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Tag: कागज

Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
खुलता रोज है एक पन्ना हमेशा खुलता है उसी तरह जैसे खोला जाता है सुबह किसी दुकान का शटर और बन्द कर दिया जाता है शाम को आदतन पिछले कई दिनों से तारीख बदल रही है रोज की रोज मगर कलम है लेट जाती है थकी हुयी सी बगल में ही सफेद पन्ने के सो जाती है आँखे खुली रख कर देखने के लिये कुछ रंग... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   4:42pm 11 Mar 2020 #कागज
Blogger: सरिता भाटिया at गुज़ारिश ...
सबसे सुंदर देश हमारा,विश्व को यह बतलाना है।हाथ मिलाकर बढ़ो साथियों,भारत स्वच्छ बनाना है।सोच बदलने देश बदलने एक मसीहा आया हैछोड़ गंदगी शुचिता धारो,यह हमको समझाया हैमातृभूमि को जन्नत करने,यह अभियान चलाना हैहाथ मिलाकर ...खुद समझो सबको समझाओ महत्ता कूड़ा दान कीप्रबंधन से ख... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   10:59am 10 Jul 2018 #कागज
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
बहुत दिन हो गये सफेद पन्ने को छेड़े हुऐ चलो आज फिर से कोशिश करते हैं पिचकारियॉ उठाने की गलत सोच का गलत आदमी होना बुरा नहीं होता है प्यारे सही आदमी की संगत से कोशिश किया कर थोड़ा सा दूर जाने की जन्नत उन्हीं की होती है जहॉ खुद के होने का भी नहीं सोचना होता है मर जायेगा एक दिन ज... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   6:15pm 8 Feb 2018 #कागज
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
शेरो शायरी बहुत हो गयी मजा उतनानहीं आ रहा है सुना है फिर से चिट्ठियाँ लिखने का चलन लौट कर वापस आ रहा है कागज कलम दवात टिकट लिफाफे के बारे में पूछ रहा है कोई कई दिनों से इधर और उधर के डाकखानों के चक्कर लगा रहा है चिट्ठियाँ लिखना भेजना डाकिये का पता देख कर किसी का घर ढूँढना क... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   1:49pm 5 Oct 2017 #कागज
Blogger: veena sethi at बात एक अनकही ...
(1)नींद पलकों पर  गिरी;फिर  बह चली ...... दरिया की मनिंद .(2)खत कोरे कागज पर,स्याही से उकेरे ;कुछ  शब्द .(3)खता एक पल  की खता :और  सदियों  को  मिली  सजा. (4)आसूं सुख  में :दुख में;पलक  की  कोर पर ठहरी  सी:खारे  पानी की एक बूंद .    (5)ऑस शीत   की भोर में ;पत्तों पर ठहरा हुआ ,पानी का एक क... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   9:38am 9 May 2012 #कागज
Blogger: naresh thakur at NARESH THAKUR...
ईसा के दूसरी सदी में ही चीनियों ने कागज का आविष्कार कर लिया था, लेकिन दुनियाभर के लोगों के लिए यह उपयोगी चीज तब तक एक पहेली बनी रही, जब तक सन् 751 में समरकंद के कैदखानेमें बंद चीनी युद्धबंदियों ने अरब के लोगों से कागज बनाने का राज साझा नहीं किया था। इसके बाद से अरब के लोगों न... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   6:33am 20 Feb 2012 #कागज
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