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Tag: कविता संग्रह

Blogger: पूरण खण्डेलवाल at शंखनाद...
राजबुन्देली की एक रचना:-रिश्तॊं मॆं नहीं कॊई दुराव, चलॊ चलतॆ हैं !शहर सॆ भला अपना गांव, चलॊ चलतॆ हैं !!पनघट की पगडंडियां, बिरवा बगीचॆ कॆ !बुला रही बरगद की छांव, चलॊ चलतॆ हैं !!अपनॆ पुरखॊं का चमन उजड़ता जा रहा !मिल कॆ करॆंगॆ रख-रखाव, चलॊ चलतॆ हैं !!गरमी की तपन वह, बारिष का भीगना !सि... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   1:54pm 13 Aug 2014 #कविता संग्रह
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कवि राजबुन्देली जी वीर रस से भरी कविता :-फ़ांसी कॆ फन्दॊं कॊ हम , गर्दन दान दिया करतॆ हैं !गॊरी जैसॆ शैतानॊं कॊ भी ,जीवन-दान दिया करतॆ हैं !!क्षमाशीलता का जब कॊई , अपमान किया करता है !अंधा राजपूत भी तब, प्रत्यंचा तान लिया करता है !!भारत की पावन धरती नें , ऎसॆ कितनॆं बॆटॆ जायॆ हैं... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   2:14pm 30 Mar 2013 #कविता संग्रह
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माया चौबे जी कि बेटी पर लिखी एक कविता:-दो फूलों का बंधन है बेटी ,दो परंपराओं का संगम है बेटी !विश्व के उत्थान का आधार है बेटी ,प्रेम,दया और ममता का सार है बेटी !!हर गुणों से भरी हुयी है ,फिर भी सहमी और डरी हुयी है !न जानें कब से मौत,मुहं खोले खड़ी हुयी है !!गर्भपात कराने वाली माता... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   6:30am 20 Mar 2013 #कविता संग्रह
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चंद्रशेखर आजाद जी पर लिखी गयी मेरे पसंदीदा कवि राजबुन्देली जी की एक रचना :-सूरज कॆ वंदन सॆ पहलॆ,धरती का वंदन करता था !इसकी पावन मिट्टी सॆ,माथॆ पर चन्दन करता था !!इसकी गौरव गाथाऒं का,वॊ गुण-गायन करता था !आज़ादी की रामायण का,नित्य पारायण करता था !!संपूर्ण क्रांन्ति का भारत मॆ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   7:53am 27 Feb 2013 #कविता संग्रह
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कल मैंनॆ भी सोचा था कॊई, श्रृँगारिक गीत लिखूं !बावरी मीरा की प्रॆम-तपस्या, राधा की प्रीत लिखूं !!कुसुम कली कॆ कानों मॆं,मधुर भ्रमर संगीत लिखूं !जीवन कॆ एकांकी-पन का,कॊई सच्चा मीत लिखूं !!एक भयानक सपनॆं नॆं, चित्र अनॊखा खींच दिया !श्रृँगार सृजन कॊ मॆरॆ, करुणा कृन्दा सॆ सींच द... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   3:21am 16 Feb 2013 #कविता संग्रह
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हर नौजवान कॆ हाथों मॆं, बस बॆकारी का हाला !हर सीनॆं मॆं असंतोष की, धधक रही है ज्वाला !!नारी कॆ माथॆ की बिंदिया, ना जानॆं कब रॊ दॆ !वॊ बूढी मैया अपना बॆटा,क्या जानॆं कब खॊ दॆ !!बिलख रहा है राखी मॆ, कितनीं, बहनॊं का प्यार लिखूं !धन्य धन्य वह क्षत्राणी जिनकॊ वैभव नॆं पाला था !आ पड़ी ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   6:45am 28 Jan 2013 #कविता संग्रह
Blogger: पूरण खण्डेलवाल at Desain Interior Rumah Minimalis | W...
हर नौजवान कॆ हाथों मॆं, बस बॆकारी का हाला !हर सीनॆं मॆं असंतोष की, धधक रही है ज्वाला !!नारी कॆ माथॆ की बिंदिया, ना जानॆं कब रॊ दॆ !वॊ बूढी मैया अपना बॆटा,क्या जानॆं कब खॊ दॆ !!बिलख रहा है राखी मॆ, कितनीं, बहनॊं का प्यार लिखूं !धन्य धन्य वह क्षत्राणी जिनकॊ वैभव नॆं पाला था !आ पड़ी ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   6:45am 28 Jan 2013 #कविता संग्रह
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बेशक तुमने अपमान किया,खण्डित भारत का मान किया॥यह वंदेमातरम सम्प्रदाय का परिचायक है,कैसे मान लिया॥आओ,मै तुम्हे बताता हूँ,इस वंदेमातरम की सत्ता। तुमको उसका भी ज्ञान नहीँ जो जान चुका पत्ता-पत्ता॥ जो ज्ञानशून्य भू पर बरसी,बन,शून्य-ज्ञान की रसधारा। दशमलव दिया इसने तब,जब... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   11:21am 27 Jan 2013 #कविता संग्रह
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बेशक तुमने अपमान किया,खण्डित भारत का मान किया॥यह वंदेमातरम सम्प्रदाय का परिचायक है,कैसे मान लिया॥आओ,मै तुम्हे बताता हूँ,इस वंदेमातरम की सत्ता। तुमको उसका भी ज्ञान नहीँ जो जान चुका पत्ता-पत्ता॥ जो ज्ञानशून्य भू पर बरसी,बन,शून्य-ज्ञान की रसधारा। दशमलव दिया इसने तब,जब... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   11:21am 27 Jan 2013 #कविता संग्रह
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पंथ कठिन है माना मैनॆ, मंज़िल ज्यादा दूर नहीं है ॥करधन-कंगन मॆं खॊया रहना, मुझकॊ मंज़ूर नहीं है ॥यॆ बिंदिया पायल झुमका, बॊलॊ बदलाव करॆंगॆ क्या ॥कजरा रॆ, कजरा रॆ कॆ गानॆ, मां कॆ घाव भरॆंगॆ क्या ॥अमर शहीदॊं का शॊणित, धिक्कार रहा है पौरुष कॊ ॥वह धॊखॆबाज़ पड़ॊसी दॆखॊ,ललकार रह... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   12:50pm 23 Jan 2013 #कविता संग्रह
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पंथ कठिन है माना मैनॆ, मंज़िल ज्यादा दूर नहीं है ॥करधन-कंगन मॆं खॊया रहना, मुझकॊ मंज़ूर नहीं है ॥यॆ बिंदिया पायल झुमका, बॊलॊ बदलाव करॆंगॆ क्या ॥कजरा रॆ, कजरा रॆ कॆ गानॆ, मां कॆ घाव भरॆंगॆ क्या ॥अमर शहीदॊं का शॊणित, धिक्कार रहा है पौरुष कॊ ॥वह धॊखॆबाज़ पड़ॊसी दॆखॊ,ललकार रह... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   12:50pm 23 Jan 2013 #कविता संग्रह
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भारत कॆ सैनिकॊं की हत्या पर, इंद्रासन हिला नहीं !प्रलयं-कारी शंकर का क्यॊं, नयन तीसरा खुला नहीं !!शॆष अवतार लक्ष्मण जागॊ, मत करॊ प्रतीक्षा इतनी !मर्यादाऒं मॆं बंदी भारत माँ,दॆ अग्नि-परीक्षा कितनी !!हॆ निर्णायक महा-पर्व कॆ, तुम फिर सॆ जयघॊष करॊ !युद्ध-सारथी बन भारत कॆ, जन-जन म... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   5:13pm 14 Jan 2013 #कविता संग्रह
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क्या खुद्दारी से जीना भूल गये हम ,आत्मसम्मान भी गँवा बैठे है !जिनकी खुद कि कोई औकात नहीं ,वो भी हमें औकात बता बैठे हैं !!काश इंदिरा ,शास्त्री आज जिन्दा होते ,दुश्मन को औकात दिखा देते !फिर कभी हिम्मत दुश्मन ना करता ,उसे छटी का दूध याद दिला देते !!गांधी के तीन बंदरों का हाल है ,स... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   5:42pm 11 Jan 2013 #कविता संग्रह
Blogger: पूरण खण्डेलवाल at Desain Interior Rumah Minimalis | W...
हाँ हुजूर मै चीख रहा हूँ हाँ हुजूर मै चिल्लाता हूँक्योंकि हमेशा मैं भूखी अंतड़ियों कि पीड़ा गाता हूँमेरा कोई गीत नहीं है किसी रूपसी के गालों परमैंने छंद लिखे हैं केवल नंगे पैरों के छालों परमैंने सदा सुनी है सिसकी मौन चांदनी की रातों मेंछप्पर को मरते देखा है रिमझिम- रि... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   2:32pm 8 Jan 2013 #कविता संग्रह
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हाँ हुजूर मै चीख रहा हूँ हाँ हुजूर मै चिल्लाता हूँक्योंकि हमेशा मैं भूखी अंतड़ियों कि पीड़ा गाता हूँमेरा कोई गीत नहीं है किसी रूपसी के गालों परमैंने छंद लिखे हैं केवल नंगे पैरों के छालों परमैंने सदा सुनी है सिसकी मौन चांदनी की रातों मेंछप्पर को मरते देखा है रिमझिम- रि... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   2:32pm 8 Jan 2013 #कविता संग्रह
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केसर घाटी में आतंकी शोर सुनाई देता है हिजबुल लश्कर के नारों का जोर सुनाई देता है मलयसमीरा मौसम आदमखोर दिखायी देता है लालकिले का भाषण भी कमजोर दिखायी देता है !!भारत गाँधी गौतम का आलोक था कलिंग विजय से ऊबा हुआ अशोक था अब ये जलते हुए पहाड़ों का घर है बारूदी आकाश हमारे सर प... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   5:07pm 4 Jan 2013 #कविता संग्रह
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केसर घाटी में आतंकी शोर सुनाई देता है हिजबुल लश्कर के नारों का जोर सुनाई देता है मलयसमीरा मौसम आदमखोर दिखायी देता है लालकिले का भाषण भी कमजोर दिखायी देता है !!भारत गाँधी गौतम का आलोक था कलिंग विजय से ऊबा हुआ अशोक था अब ये जलते हुए पहाड़ों का घर है बारूदी आकाश हमारे सर प... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   5:07pm 4 Jan 2013 #कविता संग्रह
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साल था जो पुराना  वो बीत गया , नया क्या गुल खिलायेगा !कुछ बदलेगा या वही रहेगा ,यह तो भविष्य ही बतलायेगा !!पुराने ने बहुत सारे जख्म दियें हैं ,नया क्या उनको बदल पायेगा !नहीं बदलेंगे तो क्या होगा ,नया भी क्या शर्मसार कर जाएगा !!जो बीत गया वो अतीत हो गया ,वर्तमान को निखारा जाएगा !अ... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   3:30am 1 Jan 2013 #कविता संग्रह
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साल था जो पुराना  वो बीत गया , नया क्या गुल खिलायेगा !कुछ बदलेगा या वही रहेगा ,यह तो भविष्य ही बतलायेगा !!पुराने ने बहुत सारे जख्म दियें हैं ,नया क्या उनको बदल पायेगा !नहीं बदलेंगे तो क्या होगा ,नया भी क्या शर्मसार कर जाएगा !!जो बीत गया वो अतीत हो गया ,वर्तमान को निखारा जाएगा !अ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   3:30am 1 Jan 2013 #कविता संग्रह
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पीडिता का क्या था दोष, क्यों मर रहे है निर्दोष। क्या नहीं संस्कृति रही शेष, किधर जा रहा है मेरा देश।। बदल रहा क्यों पूरा परिवेश, किसने  धरा नेताओ का भेष। बचा नहीं सभ्यता का अवशेष,किधर जा रहा है मेरा देश।।कुचला जाता युवाओ का जोश,दिल दिल में फूट रहा आक्रोश। अपराधी कर रहे ... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   5:30am 30 Dec 2012 #कविता संग्रह
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पीडिता का क्या था दोष, क्यों मर रहे है निर्दोष। क्या नहीं संस्कृति रही शेष, किधर जा रहा है मेरा देश।। बदल रहा क्यों पूरा परिवेश, किसने  धरा नेताओ का भेष। बचा नहीं सभ्यता का अवशेष,किधर जा रहा है मेरा देश।।कुचला जाता युवाओ का जोश,दिल दिल में फूट रहा आक्रोश। अपराधी कर रहे ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:30am 30 Dec 2012 #कविता संग्रह
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मैंने जो कुछ भी गाया है तुम उसको नारे बतलाओमुझे कोई परवाह नहीं है मुझको नारेबाज बताओलेकिन मेरी मजबूरी को तुमने कब समझा है प्यारे |लो तुमको बतला देता हूँ मैंने क्यूँ गाये हैं नारे ||जब दामन बेदाग न हो जी ,अंगारों में आग न हो जीघूँट खून के पीना हो जी,जिस्म बेचकर जीना हो जीमे... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   4:13am 5 Nov 2012 #कविता संग्रह
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कैकॆई नॆं वर मॆं माँगा था ,वन कॆवल चौदह वर्षॊं का,पर गद्दारॊं नॆं है गला दबाया,मर्यादाऒं का आदर्शॊं का,भारत मॆं ही भरत-बंधु कॊ, आजीवन वनवास मिला,मिला कंस कॊ सिंहासन, कान्हा कॊ कारावास मिला,घर-घर मॆं अग्नि-परीक्षा, अब दॆती अगणित सीतायॆं,मंदिर-मंदिर सिसक रही, अब वॆद-व्यास क... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   6:14am 31 Aug 2012 #कविता संग्रह
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मेरा गीत चाँद है ना चाँदनी न किसी के प्यार की है रागिनी हंसी भी नही है माफ कीजियेखुशी भी नही है माफ कीजियेशब्दचित्र हूँ मैं वर्तमान का आइना हूँ चोट के निशान कामै धधकते आज की जुबान हूँ मरते लोकतन्त्र का बयान हूँअधिक पढ़ें »... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   7:12am 21 Aug 2012 #कविता संग्रह
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चर्चा है अख़बारों मेंटी.वी. में बाजारों मेंडोली, दुल्हन,कहारों मेंसूरज,चंदा,तारों मेंआँगन, द्वार, दिवारों मेंघाटी और पठारों मेंलहरों और किनारों मेंभाषण-कविता-नारों मेंगाँव-गली-गलियारों मेंदिल्ली के दरबारों मेंधीरे-धीरे भोली जनता है बलिहारी मजहब कीऐसा ना हो देश जला... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   7:14am 17 Aug 2012 #कविता संग्रह
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