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Tag: कवितायेँ

Blogger: राजेंद्र कुमार at भूली-बिसरी या...
सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमाराहम भेड़-बकरी इसके यह गड़ेरिया हमारासत्ता की खुमारी में, आज़ादी सो रही हैहड़ताल क्यों है इसकी पड़ताल हो रही हैलेकर के कर्ज़ खाओ यह फर्ज़ है तुम्हारासारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा.चोरों व घूसखोरों पर नोट बरसते हैंईमान के मुसाफिर र... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   12:02pm 7 Jan 2014 #कवितायेँ
Blogger: राजेंद्र कुमार at भूली-बिसरी या...
जिस दिन से तुम आई मेरी जिंदगी मे जीवन के प्रत्येक दिन मानो दिवाली है. तुम से दूर रहकर नही कर सकता कल्पना हर पल महसुस करता अंतरात्मा की आवाज जिस में हम एक साथ कर रहें हैं वीणा का वादन साथ बिताये हसींन लम्हे हरपल आँखों के सामने मानों चल रहा है चलचित्र... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   3:31am 25 Sep 2013 #कवितायेँ
Blogger: Akanksha Yadav at सप्तरंगी प्र...
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर  आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती लीला तिवानी  की एक कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... प्रेम मन की आशा है, करता दूर निराशा है, चन्द शब्दों में कहें तो, प्रेम जीवन की परिभाषा है. प्रेम से ही सुमन महकते हैं, प्रेम से ही पक... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   2:30am 15 Sep 2013 #कवितायेँ
Blogger: Akanksha Yadav at सप्तरंगी प्र...
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर  आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती  उदयभानु ‘हंस’ जी  की एक कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... तू चाहे चंचलता कह ले,तू चाहे दुर्बलता कह ले,दिल ने ज्यों ही मजबूर किया, मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा।यह प्यार दिए का तेल नहीं,दो चा... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   2:30am 14 Sep 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
तब फूलों केकलियों केसपने आते थे,झरने बहते थे,हवा मे अठखेलियाँ हुआ करती थी,मन का पंछी-बिना गुदगुदाए मुस्काता था,हंसता रहता था.दूर क्षितिज के उस पार-किसी  से तार जुड़े थेअपनेपन के रिश्ते;जिनकी मुझे प्रतीक्षा रहती थी .फिर उजास, स्वर्णिम आभा मेंतृण-बेल-लता-बृक्षरसीले, मधुर... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   12:59am 17 May 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
पाप-पुण्य से परे अप्रभाषित-  और अपरिमित,   विकारी भी है    ये चित्तवृति  है.अदृश्य अनाहत सी अठखेलियां करती है  किसी को सन्मार्ग –   किसी को भटकाती है    ये चित्तवृति है.ये मन की चितवन है बहुत चँचल है  कोई भूल नहीं-   चाहे लगे नहीं अनुकूल कभी,    ये चित्तवृति है.जीवन को गति मिल... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   1:31am 25 Apr 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
चँचल चित्त पिपीलिका गतिमान विशाल पीपल वृक्ष पर उर्ध्व  किसी आराध्य की अन्वेषक सी,    अनवरत दौड़ी चली जाती है.कष्टमय साधना क्यों करती वह अगर मधु संकलन ही करना था  बिखरे पड़े हैं सर्वत्र मधुमय फल-   विकसित-गंधित-सर्वस्व समर्पित.भावना छुपी है इस प्रयास में उसके गहन प्रकृ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   2:26am 7 Apr 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
चलो खेलें, नया खेल आज होली में बदल डालें सारे बेमेल आज होली में.बन्द कर दो ये समाचार-मीडिया जो दिल तोड़ते हैं हड़ताल- हुल्लड़, अनशन, या जो माइक बोलते हैंमुँह पर चिपका दो टेप उनके जो जहर घोलते हैं.कह दो खुले में ना करो बकवास आज होली में.             चलो खेलें, नया खेल आज होली में.... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   1:26am 27 Mar 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
                          (१)रामदीन के अँगना, कामधेनु सी गाय,ये दुनिया की रीति है खूंटा देत बधाय.खूंटा देत बधाय, फिर मित्र बधाई देतेकहे पाण्डे कविराय, करो खुशियों की बातेंबन्ना-बन्नी की बनी रहें लम्बी चांदनी रातें.                           (२)जोड़ी जुग जुग बनी रहे, फूलो - फलो प्यारेसब दिन हो... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   1:51am 14 Mar 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
मैं श्वेत कमल सा पुष्प अफीम का दम्भी, गन्धी और नशीला,तुम मेढ़ के उस पार, पीली सरसों,नेह-स्नेह और शर्मीली सी.बयार बसंती छूकर आती तुमको मधुप, कीट-पतंगे दे जाते संदेशे.मैं मजबूर कि पहरे हैं भारी मुझपरचीरा जाऊंगा इसी अपराध में इक दिनमैंने अनजाने में क्यों यों चाहा तुमको,तुम ... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   3:34am 24 Feb 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
बागन में आम, जंगलन में नीम बौरायो है,खेतन में धान्य, बेल-लतान में बसंत बगुरायो है,भौरन-कीट-पतंगन को पराग-गंध अकुलायो है,अरे, बूढ़े सेमल, हाय, तू काहे फगुनायो है?कोयल पंछी कुहुक पड़े हैं, ज्यों नवसंदेसो आयो है,निम्ब-जमीर नवांकुर लेकर नवचेतन हर्षायो है,धरती सारी है इठलाती, य... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   2:45am 6 Feb 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
उन सपनों का क्या, जो कभी फलीभूत हुए नहीं,उन अपनों का क्या, जो कभी अभिभूत हुए नहीं.न कसमें न वादे, सिर्फ यादें हैं, पर यादों का क्या मोल?किसी के लिए फिजूल हैं तो किसी के लिए अनमोल.दुविधा सुविधा की बात नहीं अब तो कोई चाह नहीं.चाहे- अनचाहे भी सोचें, आगे कोई राह नहीं.भीड़ भरी द... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   2:42am 15 Jan 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
मुझे मालूम था – ‘हमेशा की तरह तुम   इस बार भी    ठीक आधी रात को     मुझे मेरी शीतनिद्रा से जगाओगी.मैं अर्धमूर्छित सा अलसाए बदन  गतवर्ष के दु:स्वप्नों को भूलकर   तुम्हारे छुवन से जागृत हो जाऊंगा.    ज्यों पत्रविहीन आड़ू के पेड़ को-     वसंत-वयार की छुवन हो.      वैसे ही छोटे छोट... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   1:48am 1 Jan 2013 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
ज्यों चकवा देखा करता है     हर शाम चांदनी की राहें,ज्यों बेल-लता ढूंढा करती हैं    ऊँचे दरख्तों की बाहें,ऐसे ही हाँ, हम ऐसे ही    पलकें बिछाये रहते हैं,वो आयें हमारे पास कभी    यों आस लगाते रहते हैं.जब सावन आ के गाता है    या आम कभी बौराते होंहर बार दिवाली करते हम    कि साजन शायद ... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   3:36am 11 Dec 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
मोतिया कपोलन में लाली ये गुलाब सी,नयना हैं सम्मोहनी-दिलनशीं शराब सी.अबीर बन गया हूँ मैं, मुझको तुमसे प्यार है, प्यार में बिखेर दो, जाँ तुम्हें निसार है.छप रहूँ तुम्हारे तन, मोरडे का पँख बन,पद्मिनी सी बाँध लो, छुप रहूँ तुम्हारे तन.खिलखिला उड़ेल दो प्यार का अनूप रंगसिलसिला ... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   2:35am 29 Nov 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
                  (१)डरता हूँ खेल तमाशों में जाने से,मंदिर या महफ़िल में जाने सेभटके ना कहीं अनजाने में भीमेरे महबूब की याद तन्हा.                   (२)दम-दिलासा देने वालों ने कहा मुझसेलगा लो दिल जहाँ में और भी कुछ है.सूझता है नहीं फकीरी मेंकि दिल तो दे दिया कब का, बेचारा खो गया तन्हा.       ... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   1:59am 15 Nov 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
जिनकी मूरत दिल में बसी है,         करीब मेरे है, खुद आ गयी है.प्यार क्या है जमाने को समझाऊँ क्या?        इक बदन में दो दो रूह आ गयी हैं.मिली वो तो संध्या सुबह बन गयी है,        अभी तक के सफर की थकां मिट गयी है,खुशी क्या है जमाने को समझाऊँ क्या?        इक भूले मुसाफिर को मंजिल मिल गयी है.बेख... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   1:43am 1 Nov 2012 #कवितायेँ
Blogger: Akanksha Yadav at सप्तरंगी प्र...
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती अवनीश कुमार की एक कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...  तुम- गुलाबी होजैसे नवजात की नज़र तुम- हरी हो जैसे नवेली वसंत की ऊष्मा तुम- नीली होजैसे बड़े परदे की बड़ी सी फिल्म तुम- उजली होजैसे हर रोज़ धुल... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   11:00am 28 Oct 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
शिकवे कबूल लूंगा, तू मुझको बता तो दे,या कह दे सारी बात, जो उसका पता तो दे.गुल से पूछा, गुलशन से पूछा, भंवरों ने भी कह दिया- उनको नहीं पता,शबनम कुछ कहने को थी, मगर मैंने उसको छू दिया- बस यही हुई खता,                                                                              शिकवे कबूल लूंगा...सितारे तोड़ दूं... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   2:40am 27 Oct 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
प्रिय, कलियों ने सी लिए हैं होंठ, तेरे खो जाने परगंधहीन खीझे से लगते खिलखिलाते सुरभित प्रसून.अस्वस्थ से, डरावने लगते मेघों के घटते–बढ़ते बिम्ब,भयभीत सी, झंकारविहीन बहती है अस्त-व्यस्त बयाररस–रसना, रस-काव्य, स्वर लहरी, सब हो गए हैं अग्राह्यतुम लुप्त दिवाकर या बीती बहार... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   1:10am 13 Oct 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
मन अब भर चुका है  डीजल और पेट्रोल के धुएं से  खारा लगता है क्लोरीनी पानी   ताजा पियेंगे अपने कुँए से    चलो अपने गाँव चलें.चाचा की भैंस ब्या गई है ऐसी चिट्ठी आई है  मन करता है ‘खींच’ खाने को    बेस्वाद लगता है ये पैकेट का दूध    चलो अपने गाँव चलें.नवरात्रियों में जागरण करेंग... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   1:11am 29 Sep 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
फूल फूल पर उड़ती तितली कहाँ है तेरा बसेरा?  तू नित्य लगाती फेरा    मन मोहा करती मेरा.कली कली से पूछ के जाती  कान में भी कुछ कह जाती   कौन है प्रियतम तेरा?   कि कहाँ है उसका डेरा?कुछ कह-सुन कर है इठलाती  तरह तरह से छेड़ के जाती  प्रिय, खेल अनोखा तेरा    आ, प्यार लिए जा मेरा. दूर क्ष... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   1:18am 18 Sep 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
मैं विग्रही हूँ.मैं अशांति का बेटा हूँ मेरी माँ ने अनिश्चित काल तकमुझे अपने गर्भ में ढोया है.असह्य प्रसव वेदना पाई है.मैं उत्तेजित हूँ,आक्रोशित हूँ,अनियमित भी हो गया हूँ.क्योंकि मेरी माँ को बहुविध दौरे पड़ने लगे हैं.जिससे सर्वत्र भ्रांतियां पैदा हो रही हैं.मेरी मुट्ठ... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   2:51am 3 Sep 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
कर बैठे कोई किशोर इश्क         उसे बस, नादानी कह लीजे,भरी जवानी इश्क न होवे         ऐसी जवानी पर लानत दीजे.करे लगन के बाद इश्क इतर         उसे बदमाशी का नाम दीजे.यदि होए इश्क साठ के पार        तो पकड़, माथे पर जूते दीजे.पर लगे रोग अस्सी के बाद        तो दादू पर खास तवज्जो दीजे.‘उत्तम’... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   12:49am 1 Jul 2012 #कवितायेँ
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
दारू ऐसी है बला-      ठौर ठौर से खाय,धन घटे, ऊर्जा घटे,      पत पंचों में जाय.घर में बसे क्लेश निरंतर,      मन बेचैन कराय.हीरा जनम अनमोल था,      सुरा में दियो डुबाय.‘उत्तम’कहे बात पते की,      जो ना समझे,पछताय.           ***http://purushottampandey.blogspot.com/... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   12:21am 19 Jun 2012 #कवितायेँ
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