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Tag: कविता

Blogger: VIMAL KUMAR SHUKLA at मेरी दुनिया...
लो बीता हिन्दी दिवस, खत्म हो गया स्वांग।किचन और ऑफिस चढ़ी, अंग्रेजी की भाँग।अंग्रेजी   की   भाँग,  गटककर  मुर्गा  सोता।अंग्रेजी  रँग  बाल,  रँगे   बाबा   का   पोता।चढ़ छज्जे पर  मेम, बन  गयी  देशी  सीता।हिन्दी हित हर हाथ, दिख रहा एक पलीता।।9198907871क... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   8:28am 15 Sep 2020 #कविता
Blogger: VIMAL KUMAR SHUKLA at मेरी दुनिया...
दूर कहाँ जायें जिंदगी से उकताकर?यहीं रहते हैं थोड़ी दूरियाँ बनाकर।।ज्यादा प्रेम मुझे हजम नहीं होता,तुम रूठो, मैं खुश रहूँ तुम्हें मनाकर।।चारों ओर समय के अजीब रँग बिखरे,दो चार ही सही ले चलें हम भी चुराकर।।रह लेंगे हम सड़क पर टेन्ट में प्यारे,बनायेंगे नहीं अपना किसी का घ... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   3:42am 22 Jun 2020 #कविता
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
अध्-खुली नींद में रोज़ बुदबुदाता हूँ एक तुम हो जो सुनती नहीं हालांकि ये चाँद, सूरज ... ये भी नहीं सुनते और हवा ...  इसने तो जैसे “इगनोरे” करने की ठान ली है    ठीक तुम्हारी तरह धुंधले होते तारों के साथ उठ जाती हो रोज मेरे पहलू से  कितनी बार तो कहा है  जमाने भर को रोशनी दे... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   6:32am 25 May 2020 #कविता
Blogger: कुमारेन्द्र सिंह सेंगर at रायटोक्रेट क...
फूल खिलने लगे गुलशन के मगर,फूल गुमसुम हैं कितने घर के मगर.कौन आया जहाँ में ये हलचल हुई.आज डरने लगे लोग खुद से मगर.(पूरी कविता पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें).#हिन्दी_ब्लॉगिंग ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   6:16pm 22 May 2020 #कविता
Blogger: VIMAL KUMAR SHUKLA at मेरी दुनिया...
इन्हें पियक्कड़ मत कहो, बड़ी आय का स्रोत।मदिरा-सागर में बहे, अर्थशास्त्र का पोत।।1।।चड्ढी फटी दिखाइ कर, मत करिये उपहास।उतर कण्ठ से माधवी, हर लेती सब त्रास।।2।।हमने चख पाई नहीं, क्या है इनका दोष।मदिरा के बूते भरे, बड़े-बड़ों के कोष।।3।।मदिरा के कारण विपुल, रचा गया साहित्य।ग़ा... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   7:14am 6 May 2020 #कविता
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
पूछता हूँ अपने आप से ... क्या प्रेम रहा है हर वक़्त ... या इसके आवरण के पीछे छुपी रहती है शैतानी सोच  ... अन्दर बाहर एक बने रहने का नाटक करता इंसान ...क्या थक कर अन्दर या बाहर के किसी एक सच को अंजाम दे पायेगा ... सुनो तुम अगर पढ़ रही हो तो इस बात को दिल से न लगाना ... सच तो तुम जानती ही हो ...... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   3:20pm 2 May 2020 #कविता
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
एहसास ... जी हाँ ... क्यों करें किसी दूसरे के एहसास की बातें,जब खुद का होना भी बे-मानी हो कभी कभी ... अकसर ज़िन्दगी गुज़र जाती है खुद को च्यूंटी काटते ... जिन्दा हूँ, तो जिन्दा होने एहसास क्यों नहीं होता  ...  उँगलियों में चुभे कांटे इसलिए भी गढ़े रहने देता हूँ  की हो सके एहसास खुद ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   9:57am 8 Apr 2020 #कविता
Blogger: yashvardhan srivastav at कविता संकलन ...
(चित्र साभार: हिन्दी समाचार)पानी जिसने इसकी कदर ना जानी उसको सिर्फ येबात बतानीकविता समझोया कहानीमुझे तो बस अपनी बात समझानी पानी यह सिर्फशब्द नहीं है इसकी कीमत बहुतबड़ी कभी इसके बिना भी दो दिन रहे हो अगर रहे हो तो बता देनाशायद तुमको इसकी कीमत ज्यादा पता होपर मै एक बार ह... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   4:53pm 22 Mar 2020 #कविता
Blogger: yashvardhan srivastav at कविता संकलन ...
(चित्र साभार: हिन्दी समाचार)पानी जिसने इसकी कदर ना जानी उसको सिर्फ येबात बतानीकविता समझोया कहानीमुझे तो बस अपनी बात समझानी पानी यह सिर्फशब्द नहीं है इसकी कीमत बहुतबड़ी कभी इसके बिना भी दो दिन रहे हो अगर रहे हो तो बता देनाशायद तुमको इसकी कीमत ज्यादा पता होपर मै एक बार ह... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   4:53pm 22 Mar 2020 #कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
मुझे नहीं करनी थीजो मैंने बात ही नहीं की।मना लो, हँसा लो, कर लो गुस्सा, हो जाओ नाराज।मुझे नहीं करनी थीजो मैंने बात ही नही की।उसने कर, चर, खप, चटरसारे सुर लगाएकंकड़ सा चुभ-चुभ करसारे जोर लगाएहुआ महीन-मुलायम भी, पर .....मुझे नहीं करनी थीजो मैंने बात ही नही की।फिर अब साजिश कर, वह ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   11:30pm 11 Mar 2020 #कविता
Blogger: आनन्द पाठक at गीत ग़ज़ल ...
फ़’लुन--फ़े’लुन---फ़े’लुन --फ़े’लुन122---122------122----122बह्र-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम-------------------ग़ज़ल 145 : लगे दाग़ दामन पे--लगे दाग़ दामन पे , जाओगी कैसे ?बहाने भी क्या क्या ,बनाओगी कैसे ?चिराग़-ए-मुहब्बत बुझा तो रही होमगर याद मेरी मिटाओगी  कैसे ?शराइत हज़ारों यहाँ ज़िन्दगी  केभला तुम अकेले निभाओ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   11:09am 11 Mar 2020 #कविता
Blogger: ऋषभ देव शर्मा at ऋषभ उवाच...
भूमिकाप्रोफ़ेसर एन. गोपि  (1948) समकालीन भारतीय कविता और तेलुगु आलोचना के प्रथम पंक्ति के रचनाकारों में शामिल हैं। उनकी कविताओं का देश-विदेश की 25 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उन्होंने अपने साहित्य अकादमी से पुरस्कृत काव्य 'समय को सोने नहीं दूँगा'के माध्यम से त... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   2:37pm 29 Jan 2020 #कविता
Blogger: yashvardhan srivastav at कविता संकलन ...
जीवन कि लड़ाइयों से,लड़ रहा हूं मैंचाहे कुछ भी हो लेकिन,आगे बढ़ रहा हूं मैंकुछ इस कदरनदी के रूप सा, ढल रहा हूं मैंतपती धूप में भीचल रहा हूं मैं।।... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   1:42pm 17 Jan 2020 #कविता
Blogger: yashvardhan srivastav at कविता संकलन ...
दिखा दो सारी दुनिया कोकी तुम क्या कर सकते होअकेले ही सही परसंसार बदल सकते होजो होना था वो हो गया जो खोना था वो खोगयापर अभी भी तुम सब कुछ पा सकते हो खोई मजिलों को वापस ला सकते हो।।बस जरूरत है सही राह पे चलने कीखुद को एक नई दिशादेने कीभले ही वापस से शुरुआत करोपरं... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   8:29am 13 Jan 2020 #कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
जाड़ों की गुनगुनी धुप मेंछत की मुंडेर परदिन-रात चुभती निष्ठुर सर्द हवाओं सेहोकर बेखबर सूरज की रश्मि सी बिखेर रही हो तुम कच्ची, सौंधी, लुभावनी प्यार भरी मुस्कान! क्या पता है तुझे?यह कीमती जेवर है तेरा इसे यूँ ही मत खो देना जरा सम्भालकर कर रखनाबहुत आयेंगे करीब तेरेअपना ... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   1:30am 11 Jan 2020 #कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
जाड़ों की गुनगुनी धुप मेंछत की मुंडेर परदिन-रात चुभती निष्ठुर सर्द हवाओं सेहोकर बेखबर सूरज की रश्मि सी बिखेर रही हो तुम कच्ची, सौंधी, लुभावनी प्यार भरी मुस्कान! क्या पता है तुझे?यह कीमती जेवर है तेरा इसे यूँ ही मत खो देना जरा सम्भालकर कर रखनाबहुत आयेंगे करीब तेरेअपना ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   1:30am 11 Jan 2020 #कविता
Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
काजू भुने प्लेट में विस्की गिलास मेंउतरा है रामराज विधायक निवास में।पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों या डकैतइतना असर है खादी के उजले लिबास में।आजादी का वो जश्न मनाएँ तो किस तरहजो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में।पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा देंसंसद बदल गई है यहाँ की नखास म... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   7:00pm 10 Jan 2020 #कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
 आपस में कोई बैर भाव न रहेन रहे कोई जात-पात का बंधनहर घर आँगन में बनी रहे खुशहालीकुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदनतोड़कर नफरत भरी सब दीवारेंबस एक भाव रहे, वह हो प्रेमबंधनऊँच-नीच का भाव मिटे जहाँ सेकुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदनश्रेष्ठता सवर्धन के हों प्रयासऔर निकृष्टता का हो उ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   1:30am 28 Dec 2019 #कविता
Blogger: Kavita Rawat at KAVITA RAWAT...
 आपस में कोई बैर भाव न रहेन रहे कोई जात-पात का बंधनहर घर आँगन में बनी रहे खुशहालीकुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदनतोड़कर नफरत भरी सब दीवारेंबस एक भाव रहे, वह हो प्रेमबंधनऊँच-नीच का भाव मिटे जहाँ सेकुछ ऐसा हो नूतनवर्षाभिनंदनश्रेष्ठता सवर्धन के हों प्रयासऔर निकृष्टता का हो उ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   1:30am 28 Dec 2019 #कविता
Blogger: राजीव उपाध्याय at स्वयं शून्य...
मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते जब कोई तागा टूट गया या ख़तम हुआ फिर से बाँध के और सिरा कोई जोड़ के उसमें आगे बुनने लगते हो तेरे इस ताने में लेकिन इक भी गाँठ गिरह बुनकर कीदेख नहीं सकता है कोई मैंने तो इक बार बुना था एक ही र... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   7:48pm 14 Dec 2019 #कविता
Blogger: VIMAL KUMAR SHUKLA at मेरी दुनिया...
करना है सम्मान मनुज का,सन्तानों को बता न पाया।निज चरित्र की रक्षा के गुर,क्या देता निज बचा न पाया।जब अपने ही लोगों से है,ल&#... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   4:19pm 10 Dec 2019 #कविता
Blogger:  राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी' at बिखरे हुए अक्...
चाँद को चाँद की तलाश आसमाँ भी खुश है आजबादल महक रहे हैं देख छतों का हर्षोल्लास! निगाहें झाँक रही हैं खुद का विश्वासमहकती ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   2:05am 8 Oct 2019 #कविता
Blogger: मनोज कुमार at मनोज...
आओ हिंदी दिवस मनाऍं- करण समस्तीपुरीस्वाभिमान की भाषा हिंदी। जन मन की अभिलाषा हिंदी। सुंदर इसकी है अभिव्यक्ति। इसमें है सम्मोहन शक्ति। भारत के माथे की बिंदी। पुरस्कार देती है हिंदी। चलो कहीं भाषण कर आएँ। कविता दोहा गीत सुनाएं।  आओ हिंदी दिवस मनाऍं।&nbs... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   2:18am 15 Sep 2019 #कविता
Blogger: सुनीता शानू at कुछ विशेष......
कालों के काल महाकाल की नगरी उज्जैन जाने का अवसर मिला। यूं तो ज्ज्जैन के कई नाम हैं मुख्यरूप से उज्जैन को उज्जयिनी के नाम से पुकारते हैं। उज्जैन आज भी भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को बचाए हुए हैं, यहाँ लगने वाला कुम्भ का मेला जग प्रसिध्द है। इसे सिंहस्थ महापर्व क... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   6:14pm 10 Sep 2019 #कविता
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