 25 Jun 2016 #गद्य
Blogger: Alpana at Vyom ke Paar...व्योम क...
स्वागत गीत अथ स्वागतम , शुभ स्वागतम आनंद मंगल मंगलम |नित प्रियम भारत भारतम ||नित्य निरंतारता, नवता , मानवता, समता , ममता |सारथी साथ मनोरथ का, जो अनिवार नहीं थमता ||संकल्प अविजित अभिमतं | आनंद मंगल मंगलम ||कुसुमित नई कामनायें, सुरभित नई साधनाएँ |मैत्रिमत क्रीडांगन में , प्रमु... Read more
clicks 292 View   Vote 0 Like   4:51pm 2 Feb 2015 #गद्य
Blogger: Alpana at Vyom ke Paar...व्योम क...
चित्र गूगल से साभार  सब कहते हैं कि यह भागती -दौड़ती दुनिया है । दुनिया भी तो हमीं से बनी है ,क्या हम सभी भाग नहीं रहे ?इस दौड़ में कौन आगे कौन पीछे रह गया यह तब  मालूम चलता है जब कहीं रुक जाएँ ,ठहर जाएँ।माही को भी आज अचानक रुकना पड़ा क्योंकि सीधी ,ऊँची-नीची तो कभी टेढ़ी या लहरद... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   8:45pm 22 Dec 2014 #गद्य
Blogger: Kavi Amrit Wani at काव्य कलश...
मालवांचल का महानगर, मायानगरी का अनुज, अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियों से सुसज्जित, अनन्त प्रगति पथ का अहर्निष धावक, षील से विकासषील, सतरंगी सृजनधर्मिता का अतिसक्रिय स्थल, नैसर्गिंक सौन्दर्य का अक्षय भण्डार, रेल- मार्ग का मकड़ जाल, कोटि-कोटि नयनों का त्राटक बिन्दु, ह... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   7:38pm 23 Jul 2014 #गद्य
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश' at Dwarka Baheti 'Dwarkesh'...
               धर्म                 डॉ. द्वारका बाहेती        धर्म को लेकर इस दुनिया में जितने विवाद व दंगे हुए हैं शायद उतने किसी भी अन्य कारण से नहीं हुए होंगे | सभी मनुष्य अपने संस्कार या पूर्वाग्रह सिद्धान्तों के वशीभूत हो अपने-अपने धर्म को सर्वश्रेष्ट व दूसरे के धर्म को एकद... Read more
clicks 145 View   Vote 1 Like   6:42pm 23 May 2012 #गद्य
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश' at Dwarka Baheti 'Dwarkesh'...
       मनुष्य- शाकाहारी या मांसाहारी ?   प्रकृति में सब कुछ नियमबद्ध है | उसमें जो कुछ भी घटता है उसको  वैज्ञानिक धरातल पर कसा जा सकता है | जब भी कोई उसके विरुद्ध जा उससे छेड़छाड़ करता है तो उसके दुष्परिणाम उसके साथ-साथ अन्य सभी को भी भोगना पड़ते हैं |        मानव, प्रकृति की सबसे प... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   8:50am 17 Nov 2011 #गद्य
Blogger: Kavi Amrit Wani at काव्य कलश...
संसार का दाता प्रत्येक जीवात्मा को उसके प्रारब्धानुसार कुछ ना कुछ ऐसा अवश्य देता है जो अन्य की तुलना में निसंदेह कुछ हद तक अतिविशिश्ट होता है। न जाने यह मेरे किस जन्म की भक्ति का प्रारब्ध है कि मां वीणा-पाणि ने अपने छलकते हुुए काव्य-कलश की एक नन्ही सी बून्द बचपन में ही ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   12:32pm 24 Mar 2010 #गद्य
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